KADLI KE PAAT कदली के पात

चतुर नरन की बात में, बात बात में बात ! जिमी कदली के पात में पात पात में पात !!

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कहाँ बढे हैं दाम ???

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कहाँ बढे हैं दाम ???

Kahan bade hain daam

राम कृष्ण खुराना

लोग ऐसे ही

हल्ला मचा रहे हैं !

सरेसाम के

रोगियों की तरह

बडबडा रहे हैं !

पैट्रोल के

दाम बढ गए,

पैट्रोल के

दाम बढ गए,

बोले जा रहे हैं,

बके जा रहे हैं !

ऐसे ही बोलकर

लोगों को

भडका रहे हैं !

कहां बढे हैं दाम

हमें तो दिखाई नहीं दिए !

हमारी गाडी में तो

पहले भी उद्योगपति

तेल डलवाते थे !

अब भी

वही तेल डलवा रहे हैं !

राम कृष्ण खुराना

लुधियाना (पंजाब)

9988950584

khuranarkk@yahoo.in



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14 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
February 11, 2014

वाह ! आदरणीय भाई राम कृष्ण खुराना जी वाह ! क्या व्यंग्य मारा है उन टुच्चों-लुच्चों और बेईमानों पर ? हार्दिक बधाई !

    R K KHURANA के द्वारा
    February 11, 2014

    प्रिय आचार्य जी, आपो मेरी व्यंग रचना “कहाँ बढे हैं दाम” अच्छी लगी ! धन्यवाद ! राम कृष्ण खुराना

January 31, 2014

सही .

    R K KHURANA के द्वारा
    January 31, 2014

    प्रिय शालिनी जी, मेरी रचना “कहाँ बढे हैं दाम” पर आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभार ! कृपया ऐसे ही स्नेह बनाये रखे ! आपकी प्रतिक्रिया मेरे लिए ऊर्जा का काम करती है ! धन्यवाद ! राम कृष्ण खुराना

akraktale के द्वारा
November 22, 2012

सुन्दर व्यंग रचना पर बधाई स्वीकार करें आदरणीय खुराना साहब.

    R K KHURANA के द्वारा
    November 23, 2012

    प्रिय रक्ताले जी, मेरी कविता “कहाँ बढे हैं दाम” पर आपकी बधाई के लिए धन्यवाद ! राम कृष्ण खुराना

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
November 22, 2012

तीखा व्यंग, बेकार चिल्ला रहे हैं चुप चाप मुनाफा कम रहे हैं बधाई. सादर आदरणीय खुराना जी.

    R K KHURANA के द्वारा
    November 23, 2012

    प्रिय प्रदीप जी, मेरी कविता “कहाँ बढे हैं दाम” पर आपकी तीखी प्रतिक्रिया मिली ! धन्यवाद ! राम कृष्ण खुराना

jlsingh के द्वारा
November 22, 2012

कहाँ बढे हैं दाम? मुझे तो गैस सिलिंडर भी खरीदना नहीं पड़ता वे खुद ही आवश्यकतानुसार पहुंचा देते हैं घर पर इसीलिये तो मुझे पता नहीं चलता लोग बेवजह ही चिल्लाते हैं! शोर मचाते है! धन्यवाद खुराना साहब, सादर प्रणाम! आपकी व्यंग्यात्मक रचना पर बधाई!

    R K KHURANA के द्वारा
    November 23, 2012

    प्रिय जवाहर जी, आपने ठीक कहा इनको को हर चीज़ ही मुफ्त में मिल जाती है इनके लिए मंहगाई कहाँ है ! मेरी व्यंग कविता “कहाँ बढे हैं दाम” पर आपकी व्यंगात्मक प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद ! राम कृष्ण खुराना

Rajni Thakur के द्वारा
November 20, 2012

..बेहतर व्यंग्य रचना, बधाई

    R K KHURANA के द्वारा
    November 20, 2012

    प्रिय रजनी जी, मेरी कविता “कहाँ बढे हैं दाम” पर आपकी प्रतिक्रिया रुपी स्नेह के लिए धन्यवाद ! राम कृष्ण खुराना

nishamittal के द्वारा
November 20, 2012

बिलकुल सही चित्रण भारत के दो भिन्न पहलुओं का

    R K KHURANA के द्वारा
    November 20, 2012

    प्रिय निशा जी, सबसे पहले आपकी प्रतिक्रया पाकर मन प्रसन्न हो गया ! मेरी व्यंग कविता “कहाँ बढे हैं दाम” पर आपका स्नेह मिला ! बहुत बहुत धन्यवाद ! राम कृष्ण खुराना


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