KADLI KE PAAT कदली के पात

चतुर नरन की बात में, बात बात में बात ! जिमी कदली के पात में पात पात में पात !!

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प्यार में धोखा नहीं

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प्यार में धोखा नहीं

Pyar mein dhokha nahi

राम कृष्ण खुराना

रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय ।
टूटे से फिर ना जुरे, जुरे गाँठ परि जाय ॥

रहीम दास जी कहते हैं कि प्रेम के धागे को तोडो मत ! झटको मत ! चटकाओ मत !  प्रेम का रिश्ता बहुत नाज़ुक होता है ! प्रेम का धागा बहुत कच्चा होता है ! प्रेम का धागा बहुत मजबूत होता है ! कच्चा और मजबूत ? यह कैसा विरोधाभास ? यही प्रेम है ! इसे ही प्रेम कहते है ! प्रेम में बहुत ताकत होती है ! प्रेम में यमराज से पति के प्राण वापिस लाने की हिम्मत होती है और यह अगर एक बार टूट गया तो फिर आप चाहे जो भी कर लें यह जुडेगा नहीं ! कोई गोंद, कोई फेविकोल, कोई चिपकाव, कोई स्टिक काम नहीं आयगी ! यदि आप इसे जोडने की नाकाम कोशिश करेंगे तो इसमें गांठ पड जायगी ! यह धागे का स्वाभाव है ! धागे की विशेषता है ! एक बार टूट जाने पर जुडता नहीं ! अगर आप जबरदस्ती करेंगे तो इसमें जोड आ जायगा, गांठ पड जायगी ! गांठ, जो जीवन भर आपको खटकती रहेगी, सालती रहेगी, कचोटती रहेगी ! कहते है कि जब जलजला आता है और उस समय अगर किसी भवन में, किसी घर में भूचाल के कारण दरार आ जाती है तो आप कितनी भी कोशिश कर लें वो दरार भरी नहीं जा सकती ! आप जितना भी प्रयास कर लें वो दरार वैसी की वैसी ही रहेगी ! उसी प्रकार यह प्यार है ! जब एक बार दिल में विकार आ गया, बिगाड आ गया, जलजला आ गया, तूफान आ गया, भूचाल आ गया तो फिर उसमें प्यार का रंग दोबारा नहीं चढ पाता ! फिर वो प्यार की कम्बली काली हो जाती है जिस पर दूजा रंग नहीं चढता ! उस में वो चटक-मटक नहीं रह जाती ! वो कशिश नहीं रह जाती ! वो आकर्षण नहीं रह जाता ! वो खिंचाव नहीं होता ! क्योंकि उधो मन न भये दस बीस ! मन एक ही है और उसमे किसी के लिए या तो प्यार रह सकता है या नफरत ! एक म्यान में दो तलवारों की कल्पना नहीं की जा सकती ! जब दिल ही टूट गया तो जी कर क्या करेंगें ! प्रेम का धागा ही टूट गया तो जीवन तो व्यर्थ ही है ! जीवन का क्या अर्थ रह जायगा ? रसहीन जीवन जीने का क्या लाभ ? क्योंकि जब भी पुराने घावों पर हाथ आ जायगा तो वो घाव फिर तकलीफ देने लग जायेंगे ! रहीम दास जी इसी बात को इस प्रकार भी कहते हैं !

बिगरी बात बने नहीं, लाख करो किन कोय।
रहिमन बिगरे दूध को, मथे न माखन होय॥

जो दूध बिगड गया ! जो दूध फट गया ! जो दूध खराब हो गया उसे आप चाहे जितना भी मथें उसमें से मक्खन नहीं निकलेगा ! उसकी दही नहीं जमेगी ! उससे खोया-पनीर नहीं बन पायगा क्योंकि उसका सार तो निकल चुका होता है ! उसकी मलाई तो गुम हो जाती है ! उसमें से फैट तो समाप्त हो जाता है ! इसी प्रकार से बिगडी बात बनाना बहुत ही मुश्किल होता है ! ज़बान से बात और कमान से तीर निकल जाने पर वापिस नहीं आते ! कबीर दास जी ने कहा है ऐसी बानी बोलिए मन का आपा खोए, औरन को सीतल करे आपहु सीतल होय ! बोलने से पहले सोचना जरुरी है ! सोच समझ कर ही बात करनी चाहिए ! जिससे प्रेम की डोर टूटे नहीं ! प्यार की चमक कम न हो ! रिश्तों में दरार न आए ! नाज़ुक बंधन बिखरे नहीं ! प्यार बना रहे ! मोहब्बत सलामत रहे ! कागा किसका धन हर लेता, कोयल किसको दे देती है ! अपने मीठे बोल सुनाकर, बस में सबको कर लेती है !

उधार प्रेम की कैंची है ! प्रेम में उधार नहीं चलता ! प्रेम में नकद ही चाहिए ! चेक भी नहीं चलेगा ! बैंक ड्राफ्ट भी मान्य नहीं है ! केवल कैश ! हार्ड कैश ! यानि प्रेम को हर रोज़ ताज़ा करना पडता है ! नया करना पडता है ! नया दिखाना पडता है ! नया जीवन देना होता है ! इसका जन्म दिन रोज़ रोज़ मनाना पडता है ! प्रतिदिन नया केक काटना पडता है ! नईं मोमबत्तियां जलानी पडती हैं ! हर रोज़ तालियां बजानी पडती हैं ! तभी प्रेम सफल हो पाता है तभी प्रेम सार्थक बन पाता है ! तभी प्रेम की तपिश मह्सूस होती है ! तभी प्यार की पींग बढती है ! तभी प्रेम परवान चढता है ! ग्रंथों में मुहब्बत का सिर्फ जिक्र होता है ! किताबों में केवल प्यार की बातें होती हैं ! लम्बें-चौडे लेख लिखे जाते हैं ! लेकिन प्रेम सिर्फ लफ्फाजी नहीं है ! इसको लफ्ज़ों में ब्यान नहीं किया जा सकता ! इसे तो बस महसूस किया जा सकता है ! पाया जा सकता है ! जिया जा सकता है ! चकोर काजू, बादाम, पिस्ता छोड कर अंगार खाता है ! भंवरा फूल के चारों ओर मंडराते हुए उसकी पंखुडियों में बंद हो जाता है ! परवाने दीपक पर कुर्बान हो जाते हैं ! प्रेम में स्वार्थ आ जाता है ! हम स्वार्थी हो जाते है ! हम चाहते हैं कि जो हमारा है वो सिर्फ और सिर्फ हमारा ही होकर रहे ! हमारे सिवा वो किसी ओर को न देखे ! उसके सिवा हम किसी ओर को न देखें ! मैं ही मैं देखूं तुम्हें पिया, और न देखे कोई ! वो मुझमें समा जाय, मैं उसमे समा जाऊं ! प्रेम की कोई सीमा नहीं ! प्रेम की कोई थाह नहीं ! प्रेम का कोई छोर नहीं ! जितना करो उतना कम ! प्यार में धोखा नहीं  यही है प्रेम !

राम कृष्ण खुराना

9988927450

khuranarkk@yahoo.in





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106 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

    R K KHURANA के द्वारा
    May 30, 2012

    What is this ?

    R K KHURANA के द्वारा
    May 30, 2012

    Change the language

    R K KHURANA के द्वारा
    June 28, 2011

    what ?

Moon के द्वारा
May 26, 2011

AFAIC that’s the best asnwer so far!

    R K KHURANA के द्वारा
    May 26, 2011

    Thank you sir,

s.p.singh के द्वारा
May 1, 2011

आदरणीय खुराना जी अति उत्तम पोस्ट – पर आज के छोकरे तो यह कहते हैं कि अगर प्रेम हम करें तो पाप और जो “कृष्ण ने किया वह रास” उनकी समझ को क्या करे ?

    R K KHURANA के द्वारा
    May 1, 2011

    प्रिय श्री सिंह साहेब, आजकल के लड़कों की बात ही और है ! यह हम लोगो का जमाना नहीं है ! आज लोग टाईम पास करते है उस समय सच्चा प्यार होता था ! फिर भी प्यार में धोखा तो ठीक नहीं ! आपके स्नेह के लिए आभारी हूँ ! राम कृष्ण खुराना

    Monkey के द्वारा
    May 26, 2011

    Hey, subtle must be your mdidle name. Great post!

    R K KHURANA के द्वारा
    May 26, 2011

    प्रतिक्रिया के लिए शुकिरिया

    R K KHURANA के द्वारा
    May 30, 2012

    is this virus

    R K KHURANA के द्वारा
    February 2, 2014

    Can’t understand

Rajkamal Sharma के द्वारा
April 24, 2011

aadrniy खुराना चाचा जी ….सादर प्रणाम ! आप का लेख चाहे बहुत ही उच्च कोटि का बन पड़ा है लेकिन इसकी ज्यादातर बाते आप पर किसी हद तक और मुझ पर तो बिलकुल ही नहीं फिट बैठती है …… क्योंकि अपना काम तो खामख्वाह ही पंगा लेना है , दूसरों के फटे में अकारण ही टांग अडाना है , हम लोग तो पहले सम्बन्ध खराब करते है और फिर यह रूठने मनाने की प्रकिर्या तो अनवरत रूप से चलती ही रहती है ….. क्योंकि अगर हम लोग समझोते करने लग जाए तो फिर मेरो जैसो की दुकानदारी का क्या होगा ?…. धन्य्वाद

    R K KHURANA के द्वारा
    April 24, 2011

    प्रिय राज जी, आपकी और मेरी आदत को क्या कहिये ! वो हम दोनों का निजी मामला है ! लेकिन यह सत्य है की मीठी वाणी से जग जीता जा सकता है ! मैं भी आपकी तरह समझोतों से दूर रहता हूँ ! आपने भी अनुभव किया होगा ! फिर भी अच्छा बोल सब को सुख ही देता है ! कभी कभी धोखा खाना भी अच्छा लगता है ! खासकर प्यार में ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवादी हूँ राम कृष्ण खुराना

    Jacoby के द्वारा
    May 26, 2011

    I feel so much happier now I understand all this. Thnkas!

    R K KHURANA के द्वारा
    May 26, 2011

    Dear Jacoby, My article \"Pyar mein Dhokha nahi\" gave you happiness. Great Thanks for your comments

shibbu arya के द्वारा
April 14, 2011

pranam shrddhyey khurana ji, 1 varsh bad aapko bada, me aapka fan hu.

    R K KHURANA के द्वारा
    April 14, 2011

    प्रिय शिबू जी, मेरी रचना “प्यार में धोखा नहीं” के लिए आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद ! इतने दिनों बाद आपका स्नेह मिला ख़ुशी हुई ! मेरी अन्य रचनाये भे पढ़िए और अपनी प्रतिक्रिया दीजिये ! राम कृष्ण खुराना

sushma के द्वारा
February 26, 2011

अछि प्रस्तुति नि:संदेह बेहद खुबसूरत रचना , पर कुछ अपनी और से कहना चाहूंगी ,रहिमन धागा ………………………..मत तोड़ो ……………..उम्दा बात है बहुत बड़ी बात है क्योकि बहुत पुरानी भी. पर प्यार इससे कुछ इतर है प्यार सिर्फ और सिर्फ प्यार होता है देवत्व तुल्य .वहा सीमा और सीमाओ की कोई आवशयकता नहीं होती .आज के पिज्जा और गले में फासी लगाने को प्यार नहीं कहते या किसी प्रकार के समझोते को प्यार नहीं कहते. वो तो एक जिद है जब तक मणि न जाये तीस देती है और पूरी होने के बाद टुकड़े{अनुपमा ]. क्या इसे प्यार की पनोती नहीं कहेंगे जहा प्यार ही गायब है.प्यार चरम है प्यार विश्राम है प्यार धुप है प्यार छाव है.प्यार सुरुवात है प्यार अंत है.

    R K KHURANA के द्वारा
    February 26, 2011

    प्रिय सुषमा जी, प्यार अनन्त है ! इसको किसी भाषा में नहीं बंधा जा सकता ! यह तो एक भावना है ! प्यार बंधन भी है और सकून भी ! प्यार तो बस प्यार ही है ! आपकी इतनी सुंदर प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

meesa.v.singh के द्वारा
February 21, 2011

sorry khurana ji mai thode din se bahar gai thi kal hi wapas aai hu .aap ke lekh ke liye bas yahi kahna chahungi ki ‘rishto se badi chahat kya hogi? ,dosti se badi ibadat kya hogi?jis ko mile aap jaisa path-pradarsak usko zindagi se shikayat kya hogi” lekh ke liye thank u .

    R K KHURANA के द्वारा
    February 21, 2011

    प्रिय मीसा जी, आप लोगो के प्यार ने मुझे लिखने का बहाना दे दिया है ! मैं इसका ऋण नहीं चूका सकता ! आपके शेयर का तो जवाब नहीं ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए मैं आभारी हूँ ! बहुत बहुत धन्यवाद राम कृष्ण खुराना

priyasingh के द्वारा
February 17, 2011

क्षमा चाहूंगी आपका लेख इतने देर से पढ़ा मैंने …….. पर कहते है न देर से आये पर दुरुस्त आये ……. अच्छा हुआ जो मैंने ये लेख पढ़ा बहुत कुछ सीखने को मिला ……….. दोहों के साथ यह लेख पढ़कर आनंद आ गया ……… उत्तम प्रस्तुति ………

    R K KHURANA के द्वारा
    February 17, 2011

    प्रिय प्रिया जी, आको मेरी रचना “प्यार में धोखा नहीं” से कुछ सीखने को मिला ! मेरा लिखना सफल हो गया ! आप जैसी अच्छी लेखिका से प्रोत्साहन पाना मेरे लिए बहुत महत्व रखता है ! कृपया ऐसे ही स्नेह बनाये रखें ! प्रतिक्रिया के लिए आपका आभार ! आर के खुराना

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
February 16, 2011

कागा किसका धन हर लेता, कोयल किसको दे देती है ! अपने मीठे बोल सुनाकर, बस में सबको कर लेती है ! आदरणीय खुराना जी……….. इस सुंदर प्रस्तुति के लिए बधाई…….

    R K KHURANA के द्वारा
    February 16, 2011

    प्रिय पियूष जी, मीठे बोल कगकर आप अपना बड़ा से बड़ा काम निकल सकते है ! यह जुबान ही लोगो को अपना बना देती है और यही जुबान अगर ख़राब हो तो लोगो को दुश्मन बना देती है ! आपको प्रतिक्रिया के लिए आभार ! आर के खुराना

s p singh के द्वारा
February 15, 2011

आदरणीय खुराना जी एक और अच्छा लेख लगता है इस बार का शेहरा आपके सर ही होगा, अग्रिम बधाई —

    R K KHURANA के द्वारा
    February 15, 2011

    प्रिय श्री सिंह साहेब, आपकी शुभकामनायों के लिए मैं सदा आपका आभारी हूँ ! कृपया अपनी कृपा ऐसे ही बनाये रखें ! मुझे आप लोगो का जो प्यार शुरू से ही मिला है उसका ऋण मैं नहीं दे सकता ! धन्यवाद सहित आर के खुराना

sanjeev sharma के द्वारा
February 15, 2011

खुराना जी , आपकी इन पंक्तियों का मर्म यदि हम सभी समझ ले तो ज़माने की सारी समस्याएँ ही ख़त्म हो जाएँ… “कागा किसका धन हर लेता, कोयल किसको दे देती है अपने मीठे बोल सुनाकर, बस में सबको कर लेती है”! अच्छी प्रस्तुति……

    R K KHURA NA के द्वारा
    February 15, 2011

    प्रिय संजीव जी, आपका कथन सही है ! यही बात तो हम सबको बताना चाहते है की प्रिय बोलो सबको अपने बस में कर लो ! मेरी रचना “प्यार में धोखा नहीं” के लिए आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद ! आर के खुराना

    Roxanna के द्वारा
    May 26, 2011

    That’s way more clever than I was expecitng. Thanks!

    R K KHURANA के द्वारा
    May 26, 2011

    I thank you very much for you affection shown Thanks again

nishamittal के द्वारा
February 15, 2011

खुराना जी ऐसी बनी बोलिए मन का आप खोये वास्तव में प्रेमयुक्त मीठी वाणी में बहुत शक्ति है.आपके अच्छे लेख के लिए बधाई .

    R K KHURANA के द्वारा
    February 15, 2011

    सुश्री निशा जी, मेरी रचना “प्यार में धोखा नहीं” के लिए आप जैसी अच्छी लेखिका की प्रतिक्रिया पाकर लिखना सफल हो गया ! धन्यवाद आर के खुराना

razia mirza के द्वारा
February 15, 2011

निर्मल प्रेम की व्याख्या से भरी बहोत सुन्दर पोस्ट ||खुराना साहब| बधाई स्वीकारें

    R K KHURANA के द्वारा
    February 15, 2011

    प्रिय रज़िया जी, कहाँ रहती है आप आजकल ! बहुत दिनों बाद आपकी प्रतिक्रिया मिली ! आप मंच पर भी कम ही दिखाई दे रही है ! मेरी रचना “प्यार में धोखा नहीं” के लिए आपकी प्रतिक्रिया मिली मन प्रसन्न हो गया ! धन्यवाद आर के खुराना

amishra के द्वारा
February 15, 2011

खुराना जी, प्रेम मे निरन्तरता ही सही मायने मे प्रेम को जीवन्त बनाये रख सकती है. प्रेम मे अटूट विश्वास और  सच्चाई की बहुत जरुरत है. बहुत ही सुन्दर व्याख्या की है आपने धन्यवाद. 

    R K KHURANA के द्वारा
    February 15, 2011

    प्रिय ऐ मिश्र जी, प्रेम प्रतिदिन प्रतिदन मांगता है ! तभी प्रेम सार्थक हो पाता है ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद आर के खुराना

Nikhil के द्वारा
February 15, 2011

आदरणीय खुराना अंकल, आपकी विद्वता से जागरण का मंच हमेशा हराभरा रहे बस यही कामना है. आभार, निखिल झा

    R K KHURANA के द्वारा
    February 15, 2011

    प्रिय निखिल जी, आप सब साथियों का प्यार मुझे इसी तरह से मिलता रहे बस यही कामना है ! मैं आपके स्नेह के लिए आभारी हूँ ! आर के खुराना

briju के द्वारा
February 15, 2011

आदरणीय खुरानाजी , सुप्रभात …….प्रेम की प्यारी व्याख्या …आप जैसे विद्वान् मित्रो के लिए किसी शायर ने कहा है .. वो जिनको देख के दिल में खुदा की याद आये हम उन बुतों का बड़ा एहतराम करते हें …ब्रजमोहन ,आगरा

    R K KHURANA के द्वारा
    February 15, 2011

    प्रिय ब्रिजू जी, आप जैसे सधे और विचारशील लेखक की सराहना पाकर मैं सराबोर हो गया ! मेरी रचना “प्यार में धोखा नहीं” के लिए आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद आर के खुराना

rajkamal के द्वारा
February 14, 2011

आदरणीय खुराना जी …सादर प्रणाम ! स्वार्थ और प्रेम , एक ही म्यान में दो तलवारे नही रह सकती है …. धन्यवाद व् शुभकामनाये

    R K KHURANA के द्वारा
    February 14, 2011

    प्रिय राज जी, मेरी रचना “प्यार में धोखा नहीं” के लिए आपकी स्नेह भरी प्रतिक्रिया मिली ! आपका तहे दिल से शुक्रिया ! आर के खुराना

roshni के द्वारा
February 14, 2011

आदरनिये खुराना जी कागा किसका धन हर लेता, कोयल किसको दे देती है ! अपने मीठे बोल सुनाकर, बस में सबको कर लेती है … आप बहुत ही सुंदर विश्लेष्ण करते हो दोहों के साथ ….. बहुत बढ़िया आभार सहित

    R K KHURANA के द्वारा
    February 14, 2011

    प्रिय रौशनी जी, मैं आपकी तरह कविता तो नहीं लिख सकता लेकिन कुछ लिखने का प्रयास करता हूँ ! आप के होसला अफजाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया ! आर के खुराना

rajeev dubey के द्वारा
February 14, 2011

खुराना जी, प्रेम को संजो कर रखने की बात कहती यह रचना बड़ी अच्छी बन पडी है, बधाई.

    R K KHURANA के द्वारा
    February 14, 2011

    प्रिय राजीव जी, आपका स्नेह मिला ! मन गदगद हो गया ! धन्यवाद आर के खुराना

आर.एन. शाही के द्वारा
February 14, 2011

आदरणीय खुराना साहब, आपकी अनुभवी लेखनी से एकबार फ़िर प्रेम का एक परिपक्व विश्लेषण पढ़ने को मिला । बहुत-बहुत बधाई ।

    R K KHURANA के द्वारा
    February 14, 2011

    प्रिय शाही जी, आप जैसे अच्छे लेखक और बुद्धिजीवी से प्रशंसा पाना मेरे लिए बहुत महत्त्व रखता है ! मैं आपका आभारी हूँ ! धन्यवाद् आर के खुराना

    Louise के द्वारा
    May 26, 2011

    That’s more than snesilbe! That’s a great post!

    R K KHURANA के द्वारा
    May 26, 2011

    Dear Louse I am thankful for your comments

    R K KHURANA के द्वारा
    June 28, 2011

    Thanks

Dharmesh Tiwari के द्वारा
February 14, 2011

आदरणीय खुराना साहब सादर प्रणाम,प्यार में धोखा हो ही नहीं सकता,,,,,काफी रोचक तरीके से अनेको सूक्तियों से सजाते हुए आपने प्यार में गहराई से महत्वपूर्ण बातों को सामने रख्खा है,धन्यवाद!

    R K KHURANA के द्वारा
    February 14, 2011

    प्रिय धर्मेश जी, आपकी प्रतिक्रिया ने मेरे लिए उर्जा का काम किया है ! मैं आपका आभारी हूँ ! धन्यवाद् सहित आर के खुराना

chaatak के द्वारा
February 14, 2011

प्यार और धोखा दो सगी बहनों की तरह हैं जिनका साथ चोली दामन का और फितरत सांप नेवले की होती है| अच्छी पोस्ट पर बधाई!

    R K KHURANA के द्वारा
    February 14, 2011

    प्रिय चातक जी, आप जैसे अच्छे लेखक से मुझे सराहना मिली ! धन्यवाद आर के खुराना

Bhagwan Babu के द्वारा
February 14, 2011

खुराना जी नमस्कार एक बार फिर महापुरूषो की सार्थक पंक्तियाँ से सराबोर ये आपका लेख सार्थक बन पडा है धन्यवाद http://bhagwanbabu.jagranjunction.com/2011/02/13/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%ae-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%88-%e2%80%93-valentine-contest/

    R K KHURANA के द्वारा
    February 14, 2011

    प्रिय भगवान् बाबु जी, आपको मेरा लेख “प्यार में धोखा नहीं”\" पसंद आया ! मेरे लिए आपके विचार बहुत महत्त्व रखते है ! आपका धन्यवाद ! आर के खुराना

deepak pandey के द्वारा
February 14, 2011

खुराना साहब अभिवादन , बहुत अच्छी सूक्तियो का उपयोग कर लिखा है आपने . सही है जहा प्रेम है वहा धोखे की कोई गुंजाईश नहीं होती. धन्यवाद एक और अछे लेख के लिए..

    R K KHURANA के द्वारा
    February 14, 2011

    प्रिय दीपक जी, आपकी स्नेह भरी प्रतिक्रिया मिली ! आपका तहे दिल से शुक्रिया ! आर के खुराना

kmmishra के द्वारा
February 14, 2011

ऐसी बानी बोलिए मन का आपा खोए, औरन को सीतल करे आपहु सीतल होय ! – काका सादर प्रणाम । आपका लेख पढ़ कर एहसास होता है कि कई बार जोश में हम ऐसा कुछ कह जाते हैं जिससे अगला आहत हो जाता है । वाकई आज आपका यह लेख पढ़ कर प्रेम के कई मूल मंत्र सीखने को मिले । अभी बहुत कुछ सीखना बाकी है और बुजुर्गों से यही आशा की जाती है कि जब हम गलती करेंगे तब वे धीमें से इशारा कर देंगे ‘बेटा ! ये ऐसे नही, ऐसे है ।’ सीखना चाहो तो सीख लो, तुम्ही को आगे काम आयेगा । इधर आपसे बहुत दिनों से बात नहीं हुयी थी लेकिन याद सबकी बनी रही । चाहे शाही जी हो, बाजपेयी जी हो, पारीक जी हों । अब लौट आया हूं । सबको पैलगी करने जाना है । बहुत बहुत आभार ।

    R K KHURANA के द्वारा
    February 14, 2011

    प्रिय मिश्र जी, अभूत दिनों के बाद आप मच पर दिखाई दिए ! आपको प्रतिक्रिया मेरे लिए बहुत महत्त्व रखती है ! आप जैसे व्यंगकार से प्रतिक्रिया मिलना बहुत सुखद लगता है ! आभार सहित आर के खुराना

rktelangba के द्वारा
February 14, 2011

आदरणीय खुराना जी, प्यार की जितनी भी परतें उघाड़ो उतना ही रहस्य गहराता चला जाता है . प्यार में धोखे की गुंजायश ही नहीं है. धोखा तो वहां हो सकता है जहाँ प्यार रहा ही न हो . आप का ब्लॉग बहुत अच्छा था . पढ़ कर बहुत अच्छा लगा. R K Telangba

    R K KHURANA के द्वारा
    February 14, 2011

    प्रिय आर के जी सही कहा है आपने ! प्यार भी कदली के पात की तरह है जितनी परते उधेदो नीचे से और निकलती आते है ! आपके स्नेह के लिए धन्यवाद् आर के खुराना

NAVEEN KUMAR SHARMA के द्वारा
February 14, 2011

चाचा जी नमस्ते, चाचा जी आपने प्रेम की बहुत ही सुन्दर व्याख्या की है प्रेम का धागा टूटने पर उसमें गाँठ पड़ जाती है गाँठ पड़ने के बाद प्रेम में वो बात नहीं रहती जो पहले थी चाचा जी आपने मेरी पत्नी के बारे बताने के लिए कहा था नवीन कुमार शर्मा बहजोई (मुरादाबाद) उ.प्र. मोबाइल नंबर – 09719390576

    R K KHURANA के द्वारा
    February 14, 2011

    प्रिय नवीन जी, मेरे लेख “प्यार में धोखा नहीं” में प्यार की व्याख्या आपको अच्छी लगी ! धन्यवाद आर के खुराना

Aakash Tiwaari के द्वारा
February 14, 2011

आदरणीय श्री खुराना जी, बहुत ही सही,और सत्य लिखा है आपने…..प्यार क्या है ये केवल एक सच्चा प्रेमी ही समझ सकता है… आकाश तिवारी

    R K KHURANA के द्वारा
    February 14, 2011

    प्रिय आकाश जी, आपके स्नेह के लिए आपका धन्यवाद ! आर के खुराना

Alka Gupta के द्वारा
February 14, 2011

श्री खुराना जी , सादर अभिवादन महान कवियों के इतने अच्छे अच्छे दृष्टान्तों से प्रेम के स्वरूप को दर्शाया है आपने | लेख बहुत ही बढ़िया व सुन्दर है !

    R K KHURANA के द्वारा
    February 14, 2011

    सुश्री अलका जी, मेरा लेख “प्यार में धोखा नहीं” आपको पसंद आया ! आपके स्नेह के लिए आभार आर के खुराना

rameshbajpai के द्वारा
February 14, 2011

ऐसी बानी बोलिए मन का आपा खोए, औरन को सीतल करे आपहु सीतल होय आदरणीय भाई जी इस सहज ,सरल ,व सटीक व्याख्या को अपने आचरण में ढाल कर सरे संसार का प्रेम हासिल किया जा सकता है | बधाई व शुभ कामनाये |

    R K KHURANA के द्वारा
    February 14, 2011

    प्रिय रमेश जी, मेरी रचना पर आपकी प्रतिक्रिया ने मेरा होसला बढाया है और मुझे और आगे लिखने के लिए प्रेरित किया है ! धन्यवाद आर के खुराना

Arvind Pareek के द्वारा
February 14, 2011

आदरणीय श्री खुराना जी, प्रेम की उत्‍कृष्‍ट व्‍याख्‍या के लिए धन्‍यवाद। साथ ही आपने जिस तरह सदवचनों को पिरोया है उससे इस लेख की खूबसूरती में चार चॉंद लग गए हैं। बहुत ही सुंदर। अरविन्‍द पारीक

    R K KHURANA के द्वारा
    February 14, 2011

    प्रिय अरविन्द जी, सदैव की तरह आपका स्नेह मिला ! “प्यार में धोखा नहीं” लेख के लिए आप जैसे लेखक और विचारक की प्रतिक्रिया मेरे लिए मायने रखती है ! आपका आभार आर के खुराना

    Monkey के द्वारा
    May 26, 2011

    Kudos! What a neat way of thniknig about it.

    R K KHURANA के द्वारा
    May 26, 2011

    धन्यवाद ! खुराना

    R K KHURANA के द्वारा
    June 28, 2011

    yes

    R K KHURANA के द्वारा
    September 29, 2012

    यह क्या है ?

वाहिद काशीवासी के द्वारा
February 14, 2011

आदरणीय खुराना जी, महान संतों और विचारकों के उद्धरणों से युक्त आपका यह सशक्त लेख प्रेम का वास्तविक स्वरुप प्रदर्शित करता है| आभार सहित,

    R K KHURANA के द्वारा
    February 14, 2011

    प्रिय शाहिद जी, “प्यार में धोखा नहीं\" लेख के लिए आपका स्नेह मिला ! मन गदगद हो गया ! धन्यवाद आर के खुराना

vinita shukla के द्वारा
February 14, 2011

सही है खुराना जी , प्रेम का धागा टूटने पर उसमें जीवन भर के लिए गाँठ पड़ जाती है. प्रेम की बहुआयामी व्याख्या करते हुए इस सार्थक लेख के लिए आपको बधाई.

    R K KHURANA के द्वारा
    February 14, 2011

    प्रिय विनीत अजी, आपको प्रतिक्रिया के लिए मैं बहुत आभारी हूँ ! आर के खुराना

allrounder के द्वारा
February 14, 2011

आदरणीय खुराना जी नमस्कार एक बार फिर से साढ़े हुए लेख पर हार्दिक बधाई !

    R K KHURANA के द्वारा
    February 14, 2011

    प्रिय सचिन जी, मेरी रचना “प्यार में धोखा नहीं” आपको अच्छी लगी ! कृपया ऐसे ही स्नेह मबये रखे अति धन्यवादी हूँ आर के खुराना

baijnathpandey के द्वारा
February 14, 2011

आदरणीय खुराना जी ……..बहुत हीं सारगर्भित आलेख है …बधाई स्वीकारें http://baijnathpandey.jagranjunction.com/?p=125

    R K KHURANA के द्वारा
    February 14, 2011

    प्रिय बैजनाथ जी, मेरी रचना “प्यार में धोखा नहीं” के लिए आपका स्नेह मिला ! अति धन्यवादी हूँ आर के खुराना

    POONAM के द्वारा
    May 2, 2011

    Khurana Ji, Kya meri koi help kar sakte he, Me apne sarir se thak gai hu, me kitna time ho gaya sahi hi nahi ho pa rahi hu, muge koi bimari bhi nahi he par meri tbiyat thik nahi rahti kabhi to lagta he mar jau, mene prabhu se bhi bahut pray kari par vo nahi sun rahe, please help me. please give me reply in my email ID

    R K KHURANA के द्वारा
    May 2, 2011

    प्रिय पूनम जी, आप अपनी जन्म तिथि, जन्म स्थान, जन्म समय लिख कर अपने समस्या लिख कर मुझे मेल करे. khuranarkk@yahoo.in


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