KADLI KE PAAT कदली के पात

चतुर नरन की बात में, बात बात में बात ! जिमी कदली के पात में पात पात में पात !!

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आज़ादी के निशान

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आज़ादी के निशान

राम कृष्ण खुराना

भुखमरी. मंहगाई, रिश्वत, बलात्कार, आतंकवाद

सभी दरवाजे लिए हाथ  में, मैं मकान ढून्ढ रहा हूँ !

गुनाहगार ही गुनाहगार हैं अब इस देश में,

फाँसी के लिए जल्लाद और मचान ढून्ढ रहा हूँ !

हमने  जन्मा  भ्रष्टाचार  या  भ्रष्टाचार   ने  हमें,

कब से  इस समस्या का समाधान ढून्ढ रहा हूँ !

बेबस  निरीह  अबला  बलात्कार की शिकार युवतियां,

गले में अटकी है चीख, सुनने वाले कान ढून्ढ रहा हूँ !

सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में उठती नहीं,

पैसे   सत्ता  कुर्सियों  में ही अपना इमान ढून्ढ रहा हूँ !

बहुत सालों से सुनता आ रहा हूँ कि  देश आज़ाद है

कहाँ है आज़ादी, मैं आज़ादी के निशान ढून्ढ रहा हूँ !!

http://www.khuranarkk.jagranjunction.com

khuranarkk@yahoo.in

राम कृष्ण खुराना

9988927450

khuranarkk@yahoo.in

A-426, Model Town Extn.

Near Krishna Mandir,

Ludhiana (Punjab)




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35 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Chetan Kumar Sankla के द्वारा
April 6, 2016

पंडित जी मेरा नाम चेतन कुमार सांकला है. मेरी सरकारी नौकरी चेन्नई में लगी हे और मेने अभी दिसंबर में ज्वाइन किया है. बहुत कोशिश करने पर भी मेरा ट्रांसफर दिल्ली नहीं हो पा रहा हे. कृपया करके कोई उपाय बताये. मेरा जनम २३.०४.१९८२ को रात ९ बजे दिल्ली में हुआ था.

    R K Khurana के द्वारा
    September 1, 2016

    ४३ दिन मंदिर में रोज तीन केले चढ़ाएं

yamunapathak के द्वारा
July 14, 2012

बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति है.सर

    R K KHURANA के द्वारा
    July 14, 2012

    प्रिय यमुना जी, मेरी रचना “आज़ादी के निशान” के लिए आपका स्नेह मिला ! अति आभारी हूँ १ राम कृष्ण खुराना

s.p.singh के द्वारा
August 27, 2010

खुराना जी आप आजादी के निशानों को आज ढूंढ़ रहे हैं आजादी का तो १६ वर्ष की उम्र में ही अपहरण हो गया था जब देश की संसद में कुछ पूंजीपतियों के आशीर्वाद से कुछ गुंडे / अपराधी / माफिया किश्म के लोगों का आगमन हुआ था आज ६३ वर्ष की बुढ़िया हो गई है आजादी आप की तरह मथुरा नगरी में भी बेचारी बाल विधवाएं/बूढी विधवाए राधे-राधे गा कर आजादी को ढूंढ़ रही हैं \ भारत का मेहनत कश किसान भी लाइन में लगा है आजादी को ढूंढने में क्योंकि जब उसको न तो अपनी फसल की कीमत तय करने दी जाती है और न ही जब उसकी जमीन जबरन छीन कर विकास के नाम पर बड़े बड़े पूंजीपतियो को दे दी जाती है तो जमीन की कीमत भी वह तय नहीं कर सकता है वह भी कराह उठता है कहां है आजादी | देश की सबसे बड़ी पंचायत में अपने केस लड़ने के लिए भी केवल अंग्रेजी भाषा की अनिवार्यता होने से भी सामान्य नागरिक कराह उठता है और उसके मुंह से निकलता है की कहाँ है आजादी ? आज आजादी को बढे -२ मिनिस्टर के बंगलों में मिलेगी, एम् एल ए / एम् पी की कोठियों में मिलेगी, देश के ब्युरोक्रेट के फ्लेट्स में मिलेगी , पूंजीपतियों के आलिशान फ़ार्म – हाउस में मिलेगी सबसे आखिर में अगर देखने की इच्छा हो तो देश के किसी भी क्षेत्र के किसी भी थाने में तशरीफ ले जाईये वहां थाने दार तो थाने दार छोटे से सिपाही को भी पूरी आजादी है आप के साथ कैसा भी व्यवहार करने की चाहे आप स्वयं ही स्वतंत्रता सेनानी रहे हों \ आपके साथ-साथ हम भी ढूंढ़ रहे हैं कभी तो मिलेगी आजादी //////////// एस०पी० सिंह , मेरठ

    R K KHURANA के द्वारा
    August 27, 2010

    प्रिय सिंह साहब, आपने बिलकुल देश की सही तस्वीर पेश की है ! मैंने भी :”आज़ादी के निशान” कविता में थोड़े से शब्दों में इन्ही बातों की और इशारा किया है ! आपने तो विस्तार से सारा चिटठा ही खोल दिया ! आपके विचारों के लिए आभारी हूँ !

chaatak के द्वारा
August 24, 2010

अच्छे लेख पर बधाई! सच तो ये है कि हम कभी आज़ाद ही नहीं हुए सिर्फ सत्ता परिवर्तन कर भारत की जनता को छला गया | पहले गोरे अंग्रेजों ने जख्म दिए फिर काले अंग्रेजों ने उसे कुरेद-कुरेद कर नासूर बना डाला |

    R K KHURANA के द्वारा
    August 25, 2010

    प्रिय चातक जी, आपको मेरी कविता “आज़ादी के निशान” अच्छी लगी ! दिल प्रसन्न हो गया ! आपका प्यार इसी प्रकार मिलता रहेगा यही आशा है ! प्रतिक्रिया की लिए धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

K M Mishra के द्वारा
August 24, 2010

बहुत सालों से सुनता आ रहा हूँ कि देश आज़ाद है कहाँ है आज़ादी मैं आज़ादी के निशान ढून्ढ रहा हूँ ! आजादी के 63 साल बाद देश की सच्ची तस्वीर यही निकल कर सामने आ रही है । आम भारतीय को इस देश में यही सब दिखाई पड़ रहा है । एक अरब हिंदुस्तानियों में मात्र 1 प्रतिशत ही आज सभी सुविधाओं को भोग रहे हैं । बाकी अपनी रोज की दाल रोटी, बच्चों की फीस, बेटी की शादी, मकान की किस्त में उलझा हुआ है । 80 साल के बुजुर्ग देश का यह हाल देखकर कहते हैं कि इनसे अच्छे तो अंग्रेज थे । आम आदमी का दर्द बयां करती कविता के लिये आभार ।

    R K KHURANA के द्वारा
    August 25, 2010

    प्रिय मिश्र जी मेरी कविता “आज़ादी के निशान” के लिए आपका स्नेह मिला ! सच कहा है अपने यह नेता लोग हमें अंग्रेजो का जमाना बार बार यद् दिला देते हैं ! आपके स्नेह के लिए आभार ! राम कृष्ण खुराना

bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
August 24, 2010

प्रिय श्री खुराना जी, आजादी के निशान कविता के ये पंक्तियां कि – बहुत सालों से सुनता आ रहा हूँ कि देश आज़ाद है कहाँ है आज़ादी मैं आज़ादी के निशान ढून्ढ रहा हूँ ! बरबस ही कुछ सोचनें को मजबूर कर देती हैं । वास्‍तव में आजादी हैं तो केवल उनके लिए जो इसका फायदा गलत तरीकों से उठाना जानते हैं । आम आदमी तो नियमों, कानुनों की गिरफ्त में फँस चुका है । ऊपर से महंगाई, भ्रष्‍टाचार आदि के दानव उसे डस रहे हैं । इसलिए बस उसका काम आजादी के निशान ढूँढना ही रह गया है । कविता अच्‍छी बन पड़ी हैं । अरविन्‍द पारीक

    R K KHURANA के द्वारा
    August 24, 2010

    प्रिय अरविन्द जी, सच में आज केवल निशान ही ढूंढें जा रहे है ! वो भी नहीं मिलते ! आपको मेरी कविता “आज़ादी के निशान” अच्छी लगी ! आपके स्नेह के लिए आभारी हूँ ! राम कृष्ण खुराना

subhash के द्वारा
August 17, 2010

aajadi ke baad sabhi apna 2 ghar banane main lag gye dheere2 aajadi mayus hoker lupt ho gyi hamko ahsaas hua to uske nisan dundhne lage sab ek dusre ko kosne lage janta karmchari ko karchari adhikari ko adhikhari neta ko par dosh to ham sab bhartpyo ka hai jo aajadi ka jarurat se jyada use karte hai apna2 ghar bharne main uncle ji ham sab chor hai lekin apni 2 anteratma ko ab hamen tatolana hoga aur aajadi ke baad aajad rahna sikhna hoga aap bhi likhte rahiye badhiya2 kavita main bhi apne star par paryas karta rahunga negative se positive ki taraf hai apna agla kadam

    R K KHURANA के द्वारा
    August 18, 2010

    प्रिय सुभाष जी, आपकी बात ठीक है ! आज़ादी के बाद सुब को अपनी अपनी ही पड़ी रही किसी ने देश के बारे में नहीं सोचा ! सोचने का समय ही नहीं है किसी के पास ! मेरी कविता “आज़ादी के निशान” के बारे आपका स्नेह मिला ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् ! राम कृष्ण खुराना

samta gupta kota के द्वारा
August 17, 2010

वाह,बहुत कडवी सच्चाई खुराना साहब,

    R K KHURANA के द्वारा
    August 17, 2010

    प्रिय समता जी, सच तो हमेशा से ही कड़वा रहा है ! उसको पचाने की हिम्मत कोइ कोइ ही कर पाता है ! मेरी कविता “आज़ादी के निशान” के बारे में आपकी प्रतिक्रिया के लिए आपका ;धन्यवाद् ! राम कृष्ण खुराना

rachna varma के द्वारा
August 17, 2010

हमने जन्मा भ्रष्टाचार या भ्रष्टाचार ने हमें कब से इस समस्या का समाधान ढून्ढ रहा हूँ ! सच , खुराना साहब बेहतरीन पंक्तिया लिखी है आपने अगर आज़ाद होने का मतलब आपकी कविताओ में जितनी समस्याओ का जिक्र किया है वे सब है तो व्यर्थ है यह आजादी

    R K KHURANA के द्वारा
    August 17, 2010

    प्रिय रचना जी, आज हमारे देश भ्रष्टाचार ही है जो आम आदमी को खाए जा रहा है ! इसका कोइ छोर ठिकाना नहीं मिलता ! कोइ समाधान नहीं मिलता ! “आज़ादी के निशान” कविता के लिए आपका स्नेह मिला ! आभार ! राम कृष्ण खुराना

roshni के द्वारा
August 17, 2010

आदरनीय खुराना जी आपकी कविता बहुत ही बदिया है … आजाद भारत के आजाद नागरिकों की व्यथा को बहुत मार्मिक चित्रण किया है अपने.. आभार सहित

    R K KHURANA के द्वारा
    August 17, 2010

    प्रिय रौशनी जी, आपको मेरी कविता “आज़ादी के निशान” अच्छी लगी ! मेरा उद्धेश्य पूरा हो गया ! मैं इसमें आज के भारत की तस्वीर दिखाना चाहता था ! आपके स्नेह के लिए आपका दिल से शुक्रिया ! राम कृष्ण खुराना

NAVEEN KUMAR SHARMA के द्वारा
August 17, 2010

चाचा जी नमस्ते चाचा जी आपने बिलकुल सही कहा है चाचा जी आपने हर हर्तिया की मन की बात कह दी की हम आजाद तो हैं लेकिन आजादी है कहाँ नवीन कुमार शर्मा बहजोई ( मुरादाबाद) उ . प्र . मोबाइल नम्बर – 09719390576

    R K KHURANA के द्वारा
    August 17, 2010

    प्रिय नवीन जी, “आज़ादी के निशान” कविता के लिए आपका स्नेह मिला ! प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद ! मेरी चोरी रचना के लिए सहयोग देने के लिए भी आपका बहुत बहुत धयांवाद ! राम कृष्ण खुराना

Rashid के द्वारा
August 17, 2010

आदरणीय खुराना जी आप की रचना की तारीफ़ क्या करू,, एक एक शब्द हकीकत बयां करते है !! उम्मीद है आप ने स्वतंत्रता दिवस पर मेरा लेख देखा होगा ! कृपया मेरा मार्ग दर्शन कीजिये राशिद http://rashid.jagranjunction.com

    R K KHURANA के द्वारा
    August 17, 2010

    प्रिय रशीद जी, आपको मेरी कविता “आज़ादी के निशान” पसंद आई ! प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया ! मैं आपकी रचना देख नहीं पाया ! कल किसी ने मेरी रचना “लाल किताब के सिद्ध टोटके -२ चुरा कर अपने नाम से प्रकाशित कर दे है ! मैं उसी कारन से किसी और तरह ध्यान न दे पाया ! आप लोगो की प्रतिकिर्या का उत्तर भी न दे पाया ! आप खुद देश सकते है ! मैं आपका लेख पढ़ कर प्रतिक्रिया जरूर दूंगा ! धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

NIKHIL PANDEY के द्वारा
August 17, 2010

सर प्रणाम स्वीकार करे…अच्छी रचना है …हर आम हिन्दुस्तानी के मन की बात कह दी है ..आपने…

    R K KHURANA के द्वारा
    August 17, 2010

    प्रिय निखिल जी, इश्वर आपको बहुत तरक्की दे ! जुग जुग जियो ! मेरी कविता \"आज़ादी के निशान\" के लिए आपका स्नेह मिला ! आप जैसे सज्जनों के होसला बढ़ने के कारन ही कुछ लिख पता हूँ ! कृपया स्नेह बनाये रखें ! प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद ! राम कृष्ण खुराना

soni garg के द्वारा
August 16, 2010

आज हम सभी आज़ादी के निशान ही तो ढूंढ़ रहे है !

    Deepak Jain के द्वारा
    August 17, 2010

    खुराना साहब , बेहतरीन कविता के लिए बधाई स्वीकार कीजये आपकी रचनाओ से प्रेरित होकर मैंने भी कुछ लिखने का प्रयास किया है भाषा और व्याकरण पर पकड़ मजबूत न होते हुए भी अपने विचारों को व्यक्त करने का साहस किया है आपके मार्गदर्शन की आशा करता हूँ क्यूंकि दिल में बहुत कुछ है जिसे बयाँ करना चाहता हूँ I http://dipakjain.jagranjunction.com/2010/08/16/%E0%A4%B9%E0%A4%AE-%E0%A4%AC%E0%A4%A6%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%87-%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%97-%E0%A4%AC%E0%A4%A6%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%97%E0%A4%BE/ दीपक जैन रायगढ़ (छत्तीसगढ़)

    R K KHURANA के द्वारा
    August 17, 2010

    प्रिय सोनी जी, अपने ठीक कहा “आज़ादी के निशान” मिलते ही नहीं ! आज़ादी तो सिर्फ फाईलों में गम होकर रह गयी है ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभारी हूँ ! राम कृष्ण खुराना

    R K KHURANA के द्वारा
    August 17, 2010

    प्रिय दीपक जी, आपको मेरी कविता “आज़ादी के निशान” बेहतरीन लगी ! जानकर मझे बहुत अच्छा लगा ! इससे भी ज्यादा यह जानकर लगा कि आप इन रचनायों से प्रेरणा लेकर लिख रहे है ! यह बहुत अच्छी बात है ! आप निरंतर तरक्की करे यही मेरी कमाना है ! मेरी शुभकामनायें आपके साथ है ! आप निरंतर लिखना जरी रखे कमिय अपने आप दूर होती जायंगी ! प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

आर.एन. शाही के द्वारा
August 16, 2010

आपकी हर रचना की तरह ही एक बेहतरीन रचना खुराना साहब … बधाई ।

    R K KHURANA के द्वारा
    August 16, 2010

    प्रिय शाही जी, आपको मेरी कविता “आज़ादी के निशान” बेहतरीन लगी लिखना सार्थक हो गया ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् ! राम कृष्ण खुराना

Rita Singh, 'Sarjana' के द्वारा
August 16, 2010

वाह ! अंकल जी , सुन्दर अभिव्यक्ति I कविता में पुरे भारत का दर्शन हो गया I बधाई स्वीकारे I रीता सिंह

    R K KHURANA के द्वारा
    August 16, 2010

    प्रिय रीता जी, आपको मेरी कविता “आज़ादी के निशान” अच्छी लगी ! धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

R K KHURANA के द्वारा
August 16, 2010

मेरी और से जागरण मंच टीम, जागरण के सुधि ब्लागर, पाठक तथा सहयोगी सबको स्वतंत्रता दिवस की लाख लाख बधाइयां ! राम कृष्ण खुराना


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