KADLI KE PAAT कदली के पात

चतुर नरन की बात में, बात बात में बात ! जिमी कदली के पात में पात पात में पात !!

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चलो कहीं ओर चलें

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चलो कहीं ओर चलें

CHALO KAHIN AUR CHALEN

राम कृष्ण खुराना

एक और गणतंत्र दिवस मनाने का दिन आ गया ! वो गणतंत्र जो हमें देश के लाखों वीरों की कुर्बानी देकर आज़ादी हासिल होने के बाद मिला ! आज़ादी के बाद देश को सुचारु रुप से चलाने के लिए हमने एक संविधान बनाया ! जिससे देश में व्यवस्था स्थापित हो और देश का शासन, जन-जीवन और सारा प्रबंध चल सके ! हमारे कार्यों को एक दिशा मिल सके ! सभी कार्य एक मर्यादा में एक मानदण्ड के अनुसार संचालित हों ! किसी प्रकार की अव्यवस्था, किसी प्रकार का कोई असंतुलन अथवा कोई दुराचार न रहे ! अच्छे और ऊंचे आदर्शों का पालन हो जिससे देश व देश की जनता तरक्की करे ! देश आगे बढे, दुनिया में हमारे देश का डंका बजे ! हमेशा से ही राम राज्य का सपना और उच्च आदर्श ही हमारा लक्ष्य रहा है ! देश में सभी एक दूसरे से प्यार करें ! सुख-शान्ति हो ! सभी को रोज़गार मिले, रहने के लिए घर हो, भर पेट भोजन मिले ! क्योंकि बिना भोजन के तो भजन भी सम्भव नहीं होता ! नीरज की यह पंक्तिया भी कुछ इसी प्रकार की बात कहती हैं !

तन की हवस मन को गुनाहगार बना देती है,

बाग के बाग को बीमार बना देती है !

भूखे पेट को देशभक्ति सिखाने वालों,

भूख इंसान को गद्दार बना देती है !

यथा राजा तथा प्रजा ! अर्थात जैसा राजा होगा वैसी ही प्रजा होगी ! यदि शासक ईमानदार और अच्छा होगा तो जनता भी ईमानदार और अच्छी होगी ! राजा के संस्कार प्रजा में स्वाभाविक रुप से आ जाते हैं ! राजा के धर्मनिष्ठ होने पर प्रजा भी चरित्रवान हो जाती है ! परंतु आज का माहौल बदल गया है ! आज हमने जिन नेताओं पर भरोसा करके सत्ता पर बिठाया था उनकी नज़रे बदल गई लगती हैं ! जैसे कि :

न आंसू अलग हैं न आहें अलग हैं !

किसी धर्म की न राहें अलग हैं !

मगर सोचता हूं कुछ सिरफिरों की,

वतन के लिए क्यों निगाहें अलग हैं !!

सत्ता की छत पर तो कुत्ता भी बडा लगता है ! परंतु वह तो छत की ऊंचाई है, कुत्ते की नहीं ! हमें सत्ता पर खडे कुत्ते की सेवा नहीं करनी चाहिए ! दुनिया में कुछ न बिकने वाले और कुछ न खरीदने वाले लोग भी होने चाहिए ! शासन पर बने रहने या आने का मोह और बिना परिश्रम के जल्द से जल्द धन बटोर लेने की भावना देश को बरबाद कर रही है ! आज देश मे चतुरता की राजनीति का बोलबाला है ! चरित्र की राजनीति समाप्त हो चुकी है ! आज समय और परिस्थियों को राजनीति में अस्त्र की तरह इस्तेमाल किया जाता है ! लोग अपने आप को खुदा समझने लग गए हैं ! इंसान नदारद हो गया है ! किसी ने सही कहा है :

तेरे बन्दों को क्या हो गया है !

जिसे देखो खुदा हो गया है !

मुल्क में सब मयस्सर है लेकिन,

सिर्फ इंसा हवा हो गया है !

भारत में सिर्फ दो जातियां हैं ! एक जाति में गरीब और निम्न वर्गीय लोग हैं ! इन लोगों के लिए दो वक्त की रोटी जुटाना भी बहुत कठिन है ! दूसरी जाति के लोग वो है  जिसमें वे अमीर, नेता, अधिकारी लोग आते हैं, जो जनता की गाढ़ी कमाई को हडप कर अपने पेट की गोलाई को बढा रहे हैं ! जिनके खाते  स्विस बैंकों में हैं और करोड़ों-अरबों के वारे-न्यारे हो रहे हैं । आम जनता की मेहनत  की गाढ़ी कमाई से सिर्फ नेता लोग ही अपना घर  नहीं भर रहे हैं  बल्कि बडे अधिकारी भी इस खेल में पूरी तरह से शामिल हैं ! गरीब और गरीब होता जा रहा है ! अमीरों के खज़ाने की कोई सीमा नहीं है !  मंहगाई ने खाद्य-पदार्थों और आम जरूरत की वस्तुओं को दुर्लभ बना दिया है ! एकाएक उनकी कीमत आसमान छूने लगी है ! लोगो के लिए अपना पेट पालना भी मुश्किल हो गया है !

यहां तन ढकने की खातिर खुद तन ही बिकने लगता है !

कोई पेट पालने निकला तो कोई पेट में पलने लगता है !!

विदेशी कहते हैं कि हमने हिन्दुस्तान देखा है ! परंतु हमें गांधी का हिन्दुस्तान कहीं भी नज़र नहीं आया ! स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात स्वंतत्रता को बनाये रखने के लिए भी बलिदान की आवश्यकता होती है ! अच्छी व्यवस्था के लिए कोई छोटा रास्ता नहीं होता ! कोई शार्ट-कट नहीं होता ! हमें उसी प्रकार ईमानदार बने रह कर संघर्ष करना पडता है ! कार खरीदने के बाद कार की सवारी करने के लिए उसे चुस्त व दुरस्त रखना पडता है ! उसके तेल-पानी का पूरा ख्याल रखना पडता है ! घर बनाने के बाद उसकी साफ-सफाई और साज़-सज़्ज़ा बनाए रखने के लिए मेहनत जरूरी होती है ! परंतु हमारी सोच को पता नहीं क्या हो गया है ! देश में कानून व्यवस्था की हालत बद से बदत्तर होती जा रही है ! लगता है कि हम कानून बनाते ही तोडने के लिए हैं ! तभी सतीश कुमार कहते हैं कि :

जाने क्यों हमें नियम रास नहीं आते,

अनुशासन, संयम हमारे पास नहीं आते !

इसी बात को सुश्री आशा खत्री अपने शब्दों में कहती हैं :

नियमों की अवहेलना आदत हुई हमारी,

जहां थी मनाही, चप्पल वहीं उतारी !

आज देश में भ्रष्टाचार, मंह्गाई, बेईमानी, बलात्कार की घटनायें बढती जा रही हैं ! हमारा देश इन बुराईयों का पर्याय बनता जा रहा है ! जब नेताओं से इस बारे में पूछा जाता है कि यह बुराईयां कब समाप्त होंगीं तो वे ज्योतिषी न होने का रोना रोने लगते हैं ! जनता इन नेताओं से ज्योतिषी होने की उम्मीद भी नहीं करती ! क्या देश की मंहगाई को रोकने का काम ज्योतिषियों का है ? देश के मतदाताओं ने नेताओं को इसलिए देश की सत्ता के शिखर पर बैठाया है  ताकि वे आम आदमी की मुश्किलों को समझें और उन्हें सुलझांयें ! हमारे प्रधान मंत्री जी विश्व विख्यात अर्थशास्त्री हैं ! जनता उनसे उम्मीद करती है कि वे अर्थशास्त्र का गणित लगाकर महंगाई को काबू में करें ! जनता की आशाओं पर खरे उतरें ! जनता की तकलीफों को समझें ! आज जनता त्राहि-त्राहि कर रही है ! उसका दुख-दर्द सुनने के लिए, उसकी तकलीफ को जानने के लिए, उसकी मुश्किल हल करने के लिए किसी के पास समय ही नहीं है ! नेताओं ने आज़ादी को अपना घर भरने का लाईसेंस मान लिया है ! उनको कोई रोकने वाला नहीं है और जनता की कोई सुनने वाला नहीं है ! अब तो इस दर्द को इन शब्दों में कहने का मन करता है :

कहां तो तय था चिराग हर घर के लिए,

कहां चिराग मयस्सर नहीं शहर के लिए !

यहां दरखतों के साये में धूप लगती है,

चलो कहीं ओर चलें उम्र भर के लिए !!

khuranarkk@yahoo.in

राम कृष्ण खुराना

9988950584

R K KHURANA

A-426, MODEL TOWN EXTN.

LUDHIANA (PUNJAB) INDIA



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64 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

    R K KHURANA के द्वारा
    October 1, 2012

    समज मे नही आया

    R K KHURANA के द्वारा
    October 1, 2012

    Virus ??

    R K KHURANA के द्वारा
    July 12, 2012

    what

Janais के द्वारा
May 26, 2011

It was dark when I woke. This is a ray of sunhsnie.

    R K KHURANA के द्वारा
    May 26, 2011

    Dear Janais, You find a ray of sunshine. Great Thanks Khurana

HIMANSHU BHATT के द्वारा
January 30, 2011

आदरणीय खुराना जी, निश्चय ही आज़ादी मिलने के बाद उसे सहेजने के लिए भी संघर्ष तो करना ही होगा…. और घर के भीतर छुपे दुश्मनों या यूँ कहें की स्वयं से संघर्ष आज़ादी की लड़ाई से ज्यादा कठिन होगा….

    R K KHURANA के द्वारा
    January 30, 2011

    प्रिय हिमांशु जी, कर खरीदने से ज्यादा जरुरी होता है कर को मेंटेन करना ! आज़ादी को बनाये रखने के लिए भी हमें सजग रहना होगा अन्यथा हालात पहले जैसे बन जायेंगे ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् खुराना

abodhbaalak के द्वारा
January 29, 2011

तेरे बन्दों को क्या हो गया है ! जिसे देखो खुदा हो गया है ! मुल्क में सब मयस्सर है लेकिन, सिर्फ इंसा हवा हो गया है ! aadarneey Khurana ji kabhi kabhi man me prashn uthta hai ki kya ho raha hai ye, ham kidhar ja rahe hain?kya badlaav sambhav hai, kya ………? http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    R K KHURANA के द्वारा
    January 29, 2011

    प्रिय अबोध जी, परेशान होने वाली बात ही है ! देश क्या होगा समझ में नहीं आता ! लोग अपना घर भरने की होड़ में लगे हैं ! आपकी पतिक्रिया के लिए धन्यवाद खुराना

NAVEEN KUMAR SHARMA के द्वारा
January 28, 2011

चाचा जी नमस्ते , चाचा जी आपने मेरी पत्नी के बारे में बताने के लिए कहा था मैं अपनी पत्नी के बारे में डिटेल आपको भेज चुका हूँ . मेरी पत्नी के जीवन में सरकारी नौकरी का योग है या नहीं मेरी पत्नी के बारे में जानकारी निम्न है NAME – KANCHAN LATA PRESENT ADDRESS – BAHJOI (MORADABAD) U.P. DATE OF BIRTH – 06 AUG 1982 PLACE OF BIRTH – VILLAGE –NAGLA JAIT, TEHSIL – BISAULI (BADAUN) U.P. TIME OF BIRTH – रात्रि २ बजकर १५ मिनट NAKSHTRA – धनिष्ठा द्वितीय चरण LAGNA – मिथुन माह – भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि MARITATAL STATUS- MARRIED नवीन कुमार शर्मा बहजोई (मुरादाबाद ) उ . प्र . मोबाइल नम्बर – 09719390576

    R K KHURANA के द्वारा
    January 29, 2011

    प्रिय नवीन जी, ठीक है मैं आपको बताऊंगा खुराना

Amit Dehati के द्वारा
January 28, 2011

बहुत सुन्दर लेख ………..खुराना जी खुराना साहब आपने जो अपनी भावनाए व्यक्त किये है वाकई काबिले तारीफ …. कम्माल की लेखनी है आपकी | आप यूँही लिखते रहे हमारी शुभ कामनाये आपके साथ है .||||||||||| शुक्रिया ! कृपया मुझे visit करके अपना विचार व्यक्त करें ! http://amitdehati.jagranjunction.com

    R K KHURANA के द्वारा
    January 29, 2011

    प्रिय अमित जी, आपको मेरा लेख पसंद आया ! प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद ! खुराना

roshni के द्वारा
January 28, 2011

खुराना जी , आज के हालात देख कर तो यही लगता है की कही और नयी दुनिया तलाश की जाये ……..इन सब मुसीबतों को यही छोड़ कर नया जहाँ बनना चहिये और राजनीती की नो एंट्री कर देनी चाहिए बहुत बढ़िया लेख आभार सहित

    R K KHURANA के द्वारा
    January 29, 2011

    प्रिय रौशनी जी, आपको मेरा लेख “चलो कहीं और चलें” पसंद आया ! धन्यवाद ! आप लोगो के होसला अफजाई से लिखने की इच्छा जाग जाती है ! आप सबका स्नेह ऐसे ही मिलता रहे यही तमन्ना है ! खुराना

    Kalie के द्वारा
    May 26, 2011

    It was dark when I woke. This is a ray of snshuine.

    R K KHURANA के द्वारा
    May 26, 2011

    Thanks

    R K KHURANA के द्वारा
    May 3, 2013

    what ????

Dharmesh Tiwari के द्वारा
January 28, 2011

आदरनीय खुराना साहब,देश की वर्तमान दशा पर बखूबी प्रहार किया है आपके इस लेख ने,धन्यवाद!

    R K KHURANA के द्वारा
    January 29, 2011

    प्रिय धर्मेश जी, मेरी रचना “चलो कहीं और चलें” के लिए आपकी प्रतिक्रिया मिली ! धन्यवाद ! खुराना

Alka Gupta के द्वारा
January 28, 2011

श्री खुरानाजी , नमस्कार देश की वर्तमान दुर्व्यवस्था का बहुत ही सही वर्णन किया है सत्ता पर आसीन भ्रष्टाचारी , बेईमान ही आज सबसे ऊंचा हो गया है उसमें हैवानियत आ गयी है इंसानियत मर चुकी है और जो ईमानदार लोग हैं उन्हें अपना फ़र्ज़ निभाने के लिए ज़िंदगी की भारी कीमत देनी पड़ती है तब कहीं जाकर हमारे शासन सत्ताधिकारियों के कान खड़े होते हैं और हरकत में आते हैं….अब तो हम सभी को सतर्क रहना होगा एक साथ कई आवाज़े विरोध मे आयें तब ही शायद स्थिति मे कुछ सुधार होने की गुंजाइश हो और फिर क्यों न इन सभी का पत्ता साफ़ किया जाए……. ! आइये सभी एक साथ ही चलें इनका पत्ता साफ़ करें….! इतने अच्छे लेख के लिए धन्यवाद !

    R K KHURANA के द्वारा
    January 29, 2011

    सुश्री अलका जी, मेरी रचना “चलो कहीं और चलें” के बारे में आपका स्नेह मिला ! लिखना सफल हो गया ! देश में पूरी “सफाई” के जरुरत है ! इसके लिए पहल हमें ही करनी होगी धन्यवाद् खुराना

    Kindsey के द्वारा
    May 26, 2011

    Wow, that’s a really clever way of tihnknig about it!

January 28, 2011

खुराना जी बहुत अच्छा लेख है. मेरे मन की बाकी बाते अन्य लोग पहले ही प्रतिक्रिया में लिख चुके हैं. धन्यवाद.

    R K KHURANA के द्वारा
    January 29, 2011

    प्रिय राजेंदर जी, आपको मेरी रचना ““चलो कहीं और चलें” पसंद आई ! धनयवाद खुराना

Nish aik bevkoof के द्वारा
January 28, 2011

खुराना सर नमस्कार, आपका लेख पढ़ा, बहुत अच्छा लिखा आपने, इसे पढ़कर मन के कोने में छुपी देशप्रेम की क्रांति आज फिर उद्विग्न हो उठी..बहुत बहुत शुक्रिया इतने अच्छे लेख के लिए !!

    R K KHURANA के द्वारा
    January 29, 2011

    प्रिय मित्र, आपका सही नाम तो मैं नहीं जान सका ! फिर भी आपको मेरी रचना “चलो कहीं और चलें” अच्छी लगी और आपमें देशप्रेम की भावना जाग्रत हुई ! इससे अच्छा इनाम मेरी रचना को और क्या मिल सकता है ! मैं आपका दिल से धन्यवाद करता हूँ खुराना

    Henrietta के द्वारा
    May 25, 2011

    Ppl like you get all the brains. I just get to say thnaks for he answer.

Shailesh Kumar Pandey के द्वारा
January 27, 2011

आदरणीय खुराना जी…. सादर अभिवादन ! आपको वर्तमान की विडंबनाओं को प्रकाशित करते प्रशंसनीय लेख पर बहुत बहुत बधाई ………… ——————————————————————————————————- एक सुधार की क्रान्ति आवश्यक है, इसके बीज लोगों के मन में पालने तो लगे हैं, बस इनके अंकुरित होने की देर है, सुधार अवश्य होगा |

    R K KHURANA के द्वारा
    January 29, 2011

    प्रिय शैलेश जी, “चलो कहीं और चलें” लेख पर आपका स्नेह मिला ! धन्यवाद ! सुधर की जरुरत है और फौरी तौर पर है ! इसके बिना देश का भला नहीं होने वाला ! खुराना

    Mattie के द्वारा
    May 26, 2011

    Now we know who the senslbie one is here. Great post!

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
January 27, 2011

आदरणीय खुराना जी….. नमस्कार ……. इस सुंदर लेख के लिए बधाई……… इस मंच पर कई ऐसे लेख पढे जो देश की दुर्दशा पर ध्यान आकृष्ट करते हैं…… कुछ लेख स्वयं मैंने ही लिखे इस विषय पर……… फिर कई ओर लोगों से देश की बिगड़ती दशा पर बातें सुनी………..यहाँ अपने शहर भी 26 जनवरी के दिन मैंने अपने आस पास लगभग सभी को उनकी बातों मे उन्हे देश के लिए कुछ करने को तत्पर पाया….. फिर सोचा की अगर सभी इस दशा से इतने परेशान है तो आखिर दोषी कौन है…? फिर एक नजर दौड़ाई आस पास तो पता चला की लोग आदि हो गए है …… इसी तरह अपने को दिलासा देने के………. गंगा स्नान कर के पाप दूर करने की आदत पड़ गयी है। यहाँ लोग आदि है …. 26 जनवरी ओर 15 अगस्त को बड़ी बड़ी बातें करने के पर जब असल मे कुछ करना पड़ता है तो सब गायब……… ये देश बदल सकता है……… बस लोगों को अपना चरित्र बदलना होगा……. ओर हम लोगों को यूं ही प्रयास करने होगे ताकी ये लोग बदल सकें…… सबको ये मानना होगा की शुरवात किसी एक को अकेले ही करनी पड़ती है……… अंत तक एक हुजूम खुद ही खड़ा हो जाता है…… ओर न भी हो तो क्या………. मुरदों की बस्ती मे एक जीवन बनके मृत्यु को प्राप्त करना अधिक मूल्यवान है…….. आपकी इस सार्थक लेख का कुछ असर हो………. इसी कामना के साथ……..

    R K KHURANA के द्वारा
    January 28, 2011

    प्रिय पियूष जी, मेरी रचना “चलो कहीं और चलें” के लिए आपकी प्रतिक्रिया मिली ! आपने ठीक कहा है की सोच बदलने की जरुरत है ! केवल बातें करने से या लोगो की वाहवाही लूटने के मकसद से कुछ बड़ी बड़ी बातें कह देने से कुछ नहीं होने वाला ! परन्तु आज देश में आदर्श बरकरार रखना भी मुश्किल हो गया है ! इमानदारी को मिटटी का तेल दाल कर जला दिया जाता है ! कल लुधियाना में भी एक ई टी ओ को छपा मारने पर पीट दिया गया और उसके ड्राईवर को भी घायल कर दिया ! ऐसी हालत में क्या हो सकता है सोचने की जरुरत है खुराना

sdvajpayee के द्वारा
January 27, 2011

श्री खुराना जी,  सामाजिक विसंगतियों और ब्‍यवस्‍थागत कमियों आपने बहुत अच्‍छी अभिब्‍यक्ति दी है, लेकिन मैं श्री एसपी सिं‍ह जी के मंतव्‍य से सहमत हूं कि पलायन का भाव ठीक नहीं है। हम क्‍यों न यह सोचें और आह्वान करें कि आओ , इस ख्‍मन को और सुदर बनाया जाए। फिर भारत से अच्‍छा देश तो अभी भी कोई नहीं है। पडोसी मुल्‍कों की हालत तो और खराब है। पलायन में संभव है हम अपने लिए बेहतर और मनोनुकूल स्थितियां पा लें , लेकिन सुधार के लिए कमर कसने पर तो हम आने वाली पीढियों के लिए ऐसा कर जाएंगे कि दरख्‍तों के साये शीतलता देने वाले ही हों।

    R K KHURANA के द्वारा
    January 28, 2011

    प्रिय श्री वाजपई जी, अपक कथन भी ठीक है की पलायन हर वास्तु का हल नहीं है ! फिर भी प्रस्तिथि के अनुसार हमें अपने आप को बदलना पड़ता है ! समय बहुत बलवान होता है ! आपकी प्रितिक्रिया के लिए अति धनय्वादी हूँ खुराना

s.p.singh के द्वारा
January 27, 2011

आदरणीय खुराना जी नमस्कार, यहां तन ढकने की खातिर खुद तन ही बिकने लगता है ! कोई पेट पालने निकला तो कोई पेट में पलने लगता है ! बहुत ही अच्छी व्यथा —– पर पलायन भी तो अच्छी बात !नहीं—– चलो कहीं ओर चलें उम्र भर के लिए – कहने से भी इन दुष्टों का ही भला होगा – अगर हम कवि नीरज की पंक्तियों को यों कहें—- चलो अब तो कोई मजहब ऐसा भी चलाया जाय जहाँ इंसान तो इंसान बनाया जाय और—- चलो इन दुष्टों को हिंद महासागर में डुबाया जाय —– धन्यवाद.

    R K KHURANA के द्वारा
    January 27, 2011

    प्रिय सिंह साहेब, मेरी रचना “चलो कहीं और चलें” को आपने इतनी दिलचस्पी से पढ़ा और उस पर अपने इतने अच्छे विचार रखे ! मन प्रसन्न हो गया ! पलायन तो मज़बूरी है ! पलायन में दर्द छिपा है ! जब आतताई प्रबल हो जाते है तो पलायन में ही भलाई नज़र आती है ! काश हम इनको महासागर में डुबो पाते ! प्रित्क्रिया के लिए आपका तहे दिल से शुक्रिया खुराना

NAVEEN KUMAR SHARMA के द्वारा
January 27, 2011

चाचा जी नमस्ते, चाचा जी बहुत दिनों के बाद आपकी एक अच्छी पोस्ट पढ़ी चाचा जी देश की हालत का वर्णन बहुत ही अच्छे ढंग से से इस पोस्ट में किया है चाचा जी देश को इस हाल तक पहुँचाने में थोडा बहुत हाथ तो हम सबका भी है हम लोगों ने ही उन नपुंसक लोगों को सत्ता पे बिठाया है जो कोई भी निर्णय लेने में सक्षम नहीं हैं केंद्र सरकार न जाने क्यों घोटालों के दोषियों को सजा देने में हिचकिचा रही है कहीं न कहीं ये सत्तासीन लोग भी इन घोटालों में हिस्सेदार हैं और केंद्र सरकार काले धन के खाताधारियों के नाम भी नहीं खोल रही है उसका कारण ये हो सकता है कि ये काला धन भी कांग्रेसियों का ही हो इसीलिए केंद्र सरकार देर करके अपने नेताओं को ये काला धन दूसरी जगह शिफ्ट करने का समय दे रही है . नवीन कुमार शर्मा बहजोई (मुरादाबाद ) उ . प्र. मोबाइल नंबर – 09719390576

    R K KHURANA के द्वारा
    January 27, 2011

    प्रिय नवीन जी, मेरे लेख “चलो कहीं और चलें” के लिए आपका प्यार मिला ! आपका स्नेह मिलता रहता है ! धन्यवाद ! खुराना

    Jean के द्वारा
    May 26, 2011

    Kudos! What a neat way of tihnikng about it.

deepak pandey के द्वारा
January 27, 2011

खुराना साहब नमस्कार , चलिए आपके पोस्ट न आने के वजह तो पता चली . बिका हुआ खरीदार के बाद मै आपसे उससे मिलते जुलते लेख का इन्तिज़ार कर रहा था . देश की हालत पर अच्छा लेख . सही कहा अपने की ‘यहां दरखतों के साये में धूप लगती है, चलो कहीं ओर चलें उम्र भर के लिए’

    R K KHURANA के द्वारा
    January 27, 2011

    प्रिय दीपक जी, सदा की तरह आपका स्नेह मिला ! आपका धन्यवाद ! देश की हालत दिन प्रतिदिन बदतर होती जा रही है ! कोइ समाधान नज़र नहीं आता ! नेता लोग तो अपना घर भरने में ही लगे रहते है ! जनता की परवाह किसे है ! खुराना

nishamittal के द्वारा
January 27, 2011

आदरनीय खुराना जी,बहुत समय बाद आपकी पोस्ट पढी,सच में हमारे देश की परिस्तिथियों घटनाक्रम का चित्र आपने सटीक केहींचा है,आज देश के हालत के लिए हम भी उत्तरदायी हैं.सत्ता पर आसीन लोगों को हम ही पहुंचाते हैं वहां.अच्छी पोस्ट हेतु बधाई.

    R K KHURANA के द्वारा
    January 27, 2011

    सुश्री निशा जी, कुछ घरेलु परेशानियों के चलते मैं पहले कोइ पोस्ट न दे सका ! “चलो कहीं और चलें” पर आपका स्नेह मिला ! आपको लेख अच्छा लगा ! आपका शुक्रिया ! जहाँ तक हमारे उत्तर्दाईत्य का प्रशन है तो हमारे पास कोइ विकल्प भी तो नहीं है ! हम उसे में से चुनते है जिनको पार्टियाँ टिकेट देती है ! खुराना

allrounder के द्वारा
January 27, 2011

आदरणीय खुराना जी नमस्कार, आपके लेख मैं एक सच्चाई है, देश मैं सभी लोग बेमान नहीं हैं किन्तु आज देश मैं अच्छे और सच्चे अधिकारीयों का क्या हाल हो रहा है ये महाराष्ट्र मैं हुई अधिकारी की बीभत्स हत्या से पता चलता है ! एक अच्छे लेख पर बधाई !

    R K KHURANA के द्वारा
    January 27, 2011

    प्रिय सचिन जी, मेरी रचना “चलो कहीं और चलें” पर आपका स्नेह मिला ! बहुत धन्यवाद ! आपने ठीक कहा है की हमारे देश में ईमानदारी की सजा मौत हो गयी है ! बड़े दुःख का विषय है की बैईमानी का बोलबाला है और सच्चाई का मुह काला हो रहा है ! खुराना


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