KADLI KE PAAT कदली के पात

चतुर नरन की बात में, बात बात में बात ! जिमी कदली के पात में पात पात में पात !!

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मैडम मोरी मैं नहीं कोयला खायो

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मैडम मोरी मैं नहीं कोयला खायो

Madam mori main nahi koyla khayo

राम कृष्ण खुराना

मैडम मोरी मैं नहीं कोयला खायो !

विपक्षी दल सब बैर पडे हैं, बरबस मुख लिपटायो !

चिट्ठी-विट्ठी इन बैरिन ने लिखी, मोहे विदेस पठायो !

मैं बालक बुद्धि को छोटो, मोहें अपनों ने ही फसायो !

हम तो कुछ बोलत ही नाहीं, सदा मौन रह जायो !

इसीलिए मन मोहन सिंह से मौन सिंह कहलायो !

लूट विपक्षी बैंक भर दीने, कालिख हमरे माथे लगायो !

हम तो कठपुतली हैं तुम्हरी, अंडर एचीवर कहलायो !

मैडम भोली बातें सुन मुस्काई, मनमोहन खींच गले लगायो !

मैडम मोरी मैं नहीं कोयला खायो !

राम कृष्ण खुराना

99889-27450

A-426, Model Town Extn.

Near Krishna Mandir,

Ludhiana (Punjab)

khuranarkk@yahoo.in



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48 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

deepasingh के द्वारा
October 12, 2012

वन्दे मातरम खुराना जी. ये ऐसी सरकार हे जिसने देश को खूब लूट लूट के खायो .

    R K KHURANA के द्वारा
    October 13, 2012

    प्रिय दीपा जी आपने ठीक कहा है ! लेकिन अब हमारा यह कर्तव्य बनता है की हम ऐसे नताओ को वोट न दें ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभारी हूँ ! धन्यवाद राम कृष्ण खुराना

chaatak के द्वारा
September 25, 2012

बहुत ही बढ़िया ऐसे ही इन्हें कुछ भिगो कर तो कुछ सूखा ही मारना पड़ेगा तभी अक्ल आएगी !

    R K KHURANA के द्वारा
    September 26, 2012

    प्रिय चातक जी, यह लोग इतने ज्यादा सयाने हैं कि इन्हें अक्ल आ ही नहीं सकती ! आपको मेरी कविता “मैडम मोरी मैं नहीं कोयला खायो” पसंद आई ! धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
September 25, 2012

आदरणीय खुराना जी जब इसी सुर में हमारे प्यारे कान्हा गाये थे तो कोई नहीं माना था और माँ ने तो उन्हें पकड़ के रस्से से ओखल में बाँध दिया था ….इनको इतनी छूट क्यों ? जय श्री राधे भ्रमर ५

    R K KHURANA के द्वारा
    September 25, 2012

    प्रिय सुरेंदर जी, उस ज़माने के माँ में और आज की माँ में अंतर है ! इस माँ के हाथ भी इस कालिख में रंगे है १ परोक्ष या अपरोक्ष !सामने या परदे में लिकिन घोटाला तो है ! इसी लिए यह मैं चुप है और खींच कर अपने मोहन को गले लगा लिया ! आपको मेरी कविता “मैडम मोरी मैं नहीं कोयला खायो” पसंद आई ! धन्यवाद राम कृष्ण खुराना

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
September 25, 2012

barbas mukh laptaayo maene keval paesa khaayo. bahut dino baad sar ji apni rachna laayo nayna hamre thak gaye khoob sabe chakayo. vaah sir ji, badhai. aadarniya khurana ji sadar abhivadan ke saath.

    R K KHURANA के द्वारा
    September 25, 2012

    प्रिय प्रदीप जी, कभी कभी किसी रचना को लिखने में, उसे फाईनल करने में समय लग जाता है ! लेकिन इच्छा यही होती है की अच्छी से अच्छी चीज़ प्रस्तुत की जाय ! लोग आनंद भी उठा सके और कुछ ज्ञान भी हो जाय ! बस इसी उधेड़ बुन में समय निकल गया ! फिर आपकी सेवा में अपनी यह “मैडम मोरी मैं नहीं कोयला खायो” लेकर आ गया ! इस कविता पर आपके स्नेह ने सराबोर कर दिया ! बहुत बहुत धन्यवाद ! राम कृष्ण खुराना

Tufail A. Siddequi के द्वारा
September 24, 2012

खुराना साहब सादर अभिवादन, बहुत ही सुन्दर, मनोरंजक और देश के भयंकर कोयला घोटाले पर कटाक्ष करती कविता. बधाई. http://siddequi.jagranjunction.com http://www.flickr.com/photos/-tufail

    R K KHURANA के द्वारा
    September 24, 2012

    प्रिय तुफैल जी, बहुत दिनों के बाद आपकी प्रतिक्रिया मिली ! आपको मेरी कविता “मैडम मोरी मैं नहीं कोयला खायो” मनोरंजक लगी ! धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

Anil Kumar "Pandit Sameer Khan" के द्वारा
September 24, 2012

खुराना जी, ज़बरदस्त कटाक्ष किया है आपने, बहुत सुन्दर रचना

    R K KHURANA के द्वारा
    September 24, 2012

    प्रिय अनिल जी, आपको मेरी कविता “मैडम मोरी मैं नहीं कोयला खायो” पसंद आई ! मेरा लिखना सार्थक हो गया ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद ! राम कृष्ण खुराना

annurag sharma(Administrator) के द्वारा
September 22, 2012

खुराना जी नमस्कार ,बहुत ही खुबसूरत रचना बधाई हो ,,,,,,,,,,,,,,हम तो कुछ बोलत ही नाहीं, सदा मौन रह जायो ! इसीलिए मन मोहन सिंह से मौन सिंह कहलायो !

    R K KHURANA के द्वारा
    September 23, 2012

    प्रिय अनुराग जी, आपको मेरी कविता “मैडम मोरी मैं नहीं कोयला खायो” पसंद आई ! प्रोत्साहन किए लिए आभारी हूँ ! कृपया ऐसे ही स्नेह बनाये रखे ! राम कृष्ण खुराना

jai के द्वारा
September 21, 2012

बहुत सुन्दर………..

    R K KHURANA के द्वारा
    September 21, 2012

    प्रिय जय जी, मेरी कविता “मैडम मोरी मैं नहीं कोयला खायो” पर आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद ! राम कृष्ण खुराना

P. Sudha Rao के द्वारा
September 21, 2012

खुराना जी नमस्कार सूरदास जी के पदों का अनुकरण कर आपने कोयला घोटाले का चंद शब्दों में सटीक वर्णान किया है कविता मुझे इतनी अच्छी लगी कि पढ़ते साथ ही मैने इसे अपने कुछ परिचितों को मेल कर दिया। यदि आपकी सहमति हो तो इसे फेसबुक में भी प्रकाशित कर दूं ? धन्यवाद

    R K KHURANA के द्वारा
    September 21, 2012

    प्रिय सुधा राव जी, आपको मेरी कविता “मैडम मोरी मैं नहीं कोयला खायो ” बहुत अच्छी लगी ! जानकर प्रसनता हुई ! मेरे लिखने का मकसद पूरा हो गया ! वैसे मैने इसे फसबूक पर डाल दिया है ! फिर भी यदि आप अपनी साईट पर डालना चाहते है तो डाल सकते है ! धन्यवाद राम कृष्ण खुराना

yogi sarswat के द्वारा
September 21, 2012

मैडम भोली बातें सुन मुस्काई, मनमोहन खींच गले लगायो ! हहाआआआ श्री खुराना जी , सादर नमस्कार ! कितनी तारीफ करें आपके अल्फाजों की ! बहुत सुन्दर शब्दों में आपने , कोयला के रंग में रंगने वालों की व्यथा को व्यक्त किया है ! बहुत बधाई

    R K KHURANA के द्वारा
    September 21, 2012

    प्रिय योगी जी, कोयले के रंग में रंगे सरकार के कथा “मैडम मोरी मैं नहीं कोयला खायो” पर आपके प्यार को बोछार ने मुझे सराबोर कर दिया ! मैं आपका दिल से शुक्रिया अदा करता हूं ! राम कृष्ण खुराना

subhash के द्वारा
September 18, 2012

ha ha ha—khurana sir kamal kar diya

    R K KHURANA के द्वारा
    September 18, 2012

    प्रिय सुभाष जी, मेरी रचना “मैडम मोरी मैं नहीं कोयला खायो” पर आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् ! राम कृष्ण खुराना

Chandan rai के द्वारा
September 18, 2012

खुराना जी , सादर अभिवादन मैडम मोरी मैं नहीं कोयला खायो ! विपक्षी दल सब बैर पडे हैं, बरबस मुख लिपटायो ! चिट्ठी-विट्ठी इन बैरिन ने लिखी, मोहे विदेस पठायो ! मैं बालक बुद्धि को छोटो, मोहें सुबोध कांत फसायो ! For a wonderful article Pls. accept my heartist greetings,

    R K KHURANA के द्वारा
    September 18, 2012

    प्रिय चन्दन जी, आप लोगो के प्रोत्साहन से ही लिखने की प्रेरणा मिलती है ! मेरी रचना “मैडम मोरी मैं नहीं कोयला खायो” पर आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभारी हूँ ! राम कृष्ण खुराना

NAVEEN KUMAR SHARMA के द्वारा
September 18, 2012

चाचा जी नमस्ते, चाचा जी बहुत ही अच्छा लिखा है आपने आपने इस देश की ककिकत बयाँ कर दी इन मैडम और मनमोहन की पूरी टीम ने इस देश को लूट कर खा लिया है इनके साथ में इनके सहयोगी दल सपा, बसपा, टीएमसी भी देश को लूटने में इनका साथ दे रहे हैं और जनता को खुश रखने के लिए इनका विरोध करने का दिखावा कर रहे हैं अगर वास्तव में इन्हें जनता का साथ देना है तो यह समर्थन बापस क्यों नहीं ले लेते नवीन कुमार शर्मा बहजोई (संभल) उ. प्र. – 202410 मोबाइल नंबर – 09719390576

    R K KHURANA के द्वारा
    September 18, 2012

    प्रिय नवीन जी, आपका स्नेह हमेशा मिलता रहता है ! आप लोगो के प्यार ने ही मुझे लिखने का मकसद प्रदान किया है ! मेरी रचना “मैडम मोरी मैं नहीं कोयला खायो” पर आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् ! राम कृष्ण खुराना

parveen dutt sharma के द्वारा
September 18, 2012

अच्छी रचना खुराना जी, वैसे इस केस में तो मैय्या और कन्हैया दोनों ने ही मिल के “मोटा माल ” खाया है. ऐसे में मनमोहन जी नाहक ही मेडम जी को सफाई दे रहे हैं.

    R K KHURANA के द्वारा
    September 18, 2012

    प्रिय परवीन जी, आपने ठीक ही कहा है की दोनों ने मिल कर माल खाया है ! लेकिन वो कहते है न की लड़ती तो फौज है नाम कप्तान का होता है ! नाम बदनाम तो कन्हैया का ही हुआ है ! मेरी रचना “मैडम मोरी मैं नहीं कोयला खायो” पर आपके स्नेह के लिए धन्यवाद् ! राम कृष्ण खुराना

jlsingh के द्वारा
September 18, 2012

आदरणीय खुराना चाचा, नमस्कार! आज के सन्दर्भ में उत्तम रचना! हम तो कठपुतली हैं तुम्हरी, अंडर एचीवर कहलायो ! मैडम भोली बातें सुन मुस्काई, मनमोहन खींच गले लगायो ! श्री विश्वकर्मा पूजा के दिन पोस्ट की गयी आपकी रचना से देवशिल्पी भी मुस्कुरा रहे होंगे! बहुत बहुत बधाई!

    R K KHURANA के द्वारा
    September 18, 2012

    प्रिय जवाहर जी, आज हमारे मनमोहन जी सिर्फ कठपुतली बनकर रह गए है ! रबर की मोहर ! “मैडम मोरी मैं नहीं कोयला खायो” पर आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् ! राम कृष्ण खुराना

alkargupta1 के द्वारा
September 17, 2012

आदरणीय खुराना जी , सादर अभिवादन क्या खूब लिखा है आपने सारी सत्यता को बयां कर दिया है ….. पद पढने में बड़ा ही आनंद आया …..

    R K KHURANA के द्वारा
    September 18, 2012

    प्रिय अलका जी, आपको मेरी रचना “मैडम मोरी मैं नहीं कोयला खायो” पसंद आई आपके स्नेह के लिए धन्यवाद् ! राम कृष्ण खुराना

Santosh Kumar के द्वारा
September 17, 2012

श्रद्धेय ,..सादर प्रणाम बहुत बढ़िया पैरोडी रचना में एक लाइन और जोड़ना चाहता हूँ ,.. देश लुटायो तुमने मैय्या ,पटेल कोयला खायो सारा माल हजम कर आई , थप्पड़ हमें पड़ायो !!…..ध्रष्टता के लिए क्षमा प्रार्थी हूँ ,..सादर बधाई

    R K KHURANA के द्वारा
    September 18, 2012

    प्रिय संतोष जी, आपकी लाईने बहुत सुंदर है ! इनको जोड़ने से पैरोडी का महत्व ओउर भी बढ़ जायगा ! मेरी पैरोडी “मैडम मोरी मैं नहीं कोयला खायो ” आपको पसंद आई ! धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

rekhafbd के द्वारा
September 17, 2012

आदरणीय खुराना जी , हम तो कठपुतली हैं तुम्हरी, अंडर एचीवर कहलायो ! मैडम भोली बातें सुन मुस्काई, मनमोहन खींच गले लगायो !,बहुत खूब खुराना जी ,खूबसूरत रचना पर हार्दिक बधाई .

    R K KHURANA के द्वारा
    September 18, 2012

    प्रिय रेखा जी, मेरी रचना “मैडम मोरी मैं नहीं कोयला खायो” पर आपकी प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद् ! राम कृष्ण खुराना

akraktale के द्वारा
September 17, 2012

आदरणीय खुराना साहब                        सादर, वाह! बहुत ही खूब रचना. जब तक मैया का आँचल होगा सिर पर तो फिर मोहन तो ऐसे उत्पात करते ही रहेगा और मोहन ही क्या उसकी पूरी मंडली भी कोई चुकाने वाली है? आप तो मनमोहनी रचना पर  बधाई स्वीकारें.

    R K KHURANA के द्वारा
    September 17, 2012

    प्रिय रक्ताले जी, ठीक कहा है आपने यह सब एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं ! “मैडम मोरी मैं नहीं कोयला खायो” पर आपका स्नेह मिला ! कोटिश धन्यवाद ! राम कृष्ण खुराना

harendra rawat के द्वारा
September 17, 2012

क्या खूब लिखा है खुराना जी हकीकत बयान कर दिया !

    R K KHURANA के द्वारा
    September 17, 2012

    प्रिय हरेंदर जी, मेरी रचना “मैडम मोरी मैं नहीं कोयला खायो” पर आपकी प्रतिक्रिया से मुझे प्रोत्साहन मिला है ! आपका बहुत बहुत धन्यवाद ! राम कृष्ण खुराना

manoranjanthakur के द्वारा
September 17, 2012

बहुत खास अंदाज कहा वो मनमोहन कहा ये कोयला चोर क्या खूब ……….. बधाई आदरनिए खुराना जी

    R K KHURANA के द्वारा
    September 17, 2012

    प्रिय मनोरंजन जी, मेरी कविता “मैडम मोरी मैं नहीं कोयला खायो” से आपका मनोरंजन हुआ ! मन प्रसन्न हो गया ! आपके स्नेह के लिए आभारी हूँ ! राम कृष्ण खुराना

vikramjitsingh के द्वारा
September 17, 2012

मैडम ने ये नहीं कहा….”बेटा मूंह खोल दिख्लायो….” आज तक के सारे घोटाले…..स्विस बैंक के खाते……सब्सिडी……नोट के बदले वोट…….सभी कुछ तो उसमें है…….. आदरणीय खुराना जी…….

    R K KHURANA के द्वारा
    September 17, 2012

    प्रिय विक्रम जी, माँ तो माँ होती है ना ! वो तो अपने बच्चे का ही बचाव करेगी ! इस लिए उसने मोहन को खींच गले लगा लिया ! मेरी रचना “मैडम मोरी मैं नहीं कोयला खायो” पर आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् ! राम कृष्ण खुराना

Santlal Karun के द्वारा
September 17, 2012

ह..ह…ह…हा ! खुराना जी, साधुवाद |

    R K KHURANA के द्वारा
    September 17, 2012

    प्रिय संत लाल जी, मेरी पैरोडी “मैडम मोरी मैं नहीं कोयला खायो ” आपको पसंद आई ! धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

nishamittal के द्वारा
September 17, 2012

बहुतमनोरंजक पैरोडी खुराना जी.

    R K KHURANA के द्वारा
    September 17, 2012

    प्रिय निशा जी, मेरी रचना “मैडम मोरी मैं नहीं कोयला खायो” के लिए आपका स्नेह मिला ! अति धन्यवादी हूँ ! राम कृष्ण खुराना


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