KADLI KE PAAT कदली के पात

चतुर नरन की बात में, बात बात में बात ! जिमी कदली के पात में पात पात में पात !!

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चाचा का बाउंसर (हास्य - व्यंग)

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चाचा का बाउंसर

प्रिय allrounder जी, आपके बाउंसर के जवाब में हमारा बाउंसर संभालिये !
आपके पास इस बाउंसर का क्या तोड़ है निकालिए !
आप तो पहले ओवर में ही गच्चा खा गए !
6 बालों के ओवर में 7 बाल करा गए !
हमारी दयालुता को हमारी कमजोरी मत कहना !
इस मंच पर सबसे मिलजुल कर है रहना !
“कदली के पात” तो युगों-युगों से पवित्र माने जाते है !
खाने की पत्तल के साथ-साथ पूजा के काम भी आते हैं !
पानी भी बरसेगा, इंद्र देवता हैं प्रसन्न !
इस तरह से खराब मत करो अपना मन !
अब भारत आज़ाद है इस बात की ख़ुशी मनाओ !
पुरानी बातों को याद करके अपना दिल न जलाओ !
हार जीत तो जीवन का खेला है !
यह जिन्दगी दो दिन का मेला है !
हंस खेल कर यहाँ से चले जायोगे !
अच्छा काम करोगे तो सब को याद आओगे !
राम – कृष्ण ने सदा आदर्श है बनाया !
अपने बल पर सारी दुनिया को है नचाया !
यदि इज्जत करोगे तो आशीर्वाद पाओगे !
सब जगह जय जय, होगी नाम कमाओगे !

( प्रिय allrounder जी,
यह पोस्ट खास आपके लिए है ! कृपया ध्यान दीजियेगा !
यह केवल मनोरंजन के लिए है कृपया अन्यथा न लीजियेगा !
राम कृष्ण खुराना )

9988927450



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30 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

visit now के द्वारा
January 11, 2015

Keep helping people and you’ll receive everything you wish in life.

    Sandeep Gupta के द्वारा
    May 31, 2011

    Pandit Ji mai private Job karta hu lekin mai apne carrier se santust nahi hu kripya bataye mera aage ka samay kaisa hoga meri dob :22-07-1980 time :09:20 minut Morning mere pas car and IInd House kab hoga jo mai apni kamai se purchase karunga

    R K KHURANA के द्वारा
    May 31, 2011

    मेरा लेख “लाल किताब के सिद्ध टोटके भाग दो” पढ़े

Tiger के द्वारा
May 26, 2011

At last, someone comes up with the “right” aswner!

    R K KHURANA के द्वारा
    May 31, 2011

    Thanks

आर.एन. शाही के द्वारा
July 16, 2010

नया ब्लाँगर होने के कारण इन प्यारी चुहलबाज़ियों पर कोई टिप्पणी तो नहीं कर सकता, परन्तु कल्पनाशीलता और भाषा-भाव पर आप की पकड़ हमारे प्राचीन आशु-कवियों का आभास कराती है, इतना अवश्य कहूँगा …बहुत-बहुत बधाइयाँ…… आर.एन. शाही ।c/o shahirn.jagranjunction.com

    R K KHURANA के द्वारा
    July 17, 2010

    प्रिय शाही जी, बात नए पुराने की नहीं है ! बात है अपनी भावनायों को व्यक्त करने की ! आप खुल कर अपनी बात कह सकते है ! “चाचा का बाऊंसर” आपको अच्छी लगी ! प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् ! राम कृष्ण खुराना

kmmishra के द्वारा
June 26, 2010

खुराना जी आपने तो बच्चा पार्टी को आलआउट कर दिया ।

    R K Khurana के द्वारा
    June 27, 2010

    प्रिय मिश्र जी, “चाचा का बाऊंसर” कविता आपको अच्छी लगी ! प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् ! बच्चा पार्टी को मैं आउट कर ही नहीं सकता ! क्योकि आजकल के बच्चे पुराने ज़माने के लोगो से ज्यादा समझदार व जागरूक है ! हाँ प्रयास करता हूँ की आप सब का मनोरंजन हो जाय ! स्नेह के लिए आभारी हूँ ! राम कृष्ण खुराना

allrounder के द्वारा
June 16, 2010

आदरणीय खुराना साहब आपका जवाव पढ़कर मन को बढ़ी शांति मिली कि मेरे द्वारा कम से कम आपकी भावनाओं को ठेस नहीं पहुंची ! वैसे अदितिजी ने मेरा नाम सही लिखा सचिन आपका आदेश सर आँखों पर रखते हुए बता ही देता हूँ, मेरा सही नाम सचिन देव है ! Allrounder

    R K Khurana के द्वारा
    June 16, 2010

    प्रिय सचिन जी, आप को मेरा जवाब पढ़ कर शांति मिली इसकी मुझे ख़ुशी है ! ऐसे ही स्नेह बनाये रखें ! धन्यवाद् खुराना

Arvind Pareek के द्वारा
June 16, 2010

आलराउंडर ने बाउंसर कर कवि बना दिया जागरण जंक्शन पर नया चक्‍कर चला दिया । आपने बैट चलाया है खास अंदाज में, सचिन जी को बेटिंग करना भूला दिया । हास्यज-व्यंग्य के इस दौर में प्रत्येक पाठक को मजा दिला दिया । आपको व आलराउंडर सचिन को अच्छी रचना के लिए बधाई ।

    R K Khurana के द्वारा
    June 16, 2010

    प्रिय अरविन्द जी, बड़ा अच्छा लगता है जब सभी चुहल बजी करते हुई एक दुसरे पर रंग फेंकते है ! मनोरंजन के साथ ज्ञान भी मिलता है ! जागरण ने यह बहुत अच्छा मंच दिया है ! इसका भरपूर लाभ उठाना चाहिए और आपस में प्रेम बढ़ाना चाहिए ! खुराना

allrounder के द्वारा
June 16, 2010

आदरणीय खुराना साहब, चाचा का bouncer पढ़कर अच्छा लगा ! मुझे ऐसा महसूस हो रहा है की मेरे व्यंग को कुछ लोगों ने गलत तरीके से ले लिया है, मगर आप शायद समझते होंगे मेरे कवि मन मै एक विचार आया जिसको मैंने व्यक्त कर दिया, इसमें किसी प्रकार की दुर्भावना या निरादर का दूर – दूर तक लेना नहीं ! फिर भी अगर मेरी बजह से आपकी या आपके किसी भी प्रशंशक की भावना को ठेस पहुंची हो तो मैं माफ़ी चाहता हूँ ! मैं तो व्यंग के जरिये बस एक दुसरे को आपस मैं जोड़ना चाहता था ! आपका ALLROUNDAR

    R K Khurana के द्वारा
    June 16, 2010

    प्रिय allrounder जी, अरे यह आप क्या कह रहे हैं ! ठेस पंहुचने का तो प्रश्न ही नहीं ! हम लोग तो आनंद ले रहे हैं ! आप ने बहुत ही अच्छी कविता लिखी थी ! बस सोचा उत्तर दे दें ! इसी लिए मैंने यह जवाब दिया है ! मैंने साथ ही लिख दिया था की— “प्रिय allrounder जी, यह पोस्ट खास आपके लिए है ! कृपया ध्यान दीजियेगा ! यह केवल मनोरंजन के लिए है कृपया अन्यथा न लीजियेगा ! ” नीचे आप प्रतिक्रिया वाले खाने में देख सकते है ! कम से कम मुझे तो आपसे कोइ शिकायत नहीं ! राम कृष्ण खुराना

    R K Khurana के द्वारा
    June 16, 2010

    प्रिय allrounder जी, क्षमा करना मुझे आपका नाम नहीं पता ! शायद अदिति जी ने कहीं आपको सचिन लिखा था ! यदि अन्यथा न ले तो अब तो अपना नाम बता ही दीजिये ! खुराना

NAVEEN KUMAR SHARMA के द्वारा
June 16, 2010

NAMASKAR KHURANA JI, AAPKA BOUNCER BAHUT HI ROCHAK LAGA. NAVEEN KUMAR SHARMA BAHJOI (MORADABAD) U.P. 09719390576 NAVEEN_SHAGUN@REDIFFMAIL.COM

    R K Khurana के द्वारा
    June 16, 2010

    प्रिय नवीन जी, आपको मेरी कविता “चाचा का बाउंसर” पसंद आई ! प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् १ खुराना

shashiranjanmishra के द्वारा
June 16, 2010

चाचा का बाउनसर पर पाठक चारो खाने चित लेकिन काव्य सुधा के रंग में खींचतान नहीं उचित मिसिर पुराण कि वाणी में काव्यधारा में बस गोते लगाओ गर्मी ना बढे बातों कि बस हास्य रस बरसाओ

    R K Khurana के द्वारा
    June 16, 2010

    प्रिय शशि जी, “चाचा का बाउंसर” के लिए आपकी प्रतिक्रिया मिली ! धन्यवाद् ! मैंने तो पहले ही स्पष्ट कर दिया था की यह केवल मनोरंजन के लिए है कृपया अन्यथा न लीजियेगा ! इंद्र देवता हैं प्रसन्न !पानी भी बरसेगा फिर गर्मी का क्या काम ? राम कृष्ण खुराना

rajkamal के द्वारा
June 15, 2010

पानी भी बरसेगा, इंद्र देवता हैं प्रसन्न ! इस तरह से खराब मत करो अपना मन -वाह चाचू यह बात कह के जीत लिया है अपने मेरा मन- अगली बार जब आप मेरे बारे में रब्ब से और कुछ चाहे न मांगना लेकिन एक सुन्दर मन की लड़की ज़रूर मांगना-कोई दहेज़ नहीं चाहिए-चाहे काली हो+लंगड़ी -लूली हो-अंधी-कानी हो-किसी भी जात की हो-चाहे आमिर न हो- बस आप की सेवा करने वाली हो…. उसको कही अपने अस पास ही ढूंडना अब हमसे अदावत के चक्कर में कही इतनी दूर भी ना निकल जाना की कही आप को कल को कही यह ना कहना पड़ जाये की में तो इस के हाथ का पानी भी नहीं पीना चाहता- वेसे आपकी चुनी हुई कोई भी किसी भी लड़की से मुझको कोई भी शिकायत नहीं होगी-वेसे एक बात मेरी समझ में नहीं आई में तो किसी भी दौड़ में नहीं हु-फिर आप हमसे……..

    R K Khurana के द्वारा
    June 16, 2010

    प्रिय राजमकल जी, आपको “चाचा का बाउंसर” पसंद आया ! धन्यवाद् ! मैं भगवान् से प्राथना करूंगा की आपको अपनी मन पसंद की लड़की मिल जाय ! मेरी कोशिश भी जारी है ! खुराना

manoj के द्वारा
June 15, 2010

क्या बाउसर है अब ऑलराउंडर की तो वॉट लगाना पक्की है,

    R K KHURANA के द्वारा
    June 15, 2010

    प्रिय मनोज जी, मैंने तो पहले ही कह दिया है की मैं बाट नहीं लगा रहा ! केवल मनोरंजन के लिए है ! प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

R K KHURANA के द्वारा
June 15, 2010

प्रिय allrounder जी, यह पोस्ट खास आपके लिए है ! कृपया ध्यान दीजियेगा ! यह केवल मनोरंजन के लिए है कृपया अन्यथा न लीजियेगा ! राम कृष्ण खुराना

    rajkamal के द्वारा
    June 15, 2010

    काश की आप इस बात को सब जगह लागू कर पाते-

    R K Khurana के द्वारा
    June 16, 2010

    प्रिय राजकमल जी, मैं तो हमेशा यही कहता हूँ की यह मच मनोरंजन के लिए तथा ज्ञान बढ़ने के लिए है ! टांग खींचने के लिए नहीं ! स्वस्थ आलोचना लेखक तो बहुत कुछ सिखा जाती है ! सभी को इस बात को मानना चाहिए ! प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् खुराना


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