KADLI KE PAAT कदली के पात

चतुर नरन की बात में, बात बात में बात ! जिमी कदली के पात में पात पात में पात !!

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चाहे कुंवारी रह जाना

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चाहे कुंवारी रह जाना

राम कृष्ण खुराना

शादी में बेटे की कीमत मांगते भारी,

यह पिता नहीं हैं, ये हैं व्यापारी !

ऐसे मंगतो के घर मत जाना, चाहे कुंवारी रह जाना !

औरत की कोख से ही पैदा हुए हैं आप,

फिर भी भ्रूण हत्या का करते जघन्य अपराध,

ऐसे अपराधियों के घर मत जाना, चाहे कुंवारी रह जाना !

संसद में बैठ नंगा विडियो चलाते,

घोटालों के सिर पर अपनी तोंद बढाते,

ऐसे बदमाशों के घर मत जाना, चाहे कुंवारी रह जाना !

बलात्कारी हैं निर्लज्जता की हद ये तोडें,

बस चले इनका तो माँ-बहन को न छोडें,

ऐसे बलात्कारियों के घर मत जाना, चाहे कुंवारी रह जाना !

नशे में डूब करते जिन्दगी बरबाद,

न अपनो की शर्म न दूजों का लिहाज्,

ऐसे नशेडियों के घर मत जाना, चाहे कुंवारी रह जाना !

संत महात्मा बने फिरते, बडा तिलक लगाते,

गला उनका ही काटें जिन्हें गले लगाते,

ऐसे पापियों के घर मत जाना, चाहे कुंवारी रह जाना !

राम कृष्ण खुराना

लुधियाना (पंजाब) भारत

99889-50584

khuranarkk@yahoo.in



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33 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
February 23, 2014

चाहे कुआंरी रह जाना,आदरणीय खुराना जी ,बहुत सटीक व्यंग रचना ,लोग गध में व्यंग ज्यादा लिखते हैं क्यों किवो आसान होता है पर कविता में सत्य को उदघाटित एक स्थापित एवं अनुभवी लेखक ही कर सकता है . सादर बधाई

    R K KHURANA के द्वारा
    February 23, 2014

    प्रिय निर्मल जी, वैसे तो व्यंग कहना अपने आप में एक बड़ा जोखिम भरा काम होता है ! लेकिन कुछ काम हमें जोखिम उठा कर भी करने पड़ते है ! आपको मेरी व्यंग कविता “चाहे कुंवारी रह जाना ” पसंद आई ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभार ! राम कृष्ण खुराना

    R K KHURANA के द्वारा
    February 24, 2014

    प्रिय निर्मला जी, क्षमा चाहता हूँ आपका नाम निर्मल छप गया है ! क्षमा प्रार्थी हूँ ! राम कृष्ण खुराना

November 12, 2012

खुराना जी बिलकुल सत्य को दर्शाती रचना आभार ,,अच्छी प्रस्तुति शुभ दिवाली

    R K KHURANA के द्वारा
    November 12, 2012

    प्रिय हिमांशु जी, मेरी रचना “चाहे कुंवारी रह जाना” पर आपका स्नेह मिला ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद ! राम कृष्ण खुराना

yogi sarswat के द्वारा
November 2, 2012

संसद में बैठ नंगा विडियो चलाते, घोटालों के सिर पर अपनी तोंद बढाते, ऐसे बदमाशों के घर मत जाना, चाहे कुंवारी रह जाना ! बलात्कारी हैं निर्लज्जता की हद ये तोडें, बस चले इनका तो माँ-बहन को न छोडें, ऐसे बलात्कारियों के घर मत जाना, चाहे कुंवारी रह जाना ! samaaj ke charitra ko ujaagar karti sarthak aur prabhavi rachna , adarniya shri khurana ji !

    R K KHURANA के द्वारा
    November 2, 2012

    प्रिय योगी जी, आपको मेरी रचना “चाहे कुंवारी रह जाना” अच्छी लगी आपका धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

shashibhushan1959 के द्वारा
October 27, 2012

आदरणीय खुराना जी, सादर ! सार्थक सन्देश भरी रचना ! बहुत सुन्दर ! बेहतरीन !

    R K KHURANA के द्वारा
    October 27, 2012

    प्रिय शशिभूषण जी, मेरी रचना “चाहे कुंवारी रह जाना ” पर आपका स्नेह मिला अति धन्यवादी हूँ ! राम कृष्ण खुराना

nishamittal के द्वारा
October 25, 2012

कुंवारी ही रह जाना.सुन्दर सार्थक सन्देश देती रचना पर आप[को बधाई

    R K KHURANA के द्वारा
    October 25, 2012

    पिय निशा जी, मेरी रचना “चाहे कुंवारी रह जाना ” पर आपके प्रोत्साहन के लिए धन्यवाद् ! राम कृष्ण खुराना

yamunapathak के द्वारा
October 24, 2012

khurana sir yah post kafee achhee hai.समाज में परिवर्तन लाने के लिए प्रत्येक लड़की को साहसी bananaa hoga. sabhar

    R K KHURANA के द्वारा
    October 25, 2012

    प्रिय यमुना जी, मेरी कविता “चाहे कुंवारी रह जाना ” के लिए आपका स्नेह मिला ! आभारी हूँ राम कृष्ण खुराना

Rudra के द्वारा
October 24, 2012

सर जी,, क्या कहने. इससए जयादा तो मैं कुछ बोले नहीं सकता.. छोटा मुह बड़ी बात होगी. Rudra

    R K KHURANA के द्वारा
    October 24, 2012

    प्रिय रूद्र जी, “चाहे कुंवारी रह जाना” पर आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
October 23, 2012

आदरणीय खुराना जी, सादर अभिवादन मार कटारी मर जाना ऐसे पापियों के घर मत जाना चाहे कुंवारी रह जाना ! सार्थक सन्देश , बधाई.

    R K KHURANA के द्वारा
    October 24, 2012

    प्रिय प्रदीप जी, मार कटारी मर जाना ऐसे पापियों के घर मत जाना ! मेरी रचना “चाहे कुंवारी रह जाना” पर आपकी ऐसे सुंदर कविता पूर्ण प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

MAHIMA SHREE के द्वारा
October 23, 2012

आदरणीय खुराना सर , सादर नमस्कार क्या खूब कहा आपने .. बहुत ही सटीक और फटकार लगाती और होश में लाती अभिवयक्ति .. मेरी ब्दाही स्वीकार करें

    R K KHURANA के द्वारा
    October 24, 2012

    प्रिय महिमा जी, लेखक की कोशिश यही होती है की लोगो को आज की समस्यायों से अवगत कराया जाय ! यही करने का प्रयास है ! आपको अच्छा लगा ! मेरी रचना “चाहे कुंवारी रह जाना” पर आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

jlsingh के द्वारा
October 22, 2012

श्रद्धेय खुराना साहब, सादर अभिवादन! बहुत ही सुन्दर सन्देश देती आपकी रचना सराहनीय है! आपका आभार!

    R K KHURANA के द्वारा
    October 24, 2012

    प्रिय जवाहर जी, आपको मेरी रचना “चाहे कुंवारी रह जाना” अच्छी लगी आपका धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

Santlal Karun के द्वारा
October 22, 2012

आदरणीय खुराना जी,  कन्या-पक्ष से जुड़ी विवाह-विसंगति पर सौ प्रतिशत खरी कविता, हार्दिक साधुवाद व सद्भावनाएँ !

    R K KHURANA के द्वारा
    October 24, 2012

    प्रिय संत लाल जी, मेरी रचना “चाहे कुंवारी रह जाना” पर आपकी प्यार भरी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

akraktale के द्वारा
October 22, 2012

आदरणीय खुराना साहब                          सादर नमस्कार, बहुत सुन्दर संदेशात्मक काव्य रचना के लिए बधाई स्वीकारें. किन्तु आज तो जनता राजनेत्री का दामाद बनने को आतुर हैं. 

    R K KHURANA के द्वारा
    October 24, 2012

    प्रिय रक्ताले जी जी हाँ ! लोग तो भोग विलास के साधन पाने के लिए कुछ भी करने को तैयार है ! लेकिन हमें तो सन्देश देना ही पड़ेगा ! हमारा फर्ज जो है वो तो निभाना ही होगा ! मेरी रचना “चाहे कुंवारी रह जाना” पर आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

seema के द्वारा
October 22, 2012

खुराना जी कविता का भाव पक्ष मन को छूने वाला है किन्तु कलात्मकता की दृष्टि से कविता कमजोर है | क्षमा चाहूंगी |

    R K KHURANA के द्वारा
    October 24, 2012

    प्रिय सीमा जी, यहाँ पर उद्धेश्य लोगो को सन्देश पहुचना था ! इसी लिए यह त्रुटी हुई ! मैं आपके विचारों का आदर करता हूँ और आपसे निवेदन करता हूँ की कृपया ऐसे ही मेरा मार्गदर्शन करें जिससे मैं रचनाओ मैं आने वाली गलतियों को सुधार सकूं ! मेरी रचना “चाहे कुंवारी रह जाना” पर आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद ! राम कृष्ण खुराना

alkargupta1 के द्वारा
October 22, 2012

आदरणीय खुराना जी , सादर अभिवादन वर्तमान समाज की यथार्थता का बहुत ही अच्छा चित्रण कियाहै ….. यही है अज के समाज की सच्चाई !

    R K KHURANA के द्वारा
    October 24, 2012

    प्रिय अलका जी, इस समाज को सुधरने के लिए कुछ तो करना ही पड़ेगा ! हमारा काम तो लिखना है और जनता को जागरूक करना है ! सो हम कर रहे है ! “चाहे कुंवारी रह जाना” के लिए आपका स्नेह मिला धन्यवाद ! राम कृष्ण खुराना

Mohinder Kumar के द्वारा
October 22, 2012

खुराना जी, भाव भरी सार्थक रचना के लिये बधाई…. मुशिक्ल यह है कि भेड की खाल पहने भेडियों को पहचाना कैसे जाये…लोग दो तरफ़ा चलते है… चाहते हैं कि वेटे की शादी में तो दहेज मिले मगर बेटी की शादी में देना न पडे…कुछ लोग जबर्दस्ती भी दहेज देते है… पैसे का आखिर वो करें क्या.

    R K KHURANA के द्वारा
    October 24, 2012

    प्रिय मोहिंदर जी, आपने बिलकुल ठीक कहा है लेकिन हमारा फर्ज है कोशिश करना और हम यह साहित्य के माध्यम से करते रहेंगे ! समय तो लगेगा लेकिन सकज को जगाना होगा ! लोग धीरे धीरे समझेंगे ! मेरी रचना “चाहे कुंवारी रह जाना” के लिए आपका स्नेह मिला धन्यवाद ! राम कृष्ण खुराना

rekhafbd के द्वारा
October 22, 2012

आदरणीय खुराना जी , संत महात्मा बने फिरते, बडा तिलक लगाते, गला उनका ही काटें जिन्हें गले लगाते, ऐसे पापियों के घर मत जाना, चाहे कुंवारी रह जाना !इस दुनिया में एक से एक बढ़ कर घटिया सोच वाले लोग भरे पड़े है बहुत सोच समझ कर शादी के लिया हाँ भरनी चाहिए ,बढ़िया प्रस्तुति,हार्दिक बधाई

    R K KHURANA के द्वारा
    October 22, 2012

    प्रिय रेखा जी, मेरी रचना “चाहे कुंवारी रह जाना” पर आपका स्नेह मिला ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभार ! राम कृष्ण खुराना


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