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भगवान शंकर – महाशक्ति

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भगवान शंकर – महाशक्ति

राम कृष्ण खुराना

एक बार भगवान शंकर व माता पार्वती विचरण करते हुए एक पर्वत पर बैठे थे ! इधर-उधर की बातें होने लगीं ! संसार के बारे में चर्चा हो रही थी ! तभी माता पार्वती के पैर पर पानी की एक बून्द गिरी ! माता ने आश्चर्य से उपर देखा ! आसमान साफ था ! उपर कोई पक्षी भी दिखाई नहीं दिया ! फिर यह पानी की बूंद कहां से आई ! माता ने बहुत सोचा परंतु पानी की बून्द का रहस्य समझ में न आया ! उन्होंने अपनी शंका भगवान शंकर से कही ! भगवन ने देखा तो उन्हें भी कुछ समझ में न आया ! माता ने जिद की तथा बूंद के रहस्य का पता लगाने के लिए कहा ! शंकर भगवान अंतर्ध्यान हो गए !

जब शंकर जी ने अपने नेत्र खोले तो माता पार्वती ने फिर अपनी जिज्ञासा जाहिर की तथा पूछा कि यह पानी की बूंद कहां से आई !

शंकर भगवान ने कहा – “अभी थोडी देर पहले नीचे समुन्द्र में एक मगरमच्छ ने छलांग लगाई थी ! जिससे पानी उछल कर ऊपर की ओर आया और आपके पैर पर पानी की बूंद पड गई !”
“यह कैसे हो सकता है ?” मां पार्वती ने शंका जाहिर की ! “क्या मगरमच्छ इतना बलशाली है कि उसकी छलांग लगाने से पानी इतना उपर उछल कर आ गया ? समुद्र तो यहां से बहुत दूर है !”

“हां पार्वती, ऐसा ही हुआ है !” भगवान ने शांत भाव से उत्तर दिया !
“परंतु यह बात मेरे गले नहीं उतर रही ! मैं इस की जांच करना चाहती हूं ! मैं स्वंय जाकर देखना चाहती हूं !” पार्वती ने आज्ञा मांगने के आशय से कहा !
“हां पार्वती, मैं ठीक कह रहा हूं ! ऐसा ही है !’ भगवान ने पार्वती को फिर समझाया !
“परंतु मुझे विश्वास नहीं हो रहा ! मैं अपनी शंका का समाधान करना चाहती हूं !” पार्वती ने कहा “मैं स्वयं जाकर सच्चाई जानना चाहती हूं !”
भगवान शंकर “जैसी आपकी इच्छा !” कहकर फिर अंतर्ध्यान हो गए !
माता पार्वती नीचे समुद्र तट पर पहुंच गईं ! उन्होंने देखा कि एक मगरमच्छ किनारे पर ही तैर रहा है ! उन्होंने झट उस मगरमच्छ को बुला कर उससे पूछा -“क्या तुमने अभी कुछ देर पहले पानी में छलांग लगाई थी ?”

“हां माता श्री, क्या मुझसे कोई भूल हो गई है ? कृप्या मुझे क्षमा कर दें !” मगरमच्छ ने हाथ जोड दिये !

“नहीं वत्स, तुमसे कोई भूल नहीं हुई ! मैं अपनी एक शंका का निवारण करने आई थी !” पार्वती ने कहा !

“कैसी शंका माता श्री ?” मगरमच्छ ने प्रश्न किया !
“मैं उपर शंकर भगवान के साथ बैठी थी कि मेरे पैर पर पानी की एक बूंद आकर गिरी ! आसमान भी साफ था तथा ऊपर कोई पक्षी भी नही उड रहा था ! मैने जब शंकर जी से इसका रहस्य पूछा तो उन्होंने ही यह सब बताया !” पार्वती आश्चर्य से मगरमच्छ को देख रहीं थीं ! “लेकिन यदि तुम्हारे पानी में कूदने से जल इतना ऊपर आया है तो इसका मतलब यह हुआ कि तुम बहुत बलशाली हो !” माता ने फिर कहा !
“नहीं मां, मैं कहां बलशाली हूं ! मेरे जैसे और मेरे से भी अधिक बलशाली कई मगरमच्छ इस समुद्र में रहते हैं ! समुद्र हम सबको समेटे हुए है ! तो बलशाली तो समुद्र हुआ न !” मगरमच्छ दीनता से बोला !
“तुम ठीक कहते हो !” यह कहकर पार्वती मां समुद्र के पास जाकर बोलीं – “समुद्र-समुद्र, तुम बहुत बलशाली हो !”

समुद्र हाथ जोडकर खडा हो गया ! “क्या बात है माता, आप ऐसा क्यों कह रहीं हैं ?”

“मैं उपर शंकर भगवान के साथ बैठी थी कि मेरे पैर पर पानी की एक बूंद आकर गिरी ! आसमान भी साफ था तथा कोई पक्षी भी नही उड रहा था ! मैने जब शंकर जी से इसका रहस्य पूछा तो उन्होंने बताया कि अभी थोडी देर पहले नीचे समुन्द्र में एक मगरमच्छ ने छलांग लगाई थी ! जिससे पानी उछल कर ऊपर की ओर आया यह उसी पानी की बूंद है !” माता पार्वती ने आगे कहा – “सोचो वह मगरमच्छ कितना बलशाली है ! और ऐसे कई मगरमच्छों को तुम समेटे हुए हो ! अतः तुम बहुत बलशाली हो !”

“माता आप ऐसा कहकर सिर्फ मेरा मान बढाना चाहती हैं ! यह आपका बडप्पन है ! मैं तो कुछ भी नही ! अब देखिए न, यह सामने पर्वत खडा है ! समुद्र में इतनी ऊंची-ऊंची लहरें ऊठती हैं पानी के थपेडे दिन-रात इसको टक्कर मारते रहते हैं ! फिर भी यह कई वर्षों से इसी प्रकार निश्चल खडा है ! इस पर मेरी लहरों और थपेडों का कोई असर नहीं होता ! मुझ से तो बलशाली यह पर्वत है !” समुद्र ने कहा !

‘ओह, मैंने तो यह सोचा ही नहीं था ! वाकई, पर्वत बहुत बलशाली है !” यह कहकर पार्वती जी पर्वत के पास जाकर बोली –“पर्वत बेटा, मैने सुना है कि तुम बहुत बलशाली हो !”
“यह आप कैसे कह सकती हैं माता जी !” पर्वत ने नम्रतापूर्वक प्रश्न किया
“मैं शंकर भगवान के साथ वहां ऊपर बैठी थी कि मेरे पैर पर पानी की एक बूंद आकर गिरी ! मैने जब शंकर जी से इसका रहस्य पूछा तो उन्होंने बताया कि नीचे समुन्द्र में एक मगरमच्छ ने छलांग लगाई थी ! जिससे पानी उछल कर ऊपर की ओर आया ! वह मगरमच्छ कितना बलशाली है ! और ऐसे कई मगरमच्छ समुद्र में अठखेलियां करते हैं ! उसी समुद्र की लहरों के हजारो-लाखों थपेडों का भी तुम पर कोई असर नहीं होता ! तब तो तुम ही बलशाली हुए न !” पार्वती मां ने सारी कहानी सुनाते हुए पर्वत से पूछा !

“नही-नही माता जी ! सच्चाई तो यह है कि मेरे जैसे कई छोटे-बडे पर्वत इस पृथ्वी पर कई वर्षों से खडे हैं ! और पृथ्वी हम सब का भार अपने ऊपर लिए निश्चल खडी है ! तो पृथ्वी हमसे भी अधिक बलशाली हुई !” पर्वत ने अपना तर्क दिया !

पार्वती सोच मे पड गईं ! वो सोचने लग गई मैं भी कहां भूली हुई थी ! बलशाली तो पृथ्वी है चलो पृथ्वी के पास चलते हैं ! मां पृथ्वी के पास जाकर कहने लगीं – “अरे पृथ्वी रानी ! मैं तो भूली पडी थी ! मुझे पहले ख्याल ही नहीं आया ! तुम तो बहुत बलशाली हो !”
“वो कैसे मां !” पृथ्वी ने प्रश्न किया !

“मैं शंकर भगवान जी के साथ ऊपर पर्वत पर बैठी थी कि मेरे पैर पर पानी की एक बूंद आकर गिरी ! मैने जब शंकर जी से इसका रहस्य पूछा तो उन्होंने बताया कि नीचे समुन्द्र में एक मगरमच्छ ने छलांग लगाई थी ! जिससे पानी उछल कर ऊपर की ओर आया ! वह मगरमच्छ कितना बलशाली है ! और ऐसे कई मगरमच्छ समुद्र में विचरण करते हैं ! उसी समुद्र की लहरों के हजारो-लाखों थपेडों को यह पर्वत सहते हैं ! इन जैसे कई पर्वतों का और हम सब का भार तुमने अपने ऊपर लिया हुआ है ! इसलिए इसमें शक की कोई गुंजाईश ही नही है ! तुम ही सबसे बलशाली हो !” पार्वती मां ने पृथ्वी को समझाया !

पृथ्वी पार्वती की बात सुनकर नत-मस्तक होकर बोली –“ मैं कहां बलशाली हूं मां ? मैं तो स्वयं ही शेषनाग पर टिकी हुई हूं ! जब शेषनाग ज़रा सा भी अपना सिर हिलाते हैं तो मैं डोल जाती हूं ! बलशाली तो शेषनाग जी हैं !”
पार्वती जी का माथा ठनका ! व सोचने लगीं ! अरे वाकई, पृथ्वी सही कह रही है ! इतनी बडी पृथ्वी का सारा का सारा भार शेषनाग ने अपने शीश पर ऊठा रखा है ! तो बलशाली और महाशक्ति तो वही हुआ !

पार्वती जी झट से शेषनाग के पास पहुंचीं और उससे कहने लगी ! – “शेषनाग जी मुझे तो आज पता चला कि आप बहुत शक्तिशाली हो !”

“वह कैसे ?” शेषनाग ने जिज्ञासा प्रकट की !

“मैं शंकर भगवान जी के साथ ऊपर पर्वत पर बैठी थी कि मेरे पैर पर पानी की एक बूंद आकर गिरी ! मैने जब शंकर जी से इसका रहस्य पूछा तो उन्होंने बताया कि नीचे समुन्द्र में एक मगरमच्छ ने छलांग लगाई थी ! जिससे पानी उछल कर ऊपर की ओर आया ! वह मगरमच्छ कितना बलशाली है ! और ऐसे कई मगरमच्छ समुद्र में रहते हैं ! उसी समुद्र की लहरों के हजारो-लाखों थपेडों को यह पर्वत सहते हैं ! ऐसे कई पर्वत पृथ्वी पर आसन जमाए बैठे हैं ! वही पृथ्वी केवल तुम्हारे शीश पर टिकी हुई है ! तुम ही सबसे बलशाली हो ! तुम महान हो ! तुम महाशक्ति हो” पार्वती ने सारी कहानी दोहरा दी !

शेषनाग हाथ जोड कर दंडवत प्रणाम करके पार्वती माता के चरणों मे लोट गया और बोला –
“हे मां, आप ऐसा कहकर मुझे पाप का भागी बना रही हैं ! मैं तो एक अदना सा प्राणी हूं ! मेरी ऐसी बिसात कहां ! असल महाशक्ति तो आपके पति शंकर भगवान हैं !”
“शंकर भगवान ? वो कैसे ?” मां ने प्रश्न किया !
“मेरे जैसे कई सर्प, कई नाग उनके गले में लिपटे रहते हैं, उनके शरीर पर रेंगते रहते हैं ! आप कहां भटक गईं माता ! महाशक्ति तो शंकर भगवान हैं !” शेषनाग का उत्तर सुनकर ऐसा लगा जैसे पार्वती के सोचने की शक्ति समाप्त हो गई थी ! वे वापिस आकर शंकर भगवान के चरणों में गिर पडीं !

राम कृष्ण खुराना

9988950584

khuranarkk@yahoo.in




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91 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Manoj के द्वारा
March 5, 2016

अपना व्यापार kaise badhey

    R K KHURANA के द्वारा
    November 11, 2012

    Can not understand

    R K KHURANA के द्वारा
    November 11, 2012

    Virus

    R K KHURANA के द्वारा
    November 11, 2012

    what

Prue के द्वारा
May 26, 2011

And I thought I was the sensible one. Thanks for setitng me straight.

    R K KHURANA के द्वारा
    May 26, 2011

    Thanks

raju verma के द्वारा
December 15, 2010

हमारैकौबहुतअचछालगा

    R K KHURANA के द्वारा
    December 15, 2010

    प्रिय राजू जी, आपको मेरी रचना अच्छी लगी ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

    VICKY के द्वारा
    March 25, 2011

    MERE CHARE PAR MUHASE HAI KOYI UPAYE BATAYE

    R K KHURANA के द्वारा
    March 25, 2011

    किसी अच्छे डाक्टर को दिखायो

    R K KHURANA के द्वारा
    April 10, 2011

    गर्म चीजों से परहेज़ करें

deepak joshi के द्वारा
September 21, 2010

आदरणीय खुराना जी, आज इस रचना को पढने का मौका मिला। महादेव तो सर्व शक्तिमान है। बहुत ही अच्‍छी रचना है। धन्‍यवाद।

    R K KHURANA के द्वारा
    September 27, 2010

    प्रिय दीपक जी, आपको मेरी रचना “भगवान् शंकर – महाशक्ति” अच्छी लगी ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् ! खुराना

आर.एन. शाही के द्वारा
September 12, 2010

आदरणीय खुराना साहब, बधाई । आज इस रचना को पढ़ पाया । वाक़ई प्रभु की श्रेष्ठता ही सर्वोपरि है । आपके मेल से नहीं पहुंच पाया था । आज होमपेज पर बाजपेयी साहब की टिप्पणी पकड़कर पहुंचा । अब दूसरी भी पढ़ पाऊंगा । धन्यवाद ।

    R K KHURANA के द्वारा
    September 13, 2010

    प्रिय शाही जी, मेरी रचना “भगवान शंकर-महाशक्ति” आपको अच्छी लगी ! जानकर हर्ष हुआ ! भगवान शंकर का आशीर्वाद सब पर बना रहे यही प्रार्थना है ! राम कृष्ण खुराना

    Caelyn के द्वारा
    May 26, 2011

    Very true! Makes a change to see smooene spell it out like that. :)

    R K KHURANA के द्वारा
    November 11, 2012

    Tanks Caelyn

    R K KHURANA के द्वारा
    November 11, 2012

    Cant understand you

    R K KHURANA के द्वारा
    November 11, 2012

    Virus hai

    R K KHURANA के द्वारा
    November 11, 2012

    siehnekkks

Ramesh bajpai के द्वारा
September 12, 2010

आदरणीय भाई जी पोस्ट पढ़ कर मन हर्षित हो गया . कितनी शालीनता और विनम्रता है, भगवन आशुतोष में . यही शिक्षा देती आपकी रचना की कितनी तारीफ किन शब्दों में करू . नहीं समझ पा रहा . बहुत बहुत बधाई . ५/५

    R K KHURANA के द्वारा
    September 13, 2010

    प्रिय रमेश जी, आपको मेरी रचना “भगवान शंकर-महाशक्ति” अच्छी लगी ! प्रतिक्रिया व स्नेह के लिए धन्यवाद ! राम कृष्ण खुराना

Shibbu Arya-Mathura के द्वारा
August 28, 2010

verygood article

    R K KHURANA के द्वारा
    August 28, 2010

    प्रिय शिबू जी, आपको मेरी रचना “भगवान शंकर – महाशक्ति” अच्छी लगी ! प्रतिक्रिया के लिए आपका बहुत बहुत धयांवाद ! राम कृष्ण खुराना

Vishnu Dutta Paliya के द्वारा
August 15, 2010

आदरणीय खुराना जी, आपका यह यह शिवमहाशक्ति कस सम्बन्द में प्रेरणादायक लगा की वास्तविक महाशक्ती शिव ही हें . इस प्रकार के लेखों के लिए कोटि कोटि साधुबाद . विष्णु दत्त शर्मा ग्राम व पोस्ट पलिया फतेहाबाद जिला आगरा मो. 09719398200

    R K KHURANA के द्वारा
    August 15, 2010

    प्रिय विष्णु जी, “भगवान शंकर – महाशक्ति” रचना आपको अच्छी लगी ! जानकर मन प्रसन्न हुआ ! आपकी प्रतिकिर्या के लिए आपको धन्यवाद् ! राम कृष्ण खुराना

Sunil के द्वारा
August 4, 2010

बहुत सुंदर है !

    R K KHURANA के द्वारा
    August 4, 2010

    प्रिय सुनील जी, “भगवान् शंकर – महाशक्ति” लेख आपको सुन्दर लगा ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् ! राम कृष्ण खुराना

Alok jain के द्वारा
July 23, 2010

मेरी जनम तारीख 31-07-1963 समय़ 03-30 दोपहर घौरा  म,प्र,है मेरा 20 लाख रूपया उधारी मै फस गया है कैसे मिलेगा कृपया उपाय बताये

    R K Khurana के द्वारा
    July 23, 2010

    प्रिय आलोक जी, आप मेरे लेख लाल किताब के सिद्ध टोटके में 5 नंबर का टोटका करें ! लाभ होगा ! राम कृष्ण खुराना

    Lucky के द्वारा
    May 26, 2011

    HHIS I should have thughot of that!

NAVEEN KUMAR SHARMA के द्वारा
June 22, 2010

GOOD AFTERNOON KHURANA JI, KHURANA JI AAPKA ARTICLE PADHA . KAFI ACHCCHA ARTICLE HAI. AAPNE BAHGWAN SHANKER KI MAHIMA KA VARNAN BAHUT HI ACHCHE DHANG SE KIYA HAI. THANKS NAVEEN KUMAR SHARMA NAVEEN_SHAGUN@REDIFFMAIL.COM CONT. NO. – 09719390576

    R K KHURANA के द्वारा
    June 22, 2010

    प्रिय नवीन जी, आपको मेरी रचना “भगवान शंकर -महाशक्ति” में भगवान् शंकर का गुणगान अच्छा लगा ! धन्यवाद् ! भगवान् शंकर तो सभी देवों के देव है ! उनकी महिमा तो कौन जन सकता है ! प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् ! राम कृष्ण खुराना

Gagandeep के द्वारा
June 18, 2010

शंकर भगवान् जी का गुणगान कितना अच्छा किया है ! उनकी तो महिमा अपरम्पार है !

    R K KHURANA के द्वारा
    June 19, 2010

    प्रया गगन दीप जी, शंकर भगवान् की महिमा गाना तो गौरव की बात है ! मेरा तो बहुत ही छोटा प्रयास था १ आपको अच्छा लगा ! धन्यवाद् ! राम कृष्ण खुराना

Munish Sachdeva के द्वारा
June 17, 2010

खुराना जी, बहुत सुंदर रचना है यह आपकी ! भगवान शंकर की महिमा का गुणगान बड़े अच्छे ढंग से किया आपने ! मेरी बढ़ाई स्वीकार करें !

    R K Khurana के द्वारा
    June 18, 2010

    प्रिय मुनीश जी, भगवान शंकर -महाशक्ति , आपको अच्छी लगी ! प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् ! खुराना

aditi kailash के द्वारा
June 11, 2010

बहुत ही सुन्दर वृतांत…….एक अच्छी सीख….हम कितने भी बड़े क्यों ना हो जाएँ हमेशा हमें विनम्र रहना चाहिए और अहंकार का एक भी अंश हमारे व्यवहार में नहीं आना चाहिए………आपका आभार………..इतना अच्छा ज्ञान फैलाने ……..

    R K Khurana के द्वारा
    June 11, 2010

    समय निकाल कर ;प्रतिक्रिया देने के लिए विशेष रूप से आभार ! खुराना

Naha Khanna के द्वारा
June 3, 2010

नमस्कार, करपिया करके आप इसका अर्थ बताने का कष्ट करे “ॐ नमः शिवाय” नेहा खन्ना

    R K Khurana के द्वारा
    June 3, 2010

    प्रिय नेहा जी, मेरे आलेख “भगवान शंकर-महाशक्ति” के बारे में जो आपने प्रश्न पूछा है उसका उत्तर जितना मेरी समझ है मैं दे रहा हूँ ! “ॐ नमः शिवाय” का अर्थ है मैं शिव को प्रणाम करता हूँ ! मैं शिव के आगे झुकता हूँ ! यह महामंत्र कहलाता है ! यह पाच शब्दों का मंत्र है १ ॐ नम-ह शि-वाय ! यह मंत्र कहीं भी किसी के द्वारा भी पढ़ा या मनन किया जा सकता है ! इसके लिए कोइ विशेष विधि विधान नहीं है ! मन से इसका जाप करने से सब प्रकार की इच्छाएं पूरी होती हैं तथा हर प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है ! ऐसा मेरा व विद्वानों का मानना है ! मेरी जितनी समझ थी मैंने आपको बता दिया ! यदि कोइ पाठक अधिक जानकारी रखता हो तो कृपया बताने का कष्ट करें ! आभारी हूँगा ! राम कृष्ण खुराना

Gagan के द्वारा
May 31, 2010

शंकर भगवान की महिमा बहुत सुंदर ढंग से प्रस्तुत की है ! साधुवाद

    R K Khurana के द्वारा
    May 31, 2010

    प्रिय गगन जी, शंकर भगवान की महिमा तो कोइ भी नहीं कह सकता क्योंकि वो अपरम्पार है ! फिर भी स्तुति करने का प्रयास किया है ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभारी हूँ ! खुराना

Vinod Kumar के द्वारा
May 27, 2010

bhagwan shankar ki jai

    R K KHURANA के द्वारा
    May 29, 2010

    प्रिय विनोद जी, भगवान शंकर की आप पर कृपा बनी रहे ! धन्यवाद् खुराना

Rajan Soni के द्वारा
May 27, 2010

बहुत सुंदर है !

    R K KHURANA के द्वारा
    May 29, 2010

    प्रिय राजन जी, आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् खुराना

Udit Sood के द्वारा
May 22, 2010

भगवान शंकर तो महाशक्ति ही हैं इसमें क्या संदेह है ! सुंदर कहानी है

    R K KHURANA के द्वारा
    May 23, 2010

    प्रिय उदित जी, इसमें कोइ शक नहीं है की भगवान शकर महाशक्ति हैं ! प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद ! खुराना

R K KHURANA के द्वारा
May 19, 2010

प्रिय कमल कान्त जी आपकी प्रतिक्रिया का ;धन्यवाद् मेरी अन्य रचनायो पर भी अपनी प्रतिक्रिया दें ! खुराना

Kamal Kant के द्वारा
May 19, 2010

आदरणीय खुराना सर आपके द्वारा लिखी कहानी भगवन शंकर महाशक्ति पढ़ी बहुत अच्छी लगी आपको बधाई

R K KHURANA के द्वारा
May 18, 2010

प्रिय शार्देश जी, आपकी प्रतिक्रिया पाकर अच्छा लगा ! मेरा प्रयास तो यही होता है की मैं रोचक कथा पाठकों को दूं तथा उससे कुछ शिक्षा भी मिले १ इसी उधेश्य से “भगवान शंकर – महाशक्ति ” लिखी थी ! आपकी जिज्ञाषा शांत हुई आप प्रसन्न हुए मुझे इस बात की ख़ुशी है ! मेरी दो नई रचनाये “की भाई सुनो” और “मुझे जल्लाद बना दो” आई हैं ! कृपया अपनी प्रतिक्रिया जरूर दें ! धन्यवाद् सहित ! राम कृष्ण खुराना

shaardeshkchaurasia के द्वारा
May 15, 2010

सर जी नमस्कार, आपकी कहानी अत्यंत रोचक एवं शिक्षाप्रद है. भगवान् शंकर तो देवताओं के भी देव हैं ,उनकी महिमा अपरम्पार है. मैं एक biotech का स्टुडेंट हूँ और इस सृष्टि का प्रथम Biotechnologist मैं भगवान् शंकर को ही मानता हूँ क्यूंकि अभी तक मनुष्य के सिर पर हाथी का सिर, और कभी बकरी का सिर उन्होंने ही लगाया है और इस तरह के और भी बहुत से प्रयोग उन्होंने ही किये हैं जो आज के वैज्ञानिकों के लिए अभी तक संभव नहीं हो सका है. आपने इस कहानी का सन्दर्भ कहाँ से लिया है ? क्योंकि जहाँ तक मुझे जानकारी है माता पार्वती तो पर्वतराज हिमालय की पुत्री थीं और आपने इस काहानी में लिखा है ( पार्वती जी पर्वत के पास जाकर बोली –“पर्वत बेटा, मैने सुना है कि तुम बहुत बलशाली हो !”) ये कैसे संभव है की माता पार्वती अपने पिता को ही बेटा कहकर संबोधित करें. कृपया मेरी जिज्ञ शांत करने की कृपा करियेगा. धन्यवाद. आपका ही -शार्देश

    R K KHURANA के द्वारा
    May 17, 2010

    प्रिय चौरसिया जी, मेरे लेख \"भगवान शंकर – महाशक्ति\" के बारे में आपके विचार जानकर प्रसन्नता हुई ! आपने कहा है की माता पार्वती पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं फिर वो पर्वत को बेटा कैसे कह सकती है ! तो मैं आपकी बात ही बड़ी करता हूँ. ! माता पार्वती हिमालय पर्वत की पुत्री हैं ! केवल पर्वत की नहीं ! अर्थात हर पर्वत की नहीं ! माता पार्वती भी तो एक ;पुरुष शंकर भगवान् की पत्नी हैं वहीँ वे गणेश जी व कार्तिक जी की माँ भी है ! गणेश जी व कार्तिक जी भी तो पुरुष हैं ! दूसरी बात जहाँ तक मेरी जानकारी है तो मैं आपको बता दूं की हिमालय पर्वत के साथ कोइ भी समुद्र नहीं है ! हाँ ! आपने पूछा है के मैंने यह सन्दर्भ कहाँ से लिया ! लगभग 30 वर्ष पहले की बात है मेरे पिताजी को कैंसर हो गया था ! उनका इलाज वैसे तो पी जी आई चंडीगढ़ में चल रहा था ! तभी किसी ने मुझे बताया की अम्बाला में एक सज्जन हैं जो चुम्बक से रोगों का इलाज करते हैं ! उनके पास कैंसर का भी इलाज है ! मैं पिताजी को लेकर अम्बाला गया तथा उन सज्जन से मिला ! उन्होंने चुम्बक से इलाज शुरू कर दिया ! मुझे लगभग ६-७ दिन वहां रहना पड़ा ! खैर पिताजी स्वस्थ तो नहीं हो पाए तथा १९८६ में उनका स्वर्गवास हो गया ! वह सज्जन शंकर भवान जी के परम भक्त थे ! यह कथा उन्होंने ने ही मुझे सुनाई थी ! मैंने यह भी नोट किया की वे यह कथा हर किसी को सुनाते थे ! मैं आपको एक बात और बता दूं की उस दौरान उन्होंने मुझे ही यह कथा ३-४ बार सुनाई थी ! पिछले दिनों पूजा करते समय मैं ॐ नमो शिवाय की माला का जप कर रहा था तो अचानक मेरे दिमाग में यह कथा कौंध गयी ! मैं कुछ दिनों तक उस कथा का स्मरण और मनन करता रहा फिर सोचा शंकर भगवान् की महिमा का वर्णन ब्लॉग पर भी कर दिया जाय ! मैंने उस कथा को अपनी टूटी-फूटी भाषा में पिरोने का प्रयास किया है ! सबसे बड़ी बात जैसे की आप भी मानते है की शंकर भगवान् देवाधिदेव हैं ! यह सारी कडिया उनको महाशक्ति सिद्ध करने के लिए ही तो पिरोई गयी हैं ! मुख्य उधेश्य तो भगवान् शंकर को महाशक्ति कहना है ! न मानने वाले तो यह भी कहते हैं की हाथी का सर किसी मनुष्य पर लगाना मेडिकल साईंस में संभव ही नहीं है ! आप सरिता को पढ़ लीजिये वो तो इन बातों को अन्धविश्वास का नाम देते हैं ! लेकिन मैंने इन कथाओ को कभी भी आलोचनात्मक द्रष्टि से नहीं देखा ! भगवान् की महिमा गाने में विश्वास रखा है ! बाकी आपकी श्रधा ! आपने इतना खोज कर के टिपण्णी की मैं गदगद हो गया ! मैं आपका तहे दिल से धन्यवाद् करता हूँ ! राम कृष्ण खुराना

    Shaardesh K Chaurasia के द्वारा
    May 18, 2010

    मेरी जिज्ञासा शांत करने के लिए आपका ह्रदय से धन्यवाद. मैं आपके सभी लेख पढता हूँ और हर बार मुझे कोई न कोई नयी जानकारी मिलती है. आपकी लेखन शैली भी बहुत ही अच्छी है. आपका ही – शार्देश

    R K KHURANA के द्वारा
    May 10, 2011

    प्रिय शर्देश जी, आपका धन्यवाद

Sanjeev Kumar के द्वारा
May 14, 2010

बहुत सुंदर कहानी ! मेरी और से शुभकामनाये स्वीकार कीजिये !

    R K KHURANA के द्वारा
    May 15, 2010

    प्रिय संजीव जी, भगवान शंकर आपकी मनोकामना पूरी करें आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद्

Parveen Malik के द्वारा
May 14, 2010

भगवान शंकर की रोचक कथा सुनाने के लिए आपका धन्यवाद् ! बहुत अच्छी कथा है !

    R K KHURANA के द्वारा
    May 15, 2010

    प्रिय मलिक जी, आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् ! भगवान शंकर आपकी मनोकामना पूरी करें

ARVIND PAREEK के द्वारा
May 13, 2010

प्रिय श्री खुराना जी, महाशक्ति शंकर भगवान की यह रोचक कथा इतने सहज, सरल शब्‍दों में निस्‍:संदेह प्रशंसनीय प्रयास है । लगे रहिए । मेरे ब्‍लॉग ‘अंग्रेजी की बोर्ड से हिन्‍दी में टाईप करें’ को पढ़कर वास्‍तव में आपनें युनिकोड फॉन्‍ट मंगल में यह बेहतरीन प्रस्‍तुति दी है । आपकी तरह लाभान्वित होने वाले साथी यदि मेरे ब्‍लॉग पर ही नहीं केवल अपने इच्छित स्‍थान पर भी जैसे अपने ब्‍लॉग, अपनी मेल आदि में भी यदि इसका उल्‍लेख कर देंगें तो मैं समझुँगा कि मेरा प्रयास सार्थक हैं । अच्‍छी रचना के लिए आपका पुन: धन्‍यवाद । अरविन्‍द पारीक

    R K KHURANA के द्वारा
    May 13, 2010

    प्रिय अरविन्द जी, आपको मेरी रचना “भगवान शंकर – महाशक्ति” अच्छी लगी ! धन्यवाद आपने की-बोर्ड से हिंदी टाइप का लेख देकर जो सराहनीय कार्य किया है उसका श्रेय आपको अवश्य मिलना चाहिए ! यह आपका हक़ बनता है ! आप इसके योग्य हैं ! धन्यवाद् सहित ! राम कृष्ण खुराना

mihirraj2000 के द्वारा
May 12, 2010

खुराना जी आप वाकई तारीफ के काबिल है. शिव की कृपा आप पर बनी रहे वही निर्विवाद सत्य है. बहुत ही रोचक कहानी. शुभकामनाये. http://www.mihirraj2000.jagranjunction.com

    R K KHURANA के द्वारा
    May 12, 2010

    प्रिय मिहिर जी, आपका स्नेह पाकर सराबोर हो गया ! “भगवान शंकर – महाशक्ति ” रचना के बारे में आपके विचार जानकर प्रसनता हुई ! भगवान शंकर से प्रार्थना है की वो आपको व आपके परिवार को हर ख़ुशी दें ! प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

sunny rajan के द्वारा
May 11, 2010

ॐ नमः शिवाय. ॐ शिव शम्भू . महादेव तेरी लीला न्यारी है

    R K KHURANA के द्वारा
    May 11, 2010

    प्रिय सन्नी जी, ॐ नमह शिवाय ! भगवान शंकर आपकी मनोकामना पूरी करें ! धन्यवाद् सहित !

jack के द्वारा
May 11, 2010

शिव भक्त से मिलीए.

    R K KHURANA के द्वारा
    May 11, 2010

    प्रिय जैक जी, ॐ नमो शिवाय ! शिव भक का स्वागत है ! भगवन शिव आपकी हर इच्छा पूरी करें ! धन्यवाद्

digvijaytrivedi के द्वारा
May 11, 2010

ॐ नमः शिवाय।

    R K KHURANA के द्वारा
    May 11, 2010

    प्रिय दिगविजय जी, ॐ नमो शिवाय ! भगवान् शिव से प्रार्थना है की आपको हर प्रकार से सुख दे ! धन्यवाद्

kmmishra के द्वारा
May 10, 2010

ऊं नमः शिवाय।

    R K KHURANA के द्वारा
    May 11, 2010

    प्रिय मिश्र जी, ॐ नमो शिवाय ! भगवान् शिव सबका कल्याण करें ! धन्यवाद्

Arunesh Mishra के द्वारा
May 8, 2010

खुराना सर, बहुत ही रोचक कथा सुनाई आपने..धन्यवाद आप का.

    R K KHURANA के द्वारा
    May 11, 2010

    प्रिय अरुणेश जी, रचना आपको अच्छे लगी मेरी म्हणत सफल हो गयी ! प्रतिक्रिया के लिए आभार ! खुराना

NIKHIL PANDEY के द्वारा
May 8, 2010

सर प्रणाम .. बहुत अच्छा लगा ये कथा पढ़कर …. तभी तो शिव देवाधिदेव महादेव कहलाते है.. धन्यवाद आपको इसके लिए ……

    R K KHURANA के द्वारा
    May 11, 2010

    प्रिय निखिल जी, आपका स्नेह मिला अच्छा लगा ! भगवान शंकर से प्रार्थना है की उनका आशीर्वाद आपको व सबको सतत मिलता रहे ! स्नेह के लिए धन्यवाद ! खुराना

शिवेंद्र मोहन सिंह के द्वारा
May 8, 2010

आपके ब्लॉग को पढ़ कर, अभी कुछ दिनों पहले पढ़ी मेल याद आ गई, लीजिये प्रस्तुत है: एक शराबी फुल टाईट होकर घर जा रहा था. रास्ते में एक मंदिर के बाहर पुजारी दिखा.: शराबी ने पुजारी से पूछा, सबसे बड़ा कौन? पुजारी ने पीछा छुड़ाने के लिए कहा मंदिर बड़ा. शराबी बोला मंदिर बड़ा तो धरती पे कैसे खड़ा? पुजारी: मेरे बाप धरती बड़ी. शराबी: धरती बड़ी तो शेषनाग पे क्यूँ खड़ी? पुजारी: शेषनाग बड़ा. शराबी: शेषनाग बड़ा तो शिव के गले में क्यों पड़ा? पुजारी: शिव बड़ा. शराबी: शिव बड़ा तो पर्बत पर क्यों खड़ा? पुजारी: पर्बत बड़ा. शराबी: पर्बत बड़ा तो हनुमान की ऊँगली पे क्यों पड़ा? पुजारी: हनुमान बड़ा. शराबी: हनुमान बड़ा तो राम के चरणों में क्यों पड़ा? पुजारी: राम बड़ा. शराबी: राम बड़ा तो रावण के पीछे क्यूँ पड़ा? पुजारी: अरे मेरे बाप तू बता कौन बड़ा? शराबी: इस दुनिया में वो बड़ा, जो पूरी बोतल पी के अपनी टांगो पे खड़ा.

    R K KHURANA के द्वारा
    May 8, 2010

    प्रिय शिवेन्द्र मोहन जी, आपकी रोचक कहानी पढ़कर मज़ा आ गया ! आज की दुनिया में तो लोग शराब को ही महत्त्व देते हैं उनके लिए तो शराब ही बड़ी है ! टिप्पणी और रोचक कहानी के लिए धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

Gautam के द्वारा
May 8, 2010

खुराना साहिब प्रणाम लेख पढ़ कर पता चला की व्यंग के साथ साथ अध्यातम में भी आपकी पकड़ है ! बहुत रोचक कहानी है ! ऐसे लेख देने के लिए शुकिरिया

    R K KHURANA के द्वारा
    May 8, 2010

    प्रिय गौतम जी, इस सृष्टि को चलाने वाले को हम भूल नहीं सकते ! कुछ समय निकाल कर उस भगवान को भी याद कर लेना चाहिए ! आपके कमेंट्स के लिए आपका धन्यवाद् खुराना

    vijay giri के द्वारा
    January 13, 2014

    khurana ji aap ki kahani bahut hi sundar hai\\\ shikchha prad hai aap samudra dev ki tarah gambhir hai aur gyani hai mai aap ko pranam karata hu

    R K KHURANA के द्वारा
    January 14, 2014

    प्रिय विजय जी, आपको मेरा लेख “भगवन शंकर – महाशक्ति” पसंद आया ! धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना


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