KADLI KE PAAT कदली के पात

चतुर नरन की बात में, बात बात में बात ! जिमी कदली के पात में पात पात में पात !!

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जानवर भी सोचते हैं

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जानवर भी सोचते हैं

मई 1924 की बात है ! उस समय मेरे पिता जी साउथ इन्डिया कम्पनी में सर्वेयर के रुप में कार्यरत  थे ! यह कहानी उनकी जबानी ही सुनिए !

मैं रेलवे लाईन के साथ साथ सर्वे कर रहा था ! हमारी पार्टी में कुल दस आदमी थे ! दो सर्वेयर और आठ मजदूर ! हम लोग अपना कैम्प रेलवे लाईन के साथ किसी गांव के पास जहां अच्छा समझते थे, लगा लेते थे और अपना काम करते रह्ते थे !

हम लोगों ने सर्वे करते-करते एक नई जगह पर अपना कैम्प लगा दिया ! शाम का समय था ! हम लोग चाय आदि पीकर बैठे ही थे कि हमने देखा कि हमारे कैम्प की तरफ एक जंगली हाथियों का झुंड आ रहा है ! मैं बहुत परेशान हो गया क्योंकि जंगली हाथी बडे खतरनाक होते हैं  हमारी पार्टी में जो मज़दूर थे उन्होंने हमें कहा कि आप चिंता न करें ! हम इन हाथियों को खदेड देंगे ! लेकिन उनके इतना कहने पर भी मेरी चिंता कम नहीं हुई ! हाथी बडी ही मस्त चाल से चले आ रहे थे !

जब हाथियों का झुंड कुछ नज़दीक आया तो हमने जो दृश्य देखा उसे देख कर हमारे आश्चर्य का कोई ठिकाना न रहा !  हमने देखा कि सबसे आगे एक हथिनी आ रही थी और उसकी पीठ पर एक 14-15 साल की लडकी बिल्कुल नंगी बैठी थी ! उस झुंड में कुल मिला कर आठ-दस हाथी थे ! हमारे कैम्प के पास आकर वो सभी हाथी रुक गए ! जिस हथिनी पर वो लडकी सवार थी वह हथिनी नीचे बैठ गई ! और वो नंगी लडकी नीचे उतर कर हमारे कैम्प में आ गई ! बाकी सब हाथी उसी प्रकार से खडे रहे ! हमने उस लडकी को कुछ रोटियां और बिस्कुट जो हमारे पास थे, उसको दे दिए ! उस लडकी ने रोटी को सूंघा फिर बिस्कुट को सूंघा और तब उनको चखा ! फिर वह लडकी भी हाथियों कि तरह चिंघाडने लगी और वापिस हाथियों के चली गई ! उसने प्रत्येक हाथी को रोटी और बिस्कुट खिलाए और खुद भी खाए ! खाने के बाद उसी प्रकार से वह लडकी हाथिनी पर बैठ गई ! और सब हाथी चुपचाप वापिस चले गए ! तब हमारी जान में जान आई !

बाद में पता करने पर मालूम हुआ कि कुछ साल पहले इस हथिनी का एक बच्चा मर गया था ! हथिनी बच्चे को मरा पाकर पागल सी हो गई ! रात को पागलों की तरह घूमती हुई एक गांव की तरफ निकल पडी ! रास्ते में रेल की लाईन पर फाटक लगा हुआ था ! रात होने के कारण गेटकीपर ने फाटक बन्द कर रखा था ! उस पागल हथिनी ने गेट को तोड दिया ! गर्मी का मौसम था ! दूसरी ओर गेटकीपर अपनी पत्नी व एक साल की बच्ची के साथ अपने क्वार्टर के बाहर ही सो रहा था ! उसको रहने के लिए रेलवे के ओर से एक कवार्टर मिला हुआ था ! गेट के टूटने की आवाज़ सुन कर वह हडबडा कर उठ खडा हुआ ! उसकी समझ में कुछ भी नहीं आया कि क्या हुआ है ! इतनी ही देर में वह हथिनी उसके सिर पर सवार हो गई ! बडी मुश्किल से गेटकीपर और उसकी पत्नी अपनी जान बचा कर अपने क्वार्टर में भाग गए ! परंतु उनकी एक साल की बच्ची वहीं बाहर ही रह गई ! बस उस बच्ची को वह हथिनी उठा लाई !

तब से अब तक वह लडकी इन्ही हाथियों के साथ रहती थी ! उसी हथिनी ने ही पाल पोस कर इस लडकी को इतना बडा किया था ! वह लडकी भाषा के नाम पर सिर्फ हाथियों की तरह चिन्घाड ही सकती थी ! इसके अलावा और कुछ नहीं जानती थी ! उस लडकी के मां-बाप उसे देखते थे और सब गांव वाले भी जानते थी कि यह उनकी लडकी है ! सभी उनको रोटियां और खाने की वस्तुएं देते थे परंतु कोई भी उस लडकी को हाथ भी नहीं लगा सकता था ! उनको हमेशा यह डर लगा रहता था कि यदि किसी ने जबरदस्ती उस लडकी को छीनने की कोशिश की तो यह हाथी सारे गांव को ही उजाड देंगें ! इसलिए सभी लोग उस लडकी को खुश रखने की कोशिश करते थे !

हमारा कैम्प वहां पर चार दिन तक रहा ! चार दिनों तक लगातार वो हाथियों का झुंड हमारे कैम्प के पास आता और हम हर रोज़ उन्हें कुछ न कुछ खाने को देते ! जिससे वे खुश होकर जांए ! हमें यह भी मालूम हुआ कि सभी हाथी उस लडकी की अध्यक्षता में रहते थे ! बिना उस लडकी की इज़ाज़त के न तो वे हाथी कोई चीज़ खाते थे और न ही किसी पर हमला करते थे !

राम कृष्ण खुराना

9988950584

www.khuranarkk.jagranjunction.com



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75 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Esther के द्वारा
May 26, 2011

No more s***. All posts of this quliaty from now on

    R K KHURANA के द्वारा
    May 26, 2011

    I appreciate you for your comment

NIKHIL PANDEY के द्वारा
March 7, 2011

सर प्रणाम .. अत्यंत ही रोचक घटना है ,,, .. सही शीर्षक दिया है आपने जानवर भी सोचते है आजकल तो लगता है जैसे जानवर ही सोचने लगे है.. क्योकि मनुष्य तो बिना सोचे समझे काम करने लगा है.. बहुत अच्छी पोस्ट . एक नया अनुभव था जिसपर आपके विचार जानने की उत्सुक्त अथी उसका लिंक यहाँ दे रहा हु अगर समय मिले तो जरुर देके. http://nikhilpandey.jagranjunction.com/2011/03/05/%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%9B-%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%97-%E0%A4%9C%E0%A5%8B-%E0%A4%85%E0%A4%AA%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A6-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%AE-%E0%A4%A6%E0%A5%87/

    R K KHURANA के द्वारा
    March 7, 2011

    प्रिय निखिलजी, आपको मेरी रचना “जानवर भी सोचते है” रोचक लगी ! धन्यवाद राम कृष्ण खुराना

    Brendy के द्वारा
    May 26, 2011

    What a joy to find smoeone else who thinks this way.

JLSINGH के द्वारा
March 4, 2011

खुराना साहब, आपकी बहुत सारी रचनाएँ पढी. आनंद भी आया और जानकारी भी बढ़ी. कृपया डा. मनमोहन सिंह पर अपनी रचना पेश करते तो ज्यादा मजा आता. वे क्या सोंचते है. वे तो बड़े विद्वान है, क्यों काली कोठरी को अपना आशियाना बना लिए हैं? जरा उन्हें प्रेरित करने वाली रचना लिखें और हो सके तो उन्हें प्रेषित भी करे. परम आदर के साथ.

    R K KHURANA के द्वारा
    March 5, 2011

    प्रिय सिंह साहेब, आपको मेरी रचनाएँ अच्छी लगती है जानकर बहुत हर्ष हुआ ! आपने मनमोहन सिंह के बारे में कहा है तो वैसे तो मैन्य एक व्यंग कविता “कलमाड़ी से बड़े तो नहीं” में इसका जिक्र किया था ! हाँ पूरा लेख भी लिख रहा हूँ ! जल्द ही आपको सेवा में प्रस्तुत करूंगा ! धन्यवाद राम कृष्ण खुराना

Arvind Pareek के द्वारा
January 1, 2011

नव वर्ष 2011 आपके व आपके परिवार के साथ सभी के लिए सुखदायक, मंगलकारी व आन्नeददायक हो। आपकी सारी इच्छाiएं पूर्ण हो व सपनों को साकार करें। आप जिस भी क्षेत्र में कदम बढ़ाएं, सफलता आपके कदम चूमें। Wish you a very Happy New Year 2011. May the New Year turn all your dreams into reality and all your efforts into great achievements. अरविन्द पारीक ARVIND PAREEK http://bhaijikahin.jagranjunction.com

    R K KHURANA के द्वारा
    January 1, 2011

    प्रिय अरविन्द जी, आपको भी नए वर्ष की शुभकामनायें ! इश्वर करे आपकी व आपके परिवार की सारी इच्छाएं पूरण हो ! कही से भी कोइ कमी न रहे ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए धनवाद राम कृष्ण खुराना

ashutoshda के द्वारा
December 6, 2010

आदरणीय खुराना जी वैसे मुझे भी आपके इस संस्मरण में कहानी ज्यादा सच्चाई कम नजर आई ! ऐसा भी नहीं ये संभव ही न हो ! जानवर भी सोचते है समझते है इसमें कोई शंका नहीं है संस्मरण साझा करने के लिए धन्यवाद् ! आशुतोष दा

    R K KHURANA के द्वारा
    December 6, 2010

    प्रिय आशुतोष जी, यह आपका नजरिया है ! लेकिन इस संसार में बहुत से कारनामे ऐसे हो जाते है जिन पर विशवास नहीं आता परन्तु होता वो सच है ! देखने पर विश्वाश करना पड़ता है ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद ! राम कृष्ण खुराना

Alka Gupta के द्वारा
December 6, 2010

श्री खुराना जी,  अभिवादन  बहुत ही रोचक व अदभुत संस्मरण है। पशु भी हमारी ही तरह सोच समझ सकते हैं  वे भी भावनाओं को समझते हैं और ऐसी आश्चर्यजनक घटनाएं घटित हो जातीं हैं।

    R K KHURANA के द्वारा
    December 6, 2010

    सुश्री अलका जी, आपके अमेरिका से वापिस आने पर स्वागत है ! मैंने सोचा अभी आपकी थकान नहीं उतरी होगी सो आपको उत्तर नही दिया ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् ! राम कृष्ण खुराना

NAVEEN KUMAR SHARMA के द्वारा
December 6, 2010

चाचा जी आपने मुझे मेरी पत्नी के बारे में बताने को कहा THA नवीन कुमार शर्मा बहजोई ( मुरादाबाद ) उ . प्र . मोबाइल नम्बर – 09719390576

    R K KHURANA के द्वारा
    December 6, 2010

    प्रिय नवीन जी, मैं भूल गया था ! माफ़ी चाहता हूँ ! जल्द ही आपको इस बारे में बताऊंगा ! खुराना

NAVEEN KUMAR SHARMA के द्वारा
December 6, 2010

चाचा जी नमस्ते , चाचा जी आपने बहुत ही अद्भुत घटना सुनाई है यह घटना वास्तव में अजीबो गरीब है चाचा जी वास्तव में जानवर इंसानों से ज्यादा वफादार व समझदार होते हैं . नवीन कुमार शर्मा बहजोई ( मुरादाबाद ) उ . प्र . मोबाइल नम्बर – 09719390576

    R K KHURANA के द्वारा
    December 6, 2010

    प्रिय नवीन जी, आपको मेरी रचना मज़ेदार लगी ! प्रतिक्रिया के लिए आपका धन्यवाद ! राम कृष्ण खुराना

bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
December 6, 2010

आदरणीय श्री खुराना जी, प्रेम व ममता जैसे स्‍वाभाविक गुण जानवर खासकर बंदर, कुत्ता, हाथी, घोड़ा व बैल जैसे जानवरों द्वारा समझनें के किस्‍से अनेकों बार देखनें में आए हैं। इन पर जंगल बूक जैसी किताब भी लिखी गई है तो पीली नदी की घाटियों में जैसी लंबी कहानी भी । फिर यह घटना जो आपने प्रस्‍तुत की है। इसे संस्‍मरण कहें और वह भी एक यादगार संस्‍मरण तो गलत ना होगा । एक अच्‍छी प्रस्‍तुति । अरविन्‍द पारीक

    R K KHURANA के द्वारा
    December 6, 2010

    प्रिय अरविन्द जी, मेरी रचना “जानवर भी सोचते है” के लिए आपका स्नेह मिला ! अति धन्यवादी हूँ ! जानवरों में भी सोचने सम्खने के शक्ति ही उनसे कई ऐसे ऐसे काम करवा देती है कि हम लोग भी सोचने के लिए मजबूर हो जाते है कि इनमे भी बुध्धि है ! राम कृष्ण खुराना

rita singh 'sarjana' के द्वारा
December 3, 2010

आदरणीय अंकल जी , सादर अभिवादन l हाथियों की झुण्ड में उस लड़की की तस्वीर चलचित्र की भांति मेरी आँखों में छाई रही l बधाई l

    R K KHURANA के द्वारा
    December 4, 2010

    प्रिय रीता जी, आपको मेरी रचना “जानवर भी सोचते है ” अच्छी लगी और चलचित्र की भाँती आपकी आँखों में छाई रही जानकर हर्ष हुआ ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए आपका धन्यवाद राम कृष्ण खुराना

mihirraj2000 के द्वारा
December 3, 2010

प्रिय खुराना जी कहानी कहने में आप सा कोई और नहीं. पर ये कहानी पर मुझे कोई खास ऐतबार नहीं हो रहा. लग रहा था तार्जान फिल्म देख रहा हूँ. आप से कई कहानी सिखा है मैंने कुछ और बेहतर कहानी की मुझे आशा थी. वैसे आप तो है ही अच्छे लेखक.

    R K KHURANA के द्वारा
    December 4, 2010

    प्रिय मिहिर राज जी, आपको कहानी पर ख़ास एतबार नहीं आया ! ठीक है आप डाक्टर है और विज्ञानं के विद्यार्थी है ! विज्ञानं को प्रमाण की आवश्यकता होती है ! परन्तु प्रमाण तो मैं दे नहीं पाउँगा ! क्योंकि यह मेरे पिता श्री ने मुझे सुनाई थी और अब वे इस नश्वर संसार को छोड़ चुके है ! हाँ लगभग एक डेढ़ वर्ष पहले मैंने टी वी पर मानो या न मानो कार्यक्रम में देखा था की एक बालक बचपन से जंगल में भटक जाता है और उसे बन्दर पालते है ! वो बंदरों की तरह पेड़ पर बड़ी आसानी से चढ़ जाता था ! नंगा बदन और नंगे पांव चलने और पेड़ पर चढ़ने में उसे कोइ दिक्कत नहीं होती थी ! लगभग 17 – 18 वर्षों बाद अचनक उसके माँ-बाप को वह मिल गया ! और उसके माता पिता उसे सभ्य इंसान की तरह रहने की तालीम दे रहे थे ! ऐसे कई हैरत अंगेज किस्से देखने सुनने में मिलते है ! फिर भी मैं आपकी भावनायों की कद्र करता हूँ और आपकी आशानुरूप और अच्छा लिखने का प्रयास करूंगा ! समय निकाल कर प्रतिक्रिया देने के लिए धन्यवाद राम कृष्ण खुराना

kmmishra के द्वारा
December 3, 2010

खुराना काका सादर प्रणाम । अद्भुत घटना सुनाई आपने और यह असंभव भी नहीं हैं क्योंकि इस तरह की तमाम घटनाएं प्रकाश में आयी हैं जिन्हें अखबार और किताबों के माध्यम से हमने पढ़ा है । रूडयार्ड किपलिंग की जंगल बुक भी ऐसी किसी घटना पर आधारित रही होगी लेकिन सबसे महत्वपूर्ण है आपका कहानी बयां करने का अंदाज । रोमांच से भरपूर । . वैसे इसमें कोयी शक नहीं कि जानवर भी सोचते समझते हैं । ईश्वर ने उनको दिमाग दिया है, विवेक भले ही न दिया हो पर वह अपनी तरह से सोचते समझते खूब हैं । चाहे जंगली जानवर हो या पालतू जानवर । मैंने महसूस किया है कि अगर आपको किसी जानवर से संपर्क करना हो तब आंखे सबसे महत्वपूर्ण माध्यम होती हैं । अगर आपकी आंखों में प्यार है तब फिर चाहे हिंसक शेर ही क्यों न हो वह शांत हो कर बैठ जायेगा । इस प्रयोग को आप कुत्ते और बिल्लियों पर आजमा कर देख सकते हैं । आपका भतीजा के एम मिश्र

    R K KHURANA के द्वारा
    December 4, 2010

    प्यारे मिश्र जी, परमात्मा आपको लम्बी आयु दे ! जानवरों में भी सोचने समझने की शक्ति होती है इसमें कोइ शक नहीं है और इसी कारन से वे कई ऐसे ऐसे कारनामे कर जाते है की हम लोग दांतों टेल ऊँगली दबा लेते है ! आपकी स्नेह भरी प्रतिक्रिया के लिए आभार ! राम कृष्ण खुराना

sdvajpayee के द्वारा
December 3, 2010

 निश्चित रूप से जानवरों में संवेदना होती है। यही नही पेडपौधों तक संवेदनशील और चैतन्‍य होते हैं।

    R K KHURANA के द्वारा
    December 4, 2010

    प्रिय वाजपई जी, आपने सच कहा है ! जानवरों और पेड़ पोधों में भी संवेदना होती है और इसी कारण से कई बार हमें आश्चर्यजनक किस्से सुनने को मिल जाते है ! आपकी प्रतिक्रिया मेरे लिए उर्जा का काम करती है ! कोटि कोटि धन्यवाद ! राम कृष्ण खुराना

nishamittal के द्वारा
December 3, 2010

खुराना जी,रोचक संस्मरण आपने बांटा.जानवर में संवेदनशीलता है और इंसान कृतघ्न बन रहा है.सामुदायीक भावना जानवर में अधिक है.पहले अपने साथियों की भूख की चिंता फिर अपनी.

    R K KHURANA के द्वारा
    December 4, 2010

    सुश्री निशा जी, आपको मेरी रचना “जानवर भी सोच्नते है” अच्छी लगी ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

deepak joshi के द्वारा
December 3, 2010

आदरणीय खुराना जी, आपके पिताजी का यह संस्मरण बहुत ही रोचक है, यह सही है जानवर इंसान से भी ज्‍यादा वफादार एवं समझदार है, हमें उन से कुछ सीख लेनी चाहिए। एक अच्‍छी कहानी को हमारे साथ बांटने के लिए धन्‍यवाद। -दीपकजोशी63

    R K KHURANA के द्वारा
    December 4, 2010

    प्रिय जोशी जी, सच में कई मायनो में जानवर इन्सान से ज्यादा समझदार साबित हुए है ! आपके स्नेह के लिए धन्यवाद राम कृष्ण खुराना

jalal के द्वारा
December 3, 2010

अपने आप में एक अजीबो गरीब घटना.

    R K KHURANA के द्वारा
    December 4, 2010

    प्रिय जलाल जी, यह दुनिया अजीबो गरीब घटनायों से भरी पड़ी है ! इन्ही को हम चमत्कार कह देते है ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

    Laneta के द्वारा
    May 25, 2011

    I feel so much hpapeir now I understand all this. Thanks!

    R K KHURANA के द्वारा
    May 25, 2011

    Thanks for your comments khurana

आर.एन. शाही के द्वारा
December 2, 2010

आदरणीय खुराना साहब, आपके पूज्य पिताजी का यह संस्मरण तो रोचक है ही, परन्तु इसकी रोचकता में आपकी सुगम लेखनशैली ने जान डाल दिया है । जानवरों में हाथी सबसे बुद्धिमान प्रजाति में हमेशा से ही जाना जाता है । संवेदनशीलता में हाथी सभी जानवरों में सर्वोत्तम है, तथा इनके समाजवाद को तो मनुष्य से भी उच्च कोटि का स्थान दिया जा सकता है । बच्चों की देखभाल पूरा झुंड मिलकर करता है, एवं समूह के मध्य में सुरक्षित रखते हुए चलता है । यह हाथी ही हैं, जो अपने पुरखों को श्रद्धांजलि देने साल में एक निश्चित समय पर उनकी अस्थियों के पास जाकर कपाल को सूंड में लपेटते हुए आंसू बहाते देखे जाते हैं । साधुवाद ।

    R K KHURANA के द्वारा
    December 3, 2010

    प्रिय श्री शाही जी, आपका कथन सत्य है ! हाथी के बारे में जो जानकारी आपने दी है वो भी अपने आप में रोचक जानकारी है ! पुरखो को श्रधांजलि देने वाली बात मुझे पता नहीं थी ! दूसरी बात आप जितने अच्छे लेखक है उतनी ही अच्छी प्रतिक्रिया भी देते है ! दिल चाहता है ऐसे ऐसे उच्च लोगों द्वारा प्रशंशा मिलती रहे और ज्यादा से जयादा लिखते रहे ! आपकी प्यार भरी प्रतिक्रिया के लिए तहे दिल से आभारी हूँ ! राम कृष्ण खुराना

    Minerva के द्वारा
    May 26, 2011

    Thank God! Smoenoe with brains speaks!

    R K KHURANA के द्वारा
    May 26, 2011

    Yes sir,

chaatak के द्वारा
December 2, 2010

आदरणीय चाचाजी, इस कहानी को सुना कर आपने तो मेरे तोते ही उड़ा दिए| एक ऐसी घटना जिसके चश्मदीद गवाह स्वयं आप हों उससे भला इनकार करें भी तो कैसे? सचमुच एक रोचक संस्मरण लिखा है आपने| इस अनुभव को हमारे साथ बांटने का शुक्रिया!

    R K KHURANA के द्वारा
    December 3, 2010

    प्रिय चातक जी, जानवर भी सोचते है समझते है ! ऐसी घटनाएँ आजकल हम लोग कई बार देखते सुनते है ! उसी कड़ी में यह भी कथा मेरे पिता जी मुझे सुनाई ! आपसे भी सांझ कर ली ! आपके स्नेह के लिए धन्यवाद राम कृष्ण खुराना

Rashid के द्वारा
December 2, 2010

खुराना साहब,, आश्चर्यचकित कर देने वाली घटना !! जिन्होंने देखा कैसा महसूस किया होगा !! राशिद http://rashid.jagranjunction.com

    R K KHURANA के द्वारा
    December 3, 2010

    प्रिय राशिद जी, आपकी प्रतिक्रिया मिली ! आपका तहे दिल से धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

    Lateisha के द्वारा
    May 26, 2011

    That’s the best asewnr of all time! JMHO

    R K KHURANA के द्वारा
    May 26, 2011

    जी हाँ, आप ठीक कह रहे है

Dharmesh Tiwari के द्वारा
December 2, 2010

आदरणीय खुराना साहब सादर प्रणाम,कहते है न जैसा वातावरण रहता है जीव उसी में ढल जाता है अब ये जीव इन्शान या जानवर कुछ भी हो सकते है,आज हम देख सकते है की कुत्तों को अति आधुनिक ट्रेनिग देकर उपयोग में लिया जाता है,धन्यवाद!

    R K KHURANA के द्वारा
    December 3, 2010

    प्रिय धर्मेश जी, बिलकुल ठीक कहा है अपने ! आज कई जानवरों को ट्रेनिंग देकर ज्यादा समझदार बनाया जा रहा है तथा उनसे मन चाह काम करवा जा रहा है ! आपके स्नेह के लिए धन्यवाद राम कृष्ण खुराना

Aakash Tiwaari के द्वारा
December 2, 2010

आदरणीय श्री खुराना जी, आपके द्वारा सुनाई ये सत्य कथा बहुत अच्छी लगी..मगर मै भी रौशनी जी की तरह उस लड़की के बारे में जानना पसंद करूँगा.. http://aakashtiwaary.jagranjunction.com आकाश तिवारी

    R K KHURANA के द्वारा
    December 3, 2010

    प्रिय आकाश जी, आपको यह सत्य कथा बहुत पसंद आई ! मेरा लिखना सार्थक हो गया ! हाँ आपने और रौशनी जी ने उस लड़की के बारे में पूछा है ! परन्तु जैसे के कथा में लिखा है उस लड़की को कोइ हाथ भी नहीं लगा सकता था ! क्योंकि हाथी किसी को उसे छूने ही नही देते थे ! फिर मेरे पिताजी वहां से चले आये थे इसलिए आगे उसका क्या हुआ बता नहीं सकता ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभार राम कृष्ण खुराना

roshni के द्वारा
December 2, 2010

खुराना जी नमस्कार बहुत ही आश्चर्यजनक कहानी है! ये यकीं ही नहीं होता की एक इंसान इस तरह से जानवरों के साथ रहता है और जानवर उसे इतना प्यार करते है ……. वैसे खुराना जी उस लड़की का क्या हुआ होगा बाद में ये भी जिज्ञासा की विषय है सच्ची और अच्छी कहानी के लिए धन्यवाद

    R K KHURANA के द्वारा
    December 3, 2010

    प्रिय रौशनी जी, ऐसी अश्चार्जनक कहानिया कई है जो सुनने में आती है ! कई बार टी वी में भी इनके बारे में ऐसे ही हैरान कर देने वाले किस्से सुनने के को मिलते है ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् हाँ इस इतवार को मैं आपके शहर में था ! मेरी बेटी वही अमृतसर में रहती है श्री राम स्कूल के पास जज नगर में ! राम कृष्ण खुराना

December 2, 2010

खुराना जी नमस्ते, बहुत ही विस्मयजनक संस्मरण है. ये बात तो सच है की जानवर भावनाओं को समझते हैं और उसी के अनुसार उनकी प्रतिक्रियाएं भी होती है. इसी तरह का रिसर्च प्रोग्राम एनीमल प्लेनेट पर भी आया था और वह भी हाथियों के ऊपर ही था. एक बढिया संस्मरण हमारे बीच शेयर करने के लिए धन्यवाद.

    R K KHURANA के द्वारा
    December 3, 2010

    प्रिय राजेंदर जी, जानवरों का संस्मरण आपको अच्छा लगा ! जानकर हर्ष हुआ ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभारी हूँ राम कृष्ण खुराना

abodhbaalak के द्वारा
December 2, 2010

खुराना जी, जानवर भी पयार की भाषा समझते हैं, एक इंसान है जो की…… इंसान आज अपनी सोचने की शक्ति केवल ऐसे ही चीज़ों में लगा रहा है जो की हमारे विनाश का साधन बने. सुन्दर भावनातमक और सजीव रचना,

    R K KHURANA के द्वारा
    December 2, 2010

    प्रिय अबोध जी, आज का इंसान तो जानवर में तब्दील होता हा रहा है और जानवर समझदार होते जा रहे हैं ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद राम कृष्ण खुराना

    Wilma के द्वारा
    May 26, 2011

    YMMD with that asnwer! TX

    R K KHURANA के द्वारा
    May 26, 2011

    शुक्रिया

    Bucky के द्वारा
    May 26, 2011

    Now I know who the brainy one is, I’ll keep lokonig for your posts.

allrounder के द्वारा
December 2, 2010

चाचाजी प्रणाम, इतने दिनों से इस मंच पर हूँ पर शायद पहली बार आपकी पोस्ट पर पहली प्रतिक्रिया देने का सौभाग्य प्राप्त हुआ वेह भी एक सच्ची और आश्चर्यजनक घटना पर ! और खुशकिस्मती से ये आपके पूज्य पिताजी का संस्मरण है ! बहुत – बहुत बधाई !

    R K KHURANA के द्वारा
    December 2, 2010

    प्रिय सचिन जी, परमात्मा आपको सुख दे ! “जानवर भी सोचते” है पर आपकी पहली प्रतिक्रिया पाकर मन हर्षित हुआ ! यह सच्ची कहानी है जो की मेरे पिताजी ने मुझे सुनाई थी ! सोचा आप लोगो से भी शेयर कर लूं ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभार ! राम कृष्ण खुराना


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