KADLI KE PAAT कदली के पात

चतुर नरन की बात में, बात बात में बात ! जिमी कदली के पात में पात पात में पात !!

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बिका हुआ खरीदार

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बिका हुआ खरीदार

राम कृष्ण खुराना

किसी ने काल-बेल का बटन दबा दिया था ! घंटी का स्वर कमरे में भर गया ! उठना पडा ! आई-ग्लास से आंख लगा कर देखा तो हरीश का गर्दन से उपर का भाग उग आया !

“हरीश……!” एकदम चौंक पडता हूं !

लगभग छः-सात माह पूर्व मैं और हरीश एक ही मकान में किरायेदार थे ! फिर मैंने अपना फ्लैट खरीद लिया ! तब से हरीश ने कभी सीधे मुंह बात नहीं की ! यद्यपि उसका और मेरा कोई मुकाबला नहीं ! उसकी क्वालिफिकेशन, पोस्ट आदि सब कुछ मुझ से कम है ! आयु में भी मैं उससे बडा हूं, फिर भी ईर्ष्या…….? घर आना तो दूर, मिलने पर कभी दुआ-सलाम भी नहीं होती ! वो मुझे देख, कतरा कर निकल जाता है, और मैं बरबस मुस्करा देता हूं !

दरवाजा खोलने पर ज्ञात हुआ कि हरीश अकेला नहीं है ! साथ में एक तरुण भी है ! दोनो ने बडे ही आत्मीय ढंग से मुझे अभिवादन किया ! मन में शंका हुई !“आज यह चांद निशकलंक कैसे ?”   बिना किसी मतलब के तो हरीश आने से रहा ! परंतु साथ में यह तरुण ? कुछ समझ में न आया !

”ओहो…..आओ…आओ…! हमारी उम्र बहुत बडी है !”

अभिवादन के उत्तर में मैंने किंचित व्यंग्य से कहा ! मेरे होठों पर मुस्कराहट की एक लहर दौड गई !

“हमारी उम्र…? क्या…आपकी ..? मेरा मतलब… है… हां आपकी उम्र बहुत बडी है ! ईश्वर आपको दुगनी उम्र दे ! आपके सिर पर ही तो विश्वविद्यालय चल रहा है !” हरीश ने मक्खन लगाया !

मुझे चापलूसी करने वालों से एक प्रकार की चिढ सी है ! मैं साफ बात करने में विश्वास रखता हूं, क्योंकि चिकनी-चुपडी बातों के नीचे बहुधा गंदगी का ढेर छिपा रहता है ! फिर मैं उसकी इस आदत से परिचित हूं कि जब हरीश को अपना कोई काम निकलवाना होता है तो पहले वो भूमिका के रूप में चापलूसी करने लगता है ! परंतु आज यह किस काम से आया है  यदि रुपये पैसे के मामले में आता तो इसे अकेला ही आना चाहिए था ! फिर यह तरुण कौन है ?

“खैर इतनी तरीफ तो मत करो !” मैंने अपनी बात साफ की ! “मैं तो इसलिए कह रहा था कि कम से कम आज तुमने हमें याद तो किया !” इतना कहकर मैं उनको लेकर ड्राईंग-रुम में आ गया ! सोफों के चरमराने के साथ ही हरीश का स्वर उभरा – “अरे नहीं भाई साहब, आप तो हमें शर्मिन्दा कर रहे हैं !” वह मुझे भाई-साहब ही कहा करता था ! “बस कुछ समय ही नहीं मिल पाता ! हमारा जीवन भी कोई जीवन है ? एकदम मशीनी ! मेरा मतलब है सुबह उठो, नहाओ-धोओ और दफ्तर ! सारा दिन कलम घिसो ! फिर घर का सामान और सौ झंझट ! बस इसी प्रकार से दिन निकल जाता है ! रोज ही सोचता था कि आपको मिल आऊं ! परंतु समय ही नहीं मिल पाया !”

समय न मिलने का बहाना उसने एक बार पहले भी किया था ! जब मैंने नया फ्लैट लिया तो रामायण का अखंड-पाठ रखवाया था ! सारा मोहल्ला आया परंतु हरीश परिवार समय न मिल पाने के कारण न आ सका ! उसके पश्चात हमारे सम्बन्ध की गांठे दिन-प्रतिदिन ढीली होती चली गईं !

“आपने यह अच्छा किया जो अपना फ्लैट ले लिया ! अपना फिर भी अपना होता है !” मौन हरीश ने ही तोडा ! फिर उसने एक गहरी सांस छोडकर अपनी दोनो टांगे आगे की ओर पसार लीं और अपनी पीठ सोफे के साथ लगा दी ! “किराएदार का भी कोई जीवन नहीं ! मकान मालिक सोचता है कि मैंने मकान किराए पर देकर इनको खरीद लिया है ! बात बात पर टोकता है ! यह न करो, वह न करो, यहां बच्चे को पेशाब न कराओ, यहां बर्तन साफ न करो, बिजली न जलाओ, पानी न गिराओ ! बस पूछिये मत ! ज़रा सा कुछ कह दो तो मकान खाली करने की धमकी !” इतना कहते कहते उसके चेहरे पर विषाद की रेखांये उभर आईं !

“हां, हमें कम से कम इन झंझटों से तो छुट्टी मिली !” मैंने उसकी हां में हां मिलाई ! मैं उसके चेहरे के भाव पढना चाह रहा था कि उसने यह बात किस आधार पर कही है ! तभी उसके चेहरे की रेखाओं में परिवर्तन आ गया !

“आज भाभी जी दिखाई नहीं दे रहीं ! मेरा मतलब है कहीं गईं हैं क्या ?” उसने एकदम चौंकते हुए से पूछा !

”नहीं अन्दर ही है ! मंजू देखो तो कौन आया है ?” मैंने अन्दर वाले कमरे की ओर मुंह करके पत्नी को आवाज़ लगाते हुए हरीश पर कुछ अपनेपन की छाप छोडी ! पत्नी हल्के नीले रंग की कटवर्क की साडी पहने हुए अन्दर आई ! हरीश ने आदर पूर्वक थोडा सा उठकर नमस्ते की ! तरुण ने भी सभ्यतावश हाथ जोड दिए ! मंजू ने सिर हिलाकर नमस्ते का उत्तर देते हुए हरीश की पत्नी का समाचार पूछ्ने की औपचारिकता निभाई ! उसे साथ न लाने की शिकायत की ! फिर तरुण की ओर देखते हुए हरीश से पूछा – “आज इधर का रास्ता कैसे भूल गए ?”

”अरे भाभी जी, रास्ता-वास्ता क्या भूलना ! आप तो कभी आती नहीं हमारे घर ! आपसे मिले बहुत दिन हो गए थे ! यह मेरा ब्रदर-इन-ला है ! देहरादून से आया है ! हम लोग इधर से गुज़र रहे थे, मैंने सोचा इसे भी आपके दर्शन कराता चलूं !” हरीश ने उत्तर दिया !

”दर्शन” शब्द पर मैं चौंकता हूं ! उसके साले पर एक भरपूर निगाह डालता हुआ होंठो ही होंठो में मुस्करा देता हूं ! तरुण क्षण भर मेरी ओर देखता रहा, फिर उसने आंखे दूसरी ओर कर लीं और अपने आप को कमरे की सज़ावट देखने में व्यस्त होने का असफल प्रयास करने लगा ! हरीश प्रतिदिन, प्रातः व सांय दूध लेने के लिए यहीं से होकर गुजरता है ! कभी इधर झांकने का भी कष्ट नहीं किया ! एक-दो बार सामने पडने पर मैंने इस बात का गिला भी किया ! फिर कहना छोड दिया !

मैंने पत्नी की ओर देखकर कहा – “हरीश के लिए चाय-वाय तो ले आओ !”

”नहीं-नहीं भाभी जी, आप बैठी रहिए ! चाय तो हम घर से पीकर ही चले थे ! हम तो ऐसे ही घूमते हुए चले आए थे ! मेरा मतलब है, आप ज़रा भी तकल्लुफ न करें !”

”भाई तकल्लुफ की तो इसमें कोई बात नहीं ! हमारे यहां अक्सर सभी लोग चाय पीकर ही आते हैं और हमें उन्हें ही चाय पिलानी पडती है !” शरारतभरी मुस्कान बिखेर कर मंजू नौकर को चाय के लिए कहकर फिर आकर बैठ गई ! हरीश कट कर रह गया ! उसका साला व मैं मुस्करा दिए !

”भाई साहब आप तो बेकार ही फारमैलिटी-शो कर रहे हैं ! हम तो घर के ही आदमी हैं ! आप तो हमारे घर आते नहीं ! कल आप भी भाभी जी को लेकर हमारे घर आईये न !”

”तुम जो रोज़ आ जाते हो हमारे यहां !” मैंने व्यंगबाण छोडा !

हरीश ने मेरी बात का कोई उत्तर नहीं दिया ! वह कमरे का निरीक्षण सा करने लगा ! कुछ क्षण उसी प्रकार देखने के पश्चात पत्नी से बोला – “भाभी जी, आपने कमरा बहुत सुन्दर ढंग से सज़ा रखा है ! वास्तव में आप एक कुशल ग्रहणी हैं ! सजावट देखकर तो आपको दाद देनी ही होगी !” उसने फिर चापलूसी का सहारा लिया !

मंजू अपनी प्रशंसा सुनकर फूलकर कुप्पा हो गई ! मैंने कभी भी पत्नी की इतनी प्रशंसा नहीं की थी ! कम से कम कमरे की सज़ावट को लेकर तो कभी नहीं ! हरीश के मुंह से ऐसे शब्द सुनकर नारी-सुलभ स्वभाव के कारण उसका प्रसन्न होना स्वाभाविक ही था ! आज मुझे भी ऐसा प्रतीत होने लगा कि वास्तव में मंजू ने कमरे को सज़ाने में अपनी बुद्धिमता का सराहनीय प्रदर्शन किया है ! मंजू ने मंद-मंद मुस्करा कर हम तीनो की ओर देखा ! एक बार तो मुझे भी ऐसी स्त्री का पति होने पर गर्व अनुभव होने लगा ! मैं सोफे पर ज़रा अकड कर बैठ गया ! मेरा प्रत्येक अंग पुकार-पुकार कर कह रहा था “आखिर पत्नी किसकी है ?”

नौकर चाय तथा बिस्किट ले आया था ! मंजू ने चाय तैयार की ! सबसे पहले उसने एक प्याला हरीश की ओर बढा दिया ! शायद यह उसी प्रशंसा का प्रभाव था ! फिर एक-एक प्याला मेरी व उसके साले की ओर खिसका दिया और बिस्किट की तश्तरी हरीश के आगे कर दी !

हरीश ने एक बिस्किट उठा कर प्लेट मेरी ओर बढा दी तथा चाय का एक घूंट सुडप की आवाज के साथ चढा कर बोला – “भाई साहब, आप फ्रिज व टैलिविज़न भी ले लीजिए ! ड्राईंग-रूम के खाली कोने अच्छे नहीं लगते !”

”विचार तो मैं भी कर रहा हूं ! देखो, शायद एक-दो महीने में फ्रिज ले आंए !” मैंने साधारण सा उत्तर दिया !

”फ्रिज की बजाय आप पहले टी वी ले लें तो अधिक अच्छा होगा ! क्यों भाभी जी आपका क्या विचार है ?” हरीश ने मंजू की ओर मुडकर पूछा !

इससे पहले पत्नी भी मुझे टी वी लाने पर ही जोर दे रही थी ! उसे पिक्चर देखने का बहुत शौक है ! उसके विचार में फ्रिज से अधिक जरुरी टैलिविज़न था ! हम दोनो में इसी बात की बहस होती थी कि पहले कौन सी चीज़ लाई जाय ! हरीश ने तो मंजू के मन की बात कह दी थी !

पत्नी ने विजयी मुद्रा में मेरी ओर देखकर कहा – “हां, मैं भी इनसे यही कह रही थी कि टी. वी. ही ले आईए ! लेकिन तुम्हारे भाई साहब तो बस फ्रिज की ही जिद कर रहे हैं !”

”ठीक ही तो कहती हैं भाभी जी !” यह हरीश था ! “अब तो गर्मी केवल एक-डेढ महीना ही है ! फिर तो फ्रिज अगले वर्ष ही काम आयगा ! टैलिविज़न तो बारह महीने देखने की चीज़ है ! हमें भी आराम हो जायगा ! इसी बहाने आपके दर्शन भी हो जाया करेंगें !”

यह तो मनुष्य का स्वाभाविक गुण है ! बिना मतलब किसी से मिलने का भी समय नहीं ! इस आपाधापी के युग में समय की परिभाषा ही बदल गई है ! एक स्वार्थ ही तो है जो एक दूसरे को मिलने के लिए विवश करता है ! हरीश भी टी. वी. के बहाने ही हमारे ‘दर्शन’ करना चाहता है तो इसमें बुरा क्या है ?

”हां, देखो इस माह के अंत तक टी. वी. या फ्रिज ले ही आयेंगें !” मैंने अपनी बात में संशोधन किया !

“बस फिर तो केवल कालीन की कमी रह जायगी इस कमरे में !” उसके साले ने पहली बार मुंह खोला !

”हां कालीन तो अवश्य ही होना चाहिए, इसके बिना ड्राईंग-रुम, ड्राईंग-रुम ही नहीं लगता !” समर्थन हरीश ने किया !

“इसकी कमी मैं पूरी कर दूंगा !” उसके साले ने कहा 1

”क्या मतलब ?”

“परसों मैं आपको एक मिर्जापुरी कालीन भिजवा दूंगा !” तरुण भात की तरह बिछ गया ! परंतु मेरी समझ में कुछ भी न आया !

”इसका एक दोस्त कालीन का काम करता है ! आपको भेंट करने के लिए यह एक पीस उठा लाया है !” हरीश ने पर्दा हटा दिया !

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मैं तथा हरीश एक ही मकान में रहते थे ! मैं युनिवर्सिटी से लौटा तो हरीश भागा भागा फिर रहा था ! सामने पडने पर एकदम रास्ता रोककर बोला –“ भाई साहब, आपकी कोई जान-पह्चान है पुलिस स्टेशन में ?”

” पुलिस स्टेशन ?” मैं एकदम चौंक पडता हूं ! “हमारा पुलिस से क्या काम ? पर बात क्या हुई ?”

”कुछ नहीं बस, ऐसे ही एक छोटा सा काम फंस गया था !” हरीश जल्दी से इतनी बात कहकर बाहर चला गया ! बाद में पत्नी ने बताया कि हरीश रिश्वत लेता हुआ पकडा गया है ! कोई सिफारिश ढूंढ रहा है !

रात के दस बजे हरीश लौटा तो चेहरा खिला हुआ था ! पडौसी के नाते मैंने चिंता व्यक्त की तो वह बडी ही बेशरमी से बोला, “अरे भाई साहब, ये तो छोटी-मोटी बातें हैं ! इनसे घबराने लगे तो बीवी-बच्चों का गला घोंट कर कुंए में फेंकना पड जायगा ! पुलिस में तो सब घर के ही आदमी हैं ! मामला रफा-दफा…….हूं !” उसने हाथ नचाकर रफा-दफा होने के एक्टिंग की

तीसरे दिन दारोगा की बेटी की शादी थी ! हरीश उसे एक मिडियम साईज का रैफ्रीजिरेटर भेंट कर आया था !

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“अरे नहीं ब्रदर, हम इस एहसान का बोझ नहीं उठा पायेंगें !” मैं एकदम गम्भीर हो गया !

”इसमें एहसान जैसी क्या बात है ? यह तो संसार चक्र है ! ताली बजाने के लिए दूसरा हाथ होना आवश्यक होता है ! आप इसे “ईनाम” ही समझ लीजिए !” हरीश खुलने लगा !

”ईनाम..? ईनाम कैसा……?”

”अब आपसे क्या छिपाना भाई साहब ! यह मेरा ब्रदर-इन-ला देहरादून से आया है ! इसी साल इसने एम. ए. की है ! कल आपने जो लेक्चरार की पोस्ट के लिए इंटरव्यू लेना है उसके लिए यह भी एक उम्मीदवार है ! मेरा मतलब है……..!”

”मैं आपका मतलब समझ गया हूं !” मैंने हरीश की बात बीच में ही काट दी ! मेरे चेहरे पर क्रोध की रेखाएं खिंच गईं !

हरीश ने जेब से एक कागज़ निकाल कर दिया जो उसके साले का सी. वी. था !

“परसों मैं आपको कालीन भिजवा दूंगा !” उसके साले ने पुनः याद दिलाया !

मेरे शरीर की रगें तन गईं ! चेहरे पर लाल रेखाएं और गहरी हो गईं ! इसीलिए हरीश हर बात पर समर्पित हुआ सा लगता था ! उसके अपनेपन की बातें दिल को छू छू जाती थीं ! लेकिन हर बुरके के नीचे चांद नहीं छिपा होता ! स्वयं दमडों में बिकने वाला मुझे कालीन देकर खरीदना चाहता था !

“मेरा ईमान इतना सस्ता नहीं है मि. हरीश !” इतना कहकर मैंने उसके द्वारा दिया कागज़ उसके सामने ही चिन्दी-चिन्दी कर दिया

************

राम कृष्ण खुराना
8066, 116 Street, 80 Ave. BC, Delta, CANADA.

khuranarkk.ca@gmail.com



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77 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

    R K KHURANA के द्वारा
    January 6, 2013

    Virus ???

    R K KHURANA के द्वारा
    January 6, 2013

    what ??

Kaeden के द्वारा
May 26, 2011

That’s way more clever than I was expecting. Tanhks!

    R K KHURANA के द्वारा
    May 26, 2011

    Thank U

deepak pandey के द्वारा
January 19, 2011

खुराना साहब ब्लॉगर ऑफ़ the इयर बनने के बाद इधर आपके नए लेख का इंतज़ार हो रहा है .

    R K KHURANA के द्वारा
    January 19, 2011

    प्रिय दीपक जी, मैं शीघ्र ही आप लोगो की सेवा में प्रस्तुत होऊंगा ! धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

    Earthwind के द्वारा
    May 26, 2011

    That’s a mold-breaker. Great tikhinng!

    Roxanna के द्वारा
    May 26, 2011

    Tahkns for the insight. It brings light into the dark!

    R K KHURANA के द्वारा
    July 30, 2012

    Thank you very much

J.L. Singh के द्वारा
January 13, 2011

बहुत ही सुन्दर रचना पढने को मिली! आपके द्वारा लिखी गयी एक एक पंक्ति महत्वपूर्ण है. मस्का लगाना और उसे समझ पाना! और सही जवाब देना! बहुत कुछ जानने और सीखने को मिला.! बधाई और धन्यवाद!

    R K KHURANA के द्वारा
    January 13, 2011

    प्रिय जे एल सिंह साहेब, आपको मेरी कहानी “बिका हुआ खरीदार” अच्छी लगी ! हर्ष हुआ ! आप जैसे बंधुओं के प्रोत्साहन से ही लिखने की प्रेरणा मिलती है ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए आपका धन्यवाद् ! राम कृष्ण खुराना

NAVEEN KUMAR SHARMA के द्वारा
January 5, 2011

चाचा जी नमस्ते, सबसे पहले आपको ब्‍लॉगर आफ द इयर बनने पर हार्दिक बधाई बहुत ही सुन्दर कहानी लिखी है आपने लेकिन चाचा जी आज इस दुनिया में ऐसे ईमानदार व्यक्ति बहुत कम हैं आज तो हर कोई जब नौकरी शुरू करता है तो यह जानना चाहता है कि उसमें ऊपरी आमदनी कितनी है नवीन कुमार शर्मा बहजोई (मुरादाबाद ) उ . प्र. मोबाइल नंबर – 09719390576

    R K KHURANA के द्वारा
    January 5, 2011

    प्रिय नवीन जी, बिलकुल सही कहा आपने ! आज तो वेतान से अधिक उपरी कमाई पर जोर दिया जाता है ! जिस स्थान पर रिश्वत ज्यादा मिलने के आसार जोते हैं वहां पैसे की बोली लगती है और लोग रिश्वत देकर रिश्वत वाली जगह पर अपना ट्रांसफर करवाते है ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
January 4, 2011

आदरणीय श्री खुराना जी, ईमानदारी और सत्‍य निष्‍ठा की अनुठी मिसाल पेश करने वाली आपकी यह कहानी वास्‍तव में बहुत ही सुंदर है। लेकिन ऐसे लोग आजकल अपवाद स्‍वरूप ही मिल पाते हैं। ब्‍लॉगर आफ द इयर बननें पर हार्दिक बधाई। अरविन्‍द पारीक

    R K KHURANA के द्वारा
    January 4, 2011

    प्रिय अरविन्द जी, आपका कहना सही है की आजकल इमानदारी देखने को नहीं मिलती ! हर जगह भ्रष्टाचार और बैईमानी का ही बोलबाला है ! आपको मेरी रचना “बिका हुआ खरीदार” अच्छी लगी ! धन्यवाद् ! नया साल आपको व आपके परिवार को हर प्रकार की ख़ुशी प्रदान करे यही इश्वर से कामना है ! रामकृष्ण खुराना

Aakash Tiwaari के द्वारा
January 3, 2011

आदरणीय श्री खुराना जी, आप हंसते रहे मुस्कुराते रहे, नया साल का हर दिन आपका जगमगाता रहे, खुशियाँ मिले इतनी की आप गिन न सको, दुनिया में आपके ही चर्चे होते रहे… नववर्ष की आपको तथा आपके परिवार को हार्दिक शुभकामनाये.. http//:aakashtiwaary.jagranjunction.com आकाश तिवारी

    R K KHURANA के द्वारा
    January 3, 2011

    प्रिय आकाश जी, आपको भी नए साल की बहुत बहुत शुभकामनायें ! इश्वर आपको हर इच्छा पूरी करे ! मेरा आशीर्वाद राम कृष्ण खुराना

Arunesh Mishra के द्वारा
January 3, 2011

बहुत ही अच्छी तरह से आप ने पत्रों के चरित्रों को गढ़ा खुराना जी. एक रचना पढ़ी थी शायद दसवी या बारहवी में \"इर्ष्य तू न गई मेरे मन से\"…याद दिल दी आपने ने लेख के पहले अध्याय में.

    R K KHURANA के द्वारा
    January 3, 2011

    प्रिय अरुणेश जी, आपको मेरी रचना “बिका हुआ खरीदार” अच्छी लगी ! मन प्रसन्न हुआ ! आपको नया साल मुबारक हो ! इश्वर आपकी हर इच्छा पूरी करे ! राम कृष्ण खुराना

mihirraj2000 के द्वारा
January 2, 2011

बहुत ही खुबसूरत रचना खुराना जी..अंत तक कही दिमाग नहीं बटा. बहुत दिनों बाद आपकी कोई रचना पढने को मिली. समय थोडा हमे भी कम ही मिल पता है यहाँ आने का. बधाई.

    R K KHURANA के द्वारा
    January 2, 2011

    प्रिय मिहिर जी, आपके द्वारा दी गयी प्रतिक्रिया का मेरे लिए बहुत महत्त्व होता है ! आपको रचना “बिका हुआ खरीदार” अच्छी लगी लिखना सार्थक हो गया ! नए साल की आपको व आपके परिवार को बहुत शुभकामनाये ! इश्वर आपको तरक्की दे और आपकी सारी मनोकामनाएं पूरी करे ! धन्यवाद् सहित राम कृष्ण खुराना

Rashid के द्वारा
January 2, 2011

बेहतरीन प्रस्तुति खुराना सर ! लेकिन आज कल इमानदारी और सत्य निष्ठां बहुत ही कम मिलती है मेरे एक प्रोफेसर श्री अ क वर्मा मुझे MA में पब्लिक adminstration पढ़ाते थे, उनका कहना था की अपना सिस्टम कुछ ऐसा हो गया है की आदमी मजबूर हो जाता है भ्रष्टाचार के लिए , यह हमारा दुर्भाग्य है और हमारी शासन व्यवस्था की कमी !! राशिद

    R K KHURANA के द्वारा
    January 2, 2011

    प्रिय रशीद जी, आपका कथन बिलकुल सही है ! न चाहते हुए भी हमें गलत काम करने के लिए मजबूर होना पड़ता है ! हमारी वयवस्था ही कुछ इस प्रकार की हो गयी है ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद राम कृष्ण खुराना

Tufail A. Siddequi के द्वारा
January 2, 2011

खुराना साहब अभिवादन, रचना बहुत अच्छी लगी. नव वर्ष की शुभकामना.

    R K KHURANA के द्वारा
    January 2, 2011

    प्रिय तुफैल जी, नया साल आपके और आपके परिवार जानो के लिए शुभ हो ! इश्वर आपकी हर इच्छा पूरी करे ! मेरी रचना “बिका हुआ खरीदार” पर आपका स्नेह मिला ! प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

January 2, 2011

खुराना जी प्रणाम, बहुत सुन्दर एवं सादगी से परिपूर्ण कृति है. सच है कि मनुष्य के जीवन और कर्तव्य निर्वहन में इमानदारी होनी बहुत जरूरी है.आपको व आपके पूरे परिवार को नए वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें……………. नववर्ष आपके लिए मंगलमय हो…

    R K KHURANA के द्वारा
    January 2, 2011

    प्रिय रतूड़ी जी, मेरी रचना “बिका हुआ खरीदार” पर आपका स्नेह मिला ! प्रतिक्रिया के लिए आभार ! आपको व आपके परिवार को नव वर्ष की शुभकामनायें ! इश्वर आपकी हर चाहत को पूरा करे ! राम कृष्ण खुराना

syeds के द्वारा
January 2, 2011

आदरणीय खुराना जी, आज के समय में जुगाड़ लगाना आदत और ज़रुरत दोनों बन गयी है, बाबू वर्ग हो या अधिकारी सब इसे अपना अधिकार समझते हैं…पान सिगरेट चाय से लेकर बड़ी बड़ी रिश्वतें दी जाती हैं… बेहतरीन लेख. नव वर्ष आपके और आपके परिवार के लिए सेहत,तरक्की और कामयाबी लेकर आये. http://syeds.jagranjunction.com

    R K KHURANA के द्वारा
    January 2, 2011

    प्रिय सईद जी, मेरी रचना “बिका हुआ खरीदार” आपको अच्छी लगी ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया ! नया साल आपको व आपके परिवार के लिए मंगलमय हो ! इश्वर आपको व आपके परिवार को हर ख़ुशी दे ! राम कृष्ण खुराना

    Lilian के द्वारा
    May 26, 2011

    Tnahks for sharing. Always good to find a real expert.

दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
January 2, 2011

प्रणाम भाई साहब, पहले तो आप को नव वर्ष कि हार्दिक शुभकामनाएं, काफी समय से में जागरण जंकशन से दूर रहा कुछ पारिवारिक व्‍यस्‍तता के चलते, आज बहुत दिनों बाद नेट पर बैठा तो आप का यह लेख पढ़ा वाकई में कितनी सरल शब्‍दों में आप ने इन बिके हुए खरीदारों को बे-नकाब किया है। यही आज हमारे समाज की सच्‍चाई है वह हर दूसरे व्‍यक्ति को अपने जैसा बिका हुआ समझता है। अच्‍छे लेख के लिए बधाई। -दीपकजोशी63

    R K KHURANA के द्वारा
    January 2, 2011

    प्रिय दीपक जी, बहुत दिनों के बाद आपके मंच पर दर्शन हुए ! मेरी रचना “बिका हुआ खरीदार” आपको अच्छी लगी ! धन्यवाद् ! नया साल आपको व आपके परिवार के लिए मंगलमय हो ! इश्वर आपको व आपके परिवार को हर ख़ुशी दे ! राम कृष्ण खुराना

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
January 1, 2011

आदरणीय खुराना जी…….. बदलते दौर मे बदलते मूल्यों को दर्शाती सुंदर प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई……… वास्तव मे यहाँ भ्रष्ट आदमी को शर्म नहीं है अपितु कई बार ईमानदार को ही शर्मिंदा होना पड़ता है………. आपको व आपके पूरे परिवार को नए वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें……………. नववर्ष आपके लिए मंगलमय हो…

    R K KHURANA के द्वारा
    January 1, 2011

    प्रिय पियूष जी, मेरी रचना “बिका हुआ खरीदार” पर आपका स्नेह मिला ! आभार ! आपको व आपके परिवार को नव वर्ष की शुभकामनायें ! भगवन आपकी हर चाहत को पूरा करे ! राम कृष्ण खुराना

allrounder के द्वारा
January 1, 2011

आदरणीय खुराना साहब प्रणाम आपको नए साल की बहुत – बहुत शुभकामनाये ! और bloger of the Year बनने पर भी बधाई ! आपका लेख लाल किताब के टोटके वर्ष – २०१० मैं सर्वाधिक पढ़ा गया और सबसे ज्यादा कमेन्ट भी प्राप्त किये आपने ! आपको हार्दिक बधाई !

    R K KHURANA के द्वारा
    January 1, 2011

    प्रिय सचिन जी, bloger of the Year के लिए बधाई के लिए आपका तहे दिल से शुक्रिया ! आपको और आपके परिवार को भी नए साल की शुभकामनायें ! इश्वर आपकी व आपके परिवार की सारी मनोकामनाएं पूरी करे ! मेरा आशीर्वाद आपके साथ है ! धन्यवाद् सहित ! राम कृष्ण खुराना

s.p.singh के द्वारा
January 1, 2011

आदरणीय खुराना क्या खूब – प्रस्तुति दी है कमाल है समाज की सही तस्वीर . धन्यवाद.

    s.p.singh के द्वारा
    January 1, 2011

    खुरानाजी कृपया गलती के लिए क्षमा करे “जी ” साथ में पढ़े .

    R K KHURANA के द्वारा
    January 1, 2011

    प्रिय सिंह साहेब जी, प्रतिक्रिया के रूप में मेरी रचना “बिका हुआ खरीदार” के लिए आपका प्यार मिला ! आभार ! इशार नए वर्ष में आपकी व आपके परिवार के हर इच्छा पूरी करे ! मेरी शुभकामनायें राम कृष्ण खुराना

    R K KHURANA के द्वारा
    January 1, 2011

    प्रिय सिंह साहेब जी, अरे आप तो वैसे ही फार्मल हो रहे है ! आपका प्यार मेरे लिए सदा से रहा है और आशा है आगे भी रहेगा ! पंजाबी में प्यार से हम लोग “तू” का ही इस्तेमाल करते हैं ! फिर भगवान को भी प्यार से “तू” या तुम ही कहते है ! हम कहते है “तुम सब के स्वामी’ ! मुझे मालूम है आपके दिल में मेरे प्रति कितना सम्मान है ! टाइप के गलतियां तो होते रहती है ! आपका धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

kajalkumar के द्वारा
January 1, 2011

एप्रोच लगाना आज हमारे सामाजिक क्रिया-कलापों में आत्मसात हो चुका है…लगता है आप पीछे रह गए, चेले तो बस आपको अपनी स्पीड से मिला कर चलना भर चाह रहे थे :) बाहर जाकर बोले होगे -”चलो अच्छा है कालीन बचा, पता नहीं कालीन लेकर भी काम करता या नहीं”

    R K KHURANA के द्वारा
    January 1, 2011

    प्रिय काजल जी, बिलकुल सही सोच है आपकी ! लोग बाग़ तो आजकल ऐसा ही सोचते हैं ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभारी हूँ ! नया साल आपके और आपके परिवार जानो के लिए शुभ हो ! इश्वर आपकी हर इच्छा पूरी करे ! राम कृष्ण खुराना

    Danice के द्वारा
    May 26, 2011

    And I thought I was the sensible one. Thanks for setitng me straight.

    R K KHURANA के द्वारा
    May 26, 2011

    you are right

Ramesh bajpai के द्वारा
January 1, 2011

आदरणीय भाई जी सामाजिकता बस स्वार्थ तक ही सीमित हो गयी है | नव वर्ष की हार्दिक मंगल कामनाओ सहित

    R K KHURANA के द्वारा
    January 1, 2011

    प्रिय रमेश जी, आपको तथा आपके परिवार को नए साल की बहुत बधाई ! यह साल आपके और आपके परिवार के लिए ढेर सारी खुशियाँ लेकर आये ! इश्वर आपकी हर इच्छा पूरी करे ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् ! राम कृष्ण खुराना

abodhbaalak के द्वारा
January 1, 2011

आदरणीय खुराना जी, बहुत ही सुन्दर रचना, आज समाज में इस तरह के लें दें को मान्यता मिल गयी है, सब यही कहते हैं की चलता है, एक दुसरे के पीठ खुजा कर ही काम चलता है आदि आदि घूसखोरी न हो गयी ईमानदारी का ….. आपको सपरिवार नए वर्ष की शुभकामनाएं

    R K KHURANA के द्वारा
    January 1, 2011

    प्रिय अबोध जी, रिश्वत लेना आज कल का फैशन बन गया है ! इसे लोग इश्वर की इच्छा मानने लगे है ! आपको मेरी रचना “बिका हुआ खरीदार” अच्छी लगी ! धन्यवाद ! आपको व आपके परिवार को नव वर्ष की शुभकामनायें ! राम कृष्ण खुराना

roshni के द्वारा
January 1, 2011

खुराना जी एक और अच्छी प्रस्तुति के लिए बधाई आप को नव वर्ष की शुभकामनाएं । आगामी वर्ष अपने आगमन् के साथ आपके जीवन में खुशियों की बहार लाएं और सम्पूर्ण वर्ष आप व आपके परिवार के लिए मंगलकारी हो। रौशनी

    R K KHURANA के द्वारा
    January 1, 2011

    प्रिय रौशनी जी, नया साल आपके व आपके परिवार के लिए नई खुशियाँ लेकर आये ! आपको व आपके परिवार को नए साल की शुभकामनायें ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभार ! राम कृष्ण खुराना

    Kasara के द्वारा
    May 25, 2011

    Hey, that’s the geartest! So with ll this brain power AWHFY?

    R K KHURANA के द्वारा
    May 25, 2011

    प्रियं कसर जी, आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद ! राम कृष्ण खुराना

    Rennifer के द्वारा
    May 26, 2011

    Now that’s sutble! Great to hear from you.

    R K KHURANA के द्वारा
    March 23, 2014

    मेरी रचना “बिका हुआ खरीदार” अच्छी लगी ! प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् ! खुराना

Dharmesh Tiwari के द्वारा
January 1, 2011

आदरणीय खुराना साहब सादर प्रणाम,स्वार्थ के ऊपर बेहतर प्रस्तुती,आपको व आपके परिवार के सभी सदस्यों को नए वर्ष २०११ की ढेरों सुभकामनाये,धन्यवाद!

    R K KHURANA के द्वारा
    January 1, 2011

    प्रिय धर्मेश जी, स्वार्थ ही एक ऐसी चीज़ है जो हमें एक दुसरे से मिलने पर मजबूर करती है ! नए साल में आप हर प्रकार से तरक्की करें येही कामना है ! आपको भी नए साल की बधाई ! राम कृष्ण खुराना

alkargupta1 के द्वारा
January 1, 2011

श्री खुराना जी , नमस्कार आज के समाज की यही सच्ची तस्वीर है कितने ही भ्रष्ट लोग इस घूँसखोरी के इर्द-गिर्द चक्कर काटते नज़र आते हैं गेंडे की खाल होते हैं कोई असर नहीं होता है…..लेकिन एक ओर विश्वविद्दालय के लेक्चरार जैसे लोग भी उदाहरण हैं ….| बहुत ही अच्छी रचना है | नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं !

    R K KHURANA के द्वारा
    January 1, 2011

    सुश्री अलका जी, आपको तथा आपके परिवार को नए साल की बहुत बहुत मबारक ! यह साल आपके और आपके परिवार के लिए ढेर साड़ी खुशियाँ लेकर आये ! इश्वर आपकी हर इच्छा पूरी करे ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् ! राम कृष्ण खुराना

Amit Dehati के द्वारा
January 1, 2011

खुराना जी नमस्कार !!!!!!!!!!!!!!!!! बहुत बढ़िया …………….आपने जो रिश्वत और हरीश जैसे लोगों पर प्रकाश डाला है अच्छा लगा वाकई रिश्वत देने वालों को मुहतोड़ जवाब दिया जाए तो रिश्वत शब्द ही गायब हो जायेगा …………. आपके खिदमत में दो लाइन …………. वो खता करके भी बेकसूर बने फिरते हैं , हमने हालात-ए-दिल कहा तो कशुर्वर हुआ . नववर्ष की हार्दिक शुभकामना आपको भी !///////////////////// नववर्ष मंगलमय हो ! http://amitdehati.jagranjunction.com

    R K KHURANA के द्वारा
    January 1, 2011

    प्रिय अमित जी, आपको नए साल की बहुत बहुत मुबारक ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभारी हूँ ! आपका शेयर तो कमाल का है ! आपके लिए यह सब मुझी को कहते है रख नज़र नीची अपनी ! कोइ उनको नहीं कहता न निकलो यूं अयान होकर ! राम कृष्ण खुराना

आर.एन. शाही के द्वारा
January 1, 2011

आदरणीय खुराना साहब, नए वर्ष की ढेर सारी बधाइयां । आपकी प्रस्तुति स्वार्थपरक सामाजिक सोच की परिचायक है । आधुनिक भावनात्मक आदान-प्रदान भी यही रह गया है । साधुवाद ।

    R K KHURANA के द्वारा
    January 1, 2011

    प्रिय श्री शाही जी, नए वर्ष में आपकी पहली प्रतिक्रिया ने मेरे लिए उर्जा का काम किया है ! आपको तथा आपके परिवार को नए साल की लाख लाख बधाईयाँ ! इश्वर आपको तथा आपके परिवार को हर ख़ुशी दे ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद ! राम कृष्ण खुराना


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