KADLI KE PAAT कदली के पात

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मेरे प्रियतम जागरण जंक्शन

Posted On: 18 Feb, 2014 Contest,Entertainment,Hindi Sahitya में

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मेरे प्रियतम जागरण जंक्शन (यादों के लम्हों से प्रेमाभिव्यक्ति)

राम कृष्ण खुराना

मेरे प्रियतम जागरण जंक्शन,

यह मेरा सौभाग्य है कि मैं आज फिर तुम्हे प्रेम पत्र लिख रही हूँ ! क्योंकि यह पत्र मैं अपनी जान को लिख रही हूँ ! अपनी सांसों को लिख रही हूँ ! अपनी धडकन को लिख रही हूँ ! अपने प्यार को लिख रही हूँ ! लगभग चार साल हो गए ! मुझे याद है, हम पहली बार 2010 मे मिले थे ! पहले मैंने तुम्हें शायद कहीं देखा था ! एक आकर्षण था ! लेकिन मैं इतना गौर न कर पाई ! दो तीन दिनों बाद फिर तुमसे मुलाकात हुई ! थोडा सा तुम्हारी तरफ आकर्षित हुई लेकिन ज्यादा ध्यान नहीं दिया ! परंतु तीसरी बार …… हाँ, तीसरी बार जब तुम मुझे मिले…… जब तीसरी बार मैने तुम्हें देखा, तुम्हें जाना, तुम्हें समझा तो अपने आप को रोक न पाई ! न रोक पाई तुम्हें अपना बनाने से ! न रोक पाई अपने आप को तुम्हें अपनाने से !

प्रिय जागरण जंकशन, तुमने आमंत्रण भेजा था ! मैंने तुम्हारा आमंत्रण स्वीकार किया ! मैंने तुम्हें दिल से चाहा ! दिल से पूजा ! दिल की गहराईयों से प्यार किया ! मैं सौभाग्यशाली रही ! तुमने भी मुझे अपनाया ! अपना बनाया ! अपने सीने से लगाया ! उस समय तुम एक फिल्मी गीत गुनगुना रहे थे –

बा-होशो हवास मैं दीवाना, ये आज वसीयत करता हूँ,

ये दिल ये जाँ मिले तुमको, मैं तुमसे मुहब्बत करता हूँ !

मेरे अराध्य ! मैं सुन्दर हूँ इसलिए तुमने मुझे प्यार नहीं किया वरन तुम्हारा प्यार पाकर मैं सुन्दर हो  गई ! मैं निखर गई ! मैं संवर गई ! जैसे मेरी केंचुली उतर गई ! मुझमें एक नई चमक आ गई ! तुम्हारे प्यार को पाकर मेरे पैर जमीन पर नहीं पडते थे ! लोग कहते हैं न कि वह पुरुष सौभाग्यशाली होता जो किसी स्त्री का पहला प्यार होता है और वो स्त्री सौभाग्यशाली होती है जो किसी पुरुष का आखिरी प्यार होती है ! तुम्हारा प्यार पाना मेरा सौभाग्य था ! मैं पागल सी इधर उधर ढोलती फिरती थी ! भागती फिरती थी ! हिरनी की तरह ! हर समय तुम्हारा ख्याल ! हर समय तुम्हारी याद ! हर समय तुमसे मिलन की आस ! बस तुम ही तुम थे मेरे ख्यालों में, मेरी सांसों में, मेरी धडकन में ! तुम को देखे बिना एक पल भी चैन न पडता था ! जिस दिन तुम से मिलन नहीं होता था तो ऐसा लगता था जैसे आज दिन ही नही निकला ! सूरज ही नहीं उगा ! सारा दिन बैचैन ! खोई खोई सी ! न ठीक से खाती थी न ठीक से सोती थी ! बस हर पल हर क्षण जागरण जंकशन !

तुझे क्या खबर तेरी याद ने मुझे किस तरह से सता दिया !

कभी अकेले में हंसा दिया, कभी महफिल में रुला दिया !!

मेरे देवता ! मुझे दिन, तारीख, महीना, सन सब कुछ याद है ! हाँ सब याद है ! 18 मार्च, सन 2010 का वो दिन याद है जब हमारा पहला मिलन हुआ था ! तुमने मुझे सिर आँखों पर बिठा लिया था ! मेरे प्यार का उत्तर अपने प्यार से दिया था ! मैं धन्य हो गई ! मैं तुम्हारे प्यार में सराबोर हो गई ! तुम्हारे प्यार के समुद्र में डूबती चली गई, डूबती चली गई ! मुझे कुछ भी होश नहीं था ! बस सिर्फ तुम ही तुम ! फिर तो मुलाकातों का सिलसिला चल निकला ! हमारी मुलाकातें बढती गई ! मैं तुम हो गई तुम मैं हो गए ! तुम मुझे प्यार से आर. के. बुलाते थे और मैं तुम्हें जे. जे. कहने लगी ! जे जे ! कितना प्यारा नाम ! कितनी मिठास ! कितना रस ! बस दिल करता हर समय तुम्हें देखती रहूँ ! हर समय तुम्हारे पास बनी रहूँ ! हर क्षण तुमसे बातें करती रहूँ ! हर समय तुम्हारा नाम जपती रहूँ !

मेरे सरताज ! तुम्हारा परिवार भी बहुत बडा है ! तुमने मुझे अपने परिवार से मिलवाया था ! सब को पता था कि मैं तुम्हारी हूँ ! इसलिए सब ने मुझे भरपूर प्यार दिया ! भरपूर सम्मान दिया ! भरपूर आदर दिया ! मुझे सब कुछ याद है ! मैं कुछ भी नहीं भूली !

मेरे प्यारे जे जे ! मुझे बहुत से लोगों ने बहकाने की कोशिश की ! तुम्हारे बारे में कई अनाप शनाप बातें कहकर ! लेकिन मेरा प्यार सच्चा था ! कई लोगों ने तुम्हे लेकर मेरे उपर कई लांछन लगाए, कई आरोप लगाए ! मेरे और तुम्हारे प्यार को मैच फिक्सिंग का नाम दिया ! लेकिन तुमने सब का मुँहतोड जवाब देकर उनकी बोलती बन्द कर दी ! मैं जब भी तुम्हारे बारे में सोचती हूँ तो मेरा दिल मेरे काबू में नहीं रहता ! मेरी ज़ुबान बन्द हो जाती है तब मेरी आत्मा तुम से बात करती है ! मेरे कान सुन्न हो जाते हैं तब मेरी सांसे तुम्हारी आवाज़ सुनती हैं ! मैं अपने होश में नहीं रहती तब मेरी धडकन तुम्हारे गीत गाती है ! तुम्हारा प्यार ही मेरे जीने की वजह बन गई थी ! किसी ने कहा भी है –

कोई कहता है प्यार नशा बन जाता है !
कोई कहता है प्यार सज़ा बन जाता है !
पर प्यार करो अगर सच्चे दिल से,

तो वो प्यार ही जीने की वजह बन जाता है !!

मेरे सपनों के राजा ! जब मुझे तुम्हारा पहला प्रेम पत्र मिला था तो मानों पूरा का पूरा बसंत ही जाग उठा था ! बहारें फूल बरसाने लगीं थी ! दिल में लाखों फुलझडियां झिलमिलाने लगी थीं ! मेरे दिल ने वो पत्र पढा ! सांसों ने उसके एक एक शब्द को आत्मसात किया ! धडकनो ने उसे जिया ! पत्र का एक एक शब्द मेरी नस नस में उतरता चला गया उतरता चला गया ! मेरे रक्त की हर बूँद में समा गया ! पत्र के अंत में तुमने मेरे लिए लिखा था -

जिन्दगी की बहार तुमसे है !

मेरे दिल का करार तुमसे है !!

यूँ तो दुनियाँ मे लाखों हैं हसीन,

मगर क्या करूँ मुझको प्यार तुमसे है !!

प्रिय जे जे ! मैं वही बनना चाहती थी जो तुम चाहते थे कि मैं बनूँ ! मैं वही पाना चाहती थी जो तुम चाहते थे कि मैं प्राप्त करूँ ! मैंने भी वही चाहा ! वही सोचा ! वही किया ! मैने अपनी सारी ताकत लगा दी ! सब कुछ न्यौछावर कर दिया तुम्हारे प्यार में ! तुम्हें पाने के लिए ! और मैं वही बन गई जो तुम मुझे बनाना चाहते थे ! उस मकाम को पा लिया जो तुम मुझे देना चाहते थे ! अव्वल ! सर्वोत्तम ! प्रथम ! मैं उस मुकाम पर पहुँच कर बहुत खुश थी, प्रसन्न थी, खुशी से पागल ! मेरा एक सपना पूरा हुआ ! तुम भी खुश थे ! बहुत खुश ! तुमने भी अपनी खुशी का इज़हार किया था ! तुमने मुझे एक सुन्दर उपहार दिया था ! तुम्हें मालूम है कि मुझे लिखने पढने का बहुत शौक है ! मैं सारी दुनिया को देखना जानना चाहती हूँ ! तुमने सारी दुनिया मेरी झोली में भर दी थी ! इसलिए तुमने उपहार में मुझे लैपटाप दिया ! जागरण जंक्शन, तुम पे कुर्बान मेरा तन-मन-धन !

मेरे राजकुमार ! यह प्रेम पाती लम्बी होती जा रही है ! बस मैं सिर्फ इतना ही कहना चाहती हूँ कि -

तू दिल से ना जाये तो मैं क्‍या करूँ ?

तू ख्‍यालों से ना जाये तो मैं क्‍या करूँ ?

कहते है ख्‍वावों में होगी मुलाकात उनसे,

पर नींद ही न आये तो मैं क्‍या करूँ  ?

प्यार ……..उसकी ओर से…. जो तुम्हें दिल से चाहती है……….

राम कृष्ण खुराना

426-ए, माडल टाउन ऐक्सटेंशन,

कृष्ण मन्दिर के पास,

लुधियाना (प्ंजाब)

9988950584

khuranarkk@yahoo.in



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37 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rita singh sarjana के द्वारा
March 10, 2016

आदरणीय अंकल जी , पुरानी यादे ताजा हो गई . बहुत सुन्दर लिखा आपने .जे जे का वह दौर अब भी ताजा हैं . बधाई हो .

    R K KHURANA के द्वारा
    February 2, 2017

    प्रिय रीता जी, आपको मेरी रचना “मेरे प्रियतम जागरण जंक्शन ” पसंद आई ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभारी हूँ ! धन्यवाद ! राम कृष्ण खुराना

rita singh sarjana के द्वारा
March 10, 2016

आदरणीय अंकल जी , पुरानी यदि ताजा हो गई . बहुत सुन्दर लिखा आपने .जे जे का वह दौर अब भी ताजा हैं . बधाई हो .

    R K KHURANA के द्वारा
    February 2, 2017

    प्रिय रीता जी, आपको मेरी रचना “मेरे प्रियतम जागरण जंक्शन ” पसंद आई ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभारी हूँ ! धन्यवाद ! राम कृष्ण खुरताना

जागरण जंक्शन के प्रति आपकी भावनाये आपके इस प्रेमाभिव्यक्ति में खूबसूरती से प्रकट हुयी है ..बधाई..सादर..

    R K KHURANA के द्वारा
    March 3, 2014

    प्रिय शिल्पा जी, आपको मेरी रचना “मेरे प्रियतम जागरण जंक्शन ” पसंद आई ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभारी हूँ ! धन्यवाद ! राम कृष्ण खुरताना

rekhafbd के द्वारा
March 1, 2014

आदरणीय खुराना जी ,बहुत सुन्दर आलेख जे जे के लिए जिन्दगी की बहार तुमसे है ! मेरे दिल का करार तुमसे है !! यूँ तो दुनियाँ मे लाखों हैं हसीन, मगर क्या करूँ मुझको प्यार तुमसे है !बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति ,बधाई

    R K KHURANA के द्वारा
    March 2, 2014

    प्रिय रेखा जी, मेरी रचना “मेरे प्रियतम जागरण जंक्शन” पर आपका स्नेह मिला ! मैं आपका आभारी हूँ. ! कृपया ऐसे ही स्नेह बनाए रखें ! धन्यवाद ! राम कृष्ण खुराना

kmmishra के द्वारा
February 28, 2014

खुराना जी नमस्कार आपकी धार अभी तक कायम है. खूबसूरत लेख.

    R K KHURANA के द्वारा
    March 1, 2014

    प्रिय मिश्र जी, बहुत दिनों बाद आपके दर्शन हुए ! “मेरे प्रियतम जागरण जंक्शन” पर आप जैसे महँ व्यंगकार की प्रतिक्रिया पाकर मेरे रोम रोम पुलकित हो गया ! धन्यवाद ! हाँ आपकी किताब का क्या हुआ ? राम कृष्ण खुराना

Charchit Chittransh के द्वारा
February 28, 2014

भाईजी, एक शानदार आलेख, कुछ .सुंदर. प्रतिक्रियायें और सदाशयतापूर्ण पुनर्प्रतिक्रिया पढ़ी…. एक बात कहता रहता हूँ कि…. यदि विवेकानंदजी अमेरिका में सुने गये होते…. यदि फूलन देवी जी ने बड़ा नर संहार ना किया होता…. यदि सन्नी लियोन बिगबास में ना जा पाती…. ….. तो आम ही होते

    R K KHURANA के द्वारा
    February 28, 2014

    प्रिय चर्चित जी, क्या बात है ! बहुत सुंदर प्रतिक्रिया दी है आपने मेरी रचना “मेरे प्रियतम जागरण जंक्शन” पर ! आप जैसे सदपुर्षों के प्रोत्साहन से प्रेरित होकर ही मेरे जैसों को लिखने की हिम्मत मिलती है ! बहुत बहुत धन्यवाद आपका ! राम कृष्ण खुराना

डा श्याम गुप्त के द्वारा
February 26, 2014

भाई खुराना जी ….फिल्मों की क्या है वे तो निम्न कोटि की वस्तु हैं उनका कोइ भी कथन आदि प्रामाणिक व आदर्श नहीं होता ….फिर ये गाना तो एक विशेष स्थिति में लिखा गया है जब दुनिया में कुछ भी अच्छा नहीं लगता …. — जहां तक इस पोस्ट की बात है , अन्य चाहे कुछ भी कहें परन्तु भाषा, कथन , कथ्य , वक्तव्य आदि सभी औसत दर्जे की हैं ..कहीं कहीं भाषा औसत से भी निम्न स्तर पर….. ये कमियाँ है…. — अगर सीखना ही चाहते हैं तो भाषा व कथनों की अभिव्यक्तियाँ उच्च स्तर पर लायें …बाजारू भाषा व कथनों से बचें…इसके लिए अच्छे साहित्यिक रचनाओं व कृतियों को पढ़ें …आत्मसात करें तब लिखें …या कलम घसीटें एक ही बात है… —-

    R K KHURANA के द्वारा
    February 26, 2014

    आदरणीय गुप्त जी, आपने मेरी कमियों को बताया ! और मेरा मार्गदर्शन किया इसके लिए मैं हृदय से आपका आभारी हूँ ! असल मैं हमें सही मार्गदर्शन ही नहीं मिला इसीलिए थोड़ी बहुत जितनी समझ है लिख लेते हैं ! आपने कहा है कि हमें अच्छे साहित्य को पढ़ना चाहिए ! बिलकुल सही कहा आपने ! मेरा भी यही मानना है कि यदि हम अच्छा साहित्य पढ़ेंगे तो अच्छा लिखने की प्रेरणा मिलेगी ! मैं आपकी सलाह का आदर करता हूँ और वादा करता हूँ की आगे से और अच्छा लिखने व पढ़ने का प्रयास करूंगा ! मैंने इस मंच से बहुत कुछ सीखा है लेकिन अभी भी बहुत कुछ सीखने को बाकी हैं ! आप जैसे सज्जनो के संग रह कर वो कमी भी पूरी हो जायगी ऐसा मेरा विश्वास है ! आपके मार्गदर्शन के लिए पुनः आभार ! राम कृष्ण खुराना

    R K KHURANA के द्वारा
    February 27, 2014

    आदरणीय डाक्टर साहिब, क्षमा चाहता हूँ ! मैं एक बात कहना भूल गया था ! मेरी कुछ अन्य रचनाये भी इस ब्लॉग में पोस्ट हुईं है ! यदि समय निकाल सकें तो उन पर भी अपनी प्रतिक्रिया दें ! आपके मार्गदर्शन से मुझे अच्छा लिखने के लिए दिशा मिलेगी ! आप कृपया मेरी कमियों के बारे में मुझे बताये ! दिल से आभारी हूँगा. ! राम कृष्ण खुराना

sadguruji के द्वारा
February 23, 2014

कोई कहता है प्यार नशा बन जाता है ! कोई कहता है प्यार सज़ा बन जाता है ! पर प्यार करो अगर सच्चे दिल से, तो वो प्यार ही जीने की वजह बन जाता है !! आदरणीय राम कृष्ण खुरानाजी,बहुत भावपूर्ण रचना.आपकी रचना से प्रेम छलकता है.यदि संसार में और किसी रचना में प्रेम न हो तो वो नीरस हो जाती है.बहुत से विद्वान जो बहुत नीरस लिखते हैं,वे अपनी ही रचना दुबारा पढ़ने की हिम्मत नहीं जुटा पाते हैं.ये आपका मंच के नाम प्रेमपत्र बार बार पढ़ने योग्य है.आप सब साहित्यकारों के अथक प्रेम और अथक प्रयास ने इस मंच को बच्चन जी की मधुशाला के जैसा रसपूर्ण,सार्थक,उपयोगी और शिक्षाप्रद बना दिया है.इस बेहतरीन रचना के लिए मेरी हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिये.

    R K KHURANA के द्वारा
    February 23, 2014

    प्रिय सद्गुरु जी, इस संसार में सिर्फ प्रेम ही है जो शाश्वत है ! प्यार से आप बड़ी से बड़ी लड़ाई जीत सकते है ! किसी भी पराये को अपना बना सकते है ! प्रेम में बहुत ताकत होती है ! इसी बात को मैंने अपनी रचना “मेरे प्रियतम जागरण जंक्शन” में कहने की कोशिश की है ! आपके विचारों ने मेरा जो उत्साह वर्धन किया है उसे मैं हमेशा याद रखूंगा मैं आपका दिल से आभारी हूँ ! राम कृष्ण खुराना y

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
February 23, 2014

आदरणीय खुराना जी ,आपका आलेख (यादों के लम्हों से ….)पहली बार पढ़ा ,मुझे आपका जे जे को आभार व्यक्त करने का ये अंदाज़ अच्छा लगा, सादर बधाई

    R K KHURANA के द्वारा
    February 23, 2014

    प्रिय सिंह जी, आपको मेरी रचना “मेरे प्रियतम जागरण जंक्शन” अच्छी लगी ! आपकी प्रतिक्रिय के लिए बहुत बहुत धन्यवाद ! राम कृष्ण खुराना

Ramesh Bajpai के द्वारा
February 23, 2014

पर प्यार करो अगर सच्चे दिल से, तो वो प्यार ही जीने की वजह बन जाता है !! परम आदरणीय ,आत्मीय भाई जी आप का स्नेह पाकर भला कौन नहीं इतराएगा , मै तो उसी में डूबता रहता हु |   बहुत बहुत बधाई |शुभकामनाओ सहित फागुन कि रसीली फुहारों के लिए बेताब

    R K KHURANA के द्वारा
    February 23, 2014

    प्रिय रमेश जी, प्रेम पाती “मेरे प्रियतम जागरण जंक्शन” के लिए सदा की तरह आपका स्नेह मिला ! आपकी प्रतिक्रिया मेरे लिए एक धरोहर है ! धन्यवाद ! राम कृष्ण खुराना

डा श्याम गुप्त के द्वारा
February 21, 2014

खुराना जी .. —– नश्वर और उल-जुलूल एवं व्यर्थ में अंतर होता है …न प्यार ही उल-जुलूल व नश्वर है न दुनिया ही व्यर्थ…न रिश्ते नाते … 

    R K KHURANA के द्वारा
    February 21, 2014

    आदरणीय डाक्टर साहिब, मैंने तो एक फ़िल्मी गाने के सन्दर्भ में कहा था – कस्मे वादे प्यार वफ़ा सब बातें है बातों का क्या ? कोइ किसी का नहीं है झूठे नाते है नातों का क्या .. हाँ ! मैं जानना चाहता हूँ कि आप को क्या कमी लगी ! कौन सी चीज़ अच्छी नहीं लगी ! आप कृपया मुझे बताये जिससे में आगे से वही गलती न करू ! कृपया आप मेरी कमियों को बताएं ! मैं आभारी हूँगा ! मैंने तो अभी बहुत कुछ सीखना है ! मैं आपसे सीखना चाहता हूँ ! आप ने तो (शायद साहित्य में) डॉक्टर की उपाधि ली है लेकिन मैं तो एक अदना सा कलम घसीटू हूँ ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए मैं आभारी हूँ और आशा करता हूँ कि आप मेरा मार्गदर्शन करेंगे ! धन्यवाद सहित ! राम कृष्ण खुराना

jlsingh के द्वारा
February 21, 2014

आदरणीय चाचा जी, सादर अभिवादन! आपकी प्रेम पाती पढ़ मन द्रवित हो गया आपने तो अपना दिल ही निकाल कर रख दिया… दरअसल जागरण जंक्सन मंच बहुत ही प्यारा मंच है और यह नए पुराने सभी प्रकार के लेखकों का सम्मान करता है ..यहाँ पर आकर मुझे भी अच्छे अच्छे मित्र और शुभचिंतक मिले …मुझे भी जागरण जंक्सन से कई बार सम्मानित होने का अवसर प्राप्त हुआ और यह सब यहाँ की मित्र मंडली और शुभचिंतकों का योदान से ही सम्भव हो पाया है. यहाँ सकारात्मक सुधार के सुझाव भी दिए जाते हैं जिसे अपनाने से अपना हे भला होता है …आपके स्नेह सिक्त शब्दों का हार्दिक अभिनन्दन! ऐसे ही बीच बीच में दर्शन देते रहें! सादर

    R K KHURANA के द्वारा
    February 21, 2014

    प्रिय जवाहर जी, आपने बिलकुल ठीक कहा है जागरण जंक्शन ने जो दिया है वो शायद कहीं और सम्भव नहीं था ! मैंने जो कुछ भी यहाँ से पाया है उसके लिए मैं इस मंच का ऋणी हूँ ! यह बात मैंने पहले भी कई बार कही है और आज भी कहता हूँ. इस परिवार के प्यार और मंच द्वारा दिए गए सम्मान के कारण हम इस मक़ाम पर पहुंचे है ! मेरी रचना “मेरे प्रियतम जागरण जंक्शन” पर आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभार ! राम कृष्ण खुराना

डा श्याम गुप्त के द्वारा
February 20, 2014

व्यर्थ …उल जुलूल …..

    R K KHURANA के द्वारा
    February 20, 2014

    प्रिय श्री श्याम जी, आपने सच कहा है यह प्यार क्या है बस ऊल जलूल ही तो है ! सब बातें व्यर्थ ही हैं ! यह दुनिया नश्वर है व्यर्थ है ! सब रिश्ते नाते बेकार है ! मेरी रचना “मेरे प्रियतम जागरण जंक्शन” पर आपकी विचारों के लिए आभार ! राम कृष्ण खुराना

आर एन शाही के द्वारा
February 20, 2014

आदरणीय खुराना साहब, सादर प्रणाम ! आपने अपनी चिरपरिचित शैली में मानो अपना दिल ही निकाल कर सबके सामने रख दिया है । यह प्रेम पाती एक आँखों देखा हाल्भी बयान करती प्रतीत होती है, बिलकुल चलचित्र की भांति । हम सभी ने आपके उस रुतबे और समर्पण दोनों की झलकियों का एहसास किया है । वात्सल्य और आत्मविश्वास से लबरेज सबके चाचा जी का आपका वह किरदार भला कैसे भुलाया जा सकता है ? बहुत बहुत बधाइयाँ !

    R K KHURANA के द्वारा
    February 20, 2014

    प्रिय शाही जी, सदा कि तरह आपका स्नेह मिला ! जो प्यार जो सम्मान आपने दिखाया है इस के लिए मैं आपका आभारी हूँ ! वो पुराणी बातें फिर ताज़ा हो गयी ! आपके स्नेह के लिए आभार ! राम कृष्ण खुराना

NAVEEN KUMAR SHARMA के द्वारा
February 20, 2014

 चाचा जी नमस्ते चाचा जी जागरण जंक्शन पर बहुत दिनों के बाद आपकी रचना ” प्रेम पाती जागरण जंक्शन ” पढ़ी बहुत ही सुन्दर रचना है

    R K KHURANA के द्वारा
    February 20, 2014

    प्रिय नवीन जी, मेरी रचना “मेरे प्रियतम जागरण जंक्शन” पर आपका स्नेह मिला ! आपको रचना अच्छी लगी ! धन्यवाद् ! राम कृष्ण खुराना

sanjay kumar garg के द्वारा
February 20, 2014

आदरणीय खुराना जी, बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति के लिए बधाई!

    R K KHURANA के द्वारा
    February 20, 2014

    प्रिय संजय जी, मेरी प्रेम पाती “मेरे प्रियतम जागरण जंक्शन” के लिए आपका स्नेह मिला ! आपको प्रतिक्रिया मेरे लिए बहुत मूल्यवान है ! धन्यवाद ! राम कृष्ण खुराना

yamunapathak के द्वारा
February 20, 2014

खुराना जी यह बहुत ही खूबसूरत एहसास है….एक-एक शब्द पढ़ा मैंने …. साभार

    R K KHURANA के द्वारा
    February 20, 2014

    प्रिय यमुना जी, मेरी रचना “मेरे प्रियतम जागरण जंक्शन” पर आपकी प्रतिक्रिया मिली ! आप लोगो के उत्साह वर्धन से ही मुझे ऊर्जा मिलती है ! आपका सनेह मिलता रहा है ! आभार ! राम कृष्ण खुराना

ikshit के द्वारा
February 18, 2014

कभी कभी कहते-कहते shabd कम पड़ जाते हैं… और कुछ बात रह जाती है …. पर यहाँ तो जैसे आप ने कुछ भी शेष न छोड़ा… सुन्दर अभिव्यक्ति… – इच्छित

    R K KHURANA के द्वारा
    February 19, 2014

    प्रिय इक्षित जी, आपको मेरी रचना “मेरे प्रियतम जागरण जंक्शन” पसंद आई ! आपका बहुत बहुत धन्यवाद ! कृपया ऐसे ही स्नेह बनाये रखें ! राम कृष्ण खुराना


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