KADLI KE PAAT कदली के पात

चतुर नरन की बात में, बात बात में बात ! जिमी कदली के पात में पात पात में पात !!

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गाली

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गाली

राम  कृष्ण  खुराना

मुझे कुत्ता पालने का कोई शौक नहीं था ! मैं कुत्ते, बिल्ली आदि जानवर पालने को अमीरों के चोंचले मानता था ! सुबह शाम लोगों को कुत्ते की जंजीर हाथ में पकड कर टहलते हुए देखता तो मैं उनको फुकरा समझा करता था जो अपनी झूठी शान दिखाने के लिए आडम्बर करते हैं ! पिक्चरों में या कई बडे घरों में लोगों को कुत्ते, बिल्लियों से अपना मुंह चटवाते देखता तो बडी नफरत होती थी ! आज के भाग-दौड के समय में अपना तथा अपने बच्चों का ख्याल रखना ही बहुत बडी बात थी फिर इन जानवरों को पाल कर अपनी फजीहत करवाना मुझे कतई पसन्द न था ! लेकिन पुरु, मेरे चार साल के बेटे को पता नहीं कहां से धुन सवार हो गई ! पता नहीं उसने टी वी में देखा या किसी दोस्त के कहने पर कुत्ता पालने की जिद करने लगा ! उसे बहुत समझाया ! कुत्ता पालने के दोष गिनवाये ! घर गन्दा होने का वास्ता दिया ! कुत्ते के बदले में कोई और अच्छी और मंहगी चीज़ लेकर देने का लालच दिया ! लेकिन उसकी तो एक ही जिद थी कि कुत्ता पालेंगें ! स्त्री-हठ और बाल-हठ के बारे में तो सब जानते ही हैं !

हमने उसका नाम जिमी रखा था ! वो सिर्फ सात दिन का था जब मैं उसे घर लेकर आया था ! सफेद रंग का जिमी बहुत ही प्यारा बच्चा था ! उसके शरीर पर छोटे-छोटे बाल रेशम की तरह मुलायम थे ! छोटे-छोटे पैरों से सारे घर में चहल कदमी करता हुआ बहुत ही प्यारा लगता था मुझे भी वो अच्छा लगने लगा था ! मेरी पत्नी उसका बहुत ख्याल रखती थी ! हम सब उसको बहुत प्यार करते थे ! पुरु तो इसके बिना एक मिनट भी नहीं रहता था ! हर समय गोद में लेकर घूमता रहता ! पुरु और जिमी, जिमी और पुरु दोनो जैसे एक ही बन गए थे ! एक दूसरे के दोस्त ! एक दूसरे के दुख-सुख में साथ देने वाले ! एक दूसरे की जान !

जिमी अब बडा हो गया था ! अवांछनीय को देख कर भौंकने लग गया था ! उसके होते हमें घर की ज्यादा चिंता नहीं रहती थी ! पूरी देखभाल करता ! पूरी रखवाली करता ! बहुत समझदार ! पोटी की तो बात दूर उसने कभी बिस्तर पर सू-सू भी नहीं किया था ! पत्नी भी उसकी साफ-सफाई का बहुत ध्यान रखती थी ! रोज़ उसे नहलाना, शरीर पर चिपटे कीडों को चिमटी से निकालना आदि हर प्रकार से उसका ख्याल रखती थी !

पुरु का तो वो एक तरह से चेला ही था ! दोनों एक दूसरे से ऐसे प्यार करते थे जैसे सगे भाई जो चीज़ पुरु खाता वो जिमी के लिए भी आती ! साथ खेलते ! एक दूसरे को पकडते ! एक दूसरे के उपर चढ जाते ! एक दूसरे के आगे-पीछे भागते ! खूब मस्ती करते ! एक बार मोहल्ले के दो लडकों से पुरु की लडाई हो गई ! बस फिर क्या था ! जिमी ने पहले तो भौंक कर उन्हे डराने की कोशिश की जब वे नहीं माने तो दौड कर एक की टांग पकड ली ! खींचा-तानी में उसकी पेंट फट गई ! दोनों दुम दबा कर भाग गए ! और जब जिमी बीमार हुआ था तो पुरु ने खाना-पीना तक छोड दिया था ! स्कूल से आने के पश्चात स्वयं डाक्टर के पास लेकर जाता ! जब तक वो भला-चंगा नहीं हो गया पुरु को चैन नहीं आया !

जिमी अब चार साल का हो गया था और पुरु आठ का ! दोनो एक दूसरे को भाई की तरह ही प्यार करते थे ! जिमी का व्यवहार एक छोटे भाई की तरह ही झलकता था ! दिन में एक आध-घंटा वो पुरु के साथ अवश्य खेलता ! खेल-खेल में पुरु कई बार जिमी को जोर से मार देता ! कई बार उसे उठा कर नीचे पटक देता ! कई बार उसके बाल नोंच देता ! पर जिमी कांउ-कांउ करता रहता और मज़े ले ले कर पुरु के साथ खेलता रहता ! कभी उसने पुरु को कोई नुकसान पहुंचाने की कोशिश भी नहीं की ! दोनो इसी प्रकार से खेलते रहते ! यह बचपन की परम्परा आज भी बदस्तूर जारी थी ! जिमी ने कई काम सीख लिए थे ! गेट से अखबार उठा लाता था ! यदि पुरु बाज़ार से कोई सामान लेता तो लिफाफा जिमी को थमा देता ! जिमी लिफाफे के हैंडल को अपने मुंह में दबाए घर ले आता ! घर का कोई भी सदस्य बाहर से आता तो वो अभी दूर ही होता था कि जिमी को अपनी सूंघने के शक्ति से पता चल जाता और वो गेट से लेकर कमरे तक उतावलेपन से चहल कदमी करने लग जाता !

परंतु आज जो हुआ वो अप्रत्याशित था ! मैं ऐसा सोच भी नहीं सकता था ! कोई भी इसे मानने के लिए तैयार नहीं था !

आज जिमी ने पुरु को काट लिया था !

जिमी ने…… पुरु…… को… काट लिया ???

यह अनहोनी कैसे हो गई ! ऐसा नहीं हो सकता ! सभी जिमी की इस हरकत से हैरान थे ! मुझे गुस्सा आ गया !

मैंने जिमी को अपने पास बुलाया ! उसके अगले दोनों पंजो को अपने हाथ में पकड कर उसका मुंह अपने सामने लाकर उससे पूछा – “जिमी, तुमने पुरु को क्यों काटा ?”

जिमी ने एक बार मेरी ओर देखा फिर नज़रें झुका लीं !

मैंने फिर उसके पंजो को झकझोर कर उसकी आंखों में झांक कर उससे वही प्रश्न किया !

इस बार भी जिमी ने अपना चेहरा दूसरी तरफ कर लिया !

मुझे क्रोध आ गया ! मैंने गुस्से से उसको डांटते हुए उससे फिर पूछा तो उसने सिर झुका लिया और धीरे से बोला – “पुरु भईया ने मुझे बहुत गन्दी गाली दी थी ! मुझे गुस्सा आ गया और मैंने भईया को काट लिया !”

“गाली दी थी ?” मैंने फिर गुस्से से पूछा – “तुम तो पुरु को इतना प्यार करते हो और वो भी तुम्हारा कितना ख्याल रखता है ! फिर क्यों काटा ? क्या कहा था पुरु ने ?”

”हां मैं भईया से बहुत प्यार करता हूं ! उनके लिए जान भी दे सकता हूं ! वो मुझे मार लेते, मुझे कोई दूसरी गाली दे देते, मां की गाली दे देते, बहन की गाली दे देते ! पर उन्होंने तो मुझे बहुत ही गन्दी गाली दी थी ! मुझे गुस्सा आ गया और गुस्से में मैंने भईया को काट लिया ! ” जिमी कहता जा रहा था !

“मैं जब भईया के साथ खेल रहा था तो पुरु भईया ने मुझे बहुत गन्दी गाली दी थी !” जिमी किसी मुजरिम की तरह सिर झुकाए ही बोला – “उस गाली को मैं बर्दास्त नहीं कर पाया और गुस्से में मैंने भईया को काट लिया !”

”क्या गाली दी थी पुरु ने तुम्हें जो तुमने उसे काट लिया ?” मैंने आंखे तरेर कर पूछा !

”पुरु भाईया ने मुझे कलमाडी कहा था !”

जिमी का उत्तर सुन कर मैं निरुत्तर हो गया !

राम  कृष्ण  खुराना

9988927450

A-426, Model Town Extn.

Ludhiana (Punjab) INDIA

khuranarkk@yahoo.in



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103 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

    R K KHURANA के द्वारा
    June 29, 2011

    I could not understand

    R K KHURANA के द्वारा
    June 29, 2011

    what is this

    R K KHURANA के द्वारा
    May 26, 2011

    what does it mean

Genevieve के द्वारा
May 26, 2011

You have shed a ray of ssunihne into the forum. Thanks!

    R K KHURANA के द्वारा
    May 26, 2011

    Thanks for your comment

Neeraj के द्वारा
May 10, 2011

वाह आपने तो कहानी खतम करते करते पूरा दृश्य ही बदल दिया……बहुत अच्छी लगी आपकी रचना……इस कहानी को तो कलमाड़ी को भी प्रेषित किया जाना चाहेये…..

    R K KHURANA के द्वारा
    May 10, 2011

    प्रिय नीरज जी, आपको मेरी कहानी “गाली” अच्छी लगी ! धनयवाद ! कलमाड़ी जैसे लोगो को ऐसी कहानियां भेजने का कोइ लाभ नहीं है ! वे लोग तो बेशर्म है ! देश को बेच कर खाने वाले लोगों से आप क्या उम्मीद कर सकते है ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए पुनेह धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

    Jace के द्वारा
    May 26, 2011

    That’s a mold-breaker. Great tihnknig!

    R K KHURANA के द्वारा
    May 26, 2011

    Thanks for your love

    Kenisha के द्वारा
    May 26, 2011

    Hey, that post leaves me feeling foilosh. Kudos to you!

    R K KHURANA के द्वारा
    May 26, 2011

    अच्छा ?

    R K KHURANA के द्वारा
    June 29, 2011

    Please write clearly

PREETY के द्वारा
November 24, 2010

नमस्कार सर , आपकी ये रचना वास्तव में . बहुत ही अच्छा हे …………….. वास्तव में निरुतर कर दिया अपने मेने कहानी को अंत में समझा सचमुच कुत्ता इतनी भद्दी गलिय भला क्यों कर बर्दाश्त करेगा…………………………… APNE JO BHI LIKHA HAI SOOA AANE SUCH HAI A RAJA KE BAARE ME BHI LILHE TO ACHHA HAI.THANKS.

    R K KHURANA के द्वारा
    November 24, 2010

    प्रिय प्रीती जी, आपको मेरी व्यंग रचना “गाली” बहुत अच्छी लगी ! जानकर बहुत मन प्रसन्न हुआ ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभार १ हाँ ! ऐ राजा के बारे में लिखूंगा १ लेकिन देखा जाय तो यह सब बातें इन सब पर ही लागू होती है ! सब एक ही थैली के चट्टें बट्टे हैं ! राम कृष्ण खुराना

    Eldora के द्वारा
    May 26, 2011

    That’s way more clever than I was expecting. Thkans!

    R K KHURANA के द्वारा
    May 26, 2011

    Dear Eldora ji, thanks

    Honney के द्वारा
    May 26, 2011

    AFAICT you’ve cvoered all the bases with this answer!

    R K KHURANA के द्वारा
    June 29, 2011

    what ???

    R K KHURANA के द्वारा
    June 29, 2011

    Thanks Mr. Honney

Rashid के द्वारा
November 22, 2010

सही बात है ,, लेकिन शायद अब कलमाड़ी से बड़ी गली A Raja हो गयी है ,,, उम्मीद है की जल्दी ही कोई नया नेता A RAJA को भी पीछे छोड़ देगा !! राशिद http://rashid.jagranjunction.com

    R K KHURANA के द्वारा
    November 22, 2010

    प्रिय रशीद जी, अपने ठीक कहा है ! कलमाड़ी भी अब छोटे पड़ने लगे है ! इनकी तो लाइन बहुत लम्बी होती जा रही है और सभी एक दुसरे को पीछे छोड़ने की होड़ में लगे हुए है ! प्रतिक्रिया के लिए धनयवाद राम कृष्ण खुराना

vinay के द्वारा
November 17, 2010

नमस्कार सर , आपकी ये रचना वास्तव में . बहुत ही अच्छा हे …………….. वास्तव में निरुतर कर दिया अपने मेने कहानी को अंत में समझा सचमुच कुत्ता इतनी भद्दी गलिय भला क्यों कर बर्दाश्त करेगा……………………………………धनयबाद

    R K KHURANA के द्वारा
    November 17, 2010

    प्रिय विनय जी, आपको मेरी कहानी “गाली” ने निरुत्तर कर दिया ! कलमाड़ी नाम आज भ्रष्टाचार के रूप में ही लिया जाता है ! वैसे तो कई कलमाड़ी इस देश में है परन्तु इसका जिक्र जरूरी था ! आपकी प्रतिक्रिया किए लिए धन्यवाद राम कृष्ण खुराना

Satish Mishra के द्वारा
November 17, 2010

कमाल करते हैं खुराना जी, कुत्ता जैसा वफादारी का सिम्बल अपनी तुलना कल्माणी से कैसे बर्दाश्त कर सकता है? कहानी कुत्ते से शुरू करने के बात बीच मैं भी उसी पर केन्द्रित रखी, फिर चौंकाते हुए, खत्म कमीने पर कर दी!

    Satish Mishra के द्वारा
    November 17, 2010

    कम्पोजिंग मिस्टेक के लिए क्षमा करें. पुनः पोस्ट कर कहा हूँ कमाल करते हैं खुराना जी, कुत्ता जैसा वफादारी का सिम्बल अपनी तुलना कलमाडी से कैसे बर्दाश्त कर सकता है? कहानी कुत्ते से शुरू करने के बाद बीच मैं भी उसी पर केन्द्रित रखी, फिर चौंकाते हुए, खत्म कमीने पर कर दी!

    R K KHURANA के द्वारा
    November 17, 2010

    प्रिय श्री सतीश जी, मेरी रचना “गाली” पर आपकी प्रतिक्रिया !!! मेरे अहो भाग्य ! आपने मेरी रचना के लिए अपना अमूल्य समय निकाल कर जो टिपण्णी की उससे मेरा कद और भी ऊंचा हो गया है ! आपको धन्यवाद् कहना बहुत छोटा शब्द हो जायगा ! कैसे आभार व्यक्त करू ? कोटिश नमन ! राम कृष्ण खुराना

Dharmesh Tiwari के द्वारा
November 15, 2010

आदरणीय खुराना साहब नमस्ते,प्रवाह से भरी इस कहानी का अंत आपने ऐसे किया की जैसे कुत्ते ने पुरु को कटा ही नहीं हो,अंत काफी रोचक लगा!धन्यवाद!

    R K KHURANA के द्वारा
    November 15, 2010

    प्रिय धर्मेश जी, मेरी रचना “गाली” के लिए आपकी प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

roshni के द्वारा
November 14, 2010

आदरनिये खुराना जी टॉप ब्लॉगर बनाने पर हार्दिक बधाई ……. कहानी बहुत अच्छी लगी और अंत तो मैंने सोचा भी न था की ऐसा होगा …….. बहुत बढ़िया शुभकामान सहित

    R K KHURANA के द्वारा
    November 14, 2010

    प्रिय रौशनी जी, आपको मेरी कहानी “गाली” बहुत अच्छी लगी ! धन्यवाद ! बधाई के लिए आपका आभारी हूँ ! राम कृष्ण खुराना

Amit kr Gupta के द्वारा
November 14, 2010

नमस्कार सर बेशक आपकी सभी रचना काबिले तारीफ हैं .मन प्रसन्न हुआ .टॉप ब्लॉग में चुने जाने के लिए आपको बधाई . अमित कुमार गुप्ता हाजीपुर ,वैशाली ,बिहार http://www.amitkrgupta.jagranjunction.com

    R K KHURANA के द्वारा
    November 14, 2010

    प्रिय अमित जी, मेरी रचना “गाली” के टॉप ब्लॉग में चुने जाने पर बधाई के लिए आपका धन्यवाद ! राम कृष्ण खुराना

Tufail A. Siddequi के द्वारा
November 13, 2010

खुराना साहब अभिवादन, वो मुझे मार लेते, मुझे कोई दूसरी गाली दे देते, मां की गाली दे देते, बहन की गाली दे देते ! पर उन्होंने तो मुझे बहुत ही गन्दी गाली दी थी ! ”पुरु भाईया ने मुझे कलमाडी कहा था !” बेहतरीन. लेख और टाप ब्लोगर, दोनों की बधाई.

    R K KHURANA के द्वारा
    November 14, 2010

    प्रिय तुफैल जी, आपको मेरी रचना “गाली” बेहतरीन लगी ! बधाई के लिए धन्यवाद ! राम कृष्ण खुराना

rita singh 'sarjana' के द्वारा
November 13, 2010

आदरणीय अंकल जी , सादर अभिवादन l टॉप ब्लॉग में चयन होने के लिए मेरी तरफ से हार्दिक बधाई l

    R K KHURANA के द्वारा
    November 13, 2010

    प्रिय रीता जी, बधाई के लिए आपका धन्यवाद खुराना

Munish के द्वारा
November 13, 2010

जब मैं छोटा था तो अपने भाई से लड़ाई हो जाती थी, और हम एक दुसरे को मुलायम सिंह और लालू यादव कहते और अंत होता था वी पी सिंह पर, खैर ये बचपन की बात थी, कहा जाता है तलवार हमेशा कमजोर पर ही गिरती है और आपकी लेखनी ने भी कलमाड़ी को ही पकड़ा. वास्तव में हमाम में कलमाड़ी अकेले नंगे नहीं हैं और बाकी खिलाडी तो और लोग हैं, कलमाड़ी तो कमजोर कड़ी हैं जिनको सबने पकड़ लिया है, आप कलमाड़ी की जगह कांग्रेसी कर देते तो ज्यादा अच्छा था, कलमाड़ी कहना तो छोटी बात है और पुरु को बिना काटे भी काम चल जाता परन्तु कांग्रेसी कहने पर तो स्वाभिमान पर बन आती और फिर ढंग से काटना पड़ता.

    R K KHURANA के द्वारा
    November 13, 2010

    प्रिय मुनीश जी, मेरा व्यंग “गाली” पढ़कर आपको अपना बचपन याद आ गया ! आपके बचपन की लड़ाई मेरे व्यंग से मिलती जुलती है ! अच्छा इत्तफाक है ! फर्क सिर्फ नाम का है ! भ्रष्टाचार वही है चेहरे बदल गए है ! आपने कहा है की मैंने कलमाड़ी का ही नाम क्यों लिया ! यह समय की मांग थी ! आज के समय में कलमाड़ी ही भ्रष्टाचार का पर्याय बन गया है ! कलमाड़ी का नाम सुनने के बाद कुछ कहने की जरुरत नहीं होती ! आशय समझ में आ जाता है ! यदि मैं कांग्रेसी का नाम लेता तो लिस्ट बहुत बड़ी हो जाती ! फिर वो वजन नहीं पड़ता जो कलमाड़ी के नाम से पड़ा है ! दूसरी तरह जिमी को भी कांग्रेसी के नाते काटना पड़ता फिर तो पुरु को 14 टीके लगवाने पड़ते ! लेकिन जिमी पुरु को भाई की तरह मानता है वो ऐसे तो नहीं करेगा \ ! खैर……… इतनी गहरी से प्रतिक्रिया देने के लिए आपका आभारी हूँ ! राम कृष्ण खुराना

daniel के द्वारा
November 13, 2010

कहानी (post ) का अंत अप्रत्याक्षित था ! आपकी कहानी अचनक यों करवट लेगी कोई सोच भी नहीं सकता था !! टॉप ब्लॉग में चयन होने पर हर्द्रिक बधाइयाँ !!!

    R K KHURANA के द्वारा
    November 13, 2010

    प्रिय daniel जी, टॉप ब्लॉग में चयन होने पर बधाई के लिए शुक्रिया ! कहानी का अंत ही कहानी का सार होता है ! कहानी में क्या कहा जायगा अगर यह पहले ही पता चल जाय तो कौन पढना चाहेगा ! अंत तो ऐसे ही होना चाहिए की पढने के बाद पाठक सोचता रहे की यह क्या हो गया ! प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

आर.एन. शाही के द्वारा
November 13, 2010

आदरणीय खुराना साहब, आपको मिले इस सम्मान के लिये हार्दिक बधाइयां । किसी कारणवश पूर्व में लेख नहीं देख पाया था, इसके लिये खेद है ।

    R K KHURANA के द्वारा
    November 13, 2010

    प्रिय शाही जी, टॉप ब्लॉग में चयनित होने पर मिले सम्मान के लिए आपकी बधाई के लिए तहे दिल से शुक्रिया ! आपको लोगो का प्यार इसी प्रकार से मिलता रहे यही कामना है ! राम कृष्ण खुराना

    Jaylan के द्वारा
    May 26, 2011

    What a joy to find such clear tihnikng. Thanks for posting!

    R K KHURANA के द्वारा
    May 26, 2011

    प्रिय जयलान जी, मेरे व्यंग “गाली” पर आपको प्रतिक्रिया ने मेरा उत्साह बढाया है खुराना

    R K KHURANA के द्वारा
    April 26, 2015

    यह क्या मज़ाक है

NAVEEN KUMAR SHARMA के द्वारा
November 13, 2010

चाचा जी नमस्ते, चाचा जी टॉप ब्लॉग में चयनित होने पर हार्दिक बधाई. नवीन कुमार शर्मा बहजोई ( मुरादाबाद ) उ . प्र . मोबाइल नम्बर – 09719390576

    R K KHURANA के द्वारा
    November 13, 2010

    प्रिय नवीन जी, टॉप ब्लॉग में चयनित होने पर आपकी बधाई.के लिए आभार ! ऐसे ही स्नेह बनाये रखें राम कृष्ण खुराना

ritambhara के द्वारा
November 13, 2010

आदरणीय खुराना जी! टॉप ब्लॉग में चयनित होने के लिए बधाई!

    R K KHURANA के द्वारा
    November 13, 2010

    प्रिय ऋतंभरा जी, आपको भी बधाई ! यह सब आप लोगो के स्नेह का ही परिणाम है ! राम कृष्ण खुराना

Sunil Goel के द्वारा
November 12, 2010

खुराना जी अत्ति उत्तम Sunil Goel Gohana सुनील गोयल

    R K KHURANA के द्वारा
    November 12, 2010

    प्रिय सुनील जी, आपकी प्रतिक्रिया मेरी रचना “गाली” के लिए मिली ! आपको अच्छी लगी धन्यवाद ! आप तो पूजनीय पिताजी भग्त हंसराज जी के गाँव के रहने वाले है ! सौभाग्य शाली हैं ! धन्यवाद राम कृष्ण खुराना

sdvajpayee के द्वारा
November 10, 2010

क्‍या गजब की व्‍यंग-विधा है। नाटकीय अंत तक पहुंचे बिना बच नहीं सकते।

    R K KHURANA के द्वारा
    November 12, 2010

    आदरणीय वाजपई जी, मेरे व्यंग “गाली” पर आपको प्रतिक्रिया ने मेरा उत्साह बढाया है ! आपको मेरी रचना में गज़ब का व्यंग लगा ! इस उत्साहवर्धन के लिए आभार राम कृष्ण खुराना

S.P.SINGH के द्वारा
November 10, 2010

आदरणीय खुरानाजी हमेशा की तरह बढ़िया पोस्ट ” गाली ” की जुगाली पर बधाई,

    R K KHURANA के द्वारा
    November 12, 2010

    प्रिय सिंह साहेब, मेरी पोस्ट “गाली” के लिए आपको प्रतिक्रिया मिली ! आपका बहुत बहुत धफ्नाय्वाद राम कृष्ण खुराना

ashvinikumar के द्वारा
November 10, 2010

आदरणीय खुराना जी (पुरु भाईया ने मुझे कलमाडी कहा था !”) बहुत ही बढ़िया शब्द चुना आपने ,,जानवर तो वफादार ही होता है ,,लेकिन इन्सान की नीयत या तो वह जाने या फिर ऊपर वाला …सादर बधाई

    R K KHURANA के द्वारा
    November 12, 2010

    प्रिय अश्वनी जी, मेरा व्यंग “गाली” आपको पसंद आया ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए आपका धन्यवाद राम कृष्ण खुराना

abodhbaalak के द्वारा
November 10, 2010

खुराना जी जब इस रचना को पढना प्रारंभ किया तो चित्र देख कर लगा की किसी जानवर पर आपका लेख है, फिर लगा की सामाजिक कहानी जैसा है, कुछ और आगे बढ़ा तो लगा की रहस्य और रोमांच से भरपूर रचना है और जब अंत में पहुंचा तो ……………….. क्या रचना है सर जी, क्या तरीका है आपका कहानी को प्रस्तुत करने का, ….. बहुत बहुत बहुत बहुत बंधाई हो, आप हर बार विवश कर देते हैं की आपकी अगले लेख का बेसब्री से इंतज़ार रहे http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    R K KHURANA के द्वारा
    November 12, 2010

    प्रिय बालक जी, आपको मेरी रचना “गाली” में कई रंग दिखाई दिए ! हर्ष हुआ ! इस सभी रंगों को मिला कर एक व्यंग बना “गाली” ! आपको आनंद आया मेरा लिखा सार्थक हो गया ! अभी अभी मंच की तरफ से सूचना मिली है की मेरे इसी व्यंग को “टाप ब्लाग्स” के लिए चयनित किया गया है ! जो की ऊपर “टॉप ब्लाग्स” में प्रदर्शित हो रहा है ! आपके स्नेह के लिए आभार राम कृष्ण खुराना

NAVEEN KUMAR SHARMA के द्वारा
November 10, 2010

चाचा जी नमस्ते, चाचा जी आपने बहुत ही रोचक तरीके से व्यंग पेश किया. मुझे बहुत ही अच्छा व्यंग्य लगा पुरू ने जिमी को बहुत ही गन्दी गाली दी तो जिमी पुरू को काटता क्यों नहीं? जिमी को तो ये गली बहुत बुरी लगी लेकिन कलमाड़ी और कांग्रेसियों को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता उन्हें कोई कितनी ही गाली देता रहे उनको कोई शर्म नहीं 700 करोड़ का काम 70000 करोड़ में करवाने वाले का नाम लेना भी एक गाली ही है लेकिन कांग्रेसियों को इसमें कोई धांधली नजर ही नहीं आ रही है वो तो कलमाड़ी को और खुद को पाक साफ बता रहे हैं नवीन कुमार शर्मा बहजोई ( मुरादाबाद ) उ . प्र . मोबाइल नम्बर – 09719390576

    R K KHURANA के द्वारा
    November 12, 2010

    पिय नवीन जी, हर बार की तरह मेरे व्यंग “गाली” के लिए आपकी प्रतिक्रिया मिली ! आभार राम कृष्ण खुराना

    Champ के द्वारा
    May 26, 2011

    Real brain power on display. Thanks for that ansewr!

    R K KHURANA के द्वारा
    May 26, 2011

    Thank you very much

ajaykumarjha1973 के द्वारा
November 10, 2010

जब तक कलमाडी नहीं पढा था ..तब तक कहीं और ही जा रहा था ,,,,आपने तो पूरा का पूरा धो डाला

    R K KHURANA के द्वारा
    November 12, 2010

    प्रिय झा जी, मेरी रचना “गाली” के लिए आपका स्नेह मिला धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

kmmishra के द्वारा
November 9, 2010

”पुरु भाईया ने मुझे कलमाडी कहा था !” कांग्रेसी कह देता तब भी सहा जा सकता था. कलमाड़ी . अक्क थू.

    R K KHURANA के द्वारा
    November 12, 2010

    प्रिय मिश्र जी, आजकल कलमाड़ी का नाम ही एक गाली बन गया है ! और आपका …..अक्क थू…….करना जायज है ! मेरी कथा “गाली” के लिए आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभार राम कृष्ण खुराना

Alka Gupta के द्वारा
November 9, 2010

श्री खुराना जी ,पोस्ट  पढ़ती जा रही थी और गाली ..अंत में….  कलमाडी…… बहुत अच्छी व्यंग्यात्मक रचना है 

    R K KHURANA के द्वारा
    November 12, 2010

    प्रिय अलका जी, आपको मेरी कहानी “गाली” अच्छी लगी ! आपका धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

November 9, 2010

बधाई हो खुराना जी. बहुत ही रोचक तरीके से व्यंग पेश किया आपने.

    R K KHURANA के द्वारा
    November 10, 2010

    प्रिय श्रीवास्तव जी, मेरी रचना “गाली” के लिए आपका स्नेह मिला ! आभार राम कृष्ण खुराना

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
November 9, 2010

आदरणीय खुराना जी………. बड़ी रोचकता से इसको पढ़ रहा था………. लगा न जाने क्या होगा…….. क्यों कटा जिमी ने पुरु को………. पर ……………………..इसे कहते है……खोदा पहाड़ और निकला कलमाड़ी……………..

    R K KHURANA के द्वारा
    November 10, 2010

    प्रिय पियूष जी, मेरी कहानी “गाली” के लिए आपकी प्रतिक्रिया मिली धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

deepak joshi के द्वारा
November 9, 2010

आदरणीय खुराना जी, बहुत ही सस्‍पेंस भरा चित्रण किया है इस रचना में और अंत में आकर गाली की परिभाषा पता चली। बहुत ही सुन्‍दर व्‍यंग कसा और एक अच्‍छी रचना के लिए धन्‍यवाद। -दीपकजोशी63

    R K KHURANA के द्वारा
    November 10, 2010

    प्रिय दीपक जोशी जी, मेरे व्यंग “गाली” में आपको सस्पेंस नज़र आया ! यही कहानी होती है की पहले से आपको इसके अंत का पता न लग सके ! शुरू कहाँ से हुई और ख़त्म कहाँ होगी पता नहीं ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद राम कृष्ण खुराना

nishamittal के द्वारा
November 9, 2010

अपनी पोस्ट कलमाड़ी को पढवा` दीजिये शायद कुछ लज्जावनत हो जाएँ अच्छा आलेख

    R K KHURANA के द्वारा
    November 10, 2010

    प्रिय निशा जी, कलमाड़ी जैसे बेशर्म को यह पोस्ट पढवाने का क्या फायदा ? ऐसे कितने ही कलमाड़ी घूम रहे है जिनका यह सरकार भी कुछ नहीं बिगाड़ सकी ! हम तो अपने दिल की भड़ास निकाल लेते है ! शायद कही इसकी गूँज सुनाई दे जाय तो कुछ असर हो जाय ! आपका स्नेह मेरी कहानी “गाली” के लिए मिला ! आभार राम कृष्ण खुराना

    R K KHURANA के द्वारा
    November 9, 2010

    प्रिय डेनिएल जी, यदि आपकी कोइ रचना जागरण जंक्शन पर प्रतिबंधित की गयी है तो जरुर उसमे कोइ आपत्तिजनक बात लिखी होगी जो इस मंच के विचारों से मेल नहीं खाती होगी ! मेरा सुझाव है की ऐसे लेख और ऐसी टिप्पणियों से बचना चाहिए !

    Cathy के द्वारा
    May 26, 2011

    Didn’t know the forum rules allowed such brliilant posts.

    R K KHURANA के द्वारा
    May 26, 2011

    प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया

    R K KHURANA के द्वारा
    May 30, 2012

    Yes

deepak के द्वारा
November 9, 2010

एक बेहतरीन व्यंग . पहले तो लगा कोई महादेवी वर्मा टाइप रेखा चित्र है पर बाद में दिल बाग़ बाग़ हो गया आपकी सोच देख के . सच है इतनी बड़ी गाली उस वफादार के लिए. साधुवाद . अगली पोस्ट का इन्तिज़ार रहेगा

    R K KHURANA के द्वारा
    November 10, 2010

    प्रिय दीपक जी, मेरी व्यंग रचना “गाली” पर आपका स्नेह मिला ! कहानी पढ़ कर आपका दिल बाग़ बाग़ हो गया ! जानकर बहुत दिल खुश हुआ ! मेरा लिखा सार्थक हो गया राम कृष्ण खुराना

bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
November 9, 2010

आदरणीय श्री खुराना जी, रेखाचित्र के साथ व्‍यंग्‍य का मजा । वैसे आपनें बात बहुत सही लिखी है । जिमी तो क्‍या कोई भी होता तो इस गाली पर काट खाता । 700 का काम 70000 में करनें व करवानें वाले को कौन पसंद करेगा । वह भी इस बढ़ती महंगाई के दौर में । अरविन्‍द पारीक

    R K KHURANA के द्वारा
    November 9, 2010

    प्रिय अरविन्द जी, जिमी तो एक प्रतीक है ! ऐसे ऐसे कई कलमाड़ी हमारे देश में है जो देश को खोखला कर रहे है ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभार ! राम कृष्ण खुराना

Amit kr Gupta के द्वारा
November 9, 2010

नमस्कार सर ,अच्छी रचना. बधाई http://www.amitkrgupta.jagranjunction.com

    R K KHURANA के द्वारा
    November 9, 2010

    प्रिय अमित जी, मेरी रचना “गाली” के लिए आपका स्नेह मिला ! आपको रचना अच्छी लगी ! धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना


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