KADLI KE PAAT कदली के पात

चतुर नरन की बात में, बात बात में बात ! जिमी कदली के पात में पात पात में पात !!

81 Posts

3600 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 875 postid : 452

आठवां अजूबा - हास्य-व्यंग

  • SocialTwist Tell-a-Friend

आठवां अजूबा  - हास्य-व्यंग

Athawan Ajooba

राम कृष्ण खुराना

अडोसी-पडोसी और मोहल्ले वाले मुझे मनोरंजन कह्कर पुकारते हैं ! उनका कहना है कि मैं अपने मां-बाप के मनोरंजन का नतीजा हूँ ! जब मैंने आईने में अपनी शक्ल देखी तो मुझे भी पडोसियों की बात पर यकीन करना पडा ! जैसी मेरी शक्ल सूरत है वो तो किसी के मनोरंजन का ही नतीजा हो सकती है ! यदि मेरे माता-पिता अपने मनोरंजन के बजाय मेरे बारे में ज़रा सा भी गम्भीर होते या उन्होंने ज़रा सी भी मेहनत की होती तो मेरी शक्ल, मेरी अक्ल, मेरा ढांचा, मेरा कद, मेरा नाम, मेरा काम, मेरा दाम कुछ और ही होता ! लेकिन मनोरंजन को कौन टाल सकता है ? ….मेरा मतलब है कि होनी को कौन टाल सकता है ? उनका मनोरंजन ठहरा, मेरी ऐसी-तैसी फिर गई ! मैंने तो देखा नहीं, लोग कहते हैं कि होली से ठीक नौ महीने पहले मेरे पूज्य पिता जी ने मनोरंजन ही मनोरंजन में मेरी पूज्य माता जी पर अपने प्रेम रूपी रंगो की बौछार की थी ! उसी मनोरंजन के परिणाम स्वरूप ठीक होली वाले दिन मैं पैदा हुआ ! लम्बा सिर, लम्बा मुंह, लम्बे हाथ, लम्बे पैर ! सीधे खडे बाल ! चाहे जितना तेल लगा लो चाहे जितनी कंघी कर लो सिर के बाल हमेशा सरकंडे की तरह खडे रहते थे ! मेरे  रंग में और नान-स्टिक तवे के रंग में कोई अंतर नहीं कर पाता था ! हर अंग बेडौल ! ना कोई माप ना कोई तौल ! पता ही नहीं लगता कि सिर बिच मुंह है कि मुंह बिच सिर है ! जब मैं खडा होता हूं तो ऐसा लगता है जैसे किसी ने बांस पर कपडे टांग दिए हों ! जब मैं बैठता हूं तो ऐसा लगता है जैसे किसी ने होलिका दहन के लिए लकडियां इकट्ठा कर के सज़ा कर रख दी हों ! “जसुमति मैया से बोले नंदलाला” की तर्ज पर मैंने अपनी माता-श्री से कई बार पूछा कि मेरे साथ ही ऐसा मनोरंजन क्यों ? परंतु मेरा प्रश्न सुनकर हर बार वे मौन समाधि में चली गईं !

उधर जब मैं पैदा हुआ तो भी हादसा हो गया ! शायद होली के दिन पैदा होने के कारण पैदा होते ही मैंने दाई के उपर रंग बिरंगा सू-सू कर दिया ! दाई कुछ ईनाम-कराम पाने की तमन्ना लिए उसी प्रकार उठ कर कमरे से बाहर बैठे मेरे पिता-श्री को बेटा होंने की खबर सुनाने के लिए हिरनी की तरह छलांगे लगाते हुए बाहर आई ! बेटे की खबर सुनकर खुशी में मेरे पिता-श्री ने दाई को अपने बाजुओं में भरकर उसे चूमना चाहा ! लेकिन उसके मुंह और कपडों पर मेरा रंग बिरंगा सू-सू देखकर पीछे हट गए ! इस प्रकार से मेरे सू-सू ने मेरे पिता-श्री को पर-स्त्री-चुम्बन के आरोप में कुम्भी पाक नर्क में जाने से बचा लिया !

हरि कथा कि तरह मेरे नाम भी अनंत हैं ! मां मुझे राज दुलारा कहकर बुलाती है ! उसका कहना है कि मेरा बेटा चाहे जैसा भी है, है तो मेरा ! मैं तो इसे नौ महीने कोख में लिए ढोती- डोलती रही हूं ! पिता जी मुझे निकम्मा और नकारा कहकर बुलाते हैं ! स्कूल में मेरे पूज्य गुरुजन मुझे डफर और नालायक कहते हैं ! मेरी सखियां (गर्ल-फ्रेन्डस) प्यार से मुझे कांगचिडि कहती हैं ! मेरे बाल-सखा मेरे नाम के बदले मुझे बेवकूफ, गधा, ईडियट, उल्लू आदि आदि विशेषणों से अलंकरित करते रहते हैं ! हमारे मुहल्ले में एक सरदार जी रहते हैं वो मुझे झांऊमांऊ कहकर मुस्कराते हुए मेरे हाथ में एक टाफी पकडा देते हैं ! मैं खुश हो जाता हूं !

मैं पूरा का पूरा ओ-पाज़िटिव हूं ! अर्थात जैसे ओ-पाज़िटिव ग्रुप का ब्लड सबको रास आ जाता है उसी प्रकार अडोसी-पडोसी अपनी जरुरत के मुताबिक अपने अपने तरीके से मेरा उपयोग कर लेते हैं ! मोहल्ले में गुप्ता जी की कोठी बन रही थी ! अचानक रात को तेज हवा चलने के कारण उनकी छत पर टंगा हुआ नज़रबट्टू कहीं उड गया ! दूसरे दिन जब गुप्ता जी को पता चला तो उन्हें बिना नज़रबट्टू के कोठी को नज़र लगने का डर सताने लगा ! वे दौडे-दौडे आए और मुझे काले कपडे पहना कर अपनी छत पर ले गए ! मैं सारा दिन जीभ निकाल कर उनकी छत पर खडा रहा ! शाम को गुप्ता जी का लडका बाज़ार से नया नज़रबट्टू लेकर आया तो उसने वो नज़रबट्टू छत पर टांगा तब मुझे नीचे उतारा !

शर्मा जी हाथ में झोला लिए बाजार से सामान लेने जा रहे थे ! तभी मैली-कुचैली सी 18-20 साल की दो लडकियां शर्मा जी से खाने के लिए कुछ पैसे मांगने लगीं ! शर्मा जी को बातों में उलझा कर उनका पर्स मार लिया ! शर्मा जी को पता लग गया ! उन्होंने शोर मचा दिया ! मोहल्ला इकट्ठा हो गया ! लडकियां बहुत शातिर थीं ! पैरों पर पानी नही पडने देती थीं ! तभी किसी ने पुलिस को फोन कर दिया ! थानेदार साहब दो सिपाही लेकर मौका-ए-वारदात पर आ धमके ! उन्होंने भी उनसे सच उगलवाने की बडी कोशिश की लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात ! तभी उनकी नज़र मुझ पर पडी ! थानेदार साहब ने मेरी तरफ इशारा करके उन लडकियों से कहा कि सच सच बता दो नहीं तो तुम्हारी शादी इस लंगूर से कर देंगें ! मेरी तो शक्ल ही काफी है ! दोनों लडकियों ने अपने अपने ब्लाउज़ों में हाथ डाला और शर्मा जी के पर्स के साथ तीन पर्स और निकाल कर थानेदार के हाथ पर रख दिए !

पिछले साल कुछ साथी मेले में जाने का प्रोग्राम बनाने लगे ! सौ-सौ रुपये इकट्ठा करके पैसे बिरजू को पकडा दिए ! मैंने भी साथ जाने की जिद पकड ली ! मेले में बहुत भीड थी ! हम लोग अपनी मस्ती में टहल रहे थे ! लोग मेला कम मुझे अधिक देख रहे थे ! कोई मुझे देखकर हंस रहा था तो कोई भगवान की कुदरत की दुहाई दे रहा था ! हलवाई की दुकान आई तो जलेबी खाने का मन कर आया ! जलेबी तुलवा कर जब पैसे देने लगे तो पता चला कि जेब खाली हो चुकी है ! कोई जेबकतरा अपने कौशल का प्रदर्शन कर गया था ! सबके चेहरे सफेद पड गए ! वापिस जाने का किराया भी नहीं था ! करें तो क्या करें ? बिरजू का दिमाग बहुत काम करता है ! उसने हलवाई से एक चादर मांगी ! दो लकडियां लेकर गाड दीं ! रस्सी से उन पर चादर बांध कर पर्दा सा बना दिया ! मेरे कपडे उतार कर मुझे चादर के पीछे खडा कर दिया  एक गत्ते पर “पांच रुपये में दुनिया का आठ्वां अजूबा देखिए” लिख कर बोर्ड टांग दिया ! शाम तक बिरजू की जेब नोटों से भर गई !

उसकी अम्मा जी का कहना है कि जब वो पैदा हुई थी तब भी उसके सिर पर बाल नहीं थे ! आज जब वो “मेरी उमर है सोलह साल, जमाना दुश्मन है” गीत गुनगुनाती रहती है तब भी उसके सिर पर बाल नहीं हैं ! उसकी अम्मा जी बडे गर्व से कहती हैं आज तक मेरी बेटी ने जमीन पर पैर नहीं रखा ! कैसे रखती ? 150 किलो वज़न का पहलवानी शरीर है उसका ! हर चीज़ गोल-मटोल ! बस सिर और मुंह के बारे में मार खा गई ! उसका मुंह बिल्कुल चुहिया जैसा है ! पूरा रोज़गार कार्यालय है ! उसके कारण पांच लोगों को रोजगार मिला हुआ है ! पैदल तो वो चल ही नहीं सकती ! रिक्शा पर बैठाने-उतारने, उसके कपडे आदि बदलने के लिए अलग अलग नौकर हैं ! मैं तो उसे ही आंठवा अजूबा मानता हूं ! लेकिन मैं बहुत खुश हूं ! क्योंकि मेरी शादी उसके साथ तय हो गई है ! आप सब लोगो को मेरा खुला निमंत्रण है ! नोटों से भरा शगुन का लिफाफा हाथ में लेकर शादी में जरुर आना !

राम कृष्ण खुराना

426-ए, माडल टाऊन एक्सटेंशन,

नज़दीक कृष्णा मंदिर,

लुधियाना (पंजाब)

99889-27450

khuranarkk@yahoo.in



Tags:       

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (33 votes, average: 4.61 out of 5)
Loading ... Loading ...

34 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

http://BusinessFirstFamily.com के द्वारा
January 11, 2015

Thanks for sharing your experiences with others. You’re really building a difference.

    R K KHURANA के द्वारा
    March 30, 2015

    Thanks

D33P के द्वारा
May 7, 2012

आदरणीय खुराना जी सादर नमस्कार .आज बहुत दिन बाद ऐसा मजेदार हंसी से सरोबार लेख पढकर आनंद आ गया ! वैसे एक बात समझ में नहीं आई आपकी तस्वीर देखकर लगा आपको कही देखा है फिर लगा शायद मेले में देखा हो (मजाक है ,मुझे पता चल गया है कि आप मजाक का बुरा नहीं मानते )सभी शगुन का लिफाफा लेकर बैठे है आप तो तारिख बता दीजियेगा …आभार दीप्ति अरोड़ा

    R K KHURANA के द्वारा
    May 8, 2012

    प्रिय दीप्ती जी आपको मेरा लेख “आठवां अजूबा” अच्छा लगा ! आपका दिल से आभारी हूँ ! आपकी प्रतिक्रिया ने मेरा साहस बढ़ाया है ! दीप्ती जी क्या आप पंजाबी हैं ! अरोड़ा तो पंजाबी होते है न ? प्रतिक्रिया के लिए पुन धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

    D33P के द्वारा
    May 8, 2012

    जी आपने सही फ़रमाया हम पंजाबी है ……धन्यवाद

    R K KHURANA के द्वारा
    May 9, 2012

    प्रिय दीप्ती जी उत्तर के लिए धन्यवाद ! मैं लुधियाना का हूँ ! धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

dineshaastik के द्वारा
February 2, 2012

खुराना जी नमस्कार, बहुत ही रोचक, मनोरंजक एवं जायकेदार व्यंग व्यंजन, सचमुच आनन्द से भर गया। बधाई,.,…. कृपया इसे भी पढ़े- नेता, कुत्ता और वेश्या

    R K KHURANA के द्वारा
    February 2, 2012

    प्रिय दिनेश जी, आपकी प्रतिक्रिया के लीड बहुत बहुत धन्यवाद् ! कृपया ऐसे ही स्नेह बनाए रखें खुराना

J L SINGH के द्वारा
June 26, 2011

खुराना साहब (चाचा), बहुत ही अच्छा लगा आंठवा अजूबा पढ़कर! पर, आपसे गंभीर रचना की उम्मीद रखता हूँ. यह विषय राजकमल साहब के लिए आरक्षित छोड़ दीजिये. उम्मीद करता हूँ आप और राजकमल साहब बुरा नहीं मानेंगे.- जवाहर

    R K KHURANA के द्वारा
    June 26, 2011

    प्रिय सिंह साहिब, आपको मेरा “आठवां अजूबा” अच्छा लगा ! जानकर हर्ष हुआ ! गंभीर लेखन भी करता हूँ पर कभी कभी जायका बदलने के लिए हास्य भी जरूरी हो जाता है ! आपने मेरे व्यंग भी पढ़े होंगे ! आपका सुझाव मेरे सर माथे पर अगला लेख गंभीर देने का प्रयास करूंगा ! हाँ, याद रखियेगा में कभी किसी की टिपण्णी का बुरा नहीं मानता वरन मैं तो प्रतिक्रिया देने वाले को अपना गुरु मानता हूँ ! हमें तो आप लोगो से ही सीखना है कि हममे क्या कमिया है जो हम दूर कर सकते है ! मैं इस बात के लिए आपका ह्रदय से आभारी हूँ ! प्रतिक्रिया के लिए शत शत नमन राम कृष्ण खुराना

NIKHIL PANDEY के द्वारा
June 17, 2011

बढ़िया व्यंग्य है सर शुरू से अंत तक लय बनी रही आठवा अजूबा मजेदार है….शादी में आना तो है पर शादी की तारीख आपने नहीं बताई

    R K KHURANA के द्वारा
    June 17, 2011

    प्रिय निखिल जी, मेरी व्यंग रचना “आठवां अजूबा” के लिए आपके प्यार के लिए आभारी हूँ ! हाँ आपने शादी की तारीख पूछी है तो वो जिस महीने में रविवार नहीं पड़ता उसी महीने के अंतिम दिन करने का विचार है ! बस आप शगुन का लिफाफा नोटों से भर कर तैयार रखे ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद राम कृष्ण खुराना

baijnathpandey के द्वारा
June 13, 2011

आदरणीय श्री खुराना जी सादर अभिवादन बढ़िया हास्य के लिए हार्दिक आभार

    R K KHURANA के द्वारा
    June 13, 2011

    प्रिय बैजनाथ जी, मेरे हास्य लेख “आठवां अजूबा” के लिए आपका प्रोत्साहन मिला ! धन्यवाद राम कृष्ण खुराना

s.p.singh के द्वारा
June 13, 2011

आदरणीय खुराना जी प्रणाम, बहुत दिनों के बाद आठवें अजूबे के लिए बधाई,

    R K KHURANA के द्वारा
    June 13, 2011

    प्रिय श्री सिंह साहेब, हास्य रचना “आठवां अजूबा” के लिए आपका स्नेह पाकर मन प्रसन्न हो गया ! आपके स्नेह के लिए आभारी हूँ. धन्यवाद सहित राम कृष्ण खुराना

आर.एन. शाही के द्वारा
June 13, 2011

आदरणीय खुराना साहब, बहुत दिनों बाद आपके हास्यरस की ये फ़ुहार मानसून से पूर्व ही सराबोर कर गई । प्रणाम !

    R K KHURANA के द्वारा
    June 13, 2011

    प्रिय श्री शाही जी, आपका स्नेह मिला ! मन प्रसन्न हो गया ! गंभीर समस्यायों के बीच कभी कभी हास्य की फुहार धूप में चलते हुए को ठंडी छांव की अनुभूति कराती है ! धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

bmsharad के द्वारा
June 13, 2011

आ० खुरानाजी , भरपूर मनोरंजन के लिए धन्यवाद …..मजेदार ,चटपटा आलेख ……बिरजू श्रीवास्तव

    R K KHURANA के द्वारा
    June 13, 2011

    प्रिय बिरजू जी, मेरे हास्य लेख “आठवां अजूबा” पर प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद राम कृष्ण खुराना

rachna varma के द्वारा
June 13, 2011

बढ़िया लिखा है सर आपने धन्यवाद

    R K KHURANA के द्वारा
    June 13, 2011

    प्रिय रचना जी, मेरी हास्य रचना “आठवां अजूबा” के लिए आपका स्नेह मिला ! धन्यवाद राम कृष्ण खुराना

NAVEEN KUMAR SHARMA के द्वारा
June 13, 2011

चाचा जी नमस्ते, चाचा जी बहुत ही सुन्दर और मनोरंजक रचना के लिए धन्यवाद् नवीन कुमार शर्मा बहजोई (मुरादाबाद) उ.प्र. मोबाइल नंबर – 09719390576

    R K KHURANA के द्वारा
    June 13, 2011

    प्रिय नवीन जी, मेरी रचना आठवां अजूबा पर आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद राम कृष्ण खुराना

Alka Gupta के द्वारा
June 13, 2011

आदरणीय खुराना जी , सादर अभिवादन आपकी यह विनोदपूर्ण रचना पढ़ी बहुत आनंद आया धन्यवाद !

    R K KHURANA के द्वारा
    June 13, 2011

    सुश्री अलका जी, आपको मेरी रचना “आठवां अजूबा” पढ़कर बहुत आनंद आया ! मेरा लिखना सार्थक हो गया ! प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

manoranjan thakur के द्वारा
June 12, 2011

सुंदर रचना पर मनोरंजन की ओर से दुसरे मनोरंजन को बहुत बधाई

    R K KHURANA के द्वारा
    June 13, 2011

    प्रिय मनोरंजन जी, आपकी मनोरंजनात्मक बधाई के लिए आपको ह्रदय से आभारी हूँ ! कृपया ऐसे ही स्नेह बनाय रखे ! धन्यवाद सहित राम कृष्ण खुराना

Rajkamal Sharma के द्वारा
June 11, 2011

आदरणीय चाचा जी ….सादर प्रणाम ! इस लेख में आपने दो तीन जगह पर मेरी तरह बेबाकी दिखाई है ….. देख कर अच्छा लगा की आप भी जमाने के साथ चल रहे है …. इतना मजेदार मगर सरल लेख है की हर कोई सोचेगा की अरे इसको मैंने क्यों नहीं लिखा ? यही आपकी कामयाबी का राज है एक होती है गर्ल टू नेक्स्ट डोर आप है ओल्ड मैन टू नेक्स्ट डोर धन्यवाद इस हंसाने वाली रचना के लिए

    R K KHURANA के द्वारा
    June 11, 2011

    प्रिय राज जी, सदा की तरह से मेरी रचना “आठवां अजूबा” पर भी आपका स्नेह मिला ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभारी हूँ धन्यवाद राम कृष्ण खुराना

    J L SINGH के द्वारा
    June 26, 2011

    सही कहा आपने राजकमल साहब, सादर प्रणाम! “तना मजेदार मगर सरल लेख है की हर कोई सोचेगा की अरे इसको मैंने क्यों नहीं लिखा ?”—- मैं भी यही सोंच रहा हूँ. – जवाहर

    R K KHURANA के द्वारा
    June 26, 2011

    प्रिय जवाहर जी, आप भी ऐसे ही हास्य लेख लिखिए ! हमें पढ़ कर मज़ा आएगा ! मैं आपके हास्य लेख का इंतजार करूंगा ! धन्यवाद राम कृष्ण खुराना

allrounder के द्वारा
June 11, 2011

आदरणीय खुराना साहब मनोरंजक आलेख पर हार्दिक बधाई !

    R K KHURANA के द्वारा
    June 11, 2011

    प्रिय सचिन जी, मेरी हास्य रचना “आठवां अजूबा” के लिए आपके स्नेह के लिए आभारी हूँ ! धन्यवाद सहित राम कृष्ण खुराना


topic of the week



latest from jagran