KADLI KE PAAT कदली के पात

चतुर नरन की बात में, बात बात में बात ! जिमी कदली के पात में पात पात में पात !!

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कितना आसान है मूर्ख बनाना !

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कितना आसान है मूर्ख बनाना !

एक कहावत है कि दुनिया झुकती है, झुकाने वाला होना चाहिए ! यदि इस कहावत का नवीनीकरण कर दिया जाय तो हम ऐसे भी कह सकते हैं कि दुनिया बेवकूफ है, बेवकूफ बनाने वाला होना चाहिए ! इस युग में हम जिस ओर भी दृष्टि घुमाकर देख लें हमें यही दिखाई देगा कि प्रत्येक व्यक्ति दूसरे को बेवकूफ बनाने का प्रयत्न करता है !
आए दिन समाचार पत्रों में तरह-तरह के विज्ञापन छपते रहते हैं ! एक विज्ञापन था – “हमेशा एक सा समय देने वाली घडी खरीदिए ! कीमत केवल 125/- रूपये ! एक सज्जन ने फटाफट मनीआर्डर भेज दिया ! कुछ समय पश्चात उनको एक पार्सल मिला जिसमें 10 रूपये की बच्चों वाली घडी थी ! उन्होंने विज्ञापन देने वाले पर दावा ठोक दिया ! घडी विक्रेता ने कोर्ट में अपनी सफाई में समाचार पत्र में छ्पा अपना विज्ञापन जज के सामने रख दिया और बोला – “क्या मैंने विज्ञापन में नहीं लिखा था कि हमेशा एक सा समय देने वाली घडी ! देख लीजिए इस घडी की सूईंया हमेशा एक जगह पर ही ठहरी रहती हैं और एक ही समय देती हैं !”

यहां मुझे एक बात याद आ गई ! बात उस समय की है जब मैं मुम्बई में था ! मैं अपने चाचा जी के साथ एक सज्जन से मिलने गया ! वे बहुत बडे सेठ थे ! हमें बडे आदर से बिठाया झट से घंटी बजाई और नौकर के आने पर उसी तेजी से कहा – “इनके लिए दो स्पेशल कप में चाय लाओ !”

मैं बहुत देर तक उनके इस वाक्य पर विचार करता रहा कि सेठ ने स्पेशल कप के लिए कहा है या स्पेशल चाय के लिए ! चाय आने पर मेरी शंका का समाधान हो गया ! मैंने देखा के वाकई कप बहुत सुन्दर व डिज़ाईनदार थे परंतु उस कप में चाय आधी व चालू ही थी ! मुम्बई में दो तरह की चाय चलती है ! एक स्पेशल व दूसरी चालू ! बाद में जब मैंने अपने चाचा जी से इस बारे में बात की तो उन्होंने बताया कि इस सेठ के पास पैसा तो बहुत है परंतु वह एक नम्बर का कंजूस है ! यह इसी तरह से लोगों को मूर्ख बनाता था ! लोग बाग स्पेशल के नाम से प्रभावित हो जाते थे कि उनके लिए विशेष चीज़ मंगाई जा रही है ! उनके मन में वही ख्याल बना रहता था तथा वो आधा कप चालू चाय भी उन्हें स्पेशल का आभास देती थी ! मूर्ख बनाने का कितना मनोवैज्ञानिक ढंग है !

मनोविज्ञान की बात चली है तो मैं आपको यह भी बता दूं कि आजकल मनोविज्ञान का कितना दुरूपयोग होता है ! आप बाज़ार में जूते खरीदने के लिए चले जाईये ! जिस बूट या चप्पल को भी आप हाथ लगायेंगें उसका मूल्य होगा 199 रूपये या 499 रूपये ! जब ग्राहक को यह बताया जाता है कि जूते का मूल्य 499 रूपये है तो ग्राहक के मस्तिष्क में 400 रूपये यानि कि 4 का पहाडा ही घूमता है ! वह यह नही सोचता कि 500 रूपये में केवल एक रूपया ही कम है परंतु जब वो जूता पैक करवा कर पैसे देने लगता है तो उसे मालूम पडता है कि उसका पांच सौ का नोट निकल गया ! तब तक जूता पैक करके लिफाफा उसके हाथ में पकडा दिया जाता है !

मूर्ख बनाने की एक और घटना याद आ गई ! इतवार का दिन था मैं दिल्ली में चांदनी चौक में घूम रहा था ! तभी मेरी निगाह एक फलों का जूस बेचने वाले की रेहडी पर टंगे हुई बोर्ड पर पडी ! मोटे-मोटे अक्षरों में लिखा था – “फलों के ताज़े रस की गारंटी !”

जब मैंने बोर्ड पहली बार पढा तो मैंने उस वाक्य का अर्थ – “ताज़े फलों के रस की गारंटी से लिया !” परंतु जब मैंने दोबारा ध्यान से उस तख्ती पर लिखे वाक्य को पढा तो मुझे अपनी बुद्धि पर तरस आ गया ! मैंने अपना माथा पीट लिया ! उसने तो साफ-साफ लिखा था – “फलों के ताज़े रस की गारंटी 1” अर्थात फल चाहे बासी या गले-सडे ही हों परंतु उनका रस ताज़ा था ! अर्थात उसी समय ताज़ा निकाल कर देने की गारंटी थी ! जब मैं रेहडी के पास गया तो देखा कि सचमुच फल बासी व गले हुए थे ! एक शब्द के हेर-फेर से कितने हास्यास्पद ढंग से जनता को “पब्लिक” समझ कर बेवकूफ बनाया जा रहा था ! मज़े की बात तो यह थी कि लोग बडे चाव से उसके बासी फलों के “ताज़े” रस को चटकारे ले-ले कर पी रही थे !

लोगों को बेवकूफ बनाने का एक और ढंग व्यापारियों ने ढूंढ निकाला है ! आपको बहुत सी वस्तुयें ऐसी मिलेंगी जिस पर लिखा होगा “मेड ऐज़ जापान” या मेड ऐज़ रशिया” ! इसका सही मतलब जापान या रूस जैसी बनी होता है न कि जापान या रूस में बनी ! अर्थात जैसे जापान वालों ने बनाया उसी की नकल करके भारत में निर्मित की गई ! (अब नकल करने में तो भारतीय बहुत चतुर हैं !) परंतु जल्दी में लोग इस का अर्थ जापान में बनी से ही लेते हैं तथा आयातित (इम्पोर्टेड) समझ कर अधिक पैसे देकर भी खरीद लेते हैं !

मनोविज्ञान पर मुझे एक पुरानी कहानी याद आ गई ! एक बार एक निहत्था अपराधी एक छोटे से कमरे में घिर गया ! कमरे में एकमात्र निकलने के रास्ते पर पुलिस इंसपेक्टर पिस्तौल तानकर उसे “हैंडस अप” का आदेश दे चुका था ! उस अपराधी ने वहां भी मनोविज्ञान का सहारा लिया ! उसने एकदम चौंक कर सीधे खडे होकर बाहर की ओर देखकर कहा “अरे !”

पुलिस ईंसपेक्टर भी उस “आश्चर्यजनक” वस्तु को देखने के लिए पीछे मुडा जिसको देखकर अपराधी ने चौंक कर “अरे” कहा था ! बस यहीं पर ईंसपेक्टर मात खा गया ! जब ईंसपेक्टर पीछे की ओर मुडा उसी समय अपराधी ने फुर्ती दिखाई ! झपटा मारकर पिस्तौल छीन ली ! वास्तव में अपराधी ने चौंकने का केवल नाटक किया था ! यह मनुष्य का स्वभाव है कि वह प्रत्येक आश्चर्यजनक वस्तु के देखने की जिज्ञासा रखता है ! और उसको अतिशीघ्र शांत करने का प्रयास करता है !

मनोविज्ञान के पश्चात एक और ढंग भी है लोगों को मूर्ख बनाने का ! वो है इश्वर व धर्म के नाम पर मूर्ख बनाने का ! आजकल भी ढोंगी साधुओं की कमी नहीं है ! एक ढूंढों तो हज़ार मिलते हैं मोह माया से दूर रहने का पाठ पढाने वाले सांसारिक मोहमाया के दलदल में लिप्त साधु ! मैं आपको बहुत पुरानी बात बताने जा रहा हूं ! तब टी वी नहीं होते थे ! ट्रांज़िस्टर का जमाना था ऐसे ही एक साधु महाराज मुझे मिले ! उनके पास मरफी कम्पनी का बडा ही सुन्दर ट्रांज़िस्टर था ! मैं गलती से उनसे पूछ बैठा – “आप तो महान आत्मा हैं ! सासारिक मोहमाया से निर्लिप्त, संसार के मिथ्या आडम्बरों से बहुत दूर ! फिर आपके पास इस ट्रांज़िस्टर का क्या काम ?”
साधु महाराज जी ने छूटते ही उत्तर दिया – “क्यों, मेरे सीने में दिल नहीं है क्या ?” मैं अवाक तथा निरूत्तर हो गया ! मुझे मानना पडा कि उनके सीने में भी दिल है !

वास्तव में दिल और दिमाग उनका भी वही होता है जो आम आदमी का ! आप रोज़ टी वी और अखबार में इस बारे में देखते व पढते ही होंगे ! केवल उनके भगवा कपडे पहन लेने से हर आदमी मूर्ख बन जाता है !



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23 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rupendra singh के द्वारा
October 16, 2010

यह सत्य है की मुर्ख बनाना बहुत आसन है,पर हम मुर्खte हाँ जो बन जाते है. इन दिनों टीवी में सुरछा कवच जैसे विगयापन लोगो को मुर्ख बना रहे है. रूपेंद्र सिंह राजनंदगांव कग 09827958380

    R K KHURANA के द्वारा
    October 18, 2010

    प्रिय रूपेंद्र जी, मेरी रचना “कितना आसान है मुर्ख बनाना” पर आपकी प्रतिक्रिया प्राप्त हुई ! आपका भुत बहुत धन्यवाद् ! आपका कहना ठीक है की आजकल धर्म के नाम सबसे ज्यादा लोग मुर्ख बन रहे है ! लोगो ने मुर्ख बनाने के नए नए तरीके खोज लिय है जिसके बारे में हम आप सोच भी नहीं सकते ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद राम कृष्ण खुराना

rita singh 'sarjana' के द्वारा
July 12, 2010

अंकल जी , इतना अचछा विषय कैसे चुन लेते है. कभी-कभी हम जानबूझ के भी बेवकूफ बन जाते है कभी सेल में जाकर तो कभी कुछ अचछा सुनने के चक्कर में भगवा चोला पहने व्यक्ति की बातो में उलझकर मुर्ख बन जाते है .मेरे ऑफिस में इस तरह के लोग अक्सर आते है पर सबकुछ जानते हुए भी कुछ लोग इनका शिकार बन जाते है .

    R K KHURANA के द्वारा
    July 12, 2010

    प्रिय रीता जी, अपने ठीक कहा है कि कभी कभी हम लोग जानते हुए भी बेवकूफ बन जाते है ! आपके स्नेह के लिए धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

ASHISH RAJVANSHI के द्वारा
July 11, 2010

प्रणाम सर , लेख को देर से पढने के लिए माफ़ी चाहता हूँ | आप जैसे प्रतिभावान लेखक का हर शब्द अपने आप में संजीवनी से कम नहीं है | अब बात इस पोस्ट की तो , बहुत ही धुंधले विषय पर हाथ लगाया है आपने | बेवक़ूफ़ सभी बन रहे हैं पर अफ़सोस की बहुत गर्व के साथ | रेडीमेड गारमेंट के शोरूम में जाइए , ५०० की पैंट को १५०० का लिखकर , ५०% डिस्काउंट वो भी फ्लैट देने की बात कहते हैं यानी मुनाफा फिर भी २५० . पर हम बड़े ही गर्व से कहते हैं की भाई १५०० की पैंट लाये हैं | दरसल बेवक़ूफ़ बनाने और बनने में हमे अपार ख़ुशी होती है | अगर बनने वाले हम लोग हैं तो बनाने वाले भी हमारे बीच में ही हैं , कभी हम किसी को बनाते हैं , कभी कोई हमे बनाता है , तो कभी कोई और उसे बनाता है जिसने हमे बनाया हुआ होता है | मेरा लेख ‘माफिया समाज’ भी इन्ही लोगों से सम्बंधित है | मेरी ओर से आपको शुभकामनाएं | धन्यवाद

    R K KHURANA के द्वारा
    July 12, 2010

    प्रिय आशीष जी, बिलकुल सही फ़रमाया है अपने १ आजका लोग दूसरों को बेवकूफ बनाबे में माहिर हो गए है ! ४५०/- रूपये के जूते पर ९००/- रेट लिख कर ५०% डिस्काऊंट दे रहे है ! “कितना आसान है बेवकूफ बनाना” पर आपका स्नेह मिला ! प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् ! राम कृष्ण खुराना

sumityadav के द्वारा
July 8, 2010

मूर्ख बनाने के लिए भारत में बहुत स्कोप है। यहां तो मूर्खों की फौज है। दरअसल दिखावे से प्रभावित होकर लोग खुद बेवकूफ बनते हैं। चाहे ये बाबा हों या मल्टीनेशनल कंपनियां। मोह माया से दूर रहने की बात करने वाले बाबाओं के पास कितनी माया है सब देख चुके हैं। सच बात तो यह है कि मूर्ख बनाने का बिजनेस धांसू है जिसको जैसे मूर्ख बनाना है बनाओ खुले आम बनाओ सब मूर्ख बनने के लिए

    R K KHURANA के द्वारा
    July 8, 2010

    प्रिय सुमित जी, आपकी बात सोलह आने सच है ! मूरख बनाने के लिए हर कोइ अपना अपना हथकंडा अपना रहा है ! “कितना आसान है मूर्ख बनाना” बारे आपकी प्रतिक्रिया मिली ! धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

parveensharma के द्वारा
July 8, 2010

सही कहा आपने कि बेवकूफ बनाना आसान है. हम सब रोज मूर्ख बन रहे हैं. कभी सरकार के हाथों तो कभी विपक्ष के हाथों. कभी साधू मूर्ख बना जाता है, तो कभी कोई और….मुझे तो लगता है कि मूर्ख बनना आम आदमी कि जन्मसिद्ध अधिकार है..और मूर्ख बनाना चालाक किस्म के लोगों का कर्तव्य. बधाई.

    R K KHURANA के द्वारा
    July 8, 2010

    प्रिय परवीन जी, “कितना आसान है मूर्ख बनाना” रचना बारे आपकी प्रतिक्रिया मिली ! धन्यवाद् १ यह चालाक किस्म के लोग इसी प्रकार सीधे साधे लोगो को मूर्ख बना कर अपना उल्लू सीधा करते है ! इस चालाक तंत्र से निपटना पड़ेगा ! प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

Ramesh bajpai के द्वारा
July 8, 2010

भाई जी आप की रचना परअब लिखू भी तो क्या ? पर कुछतो लिखना ही होगा ..उस धरमेंदर वाले डायलग कर डर मुझको भी है

    R K KHURANA के द्वारा
    July 8, 2010

    प्रिय रमेश जी, मेरी रचना “कितना आसान है मूर्ख बनाना” के बारे आपका स्नेह मिला ! प्रतिक्रिया के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद् ! राम कृष्ण खुराना

kmmishra के द्वारा
July 8, 2010

अत्यंत प्रेरणादायक लेख । जितनी जल्दी यह कला सीख लेंगे उतनी जल्दी उद्धार समझों । सरकार क्यों मंहगाई बढ़ा रही है । वो चाहती है कि पब्लिक अब ईमानदारी से जीवन बिताना छोड़कर अब सरकारी तरीके से यानी चोरी चकारी करके, दूसरों को उल्लू बना कर, बेईमानी सीख कर अपने पैरों पर खड़े हों । स्वरोजगार का जमाना है चाचा जी ।

    R K KHURANA के द्वारा
    July 8, 2010

    प्रिय मिश्र जी, आपने ठीक कहा है यह सब सरकारी तंत्र ही है तो रिश्वत लेना सिखाता है और मूर्ख बना कर पैसे बनाने के तरीके बताता है ! मेरी रचना “कितना आसान है मूर्ख बनाना” के बारे आपका ;स्नेह प्राप्त हुआ ! धन्यवाद् ! राम कृष्ण खुराना

Nikhil के द्वारा
July 7, 2010

बहुत ही अच्छा और जानकारीप्रद लेख. आपके इस लेख को पढने के बाद केंद्र सरकार द्वारा चलाया जा रहा अभियान जागो जनता जागो याद आ गया. जागो जनता जागो!

    R K Khurana के द्वारा
    July 7, 2010

    प्रिय निखिल जी, मेरी रचना “कितना आसान है मूर्ख बनाना” के बारे में आपकी प्रतिक्रिया मिली ! धन्यवाद् ! जनता का जागना जरूरी है वरना लोग हमेशा मूर्ख बनाते रहेंगे ! राम कृष्ण खुराना

aditi kailash के द्वारा
July 7, 2010

चाचाजी, मुर्ख बनाना बहुत ही आसान हो गया है…. कम्पनियाँ अपना सामान बेचने नए-नए ट्रिक लगाती है और बेचारे ग्राहक बिना सोचे-समझे फँस जाते हैं…. दुकान के बाहर फ्लैट ५०% डिस्काउंट लिखा देखकर लालच में ग्राहक अन्दर चले जाते हैं और १००० रुपये की चीज़ को २५०० में खरीद कर भी खुश हो जाते हैं कि हमने २५०० बचा लिए… ये सब तो मार्केटिंग की चालाकियाँ हैं….

    R K KHURANA के द्वारा
    July 7, 2010

    प्रिय अदिति, मेरी रचना “कितना आसान है मूर्ख बनाना” के अनुसार आपने ठीक ही कहा है की आजकल हर कोइ दूसरे को बेवकूफ बना कर बहुत खुश होता है और अपने आप को बहुत अक्लमंद समझता है ! प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् ! राम कृष्ण खुराना

    R K KHURANA के द्वारा
    July 7, 2010

    प्रिय अदिति, आपने अपनी चाची को प्रणाम कहा था ! तो मैंने आपका प्रणाम उनको “साष्टांग प्रणाम करके” पंहुचा दिया था ! उन्होंने आपको आशीर्वाद दिया है ! आपको बता दिया ताकि सनद रहे ! राम कृष्ण खुराना

raziamirza के द्वारा
July 7, 2010

सच कहते हैं आप खुरानाजी। उन लोगों कि तो फ़ितरत ही होती है मूर्ख बनाना। उनमें ना तो दिल होता है ना संवेदनाएं। कैसे मूर्ख बनाया जाये उसी कि फ़िराक़ में लगे रहते हैं ये लोग। कभी धर्मो कि आड में। कभी अंधश्रध्धा की आड में। शायद वे लोग अपने आपको ही मूर्ख तो नहिं बनाते!!!! ये भी सोचनेवाली बात है।

    R K KHURANA के द्वारा
    July 7, 2010

    प्रिय रज़िया जी, मेरी रचना “कितना आसान है मूर्ख बनाना” के लिए आपका स्नेह मिला ! यह आज के युग की सच्ची कहानी है ! दूसरों को लोग सीढ़ी बना कर उपयोग करते हैं ! आपका संदेशा मैंने आपकी भाभी तक पंहुचा दिया था ! उन्होंने भी आपको स्नेह भेजा है ! मिलने की तमन्ना भी जाहिर की है ! प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया ! राम कृष्ण खुराना

NAVEEN KUMAR SHARMA के द्वारा
July 7, 2010

चाचा जी नमस्ते, चाचा जी आपका लेख “कितना आसान है मूर्ख बनाना” पढ़ा बहुत अच्छा लगा चाचा जी आपने सही लिखा है कि आज संसार में प्रत्येक आदमी दूसरे आदमी को मूर्ख बना कर अपना उल्लू सीधा कर रहा है बह केवल पैसे कमाने के लिए ही इंसान को उल्लू बनाकर धोखा दे रहा है वो यह नहीं सोचता कि आज में इसको उल्लू बना रहा हूँ और कल कोई मुझे भी उल्लू बना सकता है नवीन कुमार शर्मा बहजोई ( मुरादाबाद) मोबाइल नम्बर :- 09719390576

    R K KHURANA के द्वारा
    July 7, 2010

    प्रिय नवीन जी, “कितना आसान है मूर्ख बनाना” रचना बारे आपकी प्रतिक्रिया मिली ! धन्यवाद् १ आज के इन्सान की फितरत ही हो गयी है की दूसरों को मूरख बना कर अपना उलू सीधा करो ! प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया ! राम कृष्ण खुराना


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