KADLI KE PAAT कदली के पात

चतुर नरन की बात में, बात बात में बात ! जिमी कदली के पात में पात पात में पात !!

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मुझे जल्लाद बना दो

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मुझे जल्लाद बना दो

राम कृष्ण खुराना

मैने सुना है कि

फांसी देने के लिये
हमारे देश में नहीं रहे जल्लाद !
कुछ नकारा हो गए और
कुछ गए हैं स्वर्ग सिधार !

तो लीजिए,
आवेदन पत्र मेरा कीजिए स्वीकार !
आतंकवादियों को फांसी देने
जल्लाद बनने मैं हूं तैयार

भारत माता की गोद में
मैने पहली किलकारी भरी थी !
इसी मिट्टी में खेला-कूदा, बडा हुआ,
यहीं मैंने आज़ाद और भगत सिंह जैसे
वीरों की कहानी पढी थी !

मेरे रगों में देश पर मर मिटने का जज्बा है
अपने लेख और गीतों में भी मैंने हमेशा
शहीदों को प्रणाम किया है !

देश के लिए बेशक
तन-मन-धन लग जाय
यही इच्छा है कि मेरे खून का
आखिरी कतरा भी मातृभूमि के काम आए !

बद्ले में मुझे कोठी, बंगला न कार चाहिए,
न नोटों की माला की इच्छा है,
न राज-दरबार चाहिए !

मेरी बिनती है कि
मेरे आवेदन पत्र पर मोहर लगा दो !
आतंकवादियों को फांसी देने के लिए
मुझे जल्लाद बना दो

राम कृष्ण खुराना

9988927450

khuranarkk@yahoo.in

http://www.khuranarkk.jagranjunction.com



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22 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

R K KHURANA के द्वारा
June 12, 2010

अदिति जी, मैंने अपनी कविता “मुझे जल्लाद बना दो” में आपके सुझाव के अनुसार बदलाव किया है ! कृपया देख लीजिये और अपनी प्रतिक्रिया दीजिये ! धन्यवाद् ! राम कृष्ण खुराना

    R K KHURANA के द्वारा
    June 16, 2010

    प्रिय अदिति, कहाँ खो गयी आप ! अब तो १५ जून भी बीत गयी ! आपकी और से कोइ प्रतिक्रिया नहीं आई ! खुराना

aditi kailash के द्वारा
June 9, 2010

चाचाजी, बहुत ही अच्छे विचार हैं आपके………आपने सुझाव मांगे थे तो टीचर दीदी इतना कहना चाहेगी कि कविता में आपने कोशिश बहुत अच्छी की है……..पर कही कहीं लय टूट रहा है……..आप कुछ समय इस पर चिंतन करें और कुछ शब्दों का सुधार करें या यूँ कहूँ कि हेर-फेर करें तो ये बहुत ही अच्छी हो सकती है……..जैसे तो लीजिए, मेरा आवेदन पत्र कीजिए स्वीकार ! आतंकवादियों को फांसी देने के लिए मैं जल्लाद बनने को हूं तैयार ! कि जगह अगर तो लीजिए, और, कीजिए मेरा आवेदन पत्र स्वीकार ! आतंकवादियों को फांसी देने जल्लाद बनने मैं हूं तैयार ! या तो लीजिए, आवेदन पत्र मेरा स्वीकार कीजिए जल्लाद बनने हूं मैं तैयार आतंकवादियों को फांसी तो दीजिये आप इसमें भी और सुधार कर सकते हैं……..इसी तरह नीचे कि पंक्तियों में भी लय कि थोड़ी समस्या है……अगर सुझाव पसंद आये तो विचार कीजिये…….

    aditi kailash के द्वारा
    June 9, 2010

    तो लीजिए, आवेदन पत्र मेरा कीजिए स्वीकार ! आतंकवादियों को फांसी देने जल्लाद बनने मैं हूं तैयार

    R K Khurana के द्वारा
    June 9, 2010

    प्रिय टीचर दीदी आपके मार्गदर्शन के लिए मैं आपका शुकर्गुजार हूँ ! मैं आपके निर्देशों का पालन करूंगा तथा और बेहतर कविता लिखने का प्रयास करूंगा ! खुराना

    R K Khurana के द्वारा
    June 9, 2010

    प्रिय टीचर दीदी मुझे आपका सुझाव बहुत पसंद आया ! मैं आगे कोशिश करूंगा ! धन्यवाद् खुराना

Varun के द्वारा
May 31, 2010

बहुत ही सुंदर लिखा है अपने ! आपकी तारीफ के लिए काया कहूं ! बहुत बहुत सुंदर है

    R K Khurana के द्वारा
    May 31, 2010

    प्रिय वरुण जी, आपको मेरी कविता “मुझे जल्लाद बना दो ” अच्छी लगी ! प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद खुराना

Gagan के द्वारा
May 31, 2010

आपकी भावना की कदर है परन्तु सरकार चेते तब ही बात बने ! बहुत सुंदर कविता है !

    R K Khurana के द्वारा
    May 31, 2010

    प्रिय गगन जी, आपकी बात सही है परन्तु आजकल हर स्थान पर राजनीती हावी है ! इसीलिए जल्लादों की भारती नहीं हो प् रही ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद खुराना

brijeshkumar के द्वारा
May 31, 2010

आपकी कविता बहुत अच्छी है .

    R K KHURANA के द्वारा
    May 31, 2010

    प्रिय ब्रजेश जी, मेरी कविता “मुझे जल्लाद बना दो ” आपको अच्छी लगी ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् ! कृपया स्नेह बनाये रखे ! खुराना

शिवेंद्र मोहन सिंह के द्वारा
May 23, 2010

बहुत सुंदर कविता है आपकी, देश प्रेम क्षणिक आवेग न होकर अगर स्थाई भाव हो तभी सुंदर परिणाम दायक होता है….रचना के लिए धन्यवाद

    R K KHURANA के द्वारा
    May 23, 2010

    प्रिय शिवेंद्र मोहन जी, आपको मेरी कविता “मुझे जल्लाद बना दो” अच्छी लगी ! धन्यवाद् आप ठीक कहते हैं ! परन्तु यह क्षणिक आवेग ही आगे जाकर स्थाई भाव बनता है ! आवेग होना जरूरी है ! प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् खुराना

subhash के द्वारा
May 20, 2010

kavita achchi hai janab applause jallado ki kami to bahana hai vote bank bachana hai

    R K KHURANA के द्वारा
    May 20, 2010

    प्रिय सुभाष जी, आपका कहना सही है ! आज राजनीती ने देश को गारत में मिला दिया है ! देश बकती का जज्बा समाप्त हो गया है और पैसा हावी हो गया है ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् खुराना

Kamal Kant के द्वारा
May 19, 2010

वाह खुराना सर इन हालात को देखते हुए तो हर नागरिक को जल्लाद बन जाना चाहिए बहुत अच्छा लेख है !

    R K KHURANA के द्वारा
    May 20, 2010

    प्रिय कमल कान्त जी, अपना स्नेह मिला ! धन्यवाद् कसाब को फांसी देने की लिए तो जल्लाद बनना ही पड़ेगा

kumar के द्वारा
May 18, 2010

अरे लगता है इस पोस्ट को सरकार तक पहुचाना होगा, लेकिन एक बात बताउ भ्रष्टा चार इस तरह फैल चुका है हमारे अफसर आपसे काम भी निकलवा लेंगे और आपकी पगार भी खा जाएंगे, और आपसे कहा जाएगा कि तुमने ही तो कहा थी सब फ्री हैं. लेकिन आज सभी भारतीय कसाब के लिए जल्लाद बनने को तैयार है. काश की सरकार इन सभी की बातें सुन ले6.

    R K KHURANA के द्वारा
    May 18, 2010

    प्रिय कुमार साहेब, मेरी कविता “मुझे जल्लाद बना दो ” आपको अच्छी लगी ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद् ! मेरी रचना “की भाई सुनो ” भी आई है ! कृपया इस पर भी आपनी प्रतिक्रिया दें राम कृष्ण खुराना

neerajsinghal के द्वारा
May 18, 2010

बहुत ही अच्छी तरह से अपने अपनी भावनाओ को व्यक्त किया है.

    R K KHURANA के द्वारा
    May 18, 2010

    प्रिय नीरज जी, आपको मेरी कविता “मुझे जल्लाद बना दो ” अच्छी लगी ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद् ! मेरी एक अन्य रचना “की भाई सुनो ” भी आई है ! आपकी राय की अपेक्षा है ! राम कृष्ण खुराना


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