KADLI KE PAAT कदली के पात

चतुर नरन की बात में, बात बात में बात ! जिमी कदली के पात में पात पात में पात !!

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कोई शिकायत नहीं

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कोई शिकायत नहीं

Koi Shikayat Nahi

राम कृष्ण खुराना

मुझे तुमसे कोई शिकायत नहीं ! क्योंकि मुझे मालूम है कि तुम भी मेरी ही तरह विवश हो ! कदाचित मुझसे भी अधिक ! तुमने मुझसे वादा किया था परंतु निभाया नहीं ! शायद याद ही न रहा होगा ! रहता भी कैसे ? यह समय ही ऐसा होता है ! कई बार पास रहने वाला भी  दूर हो जाता है ! और फिर वह याद ही नहीं आता ! तुम भी मुझे भूल गई होवोगी ! लगभग एक माह पूर्व तुमने मुझसे वादा किया था और मुझसे भी वादा पूरा करने का वचन लिया था ! इस पर भी तुमने अपनी बात नहीं रखी तो मैं क्या करता ? परंतु मुझे तुमसे कोई शिकायत नहीं !

शायद तुम्हें नहीं मालूम कि हर राखी और भैय्या दूज का त्यौहार मुझे तुम्हारी याद दिला देता है ! मेरी आंखों से मोटे-मोटे आंसू गिर पडते हैं ! तुम्हीं ने तो मेरी आंखों के आंसुओं को पोछा था हर वर्ष राखी तथा सिंदूर भेजकर ! तुमने ही तो मुझे ढाढस बंधाया था मेरी सूनी कलाई पर कच्चा धागा बांध कर ! तुमने ही तो मुझे साहस दिया था एक बहन का प्यार देकर ! तुम्हीं तो थी जिसने मुझे भाई कहा था ! बहन का प्यार पाकर मैं अपने सभी दुःख भूल गया था जैसे कुछ हुआ ही नहीं ! अपने दिल के सभी दर्द समेट कर अलग कर दिए थे मैंने ! जैसे कोई अपने घर से बेकार वस्तु निकाल कर बाहर फेंक देता है ! वो तुम्हीं तो थी जिसने मेरे घावों को भर दिया था ! जिसमें पीप के स्थान पर नया मास आ गया था ! वही घाव अब फिर रिस रहे हैं ! उन्हीं घावों पर अब मेरा हाथ बार बार पड जाता है ! तुमने उन घावों को अब फिर कुरेद दिया है ! लेकिन मुझे तुमसे कोई शिकायत नहीं !

जब मेरा एक्सीडेंट हुआ था तो तुम कितना रोई थी ! तुमने कितनी दुआएं मांगी थी ! कितनी मिन्नतें की थी ! भगवान से कितनी बार प्रार्थना की थी कि मेरे भैया को ठीक कर दो ! हर रोज़ तुम अस्पताल में मेरे लिए कुछ न कुछ बना कर लाती थी ! कभी देसी घी का हलवा, कभी खीर, कभी देसी घी के परांठें ! मेरे बेड से जाने का तुम्हारा दिल ही नहीं करता था ! नर्स कहती रहती थी कि अब मिलने का समय समाप्त हो गया है ! पर तुम किसी तरह से नर्स की मिन्नते करके थोडी देर और बैठने के लिए ऊसे मना लेती थी ! तुम्हें भी याद है न जिस दिन मेरा आपरेशन हुआ था उस दिन तुम कालेज ही नहीं गई थी ! उस दिन मेरे लिए विशेषरुप से देसी घी का सीरा बना कर लाई थी ! तुम्हारे पास बैठ कर मुझे कितनी शांति मिलती थी ! कितना साहस मिलता था ! परंतु आज परिस्थियों के कारण तुम मेरे सामने आने से भी कतराती हो ! फिर भी मुझे तुमसे कोई शिकायत नहीं !

इस दुनिया ने इस पवित्र रिश्ते को भी बदनाम करना चाहा था ! भाई-बहन को भी यह समाज नहीं देख सकता ! कितने ताने मारे थे लोगों ने ! कितनी बातें की थी दुनिया ने हम दोनो के बारे में ! जितने मुंह उतनी बातें ! कोई कुछ कहता तो कोई कुछ ! इस पवित्र रिश्ते पर भी दाग लगाने से नहीं चूके थे यह समाज के “रिश्तेदार”! तुम तो एक दिन रोने ही लग गई थी ! तब मैंने तुम्हें सांतवना देते हुए कहा था जब हमारे दिल में कोई खोट नहीं तो तुम क्यों डरती हो ? सांच को आंच नहीं ! धीरे धीरे सबका मुंह बंद हो गया था ! परंतु अब विवशता के कारण तुम मुझे भाई भी नहीं कह सकती ! मुझसे बात भी नहीं कर सकती ! इतना होने पर भी मुझे तुमसे कोई शिकायत नहीं !

मैं जानता हूं कि तुम्हारे दिल में भी टीस उठती होगी ! तुम भी सोचती होगी इस विडम्बना के बारे में ! शायद कभी तुम भी मेरे दुःख को याद करके दुःखी हो जाती होवोगी ! परंतु अब मैं तुम्हें बहन कहकर पुकारने के लिए भी तरस जाता हूं ! तुमसे अपना दुख भी नहीं बांट पाता ! मेरे नज़दीक रहकर भी तुम मुझे राखी बांधने नहीं आ सकती ! मेरे सामने से निकल जाने पर भी तुम मुझे भैय्या कहकर नहीं पुकार सकती ! फिर भी मुझे तुमसे कोई शिकायत नहीं !

हां एक महीना पहले ही तो तुम मुझे अचानक गली में जाते हुए अकेली मिल गई थी ! मैंने तुम्हारी सगाई की तुम्हें बधाई दी थी तथा मिठाई की मांग की थी ! तुमने मुझे घर चलने के लिए कहा था ! जबकि तुम जानती थी कि किसी विशेष अवसर पर ही मैं तुम्हारे घर जा सकता था ! शायद विशेष अवसर पर भी नहीं ! तो भी मैंने मज़ाक में कह दिया था कि मैं तुम्हारी शादी पर आऊंगा अगर तुमने बुलाया तो ! तब तुमने गंभीर मुद्रा में ही उत्तर दिया था कि – “भैय्या, मैं तुम्हें स्पेशल इंवीटेशन दूंगी ! तुम जरुर आना !”  मैंने भी तुमसे वादा किया था और कहा था कि – “हां, अगर तुम मुझे विशेष निमंत्रण भेजोगी तो मैं अवश्य आऊंगा…..अवश्य !”

तुम्हारी शादी का दिन भी आ गया ! अभी तक मैं तुम्हारे विशेष निमंत्रण का इंतज़ार कर रहा हूं  परंतु तुम्हारा वो विशेष निमंत्रण नहीं आया ! विशेष क्या साधाराण भी नहीं आया ! ….और शादी का दिन भी बीत गया ! तुमने ही अपना वादा नहीं निभाया ! तुमने बुलाया ही नहीं अपनी शादी पर तो मैं कैसे आता ? आखिर तुम्हारे घर इतने दिनों के बाद आने का कोई न कोई बहाना तो चाहिये था ! शायद तुम्हारे सामने कोई विवशता रही होगी ! तुम मुझे बुलाना चाह कर भी बुला न पाई होवोगी ! फिर भी मेरे दिल में तुम्हारे प्रति वही श्रद्दा है, वही प्यार है ! तुम जहां भी रहो सुखी रहो ! मुझे तुमसे कोई शिकायत नहीं !

राम कृष्ण खुराना

R K KHURANA

9988950584

A-426, MODEL TOWN EXTN.

LUDHIANA (PUNJAB) INDIA



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85 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

    R K KHURANA के द्वारा
    January 6, 2013

    can’t understand

    R K KHURANA के द्वारा
    January 6, 2013

    What is this

Charleigh के द्वारा
May 26, 2011

Good to see a tleant at work. I can’t match that.

    R K KHURANA के द्वारा
    May 26, 2011

    आपको मेरी रचना अच्छी लगी इसके लिए मैं आपका आभारी हूँ धन्यवाद सहित राम कृष्ण खुराना

K M Mishra के द्वारा
May 5, 2011

khurana ji नमस्कार, बहुत दिनों के बाद इधर आना हुआ, आया और एक बेहद सुन्दर रचना पढ्ने को मिली. आभारी हूँ. 

    R K KHURANA के द्वारा
    May 6, 2011

    प्रिय मिश्र जी, आप वयस्त व्यक्ति है ! छोटे मोटे लोगो की तरफ ध्यान कम दे पाते है ! फिर भी अपने ध्यान दिया इसके लिए धन्यवाद् ! आपकी पुरस्तक कब तक आ रही है ! और हमारे पोते का क्या हाल है ! राम कृष्ण खुराना

    Essence के द्वारा
    May 26, 2011

    More posts of this quality. Not the usual c***, psleae

    R K KHURANA के द्वारा
    January 6, 2013

    Thanks

JLSINGH के द्वारा
March 4, 2011

मार्मिक और हृदयस्पर्शी रचना. सादर प्रणाम.

    R K KHURANA के द्वारा
    March 5, 2011

    प्रिय सिंह साहेब, मेरी रचना “कोइ शिकायत नहीं” पर आपका स्नेह मिला ! धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

amishra के द्वारा
February 15, 2011

खुराना जी, हम जिस समाज मे रहते वहॉ लोगो को हर अच्छी चीज मे गलत चीज पहले नजर आती है. लेकिन  यदि हम गलत नही है, हमे डर किस बात का एक न एक दिन तो सच्चाई सामने आ ही जायेगी.  

    R K KHURANA के द्वारा
    February 15, 2011

    प्रिय मिश्रा जी, आपने ठीक कहा है ! तभी किसी ने कहा है “अच्छी सूरत भी क्या बुरी शह है, जिसने भी डाली बुरी नज़र डाली:! मेरी रचना “कोइ शिकायत नहीं” पर आपकी प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद आर के खुराना

Arvind Pareek के द्वारा
February 14, 2011

आदरणीय श्री खुराना जी, समाज की सोच को अंगुठा दिखाती आपकी रचना काबिले-तारीफ हैं। प्रत्‍येक रिश्‍ते में कालिख ढूँढनें की आदत समाज के ‘रिश्‍तेदारों’ को बदलनी ही होगी। अन्‍यथा ऐसे रिश्‍ते ही समाप्‍त हो जाएंगें। अरविन्‍द पारीक

    R K KHURANA के द्वारा
    February 14, 2011

    प्रिय अरविन्द जी, यह आजकल की नियत बन गयी है की लोग बात का बतंगड़ बना देते है ! यही बात बताती है मेरी कहानी ! आपको मेरी कहानी अच्छी लगी ! धन्यवाद आर के खुराना

rajkamal के द्वारा
February 13, 2011

aadrniy khurana chacha ji …saadr prnaam ! yh lekh padh ke mn bahut hi dukhi ho gya …. is smaaj ke thekedaaro pr laant daalne ka mn krta hai …. ishwr se yhi prarthna hai ki halat khushgwaar bne aur sandeh ke sabhi baadl chhant jaaye …. aapka fir se wohi purana pavitr rishta apni puri garima ke saath sthapit ho jaaye …. dhanyvaad

    R K KHURANA के द्वारा
    February 14, 2011

    प्रिय राज जी, आपकी प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद आर के खुराना

AMIT KR GUPTA,HAJIPUR के द्वारा
February 13, 2011

नमस्कार सर ,कैसे हैं? प्रेम पर एक अच्छी रचना बधाई .व्यस्तता के कारण आपसे सम्पर्क नहीं कर पाया लेकिन जल्द ही करूंगा .

    R K KHURANA के द्वारा
    February 13, 2011

    प्रिय अमित जी, मेरी रचना “कोइ शिकायत नहीं” पर आपका स्नेह मिला ! धनयवाद आर के खुराना

s.p.singh के द्वारा
February 13, 2011

आदरणीय खुराना जी प्रणाम, एक और अच्छी रचना के लिए मुझे कोई शिकायत नहीं— बधाई स्वीकार करे. धन्यवाद

    R K KHURANA के द्वारा
    February 13, 2011

    प्रिय सिंह साहेब, आप जैसे अच्छे लेखक और विचारक से होसला मिला मेरे लिए बड़ी बात है ! मेरी रचना “कोइ शिकायत नहीं” पर आपका स्नेह मिला ! आपका आभारी हूँ ! आर के खुराना

HIMANSHU BHATT के द्वारा
February 11, 2011

नमस्कार खुराना जी….. सुंदर रचना…. आभार…..

    R K KHURANA के द्वारा
    February 11, 2011

    प्रिय हिमांशु जी, आपकी प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद् आर के खुराना

    Lyndee के द्वारा
    May 26, 2011

    Kudos! What a neat way of thikning about it.

    R K KHURANA के द्वारा
    February 2, 2014

    Virus

allrounder के द्वारा
February 11, 2011

आदरणीय खुराना साहब एक बार फिर से बेहतरीन लेख पर बधाई !

    R K KHURANA के द्वारा
    February 11, 2011

    प्रिय सचिन जी, आप जैसे लेखक से सराहना पाना मेरा अच्छा लगता है ! मेरी रचना “कोइ शिकायत नहीं” पर आपका स्नेह मिला ! आपका आभारी हूँ ! आर के खुराना

    Kacy के द्वारा
    May 26, 2011

    This forum neeedd shaking up and you’ve just done that. Great post!

    R K KHURANA के द्वारा
    May 26, 2011

    Dear Kacy, Thanks for your comments

Nikhil के द्वारा
February 11, 2011

बहुत सुन्दर रचना. आभार, निखिल झा

    R K KHURNA के द्वारा
    February 11, 2011

    प्रिय निखिल जी, अपने समय निकल कर में रचना पर पर्तिक्रिय दी शुक्रिया आर के खुराना

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
February 10, 2011

बहुत सुंदर रचना……….

    R K KHURANA के द्वारा
    February 10, 2011

    प्रिय पियूष जी, आपकी पतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद खुराना

alkargupta1 के द्वारा
February 10, 2011

श्री खुराना जी , सादर अभिवादन गंदी मानसिकता वाले लोग ही किसी भी पवित्र रिश्ते पर उंगली उठाने से बाज नहीं आते हैं…..! बहुत ही बढ़िया तरह से रचना की प्रस्तुति है !

    R K KHURANA के द्वारा
    February 10, 2011

    सुश्री अलका जी, मेरी रचना “कोइ शिकायत नहीं” पर आपका स्नेह मिला ! धनयवाद खुराना

    Eve के द्वारा
    May 26, 2011

    Fell out of bed feeling down. This has birtghened my day!

    R K KHURANA के द्वारा
    May 26, 2011

    थैंक्स

sumityadav के द्वारा
February 10, 2011

नमस्कार खुराना जी। भाई-बहन के प्यार का बहुत ही भावपूर्ण वर्णन। आज समाज की दृष्टि में  इतनी विकृति आ गई है कि एक अनजान लड़के और लड़की में लोग भाई-बहन का रिश्ता मान ही नहीं सकते। वेलेंटाइन कांटेस्ट के लिए शुभकामनाएं।

    R K KHURANA के द्वारा
    February 10, 2011

    प्रिय सुमित जी, आपकी शुभकामनायों के लिए शुक्रिया ! कृपया ऐसे ही स्नेह बनाये रखे खुराना

nishamittal के द्वारा
February 10, 2011

विवश बहिन भाई की संवेदनाओं को प्रस्तुत करते विचार.मर्मस्पर्शी.

    R K KHURANA के द्वारा
    February 10, 2011

    सुश्री निशा जी, आपकी प्रतिक्रिया के लिए आपका आभारी हूँ खुराना

Deepak Sahu के द्वारा
February 10, 2011

आदरणीय खुराना जी! भाई बहन के प्यार का बहुत ही सुंदर भावपूर्ण वर्णन किया है आपने! सच है की आज लोगों की आखे खराब हो गयी है उनका देखने का द्रष्टिकोण नकारात्मक हो गया है! हर रिसते को बुरी नज़र से ही देखते है! किसी का सुख बर्दाश्त नहीं कर सकते है ये! http://deepakkumarsahu.jagranjunction.com/2011/02/09/valentine-contest/

    R K KHURANA के द्वारा
    February 10, 2011

    प्रिय दीपक जी, ठीक कहा है ! इसी लिए आज गुंडागर्दी बढ़ रही है ! लोग सब को शक की नज़र से देखते है प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद खुराना

Ramesh bajpai के द्वारा
February 10, 2011

इस पवित्र रिश्ते पर भी दाग लगाने से नहीं चूके थे यह समाज के “रिश्तेदार”! तुम तो एक दिन रोने ही लग गई थी ! तब मैंने तुम्हें सांतवना देते हुए कहा था जब हमारे दिल में कोई खोट नहीं तो तुम क्यों डरती हो ? सांच को आंच नहीं ! धीरे धीरे सबका मुंह बंद हो गया था ! परंतु अब विवशता के कारण तुम मुझे भाई भी नहीं कह सकती ! मुझसे बात भी नहीं कर सकती ! इतना होने पर भी मुझे तुमसे कोई शिकायत नहीं ! आदरणीय भाई जी इस रिश्ते से ज्यादा पवित्र व अलौकिक और क्या हो सकता है बधाई

    R K KHURANA के द्वारा
    February 10, 2011

    प्रिय रमेश जी, आजकल लोग इस भाए बहन के पवित्र रिश्ते को लोग शक की नज़र से देख कर इसे कुलषित कर देते है ! इसी बात का दुःख है ! आपकी पतिक्रिया के लिए धन्यवाद आर के खुराना

chaatak के द्वारा
February 10, 2011

स्न्ही श्री खुराना जी, प्रेम न बाड़ी उपजे के बाद इस बेजोड़ प्रेम को प्रस्तुत करने का अंदाज़ हमें काफी अच्छा लगा| भाई बहन का प्रेम शायद सबसे ज्यादा बेजोड़ है इसीलिए तो प्रेम के देव कृष्ण को उनकी बहन सुभद्रा के साथ पूजा जाता है उथले विचारों वाले लोग इसे क्या समझेंगे| अच्छी पोस्ट पर बधाई!

    R K KHURANA के द्वारा
    February 10, 2011

    प्रिय चातक जी, भाई बहन के प्यार को भी जब लोग बदनाम करते है तो बहुत दुःख होता है है ! पर लोगो की सोच का क्या करे ! आपके स्नेह के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया ! आर के खुराना

roshni के द्वारा
February 10, 2011

आदरनिये खुराना जी भाई बहिन का प्यार दुनिया में बहुत ही पवित्र और सुंदर है मगर कुछ लोग अपनी बदनीयती के चलते इसे भी शक की निगाह से देखते है …… भावनाओ को बहुत खूबसूरती से बयाँ किया आपने

    R K KHURANA के द्वारा
    February 10, 2011

    प्रिय सौशनी जी, मेरी रचना “कोइ शिकायत नहीं” पर आपका स्नेह मिला ! लोगो की नज़रे हर चीज़ को अपने नज़र से देखने के आदि हो गयी है और पवित्र रिश्तों को भी बदनाम कर देती है ! प्रतिक्रिया के लिए आभार आर के खुराना

NIKHIL PANDEY के द्वारा
February 10, 2011

सर प्रणाम .. बहुत संवेदनशील रचना है.. इस स्थिति से कई बार हम लोग गुजरे है जब समय और समाज … के कुछ गैरजिम्मेदार लोग पवित्र रिश्तो को भी बुरी निगाह से देखते है और हमें भी देखने को मजबूर करते है.. नारी के लिए समाज आज भी बहुत कठोर है …. जब लोगो ने सीता माता को नहीं बक्शा तो आम स्त्री पुरुष …. की क्या बिसात है… बढ़िया लेख

    R K KHURANA के द्वारा
    February 10, 2011

    प्रिय निखिल जी, बिल्कुल ठीक कहा है आपने ! जब सीता माता को नहीं बक्शा तो हम आप क्या चीज़ है ! लोग इस रिश्ते को भी शक की नज़र से देखते है ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद आर के खुराना

    Nelia के द्वारा
    May 26, 2011

    Thank God! Soemnoe with brains speaks!

    R K KHURANA के द्वारा
    May 26, 2011

    आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद खुराना

आर.एन. शाही के द्वारा
February 10, 2011

आदरणीय खुराना साहब, नमस्कार । आपकी अन्य रचनाओं की भांति ही भाई-बहन के मुंहबोले रिश्ते की सामाजिक मजबूरियां दर्शाती यह भावभीनी रचना भी संग्रहणीय है । बधाई ।

    R K KHURANA के द्वारा
    February 10, 2011

    प्रिय शाही जी, आप जैसे बुद्धिजिवी और लेखक से सराहना पाना मेरा सौभाग्य है ! मेरी रचना “कोइ शिकायत नहीं” पर आपका स्नेह मिला ! हर्ष हुआ ! आपका आभारी हूँ ! आर के खुराना

February 10, 2011

आदरणीय खुराना जी, भाई-बहन के इस मार्मिक प्रेम का वर्णन कर आपने पूरा वातावरण भावपूर्ण कर दिया है.

    R K KHURANA के द्वारा
    February 10, 2011

    प्रिय राजेन्द्र जी, आपको मेरी रचना “कोइ शिकायत नहीं” ने भावुक बना दिया ! मेरा मकसद पूरा हो गया ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद आर के खुराना

meesa.v.singh के द्वारा
February 10, 2011

ek bhai ke dil me bahan ke liye pyar hone ke babjud bhi kuch aisa hota hai jo unke beech aata hai . mai bhagwan se prarthna karungi ki aapki bahan aap ko samman ke sath bulaye. achchi rachna kahu ya anubhuti………..?thank’s

    R K KHURANA के द्वारा
    February 10, 2011

    प्रिय सिंह साहेब, जब बचपन लाँघ कर जवानी में कदम रख लेते है तो लोग बहन भाई के रिश्तों को भी शाक की निगाहों से देखते है ! यही बात कही है मैंने अपनी कहानी “कोइ शिकायत नहीं” में ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद आर के खुराना

rajni thakur के द्वारा
February 10, 2011

valentine कांटेस्ट के लिए एक बेमिसाल रचना..क्योंकि इसमें प्यार के एक पवित्र रूप को आपने रेखांकित किया है. बधाई.

    R K KHURANA के द्वारा
    February 10, 2011

    प्रिय रजनी जी, प्यार केवल पति पत्नी का ही नहीं होता ! प्यार तो व्यापक शब्द है किसे से भी हो सकता है ! फिर भाई-बहन का प्यार ! एक पवित्र रिश्ता है ! आर के खुराना

vinita shukla के द्वारा
February 10, 2011

माननीय खुराना जी, भाई बहन के पवित्र रिश्ते को बदनाम करने वाले लोगों की मानसिकता दर्शाने वाला आपका ये लेख, मर्म को छू लेता है. सार्थक रचना के लिए बधाई.

    R K KHURANA के द्वारा
    February 10, 2011

    सुश्री विनीता जी, मेरी रचना “कोइ शिकायत नहीं” के लिए आपका स्नेह मिला ! बहुत आभारी हूँ ! कृपया ऐसे ही स्नेह बनाये रखें ! आर के खुराना

Aakash Tiwaari के द्वारा
February 10, 2011

आदरणीय खुराना जी, आपका पत्र मिला ख़ुशी भी हुई और गम भी ….कुल मिलाकर एक अच्छा अनुभव रहा… बधाई कबूल करे…. शुभकामनाओं सहित आकाश तिवारी

    R K KHURANA के द्वारा
    February 10, 2011

    प्रिय आकाश जी, आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद आर के खुराना

Dharmesh Tiwari के द्वारा
February 10, 2011

आदरणीय खुराना साहब सादर प्रणाम,प्यार के एक रूप पर प्रकाश डालता लेख,धन्यवाद!

    R K KHURANA के द्वारा
    February 10, 2011

    प्रिय धर्मेश जी, आपकी प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत शुक्रिया ! आपको मेरी कहानी “कोइ शिकायत नहीं” पसंद आई ! मन प्रसन्न हो गया ! धन्यवाद् सहित आर के खुराना

NAVEEN KUMAR SHARMA के द्वारा
February 10, 2011

चाचा जी नमस्ते, चाचा जी बहुत ही अच्छा लिखा है आपने बहुत ही सुन्दर भाव प्रस्तुत किया है नवीन कुमार शर्मा बहजोई (मुरादाबाद) उ.प्र. मोबाइल नंबर – 09719390576

    R K KHURANA के द्वारा
    February 10, 2011

    प्रिय नवीन जी, मरे कहानी “कोइ शिकायत नहीं” आपको अच्छी लगी ! आपका धन्यवाद आर के खुराना

R K KHURANA के द्वारा
February 10, 2011

प्रिय भगवान बाबु जी, मैं आप लोगो के स्नेह का कायल हूँ ! आपका स्नेह इसी प्रकार मिलता रहे यही कामना है ! आपको मेरी रचना “कोइ शिकायत नहीं” पसंद आई ! मैं धन्य हो गया ! आपका धन्यवाद् आर के खुराना

Bhagwan Babu के द्वारा
February 10, 2011

खुराना जी नमस्कार एक बार फिर आपने मंच पर एक अच्छा सा भाव प्रस्तुत किया धन्यवाद http://bhagwanbabu.jagranjunction.com/2011/02/10/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%ae-%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%a4%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%a7%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae-valentine-contest/


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