KADLI KE PAAT कदली के पात

चतुर नरन की बात में, बात बात में बात ! जिमी कदली के पात में पात पात में पात !!

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कलमाडी से बडे तो नहीं

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कलमाडी से  बडे तो नहीं

खेल गांव में निकला सांप, खेल गांव में निकला सांप,

कहीं हाथ में लिए लाठियां सभी  खडे  तो नहीं हैं ?

खेल खेल में खेल दिया महाखेल इन ओहदे वालों ने,

हमारी बिलों से लम्बी कहीं ये भ्रष्टाचार की जडें तो नहीं है ?

हमसे ज्यादा जहर और आग तो उनके दिलों में है !

मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे के लिए कभी  लडे  तो नहीं हैं ?

सत्ता की छत पर चढकर तो कुत्ता भी बडा हो जाता है !

चिथडे में पलते इन हाथों में कहीं खाली घडे तो नहीं हैं ?

हम तो अपनी मैल उतार कर शुद्ध होने को बदलते हैं केंचुली,

यह सत्ता लोलुप दल-बदलू सफेद लिबास में हिजडे तो नहीं है ?

हम जहरीले हैं, हम काटते हैं, हम फुफकारते हैं अपनी रक्षा के लिए !

मनमोहन, सोनिया भी डरते जिससे, उस कलमाडी से  बडे तो नहीं है ?

www.khuranarkk.jagranjunction.com



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32 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

NAVEEN KUMAR SHARMA के द्वारा
October 21, 2010

चाचा जी नमस्ते, आपके दोनों दामादों के बीमारी का पता चला तो बहुत दुःख हुआ । परमपिता से प्रार्थना है कि जल्दी से जल्दी वे दानों स्वास्थ्य लाभ करें आपने बहुत ही अच्छा कटाक्ष किया है हमारे देश के नेताओं ने कोई कोर कसर नहीं थी देश की नाक कटवाने वो तो भला हो खिलाडियों का जिन्होंने अच्छा प्रदर्शन करके देश की लाज बचा ली नवीन कुमार शर्मा बहजोई ( मुरादाबाद ) उ . प्र . मोबाइल नम्बर – 09719390576

    R K KHURANA के द्वारा
    October 21, 2010

    प्रिय नवीन जी, आपका कथन सत्य है नवीन जी ! अभी ८००० करोड़ का घोटाला तो सामने आ गया है और भी कितने घोटाले छिपे हुए है इनका पता भी समय से लग ही जायगा ! यह भ्रष्टाचार ही देश को खोखला कर रहा है ! खुराना

    NAVEEN KUMAR SHARMA के द्वारा
    October 22, 2010

    चाचा जी ८००० का घोटाला तो पकड़ में आ गया है लेकिन इन घोटाला करने वाले साँपों का क्या होगा? ये कहीं फिर बेदाग़ न निकल जाएँ क्योंकि अभी मैंने पढ़ा कि आयोजन समिति के कार्यालय के कम्प्यूटर की रैम और हार्ड डिस्क चोरी हो गयी है

    R K KHURANA के द्वारा
    October 22, 2010

    प्रिय नवीन जी, आपकी बात सही है ! रिश्वत लेने वाले रिश्वत देकर छूट जाते हैं ! फिर भी जब इतना कुछ सामने आया है तो देखो शायद कुछ हल भी निकल आये ! राम कृष्ण खुराना

आर.एन. शाही के द्वारा
October 14, 2010

आदरणीय खुराना साहब, बहुत बेहतरीन कटाक्ष वाली कविता । वह तो गनीमत है कि हमारे खिलाड़ियों ने पाप धो दिया, अन्यथा मुंह पर कालिख कुछ कम नहीं थी । नेट प्रोब्लम से थोड़ी देर से प्रतिक्रिया दे पाया । साधुवाद ।

    R K KHURANA के द्वारा
    October 14, 2010

    प्रिय शाही जी, आपका कथन सोलह आने सच है ! हमारे खिलाडियों में जो खेल भावना है यह पदक उसी का प्रमाण है ! वरना यह सफेदपोश लोग तो देश के चबा ही जाएँ ! देश और जनता से अधिक इनको अपने बैंक बलैंस की चिंता है ! हद पार हो चुकी है ! कोइ समाधान नहीं सूझ रह ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद !

Dharmesh Tiwari के द्वारा
October 14, 2010

आदरणीय खुराना साहब सादर प्रणाम,आपका मेल मिला जिसमे यह जानकारी मिली की आपके दामाद जी की तबियत ख़राब है अब वो लोग कैसे है भगवन से प्रार्थना है की वो जल्दी स्वस्थ हो जाये,बाकि एक जबरदस्त प्रहार पढने को मिला,धन्यवाद!

    R K KHURANA के द्वारा
    October 14, 2010

    प्रिय धर्मेश जी, मेरे दामाद के लिए आपकी शुभकामनायें मिली ! आभारी हूँ ! आप लोगो की दुआ से व भगवान् की कृपा से वे अब स्वस्थ्य लाभ ले रहे है ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

Tufail A. Siddequi के द्वारा
October 14, 2010

खुराना जी अभिवादन, जिन खेल और खिलाडियों के नाम पर आयोजन समिति ने अपनी कालर सफ़ेद की, वो सबने देखा. लेकिन देश की कालर सफ़ेद करने वाले तो शोषण का शिकार होने वाले खिलाडी ही है. निश्चित ही इन खिलाडियों ने ही देश का सिर शर्म से झुकने से बचा लिया. कुठाराघात करती बेहतरीन रचना. आभार.

    R K KHURANA के द्वारा
    October 14, 2010

    प्रिय तुफैल जी, आपको मेरी रचना “कलमाड़ी से बड़े नो नहीं” अच्छी लगी ! आपका आभार ! देश को पाताल में ले जाने में यह लोग कोइ कसर नहीं छोड़ रहे ! जनता भी मजबूर है ! आये दिन खिलाडियों का अपमान हो रहा है ! कोइ पूछने वाला ही नहीं है ! आपकी प्रतिक्रिया की लिए धन्यवाद राम कृष्ण खुराना

आर.एन. शाही के द्वारा
October 14, 2010

आदरणीय खुराना साहब, सार्थक और बेहतरीन रचना । वह तो गनीमत है कि हमारे खिलाड़ियों ने बहुत सारे पाप धो डाले, अन्यथा हमारे पास सीना फ़ुलाने की बजाय मुंह पर कालिख पुताने का ढेर सारा सामान था । बधाई ।

    R K KHURANA के द्वारा
    October 14, 2010

    प्रिय शाही जी, आपकी बात बिलकुल ठीक है कि हमारे खिलाडियों ने हमारी लाज बचा ली ! वरना इन सफेदपोशों ने तो अपनी तरफ से कोइ कसर नहीं छोड़ी थी ! अपने कर्मठ खिलाडियों कि वजह से हमने पिछले राष्ट्र मंडल खेलो में अर्जित किये सोने के पदकों का रिकार्ड तोड़ दिया ! और इन लोगो ने भ्रष्टाचार का रिकार्ड तोड़ दिया ! क्या कहे…….! आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद राम कृष्ण खुराना

K M MIshra के द्वारा
October 14, 2010

काका प्रणाम । आपके दोनों दामादों के बीमारी का पता चला तो मन भारी हो गया । बीमारी के वजह से न सिर्फ मरीज परेशान होता है, उसके साथ साथ पूरा घर भी तनाव में आ जाता है । परमपिता से प्रार्थना है कि जल्दी से जल्दी वे दानों स्वास्थ्य लाभ करें । हमेशा की तरह आपकी यह कविता भी जोरदार रही । कविता की ताकत का एहसास मुझे जागरण जंक्शन पर आकर हुआ है । पता नहीं कैसे कुछ ही लाईनों में आप लोग पूरे माहौल को क्रियेट कर लेते हैं, मुझसे तो नहीं हो पाता । इस सुंदर कविता के लिये बहुत बहुत आभार ।

    R K KHURANA के द्वारा
    October 14, 2010

    प्रिय मिश्र जी, मेरे दामादों के लिए शुभकामनायों के लिए आपका आभार ! पहले तो मैं भी कविता नहीं लिख पाता था ! केवल कहानी और व्यंग में ही प्रयास करता था ! परन्तु फिर थोडा थोडा लिखना शुरू किया तो मज़ा आने लगा ! अब अपने दिल का गुबार निकलने की थोड़ी बहुत कोशिश कविता के रूप में भी कर लेता हूँ ! कलमाड़ी से बड़े तो नहीं कविता के लिए आपका स्नेह मिला ! धन्यवाद राम कृष्ण खुराना

s.p.singh के द्वारा
October 14, 2010

आदरणीय खुराना जी मन प्रसन्न हो गया – क्या सटीक कहा है===\" यह सत्ता लोलुप दल-बदलू सफेद लिबास में हिजडे तो नहीं है ?हम जहरीले हैं, हम काटते हैं, हम फुफकारते हैं अपनी रक्षा के लिए\" — तुम तो सबकुछ करके भी बेशर्मों की तरह सीना तान खड़े रहते हो || धन्यवाद

    R K KHURANA के द्वारा
    October 14, 2010

    प्रिय सिंह साहब, यह हमारे देश का दुर्भाग्य है कि आज ऐसे ऐसे लोग हमारे देश का कर्णधार होने का दावा करते हैं ! जैसे आपने कहा बेशर्मों कि तरह सीना तान कर खड़े है ! आपके स्नेह के लिए धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

RaJ के द्वारा
October 13, 2010

आपके लेख ने अज्ञेय जी की कविता याद आ गयी जिसमे सांप से मनुष्य को ज्यादा विष से युक्त माना है http://jrajeev.jagranjunction.com

    R K KHURANA के द्वारा
    October 14, 2010

    प्रिय राज जी, अज्ञेय जी की गिनती तो एक महान हस्ती के रूप में होती है ! मैं क्या चीज़ हूँ ! वैसे आप नज़र घुमा कर देखे तो आप भी मान जायेंगे की आजकल मनुष्य सांप से ज्यादा जहरीला हो गया है ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभार ! राम कृष्ण खुराना

rajkamal के द्वारा
October 13, 2010

आदरणीय चाचा जी ..प्रणाम ! आपके दामाद दामाद के एक्सीडेंट के बारे में जानकर मन दुखी हुआ … भगवान उनको जल्दी तंदरुस्ती दे …. आपकी कविता रूपी वयंग्य पर मुबारके …

    R K KHURANA के द्वारा
    October 14, 2010

    प्रिय राज जी, आपकी शुभकामनायों के लिए धन्यवाद् ! दामाद जी आगे से बेहतर है और स्वस्थ्य लाभ कर रहे है ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया ! खुराना

NIKHIL PANDEY के द्वारा
October 13, 2010

सर प्रणाम…………. बहुत प्रश्नों को उठाती हुई एक और बेहतरीन रचना… अनुभव कितना प्रभावी होता है यह रचना के भावो से प्रकट होता है .. शानदार वापसी… शुभकामनाये

    R K KHURANA के द्वारा
    October 14, 2010

    प्रिय निखिल जी, मेरी कविता “कलमाड़ी से बड़े तो नहीं” आपको बेहतरीन लगी ! आपके स्नेह के लिए आभार ! राम कृष्ण खुराना

chaatak के द्वारा
October 13, 2010

अच्छे लेखन पर बधाई!

    R K KHURANA के द्वारा
    October 14, 2010

    प्रिय चातक जी, मेरी कविता “कलमाड़ी से बड़े तो नहीं” के लिए आपके स्नेह के लिए धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

deepak joshi के द्वारा
October 13, 2010

आदरणीय खुराना जी, बडे अंतराल के बाद इस मंच पर पुन: पदार्पण के लिए धन्‍यवाद, – सही ही कहा है – खेल खेल में खेल दिया महाखेल इन ओहदे वालों ने, अब तो इन नेताओं में एक होड सी हो गई है नंबर बनाने की कलमाडी क्‍या और मोदी क्‍या। बहुत ही अच्‍छा कटाक्ष है। धन्‍यवाद

    R K KHURANA के द्वारा
    October 14, 2010

    प्रिय दीपक जी, कुछ कारन वश मैं मंच पर आप लोगो की सेवा न कर सका ! आप लोगो का प्यार मुझे और अधिक लिखने की प्रेरणा देता है ! प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद राम कृष्ण खुराना

roshni के द्वारा
October 13, 2010

आदरनिये खुराना जी इतने दिनों बाद आपकी मंच पर वापसी अच्छी लगी और आपकी रचना भी … और आशा है की अब आपके दामाद ठीक होगे.. मेरी प्राथना है की भगवन उन्हें जल्दी स्वस्थय़ करे… शुभ कामना सहित

    R K KHURANA के द्वारा
    October 13, 2010

    प्रिय रौशनी जी, हाँ मेरे दामाद का एक्सीडेंट हो जाने की वजह से मैं मंच से कुछ दिनों दूर रहा ! अब आप सबकी सेवा में हाज़िर हूँ ! आपको मेरी कविता अच्छी लगी ! प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद राम कृष्ण खुराना

Ramesh bajpai के द्वारा
October 13, 2010

हम तो अपनी मैल उतार कर शुद्ध होने को बदलते हैं केंचुली, यह सत्ता लोलुप दल-बदलू सफेद लिबास में हिजडे तो नहीं है ? आदरणीय भाई जी बहुत सटीक कटाक्ष . मजा आया बधाई

    R K KHURANA के द्वारा
    October 13, 2010

    प्रिय रमेश जी, मेरी कविता “कलमाड़ी से बड़े तो नहीं” के लिए आपका स्नेह मिला ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् ! राम कृष्ण खुराना

Aakash Tiwaari के द्वारा
October 13, 2010

आदरणीय खुराना जी, सरकार के तो आपने परखच्चे उड़ा दिए…बहुत अच्छी रचना…. आकाश तिवारी

    R K KHURANA के द्वारा
    October 13, 2010

    प्रिय आकाश जी, आपको मेरी कविता “कलमाडी से बडे तो नहीं” अच्छी लगी ! आपकी प्रतिर्किया के लिए आपका धनयवाद ! राम कृष्ण खुराना


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