KADLI KE PAAT कदली के पात

चतुर नरन की बात में, बात बात में बात ! जिमी कदली के पात में पात पात में पात !!

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मुझको प्यार तुमसे है

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मुझको प्यार तुमसे है

राम कृष्ण खुराना

प्यार की परिभाषा बहुत कठिन है ! क्योंकि प्यार आदि काल से चला आ रहा है और सभी ने इसकी अलग अलग परिभाषा दी है ! सबने इसे अपने अपने हिसाब से समझा और समझाया   है ! सभी अपने अपने अनुभव के अनुसार प्यार की व्याख्या करते हैं ! आधे अक्षर से शुरु होने वाले इस शब्द में सारी दुनिया समाई हुई है ! प्यार शाश्वत है ! जब से यह दुनिया बनी है प्यार चलता आ रहा है ! जब तक यह दुनिया रहेगी प्यार कायम रहेगा ! इसका कोई अंत नहीं है ! हां प्यार के इज़हार करने का ढंग बदलता रहा है ! प्यार को जताने के तरीकों में फर्क होता रहा है ! समय और परिस्थियों के अनुसार “आई लव यू” कहने के तरीके बदलते रहे हैं ! लेकिन प्यार आज भी कायम है ! फिर भी प्यार को इस समाज ने कभी मान्यता नहीं दी ! शायद इसीलिए लोग प्यार चोरी चोरी ही करते हैं ! प्यार तो सभी करते हैं परंतु वही प्यार जब कोई दूसरा करता है तो उसका विरोध होता है ! चारों तरफ थू-थू होने लगती है ! लोग इसके अंजाम से डरने लगते हैं ! तभी किसी ने कहा है -

मद भरे जाम से डर लगता है,

प्यार के नाम से डर लगता है !

जिस का आगाज़ चोरी-चोरी हो,

उसके अंजाम से डर लगता है !!

दुनिया में शायद ही कोई शख्स ऐसा होगा जो प्यार के एहसास से अछूता होगा ! प्यार, चाहे वह किसी भी रूप में क्यों न हो, एक ऐसा सुखद एहसास देता है  जिसे शब्दों में बयान कर पाना बहुत कठिन है ! जब प्यार होता है तो बस प्यार ही होता है ! प्रेम में आकंठ डूबे हुए लोगों के चेहरे पर खुदाई नूर आ जाता है !  फिर वो प्रेमी “जब प्यार किया तो डरना क्या” की भाषा बोलने लग जाते हैं ! उनके लिए प्यार खुदा बन जाता है ! प्यार इबादत हो जाती है ! “इश्क में जीना इश्क में मरना और हमें अब करना क्या” ही उनकी दिनचर्या बन जाती है ! फिर रूठने मनाने का सिलसिला शुरु होता है ! रुठने का भी एक अलग ही मज़ा होता है ! प्रियतम के मनाने से, उसके मनाने के ढंग से पता चलता है कि वो अपने साथी को कितना प्यार करता है ! इसीलिए बार बार रुठने को मन करता है ! आप भी देखिए -

सोई यादों को जगाये कोई,

दिल में फिर आग लगाये कोई !

जाने क्यों आज यह जी करता है,

रूठ जांऊ तो मनाये कोई !!

लेकिन इसका दूसरा रूप भी है ! रूठना इतना आसान नहीं है ! रूठने के लिए भी कोई अधिकार होना चाहिए ! रोने के लिए कोई कंधा होना चाहिए ! बिना अधिकार के आप रूठ जायेंगे तो आपको मनाने कोई नहीं आयगा ! यदि आपको किसी के आने की आस भी हो तो रूठने के लिए दिल भी तो होना चाहिए ! इसीलिए किसी ने कहा है -

हम रूठें तो किसके भरोसे रूठें ?

कौन है जो आयेगा हमे मनाने के लिए ?
हो सकता है तरस आ भी जाये आपको,

पर दिल कहाँ से लायें आपसे रूठ जाने के लिये ?

दुनिया की एक सम्पर्क भाषा है उसे “एसपरेंटों” कहते हैं ! परंतु उस भाषा को विश्व में लगभग 100 व्यक्ति ही जानते हैं ! परंतु प्यार की एक ही भाषा है जिसे दुनिया का प्रत्येक व्यक्ति जानता है ! इस भाषा को सिखाने की जरुरत नहीं पडती ! इस भाषा को पढाने के लिए कोई स्कूल कोई पाठशाला नहीं है ! यह स्वाभाविक है ! सबके दिलों में बसा हुआ है ! प्यार में जबरदस्ती नहीं चल सकती ! किसी को प्यार करने के लिए विवश नहीं किया जा सकता ! प्यार हो जाता है ! प्यार अपने आप होता है ! इसीलिए प्रेमी प्यार में सब कुछ न्यौछावर करने को तत्पर रहता है ! प्रेम में सब कुछ खो देना ही सब कुछ पाना है ! प्यार में खो जाने के बाद फिर सब कुछ उल्टा होने लगता है ! दिल बैचैन रहने लगता है ! और लोग कहने लग जाते हैं कि -

जब से दिल से दिल लगा है दिल नहीं लगता !

दिल लगने के बाद प्यार के ढंग निराले हो जाते हैं ! कहा भी है –

मकतबे इश्क का ढंग निराला देखा,

उसको छुट्टी न मिली जिसने सबक याद किया !

इसी बात को एक दूसरे कवि ने कुछ इस प्रकार कहा है –

खुशी जिसने खोजी वो धन  ले के लौटा,
हंसी जिसने खोजी चमन ले के लौटा !
मगर प्यार को खोजने चला जो वो,
न तन ले के लौटा न मन ले के लौटा ।!

मुंशी प्रेम चंद ने कहा है कि “जिस मनुष्य के हृदय से प्रेम निकल गया वह अस्थि-चर्म का एक ढेर रह जाता है !” सच्चा प्रेम नाप तौल नहीं करता !  यह सिर्फ देता जाता है ! जब किसी से प्यार हो जाता है तो वो ही सबसे अच्छा लगने लग जाता है ! कोई भी उसकी बराबरी नहीं कर सकता ! प्रेमी को अपने प्रिय में ही सारा संसार नज़र आता है  उसे और कोई इतना प्यारा नहीं लगता ! और वो कहने लगता है -

जिन्दगी की बहार तुमसे है,

मेरे दिल का करार तुमसे है !
यूं तो दुनिया में लाखों है हंसी,

मगर क्या करूं मुझको प्यार तुमसे है !

प्रेम अन्धा होता है ! इसी लिए वह स्पर्श से ही आगे बढता है ! कहते हैं कि नारी का शरीर ब्याज होता है ! प्रेम की पूंजी तभी सार्थक है कि ब्याज मिलता रहे ! लेकिन प्रेम भी खतरों का छत्ता होता है ! उसमें से शहद तो भाग्यवानों को ही मिलता है ! अधिकांश का तो बर्रों से ही पाला पडता है ! जिनको प्यार नहीं मिल पाता या जिनके सजना दूर चले जाते हैं उनके लिए समय काटना भी मुश्किल हो जाता है ! प्रेमी के दूर जाने पर प्रेमिका का सजने-संवरने का मन भी नहीं करता ! उसका हार-शिंगार सब धरा का धरा रह जाता है ! पंजाबी के गायक गुरदास मान ने पंजाबी में इस व्यथा को कुछ इस प्रकार कहा है –

टंग्गे रहदें किल्लियाँ  दे नाल परांदे,

जिन्ना दे राती यार बिछुडे !

अर्थात जिनके साजन बिछुड जाते हैं, और जो रात को अकेले ही सोने के लिए मजबूर होते हैं उनके परांदे, उनकी चोटियां खूंटी के साथ ही टंगी रह जाती हैं ! उनके मेकअप का सामान उनके डिब्बों में ही बंद हो कर रह जाता है ! उनके कपडे अलमारियों में ही पडे रह जाते हैं ! क्योंकि उनके सजने संवरने की इच्छा ही मर जाती है ! सजना के लिए सजने वालियां अब किसके लिए सजें ?  इस बिछुडन को एक प्रेमिका इस प्रकार व्यक्त करती है -

अब हम बिछुडे तो शायद ख्वाबों मे मिलें,

जैसे सूखे हुए फूल किताबों में मिलें !

यह ठीक है कि सूखे हुए फूलों की कोमलता समाप्त हो जाती है ! उनकी अपनी खुशबू खत्म हो जाती है ! लेकिन उन यादों की, एक साथ बिताए पलों की महक हमेशा हमेशा बनी रहती है ! और प्रेमी सारा जीवन उन्हीं यादों के सहारे बिता देते हैं ! लेकिन आजकल बेवफाई के किस्से आम हो गए हैं ! जीवन भर साथ निभाने का वादा करने वाले समय की धार देखकर बदल जाते हैं ! लोग पहले से ज्यादा समझदार हो गए हैं ! उनका कहना हैं -

मैंने प्यार किया बड़े होश के साथ !
मैंने प्यार किया बड़े जोश के साथ !
पर हम अब प्यार करेंगे बड़ी सोच के साथ !
क्योंकि कल उसे देखा मैंने किसी और के साथ !

बात परिभाषा से शुरु हुई थी ! मेरा मानना है कि प्यार को किसी एक परिभाषा में बांधना कठिन है ! हरि कथा कि तरह प्यार की परिभाषायें भी अनन्त हैं ! प्यार तो बहता हुआ एक सागर है ! जिसके बहने में ही प्यार की महत्ता है, सुंदरता है, प्राण हैं, जीवन है !

राम कृष्ण खुराना

9988950584

khuranarkk@yahoo.in

www.Khuranarkk.jagranjunction.com



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101 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

    R K KHURANA के द्वारा
    November 18, 2012

    Who

    R K KHURANA के द्वारा
    July 29, 2012

    Thanks

    R K KHURANA के द्वारा
    July 29, 2012

    what

Dayanara के द्वारा
May 26, 2011

Ppl like you get all the brains. I just get to say tahnks for he answer.

    R K KHURANA के द्वारा
    May 28, 2011

    Thank you

meesa.v. singh के द्वारा
February 9, 2011

khuran ji aap ke lekh ke liye bas yahi kahna hai ki lafjo ki tarah mujhe kitabo mi milna tu ban ke mahak mujhe gulabo me milna jab bhi mujhe aap ki yaad aaye to ban ke aansu mujhe meri aankho me milna. .is se jyada pyar ke baare me kuch kaha hi nahi ja sakta hai bahut achcha lekh keep it up

    R K KHURANA के द्वारा
    February 9, 2011

    बहुत सुंदर शेयर है आपका ! मेरी रचना मुझको प्यार तुमसे है के लिए आपका यह शेयर बिलकुल फिट बैठता है ! धन्यवाद खुराना

a mishra के द्वारा
February 8, 2011

खुराना जी , बेहतरीन लेख है.आपने प्यार की विस्तार से व्याख्या की है बहुत ही सुन्दर . कांटेस्ट के लिए शुभकामनाये. धन्यवाद

    R K KHURANA के द्वारा
    February 8, 2011

    आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभारी हूँ ! शुभकामनायों के लिए धन्यवाद ! खुराना

bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
February 8, 2011

आदरणीय खुराना जी, आपकी फोन कॉल उज्‍जैन में प्राप्‍त की थी। कल ही दिल्‍ली पहूँचा हूँ। सर्वप्रथम आपके इस ब्‍लॉग को पढ़ रहा हूँ। ……… प्रेम या प्‍यार के अलग अलग रूपों से परिचय करवानें का शुक्रिया। लगता है आप Valentine King बन कर ही रहेंगें। बहुत सुंदर प्रस्‍तुति। अरविन्‍द पारीक

    R K KHURANA के द्वारा
    February 8, 2011

    प्रिय अरविन्द जी, आप का जो स्नेह मुझे मिला है उसका कोइ मोल नहीं ही ! मैं आप का बहु आभारी हूँ ! प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् खुराना

Shailesh Kumar Pandey के द्वारा
February 7, 2011

सादर अभिवादन ! सदैव की भाँती आपकी ये प्रस्तुति भी बहुत अच्छी लगी |

    R K KHURANA के द्वारा
    February 7, 2011

    प्रिय शैलेश जी, आपके प्रोत्साहन के लिए आपका धन्यवाद खुराना

NIKHIL PANDEY के द्वारा
February 7, 2011

अभिवादन स्वीकार करे……. बहुत ही तार्किक और व्यवस्थित ढंग से आपने व्याख्यायित किया है ..आपने इस गूढ़ विषय को … जिसकी व्याख्या में पूरी दुनिया के प्रेमी जन और मार्गदर्शक लगे है .. बहुत ही अर्थपूर्ण लेख …. शुभकामनाये

    R K KHURANA के द्वारा
    February 7, 2011

    प्रिय निखिल जी, आपकी प्रतिक्रिया रूपी स्नेह के लिए आभार ! खुराना

AMIT KR GUPTA,HAJIPUR के द्वारा
February 7, 2011

नमस्कार सर ,देर से आपके लेख पढ़ने के लिए माफ़ी चाहता हूँ .दरअसल बात यह हैं मेरी व्यस्तता इधर कुछ बढ़ गई हैं इसके कारण मैं अपना ईमेल चेक नहीं कर पाया .आपने बड़े तार्किक ढंग से प्रेम की परिभाषा दी हैं .वास्तव प्रेम की व्याख्या करना बहुत ही कठिन हैं. प्रेम किसी को भी किसी उम्र में हो सकता हैं. इस छोटे से शब्द पर एक फिल्म भी बनी थी “ढाई अक्षर प्रेम के “प्रेम अलौकिक (इस लोक के परे ) हैं .लेकिन इसका जन्म तो इसी लोक में हुआ हैं .

    R K KHURANA के द्वारा
    February 7, 2011

    प्रिय अमित जी, मेरी रचना पर आपका स्नेह मिला ! आपको लेख “मुझको प्यार तुमसे है” बहुत अच्छा लगा जानकर हर्ष हुआ ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद खुराना

rita singh \'sarjana\' के द्वारा
February 6, 2011

आदरणीय अंकल जी , सादर अभिवादन l प्रेम को बारीकियों से व्यक्त करता अति सुन्दर लेख l बधाई स्वीकार करे तथा कांटेस्ट के लिए शुभकामनाये ………………..

    R K KHURANA के द्वारा
    February 6, 2011

    प्रिय रीता जी, मेरी रचना ” मुझको प्यार तुमसे है” आपको पसंद आई ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् खुराना

rajeev dubey के द्वारा
February 5, 2011

“…प्रेम में आकंठ डूबे हुए लोगों के चेहरे पर खुदाई नूर आ जाता है !…” अति सुन्दर. शुभकामनाएं खुराना जी .

    R K KHURANA के द्वारा
    February 5, 2011

    प्रिय राजीव जी, प्रेम चीज़ ही ऐसे है जिसको हो जाता है उसके जैसा धनवान कोइ नहीं होता ! खुराना

abodhbaalak के द्वारा
February 5, 2011

Aadarneey Khurana ji valentine day contest पर लिखे हर पोस्ट से अलग, ek अलग hi …. aapke पोस्ट padh kar हम लोग ही तो लिखने का प्रयास karte hain aur ab kya kahoon कांटेस्ट के लिए शुभकामनाएं http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    R K KHURANA के द्वारा
    February 5, 2011

    प्रिय अबोध जी, आपकी प्रतिक्रिया ने मेरा होसला बढाया है ! मैं तहे दिल से आपका आभार प्रकट करता हूँ ! धन्यवाद् खुराना

Nikhil के द्वारा
February 5, 2011

अंकल जी, सच कहा है जिसने कहा है, दिल तो बच्चा है जी. आपकी इस रचना ने इसे फिर से दोहरा दिया. आभार, निखिल झा

    R K KHURANA के द्वारा
    February 5, 2011

    प्रिय निखिल जी, आपके स्नेह के लिए मैं आपका आभारी हूँ. ! कृपया इसे तरह स्नेह बनाये रखे ! धन्यवाद खुराना

div81 के द्वारा
February 5, 2011

आदरणीय खुराना जी, प्यार ……………ये शब्द ही ऐसा है जिसने सारी कायनात खुद मे समेटी हुई है फिर भी हमेशा अधूरा ही है……………बहुत सुन्दर प्रस्तुति। प्रतियोगिता के लिए शुभकामनाये

    R K KHURANA के द्वारा
    February 5, 2011

    प्रिय दिव्या जी, मेरी रचना ” मुझको प्यार तुमसे है” आपको पसंद आई ! यह जो ढाई आखर प्रेम के है इसे में दिल के जज्बात छीटे रहते है ! इसी से दुनिया के काम चलते है ! प्यार ही इबाबत है ! आपको प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद खुराना

    Stitches के द्वारा
    May 26, 2011

    You’ve got it in one. Coldun’t have put it better.

    R K KHURANA के द्वारा
    May 26, 2011

    I am grateful for your comments

    R K KHURANA के द्वारा
    November 18, 2012

    Virus

    R K KHURANA के द्वारा
    November 18, 2012

    don’t understand

briju के द्वारा
February 5, 2011

आदरणीय खुराना जी , ….सिर्फ अहसास है ये रूह से महसूस करो ,प्यार को प्यार ही रहने दो कोई नाम ना दो ……..प्रेम -व्याख्या करते हुए अद्भुत शब्द संयोजन …बधाई ….ब्रजमोहन शरद .

    R K KHURANA के द्वारा
    February 5, 2011

    प्रिय ब्रजमोहन जी, ठीक कहा आपने प्यार तो एक अहसाह है ! इसको नाम देने की जरुरत ही नहीं है ! प्यार तो बस प्यार ही है ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् खुराना

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
February 5, 2011

आदरणीय खुराना जी…सदर प्रणाम ……… इस सुन्दर रचना के लिए बधाई……….. और इस कंटेस्ट में सफलता के लिए हार्दिक शुभकामनाएं…

    R K KHURANA के द्वारा
    February 5, 2011

    प्रिय पियूष जी, रचना पसंद करने के लिए आपका शुक्रिया ! आपकी शुभकामनायो के लिए मैं आपको धन्यवादी हूँ ! आप लोगो के स्नेह ने मुझे इस मंच पर बहुत कुछ दिया है जो भुलाया नहीं जा सकता ! एक बार फिर आपका धन्यवाद ! खुराना

priyasingh के द्वारा
February 4, 2011

शायरी के साथ आपका ये लेख पढ़कर आनंद आ गया …………. बहुत ही अच्छी प्रस्तुति…………

    R K KHURANA के द्वारा
    February 5, 2011

    प्रिय प्रिया जी, आपको मेरा लेख “मुझको प्यार तुमसे है” पढ़कर आनंद आया तो मुझे भी बहुत अच्छा लगा ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद खुराना

chaatak के द्वारा
February 4, 2011

क्या बात है चाचा जी, तुसी ग्रेट हो! प्रेम की सारी पींगे उड़ाते हुए झूले को रस्सी फट्टे समेत बेवफाई की ख्नाई में लाके दफ़न किया, अति सुन्दर!

    R K KHURANA के द्वारा
    February 4, 2011

    प्रिय चातक जी, आप की प्रतिक्रिया में भी लेख का मज़ा आ जाता है ! नाविक के तीर के तरह गंभीर घाव करते है धन्यवाद् खुराना

Mala Srivastava के द्वारा
February 4, 2011

“”जाने क्यों आज यह जी करता है, रूठ जांऊ तो मनाये कोई…… “”, “”जिस का आगाज़ चोरी-चोरी हो, उसके अंजाम से डर लगता है………”", “”हम रूठें तो किसके भरोसे रूठें ? कौन है जो आयेगा हमे मनाने के लिए ?……………..”"” बहुत प्यारी शायरिया लगी हमे सर ! प्यार की कोई हमसे परिभाषा पूछे तो हम यही कहते है की .. जब कोई हमे बहुत ज्यादा याद आता है न हम खुद से पूछे के उस में क्या ऐसी बात है और इसका जवाब नही मिले तो शायद यही प्यार होता है ! जो किसे कारण से नही होता है ! कई में से एक हमारी भी fav शायरी है- “खुद्दार तबियत पर हम इल्ज़ाम नही लेंगे , मांगे से जो हाथ आये वो हम जाम नही लेंगे , इजहारे तमन्ना भी तौहीने तमन्ना है , वो खुद ही समझ जाये हम नाम नही लेंगे ..”

    R K KHURANA के द्वारा
    February 4, 2011

    सुश्री माला जी, आपको मेरी रचना ” मुझको प्यार तुमसे है” में शायरी बहुत अच्छी लगी ! जानकर अच्छा लगा ! आपके शेयर के जवाब में कहना चाहता हूँ – वो आँखों से पिलाये तो मैं क्या करूं, वो हाथों से पिलाये तो मैं क्या करूं ! मुझे तो पीने की बिलकुल ही आदत नहीं, जाम खुद चल के आये तो मैं क्या करूं !! आपकी प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया ! खुराना

l.r.gandhi के द्वारा
February 4, 2011

सुभानअल्लाह…लगता है आप को भी किसी से प्यार हो गया है…. प्यार जीवन की एक साश्वत सच्चाई है. .. अनादी काल से विश्व धरा-दिनकर के अन्नंत प्रेम पर जी रहा है. धरा सदियों से एक पाँव पर नृत्य निमग्न आपने प्रियतम की परिकर्मा में तल्लीन है -और दिनकर भी अपनी किरणों की पुष्प वर्षा से उसे अखंड सौभाग्य वती भव की आशीष से आनंदित किये जा रहे हैं…… काश पूरा विश्व आपकी इस प्यारी सी प्रेम परिभाषा में डूब जाए…. ………….उतिष्ठकौन्तेय

    R K KHURANA के द्वारा
    February 4, 2011

    प्रिय गाँधी जी, आपकी प्रतिक्रिया पाकर मन प्यार के रंग में रंग गया ! इतनी गहराई में जाकर अपने जो लिखा है उसका कोइ जवाब नहीं ! धरा और दिनकर के एक दुसरे के साथ परिक्रमा लगाने को आपने जो प्रिय और प्रियतम बना डाला वो अकल्पनीय है ! बहुत सुंदर प्रतिक्रिया ! बहुत ही सुंदर प्रोत्साहन मैं आभारी हूँ आपका ! खुराना

rajkamal के द्वारा
February 4, 2011

आदरणीय खुराना जी जब आपने नए साल को मेरी अपने अंदाज़ में की गई (जो की सभी को की गई थी )टिप्पणी को डिलीट कर दिया था तो मैंने यह संबध खत्म मान लिया था …. लेकिन आज आपका मेल मिला तो आप जैसे बजुर्ग का आशुर्वाद लेने चले आया ( आखरी बार ,अगर इस बार भी डिलीट ना हुई तो )(वैसे आपने उसको तीसरे दिन डिलीट किया था ) आपको भी प्रतियोगिता के लिए शुभकामनाये ….

    R K KHURANA के द्वारा
    February 4, 2011

    प्रिय राज जी, आप तो जानते ही हैं की पंजाबी में एक कहावत है की “पुत्र कुपुत्र जो जांदे ने, मापे कदी वी कुमापे नईं होंदे” मेरा आशीर्वाद हमेशा आपके साथ है ! शुभकामनायों सहित ! खुराना

    Geralyn के द्वारा
    May 26, 2011

    Now we know who the sesnible one is here. Great post!

    R K KHURANA के द्वारा
    May 26, 2011

    आपको मेरी रचना “मुझको प्यार तुमसे है” अच्छी लगी ! धन्यवाद ! खुराना

    R K KHURANA के द्वारा
    November 18, 2012

    Write in english or hindi

s.p.singh के द्वारा
February 4, 2011

आदरणीय खुराना जी प्यार एक शास्वत सच है जो किया नहीं जाता हो जाता है और अगर प्यार में वासना हो तो फिर तो यही कहियेगा —-पर हम अब प्यार करेंगे बड़ी सोच के साथ ! क्योंकि कल उसे देखा मैंने किसी और के साथ —— बधाई कंटेस्ट में भाग लेने के लिए

    R K KHURANA के द्वारा
    February 4, 2011

    प्रिय श्री सिंह साहेब, मैंने तो पहले ही कहा है की प्रेम अन्धा होता है ! इसी लिए वह स्पर्श से ही आगे बढता है ! कई लोग प्यार करके शादी करते है कई शादी करके प्यार करते है ! हमारे आपके ज़माने में अधिकतर लोग शादी करके ही प्यार करते थे ! फिर शादी के बाद हम क्या करते है ………..? आपकी प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धयांवाद ! खुराना

    Eel के द्वारा
    May 25, 2011

    TYVM you’ve solevd all my problems

    R K KHURANA के द्वारा
    May 25, 2011

    Thanks a lot

    R K KHURANA के द्वारा
    November 18, 2012

    What do you want to say

rachna varma के द्वारा
February 4, 2011

आदरणीय खुराना जी , सादर नमस्कार प्रेम के हर पहलू को आपने जिस ढंग से प्रस्तुत किया उसे पढ़ कर अच्छा लगा सच बात है प्यार को शब्दों में बांधना बेहद कठिन है उसके बारे में बता पाना उसी प्रकार है जैसे गूंगे व्यक्ति से गुड का स्वाद पूछना एक अच्छे लेख के लिए आपको बधाई !!

    R K KHURANA के द्वारा
    February 4, 2011

    सुश्री रचना जी, आपको मेरा लेख अच्छा लगा ! मेरे लिखने का मकसद भी यही होता है की सबका ज्ञान वर्धन और मनोरंजन हो ! आपकी पतिकिर्य के लिए धन्यवाद् ! खुराना

Alka Gupta के द्वारा
February 4, 2011

आदरणीय खुरानाजी , सादर अभिवादन निश्चित ही इस प्यार की कोई परिभाषा नहीं है यह तो हृदय में बहने वाली एक ऐसी नदी है जिसमें डुबकी लगाने पर कोमल व मधुरतम अहसास होता है….. ! बहुत ही बढ़िया आलेख !

    R K KHURANA के द्वारा
    February 4, 2011

    सुश्री अलका जी, मेरे लेख “मुझको प्यार तुमसे है” के लिए आपकी प्रतिक्रिया मिली ! आपके स्नेह के लिए आपका धन्यवाद ! खुराना

Bhagwan Babu के द्वारा
February 4, 2011

खुराना जी को मेरा सादर प्रणाम आपने प्रेम के लगभग सभी पहलुओ पर प्रकाश डाला है इस लेख को आपने काफी रोचक तरीके से पेश किया है कमाल का लिखते है आप आपको ढेरो शुभकामनाएँ http://bhagwanbabu.jagranjunction.com/2011/02/03/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%ae-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%86%e0%a4%9c/#comment-1008

    R K KHURANA के द्वारा
    February 4, 2011

    प्रिय भगवान बाबू जी, बहुत दिनों बाद इस मंच पर आपके दर्शन हुए ! खुशआमदीद ! आप जैसे बुद्धिजीवी व अच्छे विचारक और लेखक की प्रतिक्रिया मेरे लिए मायने रखती है ! ” मुझको प्यार तुमसे है” पर आपके स्नेह के लिए आभार ! खुराना

roshni के द्वारा
February 4, 2011

आदरनिये खुराना जी नमस्कार मकतबे इश्क का ढंग निराला देखा, उसको छुट्टी न मिली जिसने सबक याद किया ! बहुत बढ़िया लेख लिखा अपने और शेर सब कमाल के है

    R K KHURANA के द्वारा
    February 4, 2011

    प्रिय रौशनी जी, आप एक अच्छी कवित्री है ! आपसे प्रोत्साहन पाकर बहुत अच्छा लगा ! मेरी रचना ” मुझको प्यार तुमसे है” पर आपका स्नेह मिला ! बहुत बहुत धन्यवाद् ! खुराना

    Honney के द्वारा
    May 25, 2011

    Now I feel stupid. That’s claered it up for me

    R K KHURANA के द्वारा
    May 25, 2011

    प्रिय हनी जी, आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद राम कृष्ण खुराना

Dharmesh Tiwari के द्वारा
February 4, 2011

आदरणीय खुराना साहब सादर प्रणाम ,इस सुन्दर और स्वच्छ शब्द पर आपके विचार पढ़ कर काफी अच्छा लगा,धन्यवाद!

    R K KHURANA के द्वारा
    February 4, 2011

    प्रिय धर्मेश जी, मेरी रचना ” मुझको प्यार तुमसे है” पर आपकी प्यार भरी प्रतिक्रिया मिली ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् ! खुराना

nishamittal के द्वारा
February 4, 2011

आदरणीय खुराना जी, अभिवादन, प्रेम के सुंदर भाव को उद्धरणों के आभूषण से अलंकृत कर अपने अनुभव व विचारों से अवगत कराया है आपने.

    R K KHURANA के द्वारा
    February 4, 2011

    सुश्री निशा जी, मेरी रचनायों पर आपका स्नेह मिलता रहता है ! आपको मेरी यह रचना “मुझको प्यार तुमसे है” भी पसंद आई ! मेरा लिखना सार्थक हो गया ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् ! खुराना

वाहिद काशीवासी के द्वारा
February 4, 2011

आदरणीय खुराना जी, सुन्दर शब्दों और विचारों के साथ ही कवियों के उद्धरण ने आपके आलेख को चार चाँद लगा दिए हैं|पढ़ कर बहुत अच्छा लगा|

    R K KHURANA के द्वारा
    February 4, 2011

    प्रिय वाहिद जी, ““मुझको प्यार तुमसे है” रचना के लिए आपकी प्रतिक्रिया मिली. ! आप जैसे सुधि सज्जनों के प्रोत्साहन से ही लिखने को जी चाहता है ! आपकी प्रतिक्रिया किए लिए बहुत बहुत शुक्रिया ! खुराना

Aakash Tiwaari के द्वारा
February 4, 2011

आदरणीय श्री खुराना जी, आपका प्रेम पर लिखा ये लेख मुझे बहुत बहुत पसंद आया…..मेरा(आकाश तिवारी का ) मानना है की कोई भी प्रेम की परिभाषा नहीं दे सकता ..क्योंकि जिस चीज की सीमा निर्धारित हो जाए वो चीज अपना महत्व खो देती है और जब तक किसी चीज का ओर-छोर न मिले दुनिया उसी के पीछे परेशान रहती है…प्रेम को कभी भी शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता..यहाँ कुछ लोगों ने प्रेम पर बंदिशों को गलत ठहराया है……मेरा खुद का मानना है की प्रेम पर बंदिशे होनी ही चाहिए अगर प्यार सच्चा है तो वो प्यार दुनिया की सारी दीवारे तोड़ने की ताकत रखता है….मगर जो प्यार प्यार नहीं बल्कि आकर्षण होता है वो अपने ही घर की दीवारों को नहीं फांद पाता..और अगर फांद भी लिया तो भविष्य अंधकारमय हो जाता है……ये बंदिशे ही सच्चे प्यार और आकर्षण का भेद खोलती है…. अपने दो शब्द कहूँगा… ******************************************************** “तन्हा कितना रोता हूँ इसका मुझे अंदाजा नहीं. आज भी तेरा दिल तोड़ने का मेरा इरादा नहीं”.. ********************************************************* http://aakashtiwaary.jagranjunction.com आकाश तिवारी

    R K KHURANA के द्वारा
    February 4, 2011

    प्रिय आकाश जी, आपको मेरी आपका स्नेह पाकर मन गदगद हो गया ! यह प्यार ऐसी चीज़ है जिसके बारे में लोग कहते बहुत कुछ है परन्तु उनकी करनी और कथनी में फर्क होता है ! लेकिन सच्चा प्यार कोइ कोइ ही करता है ! देखिये प्रेमिका क्या कहती है ! तुम मुझे न चाहो यह हक़ है तुम्हे मेरी बात और है मैंने तो मुहब्बत की है ! सच्चे प्यार का कोइ सानी नहीं ! खुराना

    Giggles के द्वारा
    May 26, 2011

    Kudos! What a neat way of tihkning about it.

    R K KHURANA के द्वारा
    May 26, 2011

    Thank you for your valuable comments

    R K KHURANA के द्वारा
    November 18, 2012

    Can’t understand

deepak pandey के द्वारा
February 4, 2011

चाचा जी , नमस्ते. आपकी पिछली सभी रचनाओ की तरह यह भी बहुत बेहतरीन लगी. गद्य और पद्य के मिलन ने इस लेख को बहुत ही रोचक बना दिया .

    R K KHURANA के द्वारा
    February 4, 2011

    प्रिय दीपक जी, मेरी रचनाएँ आपको पसंद आती है जानकर दिल खुश हो गया ! मेरे लिए इससे बड़ी ख़ुशी और क्या हो सकती है आप लोग मेरी रचनायों को पसंद करते है ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए तहे दिल से धन्यवाद ! खुराना

NAVEEN KUMAR SHARMA के द्वारा
February 4, 2011

चाचा जी नमस्ते, चाचा जी आपने बहुत ही अच्छा लिखा है आपने सही कहा है कि प्यार को किसी परिभाषा में बांधना कठिन है और किसी को प्यार के लिए विवश नहीं किया जा सकता बल्कि प्यार तो अपने आप ही हो जाता है चाचा जी प्रेम एक होता है लेकिन प्रेम के मायने बदल जाते हैं एक प्रेमी को अपनी प्रेमिका से शारीरिक प्रेम होता है, एक भक्त को अपने भगवान से भक्ति प्रेम होता है, भाई से भाई का प्रेम भातृत्व प्रेम होता है और एक माँ को अपने बच्चों से वात्सल्यी प्रेम होता है आजकल का प्रेम प्रेम नहीं रहा बल्कि वो अपना कार्य सिद्ध करने का एक मात्र तरीका रह गया है तभी तो आज एक भाई दुसरे भाई की संपत्ति को पाने के लिए क़त्ल कर देता है नवीन कुमार शर्मा बहजोई ( मुरादाबाद ) उ. प्र . मोबाइल नंबर – 09719390576

    R K KHURANA के द्वारा
    February 4, 2011

    प्रिय नवीन जी, मेरे लेख “मुझको प्यार तुमसे है” के लिए आपकी प्रतिक्रिया मिली ! आपके स्नेह के लिए आभारी हूँ ! खुराना

allrounder के द्वारा
February 4, 2011

आदरणीय खुराना जी, नमस्कार आज आपके लेख से फिर से पता लगा गया अनुभव क्या चीज होती है, प्रेम के रूप को बहुत ही सशक्तता से पेश करने पर बधाई, और प्रतियोगिता के लिए शुभकामनायें !

    R K KHURANA के द्वारा
    February 4, 2011

    प्रिय सचिन जी, आप लोगो का प्यार मुझे इसी तरह से मिला रहा तो मेरी लेखनी भी आपको इसी प्रकार आशीर्वाद देती रहेगी ! तभी तो मैं कहता हूँ की “मुझको प्यार तुमसे है” खुराना

HIMANSHU BHATT के द्वारा
February 4, 2011

आदरणीय खुराना जी नमस्कार….. आपने उचित ही कहा है….. प्रेम की परिभाषा असंभव है….. प्रेमचंद ने कहा है….प्रेम चन्द्रमा के समान है, यदि वह बढेगा नहीं तो घटना शुरू हो जाएगा…… बहुत बढ़िया लेख….. आपके आशीर्वाद का आकांक्षी…. हिमांशु भट्ट http://www.himanshudsp.jagranjunction.com

    R K KHURANA के द्वारा
    February 4, 2011

    प्रिय हिमांशु जी, मेरी रचना ” मुझको प्यार तुमसे है” पर आपका स्नेह मिला ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् ! खुराना

    GULSHAN के द्वारा
    February 5, 2011

    AAPKI RATCHNA MUJHKO TUMSA PYAAR HAI MUJHKO BAHUT PASAND AAYE APNA IS BATCHA KO YAAD RAKHNA K LIYA THANKS

    R K KHURANA के द्वारा
    February 5, 2011

    प्रिय गुलशन जी, आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद ! खुराना


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