KADLI KE PAAT कदली के पात

चतुर नरन की बात में, बात बात में बात ! जिमी कदली के पात में पात पात में पात !!

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रंग दे गुलाबी चोला (चैलेंज का जवाब)

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रंग दे गुलाबी चोला (चैलेंज का जवाब)

राम कृष्ण खुराना

तो बात यहां से शुरू होती है कि हमारे एक ब्लागर भाई हैं सन्नी राजन जी ! अरे नहीं आप गलत समझ गए ! ये “मुन्नाभाई” वाले भाई नहीं है ये तो “भईया मेरे राखी के बन्धन को निभाना” वाले भाई हैं ! अब जागरण वाले परिणाम घोषित करने में देरी कर रहे थे !  परंतु शायद राजन जी को पता नहीं है कि जागरण वालों पर कितनी जिम्मेदारियां हैं ! दैनिक जागरण समाचार पत्र 11 राज्यों से प्रकाशित होता है तथा इसके 37 संस्करण छपते हैं और साढे पांच करोड से ज्यादा पाठक हैं ! मेरी जानकारी के अनुसार कदाचित यह हिन्दी का विश्व में सर्वाधिक पढा जाने वाला समाचार पत्र है ! (भगवान करे यही सत्य हो ! मेरा जागरण टीम से नम्र निवेदन है कि यदि इसमे कुछ गलत हो तो कृप्या मुझे बताएं) इसके अतिरिक्त पत्रिकायें हैं, जागरण जंकशन मंच है तथा और अन्य कई प्रकार के काम हैं ! जिनकी देख-रेख इन्हें करनी पडती है ! इनके हज़ारों कर्मठ कार्यकर्ता टीम वर्क में विश्वास करते हुए सभी कार्य सुचार रूप से मिलजुलकर कर रहे हैं ! लाखों लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोज़गार मिला हुआ है ! तो देरी होना तो स्वाभाविक है !

जैसे कि मैं पहले भी कई बार कह चुका हूं कि मैं इस जागरण मंच का सदैव ऋणी रहूंगा ! यहां पर इतने अच्छे लेखक और पाठक मिले इतना बडा परिवार मिला जो अन्यत्र सम्भव न था ! इस मंच पर आकर साहित्य के समुद्र में डुबकी लगाने का मौका मिला ! दिल को छीलकर निकल जाने वाले व्यंग, ज्ञान वर्धक लेख, गुलाब की पंखुडियों की कोमलता लिए कवितांए, विज्ञान के नए-नए प्रयोग, ज्योतिष के उपाय, उसके साथ अरविन्द पारीक जी द्वारा हिन्दी टाईपिंग का तोहफा, जिसकी बदौलत इस “कदली के पात” का इतना लम्बा सफर तय हो पाया ! सब कुछ एक ही छत के नीचे ! सब कुछ एक ही मंच पर !

हां तो मैं बता रहा था कि जागरण वाले परिणाम घोषित करने में देरी कर रहे थे  तो सन्नी  जी ने सोचा चलो एक शोशा छेड देते हैं ! लिखने वाले भी व्यस्त हो जायेंगे और पढने वाले भी  जैसा कि चातक जी ने मेरी हास्य कथा “हुआ कुछ भी नहीं” के बारे में कहा सन्नी जी सफेद शर्ट वाले लडके की तरह मज़ा लेते रहेंगें ! इन्होंने टाप 10 वालों को एक चैलेंज दे दिया कि भाई गुलाबी रंग पर कुछ कलम घसीट कर दिखाओ ! वैसे सन्नी जी स्वयं भी कई “कार” के मालिक हैं ! बहुत अच्छे कथाकार हैं, अच्छे व्यंगकार हैं, अच्छे प्रतिक्रियाकार हैं !  सन्नी जी को गुलाबी रंग बहुत पसंद है ! यह जो भी प्रतिक्रिया देते हैं गुलाबी रंग में डुबो कर देते हैं !

अरे सच, प्रतिक्रियाकार से याद आया ! हमारी अदिति बिटिया बडी अच्छी प्रतिक्रियाकारा हैं ! प्रत्येक रचना पर बहुत अच्छी प्रतिक्रिया देती हैं ! इनकी प्रतिक्रियाओं को देखते हुए मैंने तो जागरण वालों से आग्रह कर दिया है कि अगली बार प्रतिक्रियाकार का मुकाबला करा दें ! मुझे पूर्ण विश्वास है कि प्रथम स्थान इन्हें ही मिलेगा ! यह प्रतिक्रिया रचना पढकर नहीं देतीं बल्कि रचना को तौल कर देती हैं ! इन्होंने रचनायें तौलने के लिए एक विशेष प्रकार का तराज़ू ले रखा है ! बस रचना उठाई, तराज़ू पर रखी, वज़न देखा और प्रतिक्रिया लिख मारी ! हो गया काम !

पिछले दिनों इनका फोन आया तो बहुत दुखी लग रही थीं ! मैंने फोन पर जब “हैल्लू..ऊ…ऊ..ऊ” कहा तो मेरा बोलने का स्टाईल पहचान कर एकदम से उबल पडीं –“चाचा जी, मेरा तो बहुत नुकसान हो गया !”

”क्या हुआ बिटिया रानी ?” मैंने बडे प्यार से कुछ तसल्ली देने के अंदाज़ में पूछा !

”चाचा जी, मेरा तराजू जिससे मैं रचनायें तौलती थी वो टूट गया !” उसने बहुत उदास होकर अपना दुखडा सुनाया !

”मगर यह कैसे हो सकता है ?” मैंने फिर प्रश्न दाग दिया ! “उस तराजू की डंडी पर तो गुलाबी पेंट करवाया हुआ था ! पिंक – द कलर आफ प्रास्पेरिटी ! सौभाग्य का सूचक ! फिर वो कैसे टूट गया ?”

”चाचा जी, हुआ ऐसे कि पिछ्ले दिनों आपका वो व्यंग आया था न “कौन बनेगा ब्लागपति” वो बहुत भारी था ! मैंने जब उस व्यंग पर अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए उसको पलडे पर रखा तो पलडा ज्यादा वज़न होने के कारण एकदम झटके से नीचे झुक गया और डंडी पर भार पडने से वो टूट गई !” अदिति ने रूआंसे होकर कहा !

उसके बाद फोन कट गया और वो गायब हो गईं ! लगभग एक-डेढ महीने पश्चात नया कम्पयूट्रीकृत तराजू लेकर आईं हैं और अब धडाधड प्रतिक्रिया दे रही हैं ! उन्होंने वादा किया है कि जो रचनायें छूट गई हैं एक एक करके उन पर भी प्रतिक्रिया दे दी जायगी ! मुझे यह गुप्त सूचना गुप्त रूप से मिली है अतः आप लोगों से निवेदन है कि आप भी इसे गुप्त ही रखें !

अब सन्नी जी तो चैलेंज देकर एक कोने में बैठ गए ! टाप 10 वालों के लिए एक मुसीबत खडी कर गए ! सांप के मुंह में छछुंदर वाली बात हो गई ! अब चैलेंज स्वीकार न करें तो भद्द् हो जायगी और स्वीकार करें तो क्या लिखें ! गुलाबी रंग तो भई गुलाबी ही होता है ! अब इसके बारे में क्या लिखा जाय ! दूसरी ओर इन्होंने विषय विदेशी भाषा में लिख दिया ! पिंक – द कलर आफ प्रास्पेरिटी ! आप तो जानते ही हैं की विदेशी भाषा में हमारा हाथ ज़रा तंग है ! अब क्या करें ? सोचा टीचर दीदी के पास जाकर इसका अर्थ पूछते हैं ! लेकिन वो डांटती बहुत हैं ! मुझे दो लोगों की डांट सबसे ज्यादा सुननी पडती है ! एक टीचर दीदी की और दूसरी अपनी धर्म की पत्नी की ! यह जागरण वाले डांट खाने वालों की प्रतियोगिता नहीं करवा सकते क्या ? वो क्या है न कि यदि ऐसी प्रतियोगिता हो जाय तो गुलाबी रंग का करीना कपूर के विज्ञापन वाला स्लीक सा लैपटाप जीतने का चांस हमारा ही बनता है !

लैपटाप की भी बडी समस्या है ! एक लैपटाप हज़ार बीमार वाली कहावत हो गई ! अरविन्द पारीक जी को लैपटाप की सख्त जरूरत थी ! बेचारे कैफे में जाकर अभी कुछ रचनाओं को उलट-पलट कर पूरी तरह से देख भी नहीं पाते हैं कि समय समाप्ति की घोषणा हो जाती है ! जागरण की तरफ से लैपटाप मिल जाता तो रज़ाई में दुबके-दुबके भी अपनी “लैप” खोलते और उस पर “टाप” रख कर लेख लिख मारते ! उधर द्वितीय पुरस्कार से सम्मानित हमारे प्यारे मुरली मनोहर जी के साहबज़ादे को भी लैपटाप ही चाहिए था ! परंतु जागरण वालों ने कुछ अपरिहार्य कारणों से देने से मना कर दिया ! वैसे यदि मिश्रा जी चाहें तो बेटे के गले में ‘लैपटापों’ का हार बना कर पहना सकते हैं ! परंतु कृष्ण मोहन जी ठहरे सिविल लाईन वाले हनुमान जी के परम भक्त ! आप तो जानते ही हैं कि आज कल अदालतों में बिना रिश्वत व झूठ के पत्ता भी नहीं हिलता ! मिश्रा जी का मानना है कि बच्चों की पढाई के लिए मेहनत व सच्चाई से कमाया हुआ धन ही खर्च करना चाहिए ! इसलिए वे जज के सामने बहस करते हुए जितने प्रतिशत सच बोलते हैं अपनी ली हुई फीस में से उतने प्रतिशत हिस्सा अलग निकाल लेते हैं ! उनको उम्मीद है कि आठ-दस सालों में लैपटाप खरीदने लायक पैसा इकट्ठा हो जायगा तब वो अपने बेटे को वही गुलाबी रंग वाला लैपटाप ले देंगें ! भगवान उनके बेटे को लम्बी आयु दे व उसकी हर ख्वाहिश पूरी करे ! लेकिन बेटे आपने इस मंच के अंकल आंटियों को अपना नाम तो बताया ही नहीं !

वैसे लैपटाप लेने वाले को लाईन बहुत लम्बी है ! क्योंकि लैपटाप का नशा ही ऐसा है ! लोग तो लैपटाप लेकर अंग्रेज़ी सीट पर बैठकर “निपटते” वक्त भी अपनी उंगलियां की-बोर्ड पर लहराते रहते हैं ! उनका मानना है कि जो आराम, जो बेफिक्री, जो शांति यहां काम करने में मिलती है वो और कहीं नहीं ! यहां घंटों बैठे बिना रोक-टोक के काम किया जा सकता है ! मेरी तो जागरण वालों से गुज़ारिश है कि कम से कम टाप 10 की परीक्षा पास करने वालों को तो उपहार स्वरूप एक-एक लैपटाप दे ही दें ! चाहे छोटा दस इंच का सस्ता वाला ही दे दें !

अब समस्या यह थी कि इस विदेशी भाषा का अनुवाद किससे करवायें ! हमारे पास तो कोई ठोस साधन है नहीं ! या तो इंगलिश और हिन्दी के 5-7 शब्दकोशों से मगज़-पच्ची करें ! या गूगल में जाकर सर्च मारें ! गूगल वाले तो अंग्रेज हैं ! वो तो यही कहते हैं कि गुलाबी रंग प्राकृतिक ही नहीं है ! उनका कहना है कि गुलाबी रंग कोई रंग ही नहीं है ! यह लाल और सफेद रंग को मिला कर बना है ! अरे गूगल वालों लुधियाना आकर देख लो ! आपकी आंखे खुल जांयगी ! यहां पर एक रोज़-गार्डन है ! चारों ओर गुलाब ही गुलाब खिले पडे हैं ! भगवान की सुन्दर सृष्टि ! प्रकृति का अद्भुत नज़ारा ! बिना रंगों की मिलावट के गुलाबी-गुलाबी गुलाब ! प्यार का प्रतीक गुलाब ! सौभाग्य का सूचक गुलाब ! वेलेनटाईन डे का सस्ता और अहम उपहार !

तो बात यहां पर खत्म होती है की मैंने और मिहिर जी ने तो आपके चैलेंज का गुलाबी चोला रंग दिया अब बाकी बचे आठ से आप खुद निपटिए !

नोट :

[मेरी इस रचना में या अन्य किसी भी आलेख में यदि किसी का नाम आया है तो वह प्रसंगवश, लेख को मनोरंजक व अधिक हास्यास्पद बनाने और आप सब को गुदगुदाने के लिए ही किया गया है ! यह किसी भी प्रकार की दुर्भावना से ग्रसित नहीं है ! फिर भी यदि किसी को इससे ज़रा सी भी चोट पहुंची हो या दुख हुआ हो तो मैं हाथ जोडकर – जी हां – हाथ जोडकर माफी चाहता हूं !]

राम कृष्ण खुराना

9988927450

http://www.khuranarkk.jagranjunction.com



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81 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

    R K KHURANA के द्वारा
    August 17, 2013

    what

    R K KHURANA के द्वारा
    August 17, 2013

    Can not understand

    R K KHURANA के द्वारा
    August 17, 2013

    virus ?

Dayana के द्वारा
May 26, 2011

Thank God! Soenmoe with brains speaks!

    R K KHURANA के द्वारा
    July 30, 2012

    Thanks

kavita के द्वारा
January 14, 2011

ेपो्ग

    R K KHURANA के द्वारा
    January 14, 2011

    प्रिय कविता जी, आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

Ramesh bajpai के द्वारा
September 18, 2010

आदरणीय भाई जी रचना जितनी मजेदार जबाब भी उतने ही दमदार . कुल मिला कर सब कुछ लगा मजेदार . बधाई बारम्बार .

    R K KHURANA के द्वारा
    September 18, 2010

    प्रिय रमेश जी, आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् ! खुराना

shivani के द्वारा
August 12, 2010

nice……

    R K KHURANA के द्वारा
    August 12, 2010

    प्रिय शिवानी जी, आपको मेरी रचना “रंग दे गुलाबी चोला” अच्छी लगी ! प्रतिक्रिया के लिए आपका धन्यवाद् ! राम कृष्ण खुराना

SUMAN के द्वारा
July 27, 2010

mera naam suman kumari hai d/o/b hai 10/10/1972 , janam sthan hai bihar (dhanbad) samay hai dophar ke 12:30 baze bahut hee mushikal samay se gujar rahi hoon pls lal kitab ka simple remedies batiye aur kya aapka contact number mil sakata hai ya email id. pls help me thanks suman.

    R K KHURANA के द्वारा
    July 27, 2010

    प्रिय सुमन जी, शीघ्र लाख के लिए आप मेरी रचना लाल किताब के सिद्ध टोटके में ताले वाला उपाय कर लें ! लाभ होगा

    SUMAN के द्वारा
    July 29, 2010

    हेलो सर नमस्कार , में ताले वाला उपाय करती हूँ कल और कुछ आसन उपाय बताये जिससे मेरे घर में सुख शांति बनी रहे और पति मेरी बात माने और दूसरे का चक्कर छोर दे , मेरा भाग्य कैसा है ये भी थोरा बता देते तो बहुत ही मेहरबानी होगी बहुत ही मुशिकल समय से गुज़र रही हूँ ध्यन्वाद

    R K KHURANA के द्वारा
    July 29, 2010

    प्रिय सुमन जी, आप श्रधा और विश्वास से सही तरीके से उपे करे १ अवश्य लाभ होगा ! पति को बात मानाने का टोटका मेरे अगले लेख में है ! जल्द ही आप लोगो की सेवा में प्रस्तुत कर रहा हूँ !

शिवेंद्र मोहन सिंह के द्वारा
July 22, 2010

खुराना जी, ब्लॉग पढ़ कर भी मजा आता है और प्रतिक्रियाएं पढ़ कर भी उतना ही मजा आता आता है, क्योंकि आपके जवाब उतने ही अच्छे होते हैं.

    R K KHURANA के द्वारा
    July 22, 2010

    प्रिय शिवेंदर जी, आपको मेरी रचना “रंग दे गुलाबी चोला” पढ़ कर मज़ा आया तो मैं धन्य हो गया ! आप लोगो का मनोरंजन हो यही मेरी कामना है ! आपकी प्रतिक्रिया का मेरे लिए बहुत महत्त्व है ! धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

sunny rajan के द्वारा
July 20, 2010

खुराना जी नमस्कार. बहुत अच्छा लगा कि आप जैसे विद्वान व्यक्ति ने मेरे इस चेलेंज को स्वीकारा और एक बहुत ही अच्छा लेख लिखा है आपने और मुझे इस काबिल समझा कि कार बना दिया. अच्छा लगा.

    R K KHURANA के द्वारा
    July 21, 2010

    प्रिय सन्नी जी, आपको मेरी रचना “रंग दे गुलाबी चोला” अच्छी लगी ! दिल प्रसन्न हुआ ! आप में लेखक के गुण है प्रयास करिए सफलता अवश्व मिलेगी ! मेरा आशीर्वाद ! धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

    Bobbie के द्वारा
    May 26, 2011

    It was dark when I woke. This is a ray of snusihne.

Arvind Pareek के द्वारा
July 19, 2010

प्रिय श्री खुराना जी, भई वाह मजा आ गया । क्‍या गुदगुदाया है आपने – ‘अरविन्द पारीक जी को लैपटाप की सख्त जरूरत थी ! बेचारे कैफे में जाकर अभी कुछ रचनाओं को उलट-पलट कर पूरी तरह से देख भी नहीं पाते हैं कि समय समाप्ति की घोषणा हो जाती है ! जागरण की तरफ से लैपटाप मिल जाता तो रज़ाई में दुबके-दुबके भी अपनी “लैप” खोलते और उस पर “टाप” रख कर लेख लिख मारते !’  लग रहा है लैपटॉप मिल ही गया । जिस तरह आपनें सभी ब्‍लागर्स के चोलों को गुलाबी बना कर मजा दिया हैं उसका कोई जबाव नहीं हैं । सन्‍नी राजन जी को हमारे बुजूर्ग ने जवाब दे दिया अब बाकी आठ की क्‍या जरूरत हैं । हॉं प्रथम पुरस्‍कार पाने के लिए बधाई । जब लैपटॉप मिल जाए तो उसके बारे में भी कुछ बताईएगा । अरविन्‍द पारीक

    R K KHURANA के द्वारा
    July 19, 2010

    प्रिय अरविन्द पारीक जी, बधाई देने के लिए मैं आपका आभारी हूँ ! “रंग दे गुलाबी चोला” लेख आपको अच्छा लगा ! जानकर प्रसन्नता हुई ! मैं हमेशा आप लोगो की सेवा मैं ही रहूँगा ! धन्यवाद् ! राम कृष्ण खुराना

ASHISH RAJVANSHI के द्वारा
July 13, 2010

प्रणाम सर , किस दिशा में रॉकेट छोड़ा आपने की सीधे अदिति जी के घर में जाकर दगा | अब दिवाली तो है नहीं तो थोड़ी असहज जरूर हो गयी हैं पर उम्मीद है की दिवाली आते आते सब ठीक हो जायेगा | इस मंच पर तकरार और छेड़ छाड़ भी बहुत आवश्यक है ताकि रोमांच बना रहे | उम्दा व्यंग के लिए बधाई , हाँ , गुलाबी रंग वाले चैलेंज के बारे में मैंने भी पढ़ा था | धन्यवाद

    R K KHURANA के द्वारा
    July 17, 2010

    प्रिय राजवंशी जी, आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद ! राम कृष्ण खुराना

Soni garg के द्वारा
July 13, 2010

नमस्कार सर, आपका लेख पढ़ कर अच्छा लगा लेकिन माफ़ कीजियेगा इसमें गुलाबी रंग की चर्चा ज्यादा नहीं दिखी ! बाकी सब ठीक ही था !

    R K KHURANA के द्वारा
    July 13, 2010

    प्रिय सोनी जी, आपको लेख पसंद आया ! धन्यवाद् ! गुलाबी रंग को अगले किसी लेख में जयादा रंग देंगे १ प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद्

    soni garg के द्वारा
    July 14, 2010

    जी, बिलकुल गुलाबी रंग ज्यादा रंग देना चाहिए क्योकि चेलेंज तो यही था ……….

    R K KHURANA के द्वारा
    August 17, 2013

    प्रिय सोनी जी, कोइ बात नहीं अगली बार कसार निकल दूंगा खुराना

seema के द्वारा
July 13, 2010

खुराना जी आलेख मजेदार है और उससे भी मजेदार लगा यह जानकर की आप लुधियाना से हैं तां अग्गे तों पंजाबी विच गल करांगे | तुसीं तांमेरे वी चाचा जी हों | ::::))))

    R K KHURANA के द्वारा
    July 13, 2010

    प्रिय सीमा जी, आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् ! “रंग दे गुलाबी चोला” आपको मज़ेदार लगा ! मैं लुधियाना से हूँ ! तुस्सी किथ्थे रहंदे ओ ! मेरी पहली “कौन बनेगा ब्लागपाती” पोस्ट विच सारा चिठा खोल्या होअया ऐ ! पढ़ लओ ! राम कृष्ण खुराना

NAVEEN KUMAR SHARMA के द्वारा
July 13, 2010

नमस्ते चाचा जी चाचा जी आपने एक अच्छा व्यंग्य लिखा है पढ़ कर बहुत अच्छा लगा धन्यवाद् नवीन कुमार शर्मा मोबाइल नम्बर – 09719390576

    R K KHURANA के द्वारा
    July 13, 2010

    प्रिय नवीन जी, आपको मेरा व्यंग “रंग दे गुलाबी चोला” पसंद आया ! प्रतिक्रिया के लिए धयांवाद राम कृष्ण खुराना

    Rosie के द्वारा
    May 26, 2011

    Kewl you suohld come up with that. Excellent!

mihirraj2000 के द्वारा
July 12, 2010

अदिति जी का कहना पूरा जायज है मुझे भी शिकायत है कि आप शीर्षक को छोड़ बाद बाकी हर चीज पर व्यंग कर गए. आप किसी को दुःख पंहुचा ही नहीं सकते आप बस गुदगुदाते है.

    R K KHURANA के द्वारा
    July 13, 2010

    प्रिय मिहिर जी, प्यारे मिहिर राजा जी, व्यंग तो वही होता है कि जो होता है वो नहीं होता जो नहीं होता वो दिखता है ! असल में सन्नी जी के चैलेन्ज को किसी ने भी सिरिअस नहीं लिया था ! मैंने भी व्यंग के रूप में लेकर व्यंग लिख दिया ! बीच बीच में गुलाबी फुहारें भी छोड़ दी ! हाँ मुझे शिकायत है अदिति जी से ! उन्होंने भी इसको व्यग तो कहा फिर भी निजी अधर बना कर गुस्सा हो गयी ! शायद उन्होंने मेरा नीचे लिखा नोट नहीं पढ़ा ! खैर बेटी है उसे हक़ है गुस्सा करने का ! मैं किसी का भी दिल दुभाना नहीं चाहता ! यह भी गुदगुदाने के लिए ही लिखा था ! आपके स्नेह के लिए आपका शुक्रिया ! राम कृष्ण खुराना

aditi kailash के द्वारा
July 12, 2010

चाचाजी, एक अच्छा व्यंग्य, पर शायद आप टाइटल दे कर भूल गए कि आप व्यंग्य किस पर लिख रहे हैं या गलती से गलत टाइटल दे दिया…. क्योंकि गुलाबी रंग की तो ज्यादा बात ही नहीं हुई, बात हुई अदिति जी की प्रतिक्रियायों की, कृष्ण मोहन जी की, सनी जी की (जिसे आपने सुमित राजन लिख दिया) और आपके सपनों के लैपटॉप की…. आपने हमें एक अच्छी प्रतिक्रियाकारा कहा आपका आभार…. अब लगे हाथों जागरण वालों से इसके लिए पुरस्कार भी दिलवा ही दीजिये… हमें अच्छा लगता है जब हम दूसरों की पोस्ट पर प्रतिक्रियाएं देते हैं…. और आपको तो पता है हम पढ़े बिना प्रतिक्रिया नहीं देते हैं…. आपको बताया तो था हमने, जब आपने अपनी पुरानी पोस्ट पर प्रतिक्रिया देने कहा था…. पढ़ने से हमारा ज्ञान तो बढ़ता ही है और प्रतिक्रिया से सामने वाले का हौसला भी बढ़ता है, समय बेशक ज्यादा लगता है…… वैसे आपने एक अच्छा आईडिया सुझा दिया, हमें भी बताइयेगा आप जिस तराजू में तौल कर प्रतिक्रिया देते हैं और वो कहाँ मिलता है, हम भी एक मंगवा लेंगे…. वैसे एक बात अच्छी लगती कि हमारी देखा-देखी ही सही आप भी सभी पोस्ट पर प्रतिक्रिया देने कि कोशिश करते हैं… और तो और जब कोई पोस्ट नहीं बचती तो अपनी ही पोस्ट पर आई प्रतिक्रियों का दो-दो बार जवाब देते हैं, इससे एक तीर से दो निशाना हो जाता है… समय भी कट जाता है और आपकी प्रतिक्रियाओं की संख्या में भी इजाफा हो जाता है…. और तो और कभी-कभी…. खैर छोडिये इन बातों को….

    R K KHURANA के द्वारा
    July 12, 2010

    प्रिय अदिति, मुझे तो पहले ही पता था की अब मुझे डांट पड़ेगी ही ! यह ब्लागर भाई हैं न यह मुझे ऐसे ही उकसा देते है और मैं जोश में आकर कुछ उल्टा सीधा लिख देता हूँ कुछ लोग इसे गलती से व्यंग कहने लग पड़ते है ! और फिर टीचर दीदी से डांट खानी पड़ती है ! मुझे डांट खिला कर अब इनके कलेजे में ठण्ड पड़ गयी होगी ! आपने भी तो पहली लाइन में ही मेरी झूठी तारीफ करने के लिए लिख दिया है एक अच्छा व्यंग ! प्रिय अदिति जी, शायद प्रतिक्रियाकारा शब्द आपको बुरा लग गया ! नहीं बिटिया रानी मैंने किसी का भी दिल दुखाने के लिए आज तक कुछ भी नहीं लिखा ! मैंने इसीलिए पहले ही माफ़ी माँगी थी ! यदि आपको मेरी कोइ भी बात बुरी लगी है तो मैं आपसे फिर हाथ जोड़ कर माफ़ी मांगता हूँ ! राम कृष्ण खुराना

    kmmishra के द्वारा
    July 12, 2010

    चाचा जी अब पता चला व्यंग लिखने के खतरे । कलेजा और सिर दोनो मजबूत होने चाहिये । डांट और लाठ कभी भी पड़ सकती है । मेरी तो कोई सुनता ही नहीं है ।

    kmmishra के द्वारा
    July 12, 2010

    और चाचा एक ही रिश्ता बनाओ । या तो दीदी ही कह लो या बिटिया रानी । हम लोग परेशान हो जाते हैं कि अदितिजी हमारी बुआ लगें कि बहन ।

    R K KHURANA के द्वारा
    July 13, 2010

    प्रिय मिश्र जी, बिलकुल ठीक कहा आपने ! कहाँ तो मैं आपको समझाता था की व्यंग समझ बूझ कर लिखो कहाँ मैं खुद मार खा गया ! मुझे उम्मीद नहीं थी की इतनी समझदार बेटी भी गुस्सा मान जायगी ! मैं तो समझता था की वो भी इसको एक काल्पनिक व्यंग के रूप में ही लेगीं ! परन्तु ….. ??? असल में मेरी बहन नहीं है और मेरी बेटियों का भाई नहीं है ! मेरी बड़ी बेटी मुझे राखी बांधती है ! मैं उसे दीदी ही कहता हूँ ! उसी प्यार में मैं अदिति को भी टीचर दीदी कहता था ! है तो मेरी बेटी ही ! तो आप बहन का रिश्ना ही निभाईये ! राम कृष्ण खुराना

    R K KHURANA के द्वारा
    July 13, 2010

    प्रिय अदिति जी, नाम की गलती सुधरने के लिए आपका धन्यवाद ! मैंने सुमित के स्थान पर सन्नी जी का नाम अपडेट कर दिया है ! शुक्रिया सन्नी जी से क्षमा याचना सहित रामकृष्ण खुराना

rita singh 'sarjana' के द्वारा
July 12, 2010

आदरणीय अंकल जी ,सादर प्रणाम . आपके लिखने का अंदाज़ बहुत सुन्दर है .’कौन बनेगा ब्लोग्पति’ की तरह यह व्यंग रचना ने भी मन मोह लिया.इस उम्र में भी आपकी सक्रियता देख कर मुझे प्रेरणा मिलता है.अच्छी पोस्ट के लिए बधाई स्वीकारे I

    R K KHURANA के द्वारा
    July 12, 2010

    प्रिय रीता जी, “रंग दे गुलाबी चोला” ने आपका मन मोह लिया ! आपका स्नेह मिला मन प्रसन्न हुआ ! मैंने पहले भी आपसे पूछा था आपकी बातों से मुझे लगता है आप जालंधर या लुधियाना की रहने वाली है ! क्या यह सच है ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

    Teyah के द्वारा
    May 26, 2011

    Ppl like you get all the brains. I just get to say tahkns for he answer.

Chaatak के द्वारा
July 12, 2010

चाचा जी, तुसी ग्रेट हो ! गुलाबी दी गल्लां दसते-दसते ओ कारीगरियाँ दिखा दित्ती सी के सारे ब्लागारां दे दिल जंक्शन नाल भांगड़ा पाने लग गए | इतनी अच्छी पोस्ट के लिए बधाई | अच्छा हुआ मैं खाना खाते हुए इसे नहीं पढ़ रहा था वर्ना मेरे साथ भी मिश्राजी जैसा कुछ होने का अंदेशा था |

    R K KHURANA के द्वारा
    July 12, 2010

    प्रिय चातक जी, मेरे व्यंग “रंग दे गुलाबी चोला” पर आपका गुलाबी रंग का प्यार भरा सन्देश मिला ! इस व्यंग से यह सीख मिलती है कि खाना खाते समय ‘राम कृष्ण खुराना’ का व्यंग न पढ़ें ! यदि और कोइ विकल्प न हो तो कपडे पहन कर खाना न खाएं १ तुहाडी प्रतिक्रिया वास्ते लख लख वारी शुक्रिया राम कृष्ण खुराना

    kmmishra के द्वारा
    July 12, 2010

    हूं sssss आईडिया बुरा नहीं है । अब आइंदा खाना बाथरूम में नहाते नहाते ही खाया करूंगा ।

    R K KHURANA के द्वारा
    July 13, 2010

    प्रिय मिश्र जी, आपकी इन्ही प्यारी प्यारी बैटन का मैं कायल हूँ ! धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

sumityadav के द्वारा
July 12, 2010

बहुत ही बढ़िया सतरंगी व्यंग्य। आपने तो पूरे जागरण जंक्शन को लपेट दिया साथ ही चैलेंज का तगड़ा जवाब भी दे दिया।

    R K KHURANA के द्वारा
    July 12, 2010

    प्रिय सुमित जी, आपको मेरा व्यंग “रंग दे गुलाबी चोला” सतरंगी लगा ! आपका स्नेह पाकर मैं भी सतरंगी हो गया प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

rajkamal के द्वारा
July 12, 2010

परनाम चाचा जी … चलिए आपने अपने इस भतीजे से कुछ तो ग्रहण किया मेरी बातो ko सकरात्नक रूम में लेकर …. वर्ना पहले तो आप बुरा मान जाते थे … लेकिन अब तो आप न केवल दुसरो पर बल्कि खुद पर bhi zindadili skahne lage है … यह आप इस बुढ़ापे में आलोचनाये सहने के लिए जवान दिल कहा से ले आये …. एक अदद hame bhi laa dijiye …बधाई

    R K KHURANA के द्वारा
    July 12, 2010

    प्रिय राजकमल जी, आप लोगो की बातें तो हमेशा ही सकारात्मक और ज्ञान वर्धक होतीं है ! और बुरा मानने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता ! हम इस मंच पर एक परिवार की तरह रहते हैं ! एक दूसरे का आदर करते हैं और कोइ गलती हो तो उसका सुधार भी करते हैं ! आप जवान लोगो के बीच रहकर मैं भी जवान हो गया हूँ फिर आपने मेरा व्यंग “अभी तो मैं जवान हूँ” शायद नहीं पढ़ा ! कृपया पढ़ कर अपनी प्रतिक्रिया दीजियेगा ! धन्यवाद राम कृष्ण खुराना

allrounder के द्वारा
July 12, 2010

आदरणीय चाचाजी, मस्त व्यंग लिखा है आपने ! कोटि – कोटि, नमन ! देखें तराजू पर इसका बजन कितना तौला जाता है !

    R K KHURANA के द्वारा
    July 12, 2010

    प्रिय सचिन जी, “रंग दे गुलाबी चोला” व्यंग ने आपको मस्त कर दिया ! स्नेह के लिए धन्यवाद् ! तराजू का वजन अभी आया नहीं है ! ‘रचना तौल यंत्र’ तो खुला पड़ा है ! दीदी शायद काफी पीने गयी होंगी ! आनेपर वजन का पता चलेगा ! प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद राम कृष्ण खुराना

    Gatsy के द्वारा
    May 26, 2011

    Home run! Great slugging with that ansewr!

kmmishra के द्वारा
July 12, 2010

खुरना चाचा इत्ता हेवी डृयूटी व्यंग लिखेंगे तो अदितिजी का इलेक्ट्रिानिक धर्मकांटा भी टूट जायेगा । दूसरे क्यों अदितिजी को परेशान करने पर उतारूं हैं । क्या भतीजी से ही कंपटीशन करेंगे । जीत लेने दो उसको ब्लागपत्नी का पुरस्कार । सन्नी भाई के चैलेंज को मैंने और अरविंद जी  ने सीरियसली लिया था । इस लिये आंख मूंद कर बैठै रहे । बाकी माफी वाफी मांग कर हमलागों को हाय मैं शर्म से लाल हुयी न किया कीजिये । खाना खाते खाते पढ़ रहा था । हंसी के मारे दाल शर्ट पर गिर गयी । मेहरारू घूर रही है ।

    R K KHURANA के द्वारा
    July 12, 2010

    मेरे प्यारे मिश्र जी, मेरे व्यंग “रंग दे गुलाबी चोला” के उत्तर में उसी अंदाज़ में आपका जवाब बहुत भाया ! आप लोगो के असीम प्यार ने मुझे बहुत साहस दिया है ! फिर आप जैसे महान व्यंगकार द्वारा सराहा जाना एक उपलब्धि है ! राम कृष्ण खुराना

    R K KHURANA के द्वारा
    July 12, 2010

    प्रिय मिश्र जी, हाँ ! बात अधूरी रह गयी ! दाल शर्ट पर गिरने का मुझे भी अव्सोस है ! रहा पत्नी के घूरने का सवाल तो मैंने “कौन बनेगा ब्लोग्पति” में कहा है की पत्नी के झिडके का गुस्सा नहीं करते ! फिर भी मैं अपनी बहु रानी से निवेदन करूँगा कि चूंकि अबकी बार दाल मेरे व्यंग की गलती से गिरी है न की किसी “दूसरी” को घूरने के कारण इसलिए जितना आप डांट चुकी हैं उससे ज्यादा अब न डांटे ! मुझे आशा है मेरी बात वो नहीं टालेंगी ! बहु रानी को मेरा आशीर्वाद ! राम कृष्ण खुराना

Ramesh bajpai के द्वारा
July 12, 2010

आदरणीय भाई जी मै ब्लॉग पति बनने की बधाई पहले ही दिए देता हु मिठाई आप बाद मे खिला दीजिये गा

    R K KHURANA के द्वारा
    July 12, 2010

    प्रिय रमेश जी, आप लोगो के प्यार ने मुझे हमेशा ही उत्साहित किया है ! यह सब आप लोगो के प्यार बड़ो के आशीर्वाद और इश्वर की कृपा का फल है की मैं आप लोगो के बीच हूँ ! स्नेह के लिए धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

    Bones के द्वारा
    May 26, 2011

    This forum neeedd shaking up and you’ve just done that. Great post!

Nikhil के द्वारा
July 12, 2010

बहुत ही अच्छा जवाब. पढ़कर मज़ा आया.

    R K KHURANA के द्वारा
    July 12, 2010

    प्रिय निखिल जी, मेरी रचना “रंग दे गुलाबी चोला” के बारे में आपका स्नेह मिला ! प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना


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