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डेढ लाख के हस्ताक्षर

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डेढ लाख के हस्ताक्षर

(एक सत्य अपराध कथा)

राम कृष्ण खुराना

“आपके खाते में डेढ लाख रुपया कम है ! वो कहां गया ?”

“डेढ लाख रुपया ?” कीरतपुर के एस डी ओ का रंग उड गया !

“जी हां, आपने जो डेढ लाख रुपये के चेक काटे हैं उसकी कोई तफसील नहीं है !” एक्स ई एन ने तीखी नज़रों से देखते हुए पुनः प्रश्न किया !

“सर मुझे तो मालूम ही नहीं !” एस डी ओ ने कहा !

“तो और किसको मालूम है ?” एक्स ई एन साहब चीखे ! आवेश के कारण उसके चेहरे पर रक्त फैल गया ! होंठ पत्ते की तरह कांप रहे थे ! कुछ देर की भयावह चुप्पी के बाद वे फिर बोले – “अगर आपने शाम तक डेढ लाख रुपये का हिसाब न दिया तो मैं गबन के केस में आपको अन्दर करवा दूंगा !”

“गबन ?” एस डी ओ का मुंह खुला का खुला रह गया ! एस डी ओ ने रुमाल से अपने चेहरे पर उभर आया पसीना पोंछा

नंगल डैम बन चुका था ! भाखडा प्रोजेक्ट की हाईडल चैनल में नंगल सर्कल था और सर्कल के आधीन चांदपुर डिविज़न ! चांदपुर डिविज़न का एक सब-डिविज़न कीरतपुर भी था ! नहर बन कर तैयार हो गई थी ! अतः वहां पर निर्माण कार्य नहीं के बराबर ही था ! नहर की देख-रेख का भार कीरतपुर सब्-डिविज़न पर था ! सरकार की ओर से प्रोजेक्ट बनाने के लिए करोडों रुपये स्वीकृत हुए थे ! एस डी ओ को अधिकार था कि वह उचित कार्य के लिए रुपये खर्च कर सके ! जितना भी बिल बनता उसका चेक  काट दिया जाता था ! चेकबुक एस डी सी के पास ही रहती थी ! वह चेक भरकर एस डी ओ के हस्ताक्षर करवा लेता था और चेक स्टेट बैंक से कैश हो जाता था !

एक दिन एस डी ओ साहब कहीं बाहर गये हुए थे ! ए एस डी सी को किसी आवश्यक फार्म पर हस्ताक्षर करवाने थे ! उसने एस डी सी को कहा –“आज साहब छुट्टी पर हैं, मुझे एक फार्म पर सिग्नेचर करवाने थे ! कल इतवार है, अब बात परसों पर जा पडेगी !”

एस डी सी ने सिगरेट का धुआं नाक से छोडते हुए बडी लापरवाही से कहा –“अरे, छोड यार, साहब के हस्ताक्षर तो मैं ऐसे कर दूं कि खुद साहब भी न पह्चान पायें !”

“सच……!” ए एस डी सी ने आश्चर्य से कहा !

“और नहीं तो क्या झूठ ?” इतना कहकर एस डी सी ने एक कागज़ उठाया और झट से साहब के हस्ताक्षर कर दिए ! ए एस डी सी कभी एस डी सी और कभी उसके द्वारा किए गए हस्ताक्षर को फटी-फटी आंखों से देखने लगा ! उसने साहब के और कागज़ों पर किए गए हस्ताक्षरों से उसे मिलाया ! दोनों में अंतर कर पाना कठिन था !

बात आई गई हो गई ! एस डी सी पूर्ववतः अपने काम में लग गया ! परंतु भगवान को यह मंज़ूर न था इस घटना ने ए एस डी सी का दिमाग खराब कर दिया ! उसके अन्दर का शैतान जाग उठा ! वह इतवार को सारा दिन यही सोचता रहा ! अपने मन में कई प्रकार की स्कीमें बनाता रहा ! सोमवार को सुबह आफिस में आते ही उसने धीरे से एस डी सी को अपनी योजना बताई ! एस डी सी ने सुना तो वो आग बबूला हो गया ! उसने अपने जीवन में कभी ऐसी बात सोची भी न थी ! उसके दिमाग में अपने अस्सिटेंट के कहे शब्द बार बार चक्कर काट रहे थे ! एस डी सी का दिमाग चकराने लगा ! परंतु कुछ समय बाद जब उसने ठंडे दिमाग से सोचा तो उसको ए एस डी सी के बात सच जान पडी ! यहां पर तो जिन्दगी भर कलम घिसने पर भी इतनी कमाई नहीं हो सकती जितना रुपया पल भर में झोली में आ सकता था ! उसके दिमाग में योजनानुसार मिलने वाले रुपये घूमने लगे !

आफिस में बैठे-बैठे एस डी सी लखपति बनने के सपने देखने लग ! शानदार बंगला, नौकर-चाकर, चमकती कार की शान उसके मन में एक अज़ीब सा उन्माद भर रही थी ! उसकी कल्पना बंगले के प्रत्येक कमरे को आधुनिक सामान से सज़ा देख रही थी !

उस दिन दोनों का दिल काम में न लगा ! वे अपने मन में इस योजना को सफल होता देखते रहे ! इसी तरह से पांच-छ्ः दिन बीत गए ! समय के साथ साथ उनकी योजना की तैयारी पूरी होती गई ! एक दिन अच्छे मुहुर्त में उन्होंने अपनी तस्वीर में रंग भरना आरम्भ कर दिया !

सबसे पहले ए एस डी सी ने लम्बी छुट्टी ली ! वो अपने परिवार सहित दिल्ली चला गया ! वहां उसने एक बैंक में अपना खाता फर्जी ठेकेदार के नाम से खुलवाया ! उधर एस डी सी ने चैकबुक के बीच में से एक चेक काउंटर फाईल सहित निकाल लिया ! चेक में एक लाख रुपया उस फर्जी ठेकेदार के नाम से भर दिया ! चेक पर एस डी ओ के हस्ताक्षर स्वयं करके चेक को दिल्ली भेज दिया ! ए एस डी सी ने वो चेक अपने बैंक में फर्जी खुलवाए खाते में लगा दिया ! बैंक ने पास होने के लिए चेक स्टेट बैंक में फारवर्ड कर दिया ! चेक पास हो गया और उस फर्जी ठेकेदार के खाते में पैसे जमा हो गए ! उसके आठ दस दिन बाद फिर एस डी सी ने उसी प्रकार से दूसरा चेक निकाला और उसमें पचास हज़ार रुपये भरकर दिल्ली भेज दिया !

इस बार वो चेक स्टेट बैंक में गया तो हस्ताक्षरों में कुछ कमी रह जाने के कारण चेक “हस्ताक्षर नहीं मिलते” के नोट के साथ वापिस आ गया ! बैंक वालों ने फर्जी ठेकेदार से कहा के चेक डिस-आनर हो गया है ! अतः इसे कैश करवाने के लिए एस डी ओ से दोबारा वैरिफाई करवाना आवश्यक है !

ए एस डी सी ने रोपड पोस्ट मास्टर की मार्फत एक लिफाफे में वो चेक एस डी सी को भेज दिया ! (रोपड कीरतपुर से थोडी ही दूरी पर स्थित है) तथा अलग से एक पत्र द्वारा एस डी सी को इसकी सूचना दे दी ! साथ में यह भी लिख दिया कि वह चेक पर दोबारा हस्ताक्षर करके उसे भेज दे ताकि चेक कैश हो सके !

एस डी सी ने रोपड पोस्ट आफिस जाकर रजिस्ट्री छुडवा ली और एस डी ओ की मोहर लगा कर स्वयं ही हस्ताक्षर करके वैरीफाई कर दिया और कैश होने के लिए पुनः दिल्ली भेज दिया ! अंततः वह चेक भी पास हो गया !

महीना समाप्त होने पर बैंक ने डिविज़न को पूरा हिसाब भेज दिया ! जब डिविज़न में एकाउंट सेक्शन में हिसाब मिलाया गया तो डेढ लाख रुपये का अंतर आया ! छानबीन करने पर पता चला कि यह चेक कीरतपुर सब-डिविज़न से काटे गए हैं ! जबकि उस माह वहां पर कोई काम नहीं हुआ था !

डिविज़न के अधिकारी तुरंत हरकत में आ गए ! उन्होंने एक्स ई एन को कहा तो एक्स ई एन ने कीरतपुर के एस डी ओ को धमकी दी कि अगर शाम तक डेढ लाख रुपये का हिसाब न मिला तो उसे गबन के केस में जेल भिजवा दिया जायगा ! एस डी ओ अपने पांव तले की धरती खिसकती जान पडी ! वह परेशान सा अपने आफिस में आया ! उसी समय एस डी सी ने अपनी छुट्टी के लिए एस डी ओ को प्रार्थना पत्र दे दिया ! एस डी ओ का माथा ठनका ! चेक बुक भी तो एस डी सी के पास ही रहती है ! एस डी ओ ने एस डी सी के खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवा दी !

बस फिर क्या था ! एस डी सी के कहने पर पुलिस ने दिल्ली में ए एस डी सी को भी गिरफ्तार कर लिया ! पुलिस की थर्ड-डिग्री की मार के आगे ए एस डी सी भी अधिक देर तक न टिक सका ! उसने सब सच उगल दिया ! वह पुलिस इंस्पेक्टर को अपने घर ले जाकर अपने पिता से बोला –“पिता जी, इन्हें सारे रुपये दे दीजिए !”

वृद्ध पिता अपने पुत्र के साथ पुलिस को देखकर एकदम घबरा गया ! उसी घबराहट में उसके मुंह से निकला –“अभी के या सारे ?”

छिलके उतरने लगे ! भेद खुलने लगे ! बाद में मालूम हुआ कि यह सिर्फ डेढ लाख रुपये का ही घोटाला नहीं था ! ए एस डी सी का दिमाग पहले भी ऐसे ही कई घोटाले कर चुका था ! उसकी शादी एक ईरानी औरत के साथ हुई थी ! और उसके दो बच्ची भी थे ! जब उस औरत ने सुना कि उसके पति ने ऐसा घृणित कार्य किया है तो वह हथकडी में बंधे अपने पति के मुंह पर थूक कर बोली –“मुझे नहीं पता था कि मेरा पति इतना गिरा हुआ है ! क्या हिन्दुस्तानी ऐसे भी होते हैं ?”

इसके बाद वो स्त्री अपने दोनो बच्चों को साथ लेकर ईरान वापिस चली गई !

राम कृष्ण खुराना

9988950584

khuranarkk@yahoo.in

www.khuranarkk.jagranjunction.com



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74 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

    R K KHURANA के द्वारा
    November 16, 2012

    who you

    R K KHURANA के द्वारा
    November 16, 2012

    virus

Brandi के द्वारा
May 26, 2011

Cool! That’s a clever way of looikng at it!

    R K KHURANA के द्वारा
    July 26, 2012

    yes

Ritambhara tiwari के द्वारा
October 30, 2010

आदरणीय खुराना जी! यह भ्रस्टाचार तो देश की ताकत अन्दर से और गरिमा को बाहर से तहस नहस कर रहा है पता नहीं इन सबका अंत कभी होगा भी या नहीं ! वैसे इस प्रस्तुति के लिए aabhaar! http://ritam.jagranjunction.com

    R K KHURANA के द्वारा
    October 31, 2010

    प्रिय ऋतंभरा जी मेरी यह सत्य कथा “डेढ़ लाख के हस्ताक्षर” तो एक प्रतीक मात्र है ! आज कोइ अख़बार उठा कर देख लीजिये ऐसे हजारों समाचार आपको पढने को मिलेंगे ! इससे बड़े बड़े कांड हो रहे है ! ऊपर वाले कोइ कारवाही करने की बजाय उनको सरंक्षण दे रहे है ! और जनता आशय मूक बनी सब कुछ देख रही है ! भगवान् ही मालिक है ! राम कृष्ण खुराना

Ritambhara tiwari के द्वारा
October 30, 2010

आदरणीय खुराना जी! यह भ्रस्टाचार तो देश की ताकत अन्दर से और गरिमा को बाहर से तहस नहस कर रहा है पता नहीं इन सबका अंत कभी होगा भी या नहीं ! वैसे इस प्रस्तुति के लिए aabhaar!

    R K KHURANA के द्वारा
    October 31, 2010

    प्रिय ऋतंभरा जी ठीक लिखा आपने ! आज सरे फसाद की जड़ भ्रष्टाचार ही है ! पता नहीं कब ख़त्म होगा ! खुराना

bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
October 28, 2010

आदरणीय श्री खुराना जी प्रणाम । यह जानकार मन प्रसन्‍न हुआ कि आपके दामाद अब स्‍वस्‍थ हैं । मैं भी अस्‍वस्‍थता के कारण इस मंच से अनुपस्थित था । लेकिन आज ही आपकी तीनों रचनाएं जब डाकू अमृतलाल से मेरी भेंट हुई, कलमाडी से बडे तो नहीं व डेढ लाख के हस्ताक्षर पढ़ी । डाकू से भेंट ही मन को कंपा देती है और उस समय तो इनका बोल-बाला था । अंधी व मुर्खतापूर्ण वीरता ना दिखाना ही ठीक था । कलमाड़ी जी के कृत्‍यों को बयां करती आपकी कविता हम हिन्‍दी दिवस है मनाते की तरह अच्‍छी बन पड़ी हैं । आपनें थोड़े में ज्‍यादा बात लिख दी है । प्रिय श्री मिश्र जी ने सही लिखा है कि अपराध कथा का लेखन सहज व सरल नहीं हैं । आपनें बहुत सुंदर रचना लिखी है । एक मछली से सारा तालाब गंदा हो जाता है यही इसका सार भी है । अरविन्‍द पारीक

    R K KHURANA के द्वारा
    October 28, 2010

    प्रिय अरविन्द जी, आप लोगो की दुआ और इश्वर की कृपा से मेरे दोनों दामाद अब स्वस्थ्य लाभ ले रहे है ! आपकी शुभकामनायों के लिए धन्यवाद ! आपको मेरी तीनो रचनाएँ पसंद आई ! आपके प्रोत्साहन से दिल में और लिखने की उमंग पैदा होती है ! आभारी हूँ ! खुराना

kajalkumar के द्वारा
October 20, 2010

इस बात दु:ख हुआ कि एक हिन्दुस्तानी की वजह से सदियों में कमाया मान खो दिया हमने..

    R K KHURANA के द्वारा
    October 20, 2010

    प्रिय काजल जी, हम लोग अपने थोड़े से लाभ के लिए अपना तथा अपने देश का नाम डुबो देते है ! यही बताती है यह कहानी आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद राम कृष्ण खुराना

Ramesh bajpai के द्वारा
October 20, 2010

आदरणीय भाई जी आप की कथा ने यह सन्देश दिया की सत्य सामने खड़ा होता ही है शातिर अपराधी को भी उसके किये का दंड मिलता है . ये कथाये बुराई से दूर रहने व सत्य को ईमानदारी को अपनानाने के लिए एक तरह से प्रेरित भी करती है धन्यवाद

    R K KHURANA के द्वारा
    October 20, 2010

    प्रिय रमेश जी, बुराई से दूर रहने का सन्देश देती आपकी प्रतिक्रिया मिली ! मैं आपका आभारी हूँ ! राम कृष्ण खुराना

दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
October 20, 2010

आदरणीय खुराना जी, प्रणाम बहुत ही अच्‍छी रचना काफी अन्‍तराल के बाद पढ़ने को मिली। और यह सही ही है एक मछली पुरे तालाब को गंदा कर देती है। एक व्‍यक्‍ति की धृणित कर्म के कारण सभी हिन्‍दुस्‍तानीयों को गाली मिलती है पर कौन परवाह करता है उन्‍हें तो अपना स्‍वार्थ सिद्ध करना होता है। और यह जानते हुए भी वह ऐसा काम करते है कि इश्‍क और मुश्‍क छुपाए नहीं छुपते। http://deepakjoshi63.jagranjunction.com

    R K KHURANA के द्वारा
    October 20, 2010

    प्रिय जोशी जी, आजकल मछलिय नहीं बल्कि बड़े बड़े मगरमच्छ पैदा हो गए है जो देश को दोनों हाथों से लूट रहे है ! खेल गाँव का ८००० हज़ार करोड़ का घपला क्या दर्शाता है ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभार राम कृष्ण खुराना

alkargupta1 के द्वारा
October 20, 2010

खुराना जी नमस्कार मै जागरण परिवार की अभी कुछ दिन पहले ही सदस्य बनी हूँ यहाँ आज आपके लेख को पढ़ा इस सत्य कथा के द्वारा आपने देश में भ्रष्टाचार  फैलाने वालों का बिल्कुल सही चित्रण किया है वृद्ध पिता के इन शब्दों ने - अभी के या सारे- पुत्र की सारी कलई खोल दी। यही कारण है कि ऐसे ही कुछ  भ्रष्ट लोगों के कारण सभी हिंदुस्तानी गालियों के शिकार हो जाते हैं।बहुत ही अच्छा  ले बधाई।

    R K KHURANA के द्वारा
    October 20, 2010

    सुश्री अलका जी, आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद खुराना

    Janaya के द्वारा
    May 26, 2011

    And I thought I was the sensible one. Tnakhs for setting me straight.

    R K KHURANA के द्वारा
    November 16, 2012

    Thanks janaya

alkargupta1 के द्वारा
October 19, 2010

खुराना जी नमस्कार मै जागरण परिवार की अभी कुछ दिन पहले ही सदस्य बनी हूँ यहाँ आज आपके लेख को पढ़ा इस सत्य कथा के द्वारा आपने देश में भ्रष्टाचार  फैलाने वालों का बिल्कुल सही चित्रण किया है वृद्ध पिता के इन शब्दों ने - अभी के या सारे- पुत्र की सारी कलई खोल दी। यही कारण है कि ऐसे ही कुछ  भ्रष्ट लोगों के कारण सभी हिंदुस्तानी गालियों के शिकार हो जाते हैं।बहुत ही अच्छा  लेख ऐसे लेख के लिए बधाई।

    R K KHURANA के द्वारा
    October 20, 2010

    सुश्री अलका जी, जागरण मंच पर आपका स्वागत है ! आपको मेरी रचना अच्छी लगी ! मेरा मन भी खुश हो गया ! मेरा मकसद यही होता ही की किसी न किसी तरह से सबका मनोरंजन हो, कुछ शिक्षा मिले और कुछ नया पढने को मिले ! आपकी प्रतिक्रिया से मेरी यह कोशिश सफल हो गयी ! धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

chaatak के द्वारा
October 19, 2010

चाचा जी, ये सत्यकथा हिन्दुस्तान के वास्तविक हालत को दर्शाती है| सबसे ज्यादा बुरी बात लगी जब ईरानी महिला न उस बेईमान को हिन्दुस्तानी कहकर उसके मुंह पे थूका| हिन्दुस्तानियों से ईमानदार कौम पूरी दुनिया में नहीं है वो महिला किसी जात के आधे के चक्कर में हिन्दुस्तानियों को गाली दे के गई ये बात खटक गई मुझे| आप बताओ ऐसे जात के आधों का क्या किया जाय कि हिन्दुस्तानियों को गाली न खानी पड़े? अच्छा लेखन ! बधाई!

    R K KHURANA के द्वारा
    October 20, 2010

    प्रिय चातक जी, आपने सही कहा ! जहाँ तक ईरानी महिला की बात है तो उसने तो विश्वास किया था जब उसके विश्वास को धक्का लगा तो वो सभी हिन्दुस्तानियों को ही गाली दे गयी ! यह तो मनुष्य की फितरत है ! हम लोग भी तो यही करते हैं ! कहानी आपको अच्छी लगी ! धन्यवाद राम कृष्ण खुराना

    rajkamal के द्वारा
    October 20, 2010

    चातक जी ….जिस बात कि तरफ आपने इशारा किया है ..उसको मैंने जानबूझ कर नज़रंदाज़ कर दिया था … यह तो हमारे आदरणीय चाचा जी को चाहिए था कि इस सच्चाई को बयाँ ना करते …. शायद हिन्दुस्तानियों को गाली दे कर इनके मुह का जायका कुछ अच्छा हुआ है …. पत्नी के लिए पति सिर्फ पति ही होना चाहिए …. ना कि हिन्दुस्तानी और इरानी या फिर कोई और ….

    R K KHURANA के द्वारा
    October 20, 2010

    प्रिय राज जी, सच बात बहुत कडवी होती है ! और सच्चाई छुपाने से नहीं छुपती ! फिर आपने चातक जी की टिपण्णी अच्छी तरह से नहीं पढ़ी ! उन्होंने लिखा है कि “ये सत्यकथा हिन्दुस्तान के वास्तविक हालत को दर्शाती है” ! 8000 करोड़ रूपये का घोटाला करने वाले कौन हैं ! इरान में भारतीय संस्कार नहीं है ! उस औरत ने अपने देश को छोड़ कर प्यार में शादी की थी ! प्यार हमेशा विश्वास पर ही टिका होता है ! जब प्यार में धोखा मिलता है तो दिल के टुकड़े हो जाते हैं फिर हर कोइ आपा खो बैठता है ! यही हाल उस महिला का हुआ ! सच्चाई को छिपाना तो कभी भी उचित नहीं हो सकता ! यदि आप गलत करोगे तो नतीजा तो बुरा ही होगा ! खुराना

K M MIshra के द्वारा
October 19, 2010

काका प्रणाम । किसी ने सच ही कहा है, झूठ के पांव नहीं होते । अपराधी कितना ही चालक क्यों न हो एक न एक दिन पकड़ा ही जाता है । जागरण जंक्शन पर आपने अपराध कथा की शुरूआत करके एक नये अध्याय की शुरूआत की है । अपराध कथा लिखना प्रत्रकारिता में एक कठिन काम माना जाता है । आभार ।

    R K KHURANA के द्वारा
    October 19, 2010

    प्रिय मिश्र जी, जुग जुग जियो ! आप तो अभिवक्ता हैं आप की अदालत में तो ऐसे कई केस आते होंगे जिसमे अपराधी तरह तरह के तरीके अपना कर लोगो को मुर्ख बना कर पैसे ऐंठ लेते होंगे ! और इस तरह के अपराध करने वाले भी बहुत केस आते होंगे. ! आप को इसका ज्यादा अनुभव होगा ! यह एक सत्य घटना थी सोचा आप लोगों से सांझी कर लूं ! आप मेरे इतने अपने हैं की आपके लिए धन्यवाद् शब्द बहुत छोटा पद जायगा ! हाँ, आपने अपने पिता श्री का ब्लाग बनाया है जानकर अच्छा लगा ! उनकी रचनाएँ पढने को भी मिलेगीं ! मेरा उन्हें नमस्कार कहना ! राम कृष्ण खुराना

    R K KHURANA के द्वारा
    October 19, 2010

    कृपया अभिवक्ता के बजे अधिवक्ता पढ़े

rajkamal के द्वारा
October 19, 2010

चाचा जी …प्रणाम ! अगर वोह मेरी तरह काम करते तो शायद वोह कभी भी नहीं पकडे जाते …. शायद उस समय दलाली का रिवाज नहीं होगा …

    R K KHURANA के द्वारा
    October 19, 2010

    प्रिय राज जी, मेरी आपसे प्रार्थना है की कृपया आप अपना काम करने का तरीका लोगो को बताएं ! शायद कई लोग लाभ उठा सकें ! धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

Dharmesh Tiwari के द्वारा
October 19, 2010

आदरणीय खुराना साहब,ऐसी घटना को समाज के बिच लाने के लिए धन्यवाद!

    R K KHURANA के द्वारा
    October 19, 2010

    प्रिय धर्मेश जी, आपके स्नेह के लिए धन्यवाद ! खुराना

s.p.singh के द्वारा
October 19, 2010

आदरणीय खुराना जी, प्रणाम —- इस देश के कर्णाधारों की यही तो सच्चाई है ——- वो किसी शायर ने भी कहा है \" हर शाख पे उल्लू बैठा है अंजामे गुलिस्तां क्या होगा \" धन्यवाद

    R K KHURANA के द्वारा
    October 19, 2010

    प्रिय सिंह साहेब, आपका कथन बिलकुल ठीक है सिंह साहेब, अगर यह शाख के उल्लू उड़ जाएँ तो ही देख का भला हो सत्का है वरना तो इश्वर ही मालिक है ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद ! राम कृष्ण खुराना

Manish Singh के द्वारा
October 19, 2010

adarniya khurana जी pranaam, aapki lekhni se ek aur shikshaprd kahani padkar aachcha laga……… sach hai… bure kaam ka bura natiza……….. manishgumedil.jagranjunction.com

    R K KHURANA के द्वारा
    October 19, 2010

    प्रिय मनीष जी, आपको मेरी रचना अच्छी लगी जानकर मन ख़ुशी से भर गया ! आज की दुनिया सिर्फ पैसे की रह गयी है ! लोगो के खून सफ़ेद हो चुके है और रिश्वत का बोलबाला है ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद राम कृष्ण खुराना

sdvajpayee के द्वारा
October 19, 2010

  आदरणीय खुराना जी,     एक सीख – संदेश देती अच्‍छी कहानी।

    R K KHURANA के द्वारा
    October 19, 2010

    प्रिय श्री वाजपेयी जी, मेरी रचना पर आप जैसे लेखक द्वारा दी गयी प्रतिक्रिया मेरे लिए अमृत के सामान है ! आपकी प्रतिक्रिया पाकर मैं धन्य हो गया ! मैं किन शब्दों में आपका आभार वयक्त करूँ ! बहुत बहुत धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

ashvini kumar के द्वारा
October 19, 2010

आदरणीय खुराना जी आपको आज ही पढ़ा ,कथा ने मंत्रमुग्ध कर दिया,लेकिन आज के दौर को देखिये रिश्वत तो आज ऋशिवत हो गई है और भ्रस्टाचार वैराग ,,आवाज उठाने वाले को पागल कहा जाता है(हरि अनंत हरि कथा अनन्ता) की तरह इसकी कथाओं का भी अंत नही है********आपका स्नेहाकंछी

    R K KHURANA के द्वारा
    October 19, 2010

    प्रिय अश्वानि जी, मेरी रचना “डेढ़ लाख के हस्ताक्षर” के लिए आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया मिली ! आपने समय निकल कर पढ़ा और मेरा होसला बढ़ाने के लिए प्रतिक्रिया भी दी ! मैं आपका आभारी हूँ ! भ्रष्टाचार और रिश्वत ने आज लोगो को रसातल में पंहुचा दिया है ! पैसे की अंधी दौड़ ने अपने पराये का भेद भी समाप्त कर दिया है ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद ! राम कृष्ण खुराना

    Jessalyn के द्वारा
    May 26, 2011

    You’ve got it in one. Couldn’t have put it btteer.

Aakash Tiwaari के द्वारा
October 19, 2010

आदरणीय खुराना जी, आपकी लेखनी हमेशा ही बहुत अच्छी होती है,एक बार पढना शुरू कर दो तो फिर उठने का मन नहीं करता.. बुराई कभी भी नहीं छुपती आपकी ये बात इकदम सत्य है… आकाश तिवारी

    R K KHURANA के द्वारा
    October 19, 2010

    प्रिय आकाश जी, आपको मेरी रचना “डेढ़ लाख के हस्ताक्षर” अच्छी लगी मुझे भी बहुत अच्छा लगा ! बुराई का अंत तो बुरा ही होता है ! यही शिक्षा मिलती है ! आपको प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद राम कृष्ण खुराना

NAVEEN KUMAR SHARMA के द्वारा
October 19, 2010

CHACHA JI आपके दामाद जी की तबियत ख़राब है अब वो कैसे है भगवन से प्रार्थना है की वो जल्दी स्वस्थ हो जाये, नवीन कुमार शर्मा बहजोई (मुरादाबाद ) उ . प्र . मोबाइल नम्बर – 09719390576

    R K KHURANA के द्वारा
    October 19, 2010

    प्रिय नवीन जी, मेरे दोनों दामाद अब आगे से बेहतर हैं और स्वस्थ्य लाभ कर रहे है ! आप सुनाईये आपके घर में सब कुशल मंगल है ! आपकी शुभकामनायों के लिए धन्यवाद ! खुराना

NAVEEN KUMAR SHARMA के द्वारा
October 19, 2010

चाचा जी नमस्ते आपकी डेढ़ लाख के हस्ताक्षर कहानी पढ़ी बहुत ही अच्छा लिखा है चाचा जी एक न एक दिन झूठ तो पकड़ा ही जाता है चाचा जी देरी के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ नवीन कुमार शर्मा बहजोई (मुरादाबाद ) उ . प्र . मोबाइल नम्बर – 09719390576

    R K KHURANA के द्वारा
    October 19, 2010

    प्रिय नवीन जी, झूठ के पैर नहीं होते ! एक न एक दिन पकड़ा ही जाता है ! इसलिए सच्चाई के रस्ते पर ही चलाना चाहिए वरना वही हाल होता है ! प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद राम कृष्ण खुराना

abodhbaalak के द्वारा
October 19, 2010

खुराना जी, सदा ही सुनते आये हैं की सत्य की सदा जीत होती है, और बे इमानी हमेशा नहीं फलती फूलती, आपके इस सत्य कथा से भी येही देखने को मिला, पर काश हमारे नेता, जो डेढ़ लाख ही नहीं, न जाने किते अरब हराम का कमा कर डकार जाते हैं, उनके साथ भी ऐसा हो. सराहनीय रचना के लिए बधाई हो http://abodhbaalak.jagranjunction.com

    R K KHURANA के द्वारा
    October 19, 2010

    प्रिय अबोध जी, आपका कहना सत्य है ! यह कहानी लगभग ५०-६० साल पुरानी है ! उस समय डेढ़ लाख रुपया बहुत ज्यादा होता था ! आप सोचिये जब मेरी शादी हुई थी तो सोना २५०/- रूपये तोला था ! आज के हिसाब से देखें तो वो भी करोड़ो में पहुँच जायगी ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद राम कृष्ण खुराना

syeds के द्वारा
October 19, 2010

खुराना सर बहुत अच्छी सच्ची कहानी ,बेशक बुरे का अंत बुरा ही होता है… http://syeds.jagranjunction.com

    R K KHURANA के द्वारा
    October 19, 2010

    प्रिय syeds जी, यह कहानी भी रावण के अंत की तरह बुराई के बुरे अंत का प्रतीक है ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभार ! राम कृष्ण खुराना

    Fats के द्वारा
    May 25, 2011

    Good point. I hadn’t thouhgt about it quite that way. :)

daniel के द्वारा
October 19, 2010

जगरण जंक्शन पर पहली बार इस प्रकार की कहानी पढ़ी किशोरावस्था में पढ़ी गई मनोहर कहानियां आदि पत्रिकाओं की याद ताज़ा हो गई पुरानी यादें ताज़ा करने के लिए धन्यवाद

    R K KHURANA के द्वारा
    October 19, 2010

    प्रिय daniel जी, मेरी सत्य कथा “डेढ़ लाख के हस्ताक्षर” पढ़ कर आपको पुरानी यांदें ताज़ा हो गयी जानकर हर्ष हुआ ! पुरानी चेज्ज़े याद करने पर बहुत सकूं देती हैं ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

    Millie के द्वारा
    May 26, 2011

    Wow! Great tikhnnig! JK

    R K KHURANA के द्वारा
    November 16, 2012

    Thanks

roshni के द्वारा
October 19, 2010

आदरनिये खुरना जी नमस्कार , आखिर बेहिमानी कब तक साथ दे सकती है .. एक न एक दिन तो झूठ पकड़ा ही जाता है …… और ये तो वही बात हुई माया मिली न राम……… पता नहीं लोग कब इमानदार होगे … भष्टाचार पर एक बढ़िया कहानी पढने को मिली धन्यवाद

    R K KHURANA के द्वारा
    October 19, 2010

    प्रिय रौशनी जी, आपको मेरी सत्य-कथा “डेढ़ लाख के हस्ताक्षर” कहानी अच्छी लगी ! प्रतिक्रिया के लिए आपका धन्यवाद ! आपने सच कहा है की आजकल लोग बिना मेहनत किये ज्यादा धन कमाने के चक्कर में गलत काम करने से बाज नहीं आते ! लेकिन इसका अंत तो बुरा ही होता है ! यदि लोग परिणाम के बारे में पहले ही सोच लें तो बहुत से अपराध न हों ! राम कृष्ण खुराना


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