KADLI KE PAAT कदली के पात

चतुर नरन की बात में, बात बात में बात ! जिमी कदली के पात में पात पात में पात !!

81 Posts

3606 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 875 postid : 476

ज़रा सोचो....!!

  • SocialTwist Tell-a-Friend

ज़रा सोचो

zara socho

राम क़ृष्ण खुराना

आज गरीब और गरीब क्यों हो रहा है ज़रा सोचो,

मां की छाती से लिपटा बच्चा क्यों रो रहा ज़रा सोचो !

गरीबी और भूख में अपनों की आंखें भी बदल जाती हैं,

स्कूल जाने की उम्र में बचपन टोकरी ढो रहा ज़रा सोचो !



हर किसी में दूसरों को कुछ देने का जज्बा नहीं होता !

बिना गली, बिना मोहल्ले के कोई कस्बा नहीं होता !

किसी का दर्द बांटने में कितना सकून मिलता है,

ठिठुरता नंगा बदन ढकने से कम रुतबा नहीं होता !



एक जलता हुआ दिया कई और दिए जला सकता है !

एक पढा-लिखा इंसान कई लोगों को पढा सकता है !

मिट्टी में मिलकर एक बीज बनाता हैं लाखों बीज,

शीतल दरिया जल का, सबकी प्यास बुझा सकता है !



खूब मेहनत करो, भगवान करे बहुत कमाओ तुम !

कमाई का दसवां हिस्सा दान-पुन्न में लगाओ तुम !

लाखों अनाथ बच्चे हैं दर दर भटक रहे इस जहाँ में,

कुछ बच्चों को पालो, कुछ बच्चों को पढाओ तुम !

राम क़ृष्ण खुराना

426-ए, माडल टाऊन ऎक्टेंशन,

नजदीक कृष्णा मन्दिर,

लुधियाना (पंजाब)

99889-27450

khuranarkk@yahoo.in



Tags:       

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (21 votes, average: 4.81 out of 5)
Loading ... Loading ...

66 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

manoranjanthakur के द्वारा
September 6, 2012

श्री खुराना साहेब बीच में जब मंच से दूर था उस बक्त आपकी रचना nahi padh saka था der से hi sahi badhai swekare

    R K KHURANA के द्वारा
    September 7, 2012

    प्रिय ठाकुर साहेब, मेरी रचना “ज़रा सोचो” के लिए आपका स्नेह मिला ! बहुत आभारी हूँ ! राम कृष्ण खुराना

Ramesh Bajpai के द्वारा
August 1, 2012

हर किसी में दूसरों को कुछ देने का जज्बा नहीं होता ! बिना गली, बिना मोहल्ले के कोई कस्बा नहीं होता ! किसी का दर्द बांटने में कितना सकून मिलता है, ठिठुरता नंगा बदन ढकने से कम रुतबा नहीं होता ! आदरणीय भाई जी बेमिसाल ,शिक्षाप्रद पोस्ट | आशीर्वाद की आकांक्षा सहित

    R K KHURANA के द्वारा
    August 1, 2012

    प्रिय रमेश जी मेरी रचना “ज़रा सोचो” के लिए आपका प्यार मिला ! मेरा आशीर्वाद तो हमेशा ही आपके साथ है ! मैं आपके सनेह के लिए आभारी हूँ ! राम कृष्ण खुराना

yamunapathak के द्वारा
August 1, 2012

आदरणीय खुराना जी, मेरी सारी दुविधा दूर हुई बस मंच की विश्वनीयता को बरकरार रखने के लिए मुझे ब्लॉग लिखना पडा. धन्यवाद

    R K KHURANA के द्वारा
    August 1, 2012

    प्रिय यमुना जी, आपके ब्लॉग लिखने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद ! राम कृष्ण खुराना

Rajkamal Sharma के द्वारा
July 14, 2012

हर किसी में दूसरों को कुछ देने का जज्बा नहीं होता ! आदरणीय चाचा जी ….. सादर प्रणाम ! बिलकुल सच कहा है आपने अमीर तो बहुतेरे है इस द्गारती पर लेकिन कितनो का धन पुन्य कार्यों में लग पाता है …. दान भी किस्मत वाले ही कर पाते है ….. जन जन को सीख देने वाली इस अनमोल रचना पर ढेरों मुबारकबाद

    R K KHURANA के द्वारा
    July 15, 2012

    प्रिय राज जी, आपने बिलकुल ठीक कहा है की दान भी किस्मत वाले ही कर पाते है ! मेरी रचना “ज़रा सोचो” पर आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् ! राम कृष्ण खुराना

surendr shukl bhramar5 के द्वारा
July 14, 2012

गरीबी और भूख में अपनों की आंखें भी बदल जाती हैं, स्कूल जाने की उम्र में बचपन टोकरी ढो रहा ज़रा सोचो ! खूब मेहनत करो, भगवान करे बहुत कमाओ तुम ! कमाई का दसवां हिस्सा दान-पुन्न में लगाओ तुम ! लाखों अनाथ बच्चे हैं दर दर भटक रहे इस जहाँ में, कुछ बच्चों को पालो, कुछ बच्चों को पढाओ तुम ! आदरणीय प्रभु से प्रार्थना है की आप के से नयन और दिल दें लोगों को ..लोग सोचें..मेहनत करें कमायें और ये जहां ये समाज बनायें केवल जमीन में गाड़ कर धन मत रखें ..बहुत सुन्दर सन्देश …मार्मिक और दिल को छू लेने वाली रचना …बधाई भ्रमर ५

    R K KHURANA के द्वारा
    July 14, 2012

    प्रिय सुरेंदर जी, आपको मेरी रचना “ज़रा सोचो” पसंद आई ! लेखक का काम ही होता है जनता को अच्छे से अच्छा सन्देश देना और सब की भलाई के लिए प्रयास करना ! मैंने भी वही किया ! प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद ! राम कृष्ण खुराना

D33P के द्वारा
July 7, 2012

हर किसी में दूसरों को कुछ देने का जज्बा नहीं होता ! बिना गली, बिना मोहल्ले के कोई कस्बा नहीं होता ! किसी का दर्द बांटने में कितना सकून मिलता है, ठिठुरता नंगा बदन ढकने से कम रुतबा नहीं होता ! बहुत सुन्दर रचना………….

    R K KHURANA के द्वारा
    July 7, 2012

    प्रिय दीप्ती जी, आपको मेरी रचना “ज़रा सोचो” पसंद आई ! आपका आभार ! राम कृष्ण खुराना

Tufail A. Siddequi के द्वारा
July 5, 2012

आदरणीय खुराना साहब सादर अभिवादन, इंसानियत का सन्देश देती बहुत सुन्दर कविता. बधाई. http://siddequi.jagranjunction.com

    R K KHURANA के द्वारा
    July 5, 2012

    प्रिय तुफैल जी, बहुत दिनों के बाद आपका सन्देश मिला ! आपको मेरी रचना “ज़रा सोचो” अच्छी लगी ! आपका आभार ! राम कृष्ण खुराना

rita singh 'sarjana' के द्वारा
June 27, 2012

आदरणीय खुराना अंकल जी सादर नमस्कार , कविता के जरिये उम्दा मेसेज दिया हैं , इंसान जितना लोगों के लिए निस्वार्थ भाव से सेवा दान देता हैं ईश्वर उतनी ही उसका राह आसान बनता हैं l बधाई स्वीकारे l

    R K KHURANA के द्वारा
    June 28, 2012

    प्रिय रीता जी, मेरी कविता “ज़रा सोचो” के लिए आपका प्यार मिला ! इस सनेह के लिए आभारी हूँ ! राम कृष्ण खुराना

Anil Kumar "Pandit Sameer Khan" के द्वारा
June 27, 2012

राम कृष्ण जी वैसे तो मै आपकी इस कविता को पढ़कर कमेन्ट भी कर चुका हूँ पर आपने मेरे एक लेख पर मेरे नाम के लिए जो प्रश्न उठाया था उसका जवाब देने के लिए ये कमेन्ट कर रहा हूँ….कृपया मेरी ये कविता पढ़ें और अपना जवाब पायें….. http://panditsameerkhan.jagranjunction.com/2012/05/31/मैं-कौन-हूँ-कौन-हो-तुम/

    R K KHURANA के द्वारा
    June 28, 2012

    ठीक है !

seemakanwal के द्वारा
June 26, 2012

बहुत सुन्दर रचना है ,सच में ,अपने लिए जिए तो क्या जिए ,तू जी ऐ दिल जमाने के लिए ,

    R K KHURANA के द्वारा
    June 26, 2012

    प्रिय सीमा जी, बिलकुल ठीक कहा है आपने ! परमार्थ के कारण जब कोइ काम किया जाता है तभी वो कार्य सफल माना जाता है ! मेरी रचना “जरा सोचो” पर आपका स्नेह मिला ! धन्यवाद ! राम कृष्ण खुराना

Ajay Kumar Dubey के द्वारा
June 25, 2012

आदरणीय खुराना साहब नमस्कार सोचने पर मजबूर करती हुयी सुन्दर, सन्देश-प्रद प्रस्तुति पर हार्दिक आभार…..

    R K KHURANA के द्वारा
    June 25, 2012

    प्रिय अजय जी, आपको मेरी रचना “ज़रा सोचो” अच्छी लगी ! आपके स्नेह के लिए आभार ! राम कृष्ण खुराना

Anil Kumar "Pandit Sameer Khan" के द्वारा
June 25, 2012

अत्यंत उच्चकोटि के विचार और सुन्दर कविता के लिए बहुत बहुत बधाई हो राम कृष्ण जी, आप जैसे अनुभवी लोगों के विचारों का मेरे द्वारा लिखे गए इस लेख पर इंतज़ार रहेगा कृपया इस पर अपने विचार प्रकट करें http://panditsameerkhan.jagranjunction.com/2012/06/20/नारी-का-जीवन/

    R K KHURANA के द्वारा
    June 25, 2012

    प्रिय अनिल जी, आपको मेरी रचना “ज़रा सोचो” पसंद आई ! मेरा लिखना सार्थक हो गया ! प्रतिक्रिया के लिए आपका शुक्रिया ! राम कृष्ण खुराना

NAVEEN KUMAR SHARMA के द्वारा
June 25, 2012

चाचा जी नमस्ते, चाचा जी यह कविता बहुत ही सार्थक सन्देश देती है आपको फिर से मंच पर लिखते देखमैं बहुत ही खुश हूँ ऐसी ही सार्थक एवं संदेशात्मक रचनाओं का सृजन करते रहें आपका नवीन कुमार शर्मा बहजोई (भीमनगर) उ. प्र. – 202410 मोबाइल नंबर- 09719390576

    R K KHURANA के द्वारा
    June 25, 2012

    प्रिय नवीन जी, आप लोगों का प्यार हर किसी को इस मंच पर खींच लाता है ! आप लोगो को छोड़ कर मैं कहाँ जा सकता हूँ. ! मेरी रचना “ज़रा सोचो” पर आपके स्नेह के लिए आभार ! राम कृष्ण खुराना

rudranath tripathi के द्वारा
June 24, 2012

बहुत उम्दा रचना ……………….बधाई सर

    R K KHURANA के द्वारा
    June 24, 2012

    प्रिय रूद्र नाथ जी, मेरी कविता “ज़रा सोचो” पर आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद ! राम कृष्ण खुराना

नितिन देसाई के द्वारा
June 24, 2012

आदरणीय खुराना जी, प्रणाम. प्रेरणायुक्त, सुन्दर पोस्ट. बधाई एवं साधुवाद. नितिन देसाई, जबलपुर.

    R K KHURANA के द्वारा
    June 24, 2012

    प्रिय नितिन जी, आपको मेरी रचना “ज़रा सोचो” प्रेरणादायक लगी ! आभार राम कृष्ण खुराना

vikramjitsingh के द्वारा
June 24, 2012

आदरणीय खुराना जी….सादर…. सच है…. सोचने के लिए मजबूर ही तो कर दिया आपने….. सादर…

    R K KHURANA के द्वारा
    June 24, 2012

    प्रिय विक्रमजीत सिंह जी, आपको मेरी कविता “ज़रा सोचो” अच्छी लगी ! प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद ! राम कृष्ण खुराना

Santosh Kumar के द्वारा
June 23, 2012

श्रद्धेय सर ,..सादर प्रणाम वर्तमान परिस्थिति में बहुत अच्छा आवाहन ,..पूरी रचना बहुत अच्छी है लेकिन यही लाने मुझे भी सबसे ज्यादा भाई जो सबको अच्छी लगी ,. एक जलता हुआ दिया कई और दिए जला सकता है ! एक पढा-लिखा इंसान कई लोगों को पढा सकता है ! मिट्टी में मिलकर एक बीज बनाता हैं लाखों बीज, शीतल दरिया जल का, सबकी प्यास बुझा सकता है !….. जरा सोचने के लिए मजबूर करने के लिए कोटिशः आभार ..सादर

    R K KHURANA के द्वारा
    June 24, 2012

    प्रिय संतोष जी, मेरी कविता “ज़रा सोचो” के लिए आपका प्यार मिला ! इस सनेह के लिए आभारी हूँ ! राम कृष्ण खुराना

rekhafbd के द्वारा
June 23, 2012

आदरणीय खुराना जी ,सादर नमस्ते , एक जलता हुआ दिया कई और दिए जला सकता है ! एक पढा-लिखा इंसान कई लोगों को पढा सकता है ! मिट्टी में मिलकर एक बीज बनाता हैं लाखों बीज, शीतल दरिया जल का, सबकी प्यास बुझा सकता है !,सुंदर सन्देश देती हुई कविता ,बधाई

    R K KHURANA के द्वारा
    June 24, 2012

    प्रिय रेखा जी, आपको मेरी कविता “ज़रा सोचो” पसंद आई ! आपका आभारी हूँ ! राम कृष्ण खुराना

allrounder के द्वारा
June 23, 2012

सादर नमस्कार आदरणीय खुराना साहब बहुत ही सार्थक सन्देश देती है आपकी ये रचना, आपको फिर से मंच पर लिखता देख बड़ा ही सुखद लगता है ! ऐसे ही सार्थक रचनाओं का सृजन करते रहें आभार सहित !

    R K KHURANA के द्वारा
    June 23, 2012

    प्रिय सचिन जी, आप लोगो का प्यार ही है जो मेरे जैसे कलम घसीटू को भी खींच लाता है ! “जरा सोचो” के लिए आपका प्यार मिला दिन गद गद हो गया ! धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

Rajni Thakur के द्वारा
June 23, 2012

आदरणीय खुराना जी, आज जब सभी अपनी छोटी सी दुनिया में ही व्यस्त और पस्त हैं,ऐसे में यह कविता निसंदेह प्रेरणा देती है अपने अलावे ओउरों के बारे में भी सोचने के लिए..

    R K KHURANA के द्वारा
    June 23, 2012

    प्रिय रजनी जी, असल में हम लोग स्वार्थी हो गए है ! खून सफ़ेद हो गया है ! अपने ही अपनों का खून चूस रहे है ! यदि हम अपने स्वार्थों से हट कर कुछ दूसरों के लिए सोचे तो हालत कुछ और ही हो जायेंगे ! मेरी रचना “ज़रा सोचो” पर आपका स्नेह मिला ! आभार राम कृष्ण खुराना

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
June 23, 2012

आदरणीय खुराना जी, सादर बहुत बढ़िया सन्देश, जरा सा भी पालन कर लें. बात बन जाए. बधाई.

    R K KHURANA के द्वारा
    June 23, 2012

    प्रिय प्रदीप जी, मेरी कविता “ज़रा सोचो” के लिए आपका स्नेह मिला ! आपका बहुत बहुत शुक्रिया ! राम कृष्ण खुराना

yogi sarswat के द्वारा
June 23, 2012

एक जलता हुआ दिया कई और दिए जला सकता है ! एक पढा-लिखा इंसान कई लोगों को पढा सकता है ! मिट्टी में मिलकर एक बीज बनाता हैं लाखों बीज, शीतल दरिया जल का, सबकी प्यास बुझा सकता है ! सुन्दर प्रेरणादायक शब्द , आदरणीय श्री खुराना जी ! बहुत बहुत बधाई

    R K KHURANA के द्वारा
    June 23, 2012

    प्रिय योगी जी, सबा की तरह आपका स्नेह मिला ! मेरी रचना “ज़रा सोचो” पर आपकी प्रेरणादायक प्रतिक्रिया ने मेरा मनोबल बढाया है ! धन्यवाद ! राम कृष्ण खुराना

jlsingh के द्वारा
June 23, 2012

आदरणीय खुराना साहब, सादर अभिवादन ! एक जलता हुआ दिया कई और दिए जला सकता है ! एक पढा-लिखा इंसान कई लोगों को पढा सकता है ! मिट्टी में मिलकर एक बीज बनाता हैं लाखों बीज, शीतल दरिया जल का, सबकी प्यास बुझा सकता है ! हम सबको सोचने और उसे कार्यरूप देने की जरूरत है.

    R K KHURANA के द्वारा
    June 23, 2012

    प्रिय जे एल सिंह जी, आपको मेरी रचना “ज़रा सोचो” पसंद आई ! आपका आभारी हूँ ! दन्यवाद ! राम कृष्ण खुराना

pritish1 के द्वारा
June 22, 2012

कारण स्पष्ट है………हम जब तक सुप्त हैं ऐसा ही होगा…….जागरण का समय आ गया है हमें जागना है कुछ करना है……….. आपका अपना प्रीतीश

    R K KHURANA के द्वारा
    June 23, 2012

    प्रिय प्रीतीश जी, बिलकुल ठीक कहा आपने अब समय सोने का नहीं जगाने का है ! तभी हम देश के लिए और गरीबों के लिए कुछ कर सकेंके ! मेरी कविता “ज़रा सोचो” पर आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद ! राम कृष्ण खुराना

vinitashukla के द्वारा
June 22, 2012

आदरणीय खुराना जी, प्रणाम. बड़े ही विचारणीय प्रश्न और साथ में कुछ अच्छा कर दिखने की प्रेरणा संजोये हुए सुन्दर पोस्ट. बधाई एवं साधुवाद.

    R K KHURANA के द्वारा
    June 23, 2012

    प्रिय विनीता जी, मेरी रचना “ज़रा सोचो” पर आपका प्रोत्साहन मिला ! कृपया ऐसे ही स्नेह बने रखे ! धन्यवाद ! राम कृष्ण खुराना

alkargupta1 के द्वारा
June 22, 2012

आदरणीय खुराना जी , सादर अभिवादन बहुत लम्बे समय बाद आपकी रचना पढ़ी बहुत ही बढ़िया आह्वान किया है बहुत ही सुन्दर भावाभिव्यक्ति

    R K KHURANA के द्वारा
    June 22, 2012

    प्रिय अलका जी, मेरी कविता “ज़रा सोचो” आपको अच्छी लगी ! आपका स्नेह तो सदैव मिलता रहता है ! अच्छा लगता है ! आपका बहुत बहुत शुक्रिया ! राम कृष्ण खुराना

yamunapathak के द्वारा
June 22, 2012

khurana sir itnee सुन्दर भावाभिव्यक्ति भरी कविता मंच पर प्रस्तुत करने के लिए आपका अति शय धन्यवाद.

    R K KHURANA के द्वारा
    June 22, 2012

    प्रिय यमुना जी, मरी कविता “ज़रा सोचो” को आपकी सराहना मिली ! लिखने के लिए नई उर्जा मिल गयी ! आपका आभारी हूँ ! राम कृष्ण खुराना

sadhna srivastava के द्वारा
June 22, 2012

जी सर मैं इनसब बातों के विषय में बहुत ईमानदारी से सोच रही हूँ…… और आपने जितनी चीज़े लिखीं हैं वो सब मैं करना चाहती हूँ…..!! सच्चाई बयां की है आपने……

    R K KHURANA के द्वारा
    June 22, 2012

    प्रिय साधना जी, बहुत बहुत मुबारक आपके नेक ख्यालों के लिए ! जानकर बहुत ही ख़ुशी हुई की आप इन बातों को करने के लिए सोच रही है ! मैं आपका बहुत आभारी हूँ. ! आप जैसे कुछ लोग भी आगे आ जांय तो गरीबों का बहुत कल्याण हो जाय. ! मैं आपके विचोरों का तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ.! मेरी रचना “जरा सोचो” से आपने इतना कुछ सोच लिया इससे बड़ा इनाम इस कविता को क्या हो सकता है ! धन्यवाद् सहित राम कृष्ण खुराना

Mohinder Kumar के द्वारा
June 22, 2012

खुराना जी, आम आदमी से सरोकार लिये और कोमल भावनाओं से सजी आपकी इस रचना के लिये आपको बधाई.

    R K KHURANA के द्वारा
    June 22, 2012

    प्रिय मोहिंदर जी, मेरी कविता “ज़रा सोचो” के लिए आपका स्नेह मिला ! आपका बहुत बहुत शुक्रिया ! कृपया ऐसे ही स्नेह बनाए रखें राम कृष्ण खुराना

dineshaastik के द्वारा
June 22, 2012

आज गरीब और गरीब क्यों हो रहा है ज़रा सोचो, मां की छाती से लिपटा बच्चा क्यों रो रहा ज़रा सोचो ! गरीबी और भूख में अपनों की आंखें भी बदल जाती हैं, स्कूल जाने की उम्र में बचपन टोकरी ढो रहा ज़रा सोचो ! आदरणीय खुराना साहब, बहुत ही सुन्दर एवं प्रभावशाली अभिव्यक्ति….

    R K KHURANA के द्वारा
    June 22, 2012

    प्रिय दिनेश जी, मेरी रचना “ज़रा सोचो” पर आपका स्नेह मिला ! अति आभारी हूँ. ! राम कृष्ण खुराना

roshni के द्वारा
June 21, 2012

Respected खुराना जी नमस्कार .. काफी समय बाद आपकी कविता पढ़ी और बहुत अच्छी लगी … प्रेरणा देती .. कुछ सिखाती और कम शब्दों में बहुत बड़ी बात कह रही है ये रचना … ऐसे ही अपनी कवितीओं से मार्गदर्शन करते रहे आभार

    R K KHURANA के द्वारा
    June 21, 2012

    प्रिय रौशनी बिटिया, बहुत दिनों बाद आपका स्नेह मिला ! मेरी कविता “ज़रा सोचो” आपको अच्छी लगी ! आपका शुक्रिया ! राम कृष्ण खुराना

chaatak के द्वारा
June 21, 2012

आदरणीय खुराना जी, सादर अभिवादन, कविता के माध्यम से मानवता का ये आह्वान सराहनीय है| सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामया, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद् दुःखभाग्भावेत| अच्छी पोस्ट पर बधाई!

    R K KHURANA के द्वारा
    June 21, 2012

    प्रिय चातक जी, यह तो हमारे ऋषि मुनियों की परम्परा रही है की दुनिया का भला करो ! गरीब की सहायता करो ! इसी बात को कहने का प्रयास किया है मैनी अपनी कविता “ज़रा सोचो” में ! आपकी प्रतिक्रिया मेरे लिए उर्जा का काम कराती है ! धन्यवाद् ! राम कृष्ण खुराना

चन्दन राय के द्वारा
June 21, 2012

खुराना जी , आपने परोपकार की आवश्यकता को बड़े ही चारू रूप में महिमामंडित किया है , आज इंसान इंसान नहीं रहा , दुआ करता हूँ आपकी कविता सायद लोगो की सोच को मजबूर करे, की जरा सोचे , आज गरीब और गरीब क्यों हो रहा है ज़रा सोचो, मां की छाती से लिपटा बच्चा क्यों रो रहा ज़रा सोचो ! गरीबी और भूख में अपनों की आंखें भी बदल जाती हैं, स्कूल जाने की उम्र में बचपन टोकरी ढो रहा ज़रा सोचो !

    R K KHURANA के द्वारा
    June 21, 2012

    प्रिय चन्दन जी, आपको मेरी रचना “ज़रा सोचो” अच्छी लगी ! आप लोगो के स्नेह का ही फल है की मैं कुछ लिख पाता हूँ ! आपके स्नेह के लिए आभार ! राम कृष्ण खुराना


topic of the week



latest from jagran