KADLI KE PAAT कदली के पात

चतुर नरन की बात में, बात बात में बात ! जिमी कदली के पात में पात पात में पात !!

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शीतल प्रसाद - ग्रीष्म प्रसाद

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शीतल प्रसाद – ग्रीष्म प्रसाद

राम कृष्ण खुराना

वे बहुत पंहुचे हुए तपस्वी माने जाने लगे थे ! उनका नाम चारों ओर फैलने लगा था ! एक दिन एक भक्त उनकी कुटिया में आया ! कुछ क्षण पश्चात् उसने साधू बाबा से पूछा – “महाराज जी, आपका नाम क्या है ?”

“शीतल प्रसाद !” महात्मा ने शांत भाव से उत्तर दिया !

पांच मिनट पश्चात् उस भक्त ने फिर पूछ लिया – “भगवन, आपका नाम क्या है ?”

“कहा न शीतल प्रसाद !” बाबा ने फिर उत्तर दिया !

कुछ समय इसी प्रकार बीत गया ! भक्त ने पुन: प्रश्न किया – बाबा जी, आपका नाम क्या है ?”

बाबा ने घूर कर उसकी तरफ देखा तथा कुछ कड़क आवाज में उत्तर दिया – “शीतल प्रसाद !”

शायद पांच-सात मिनट ही बीत पाएं होंगे कि उसने फिर प्रश्न दाग दिया – “महात्मन, आपका नाम क्या है ?”

“तू बहरा है क्या बे ? कितनी बार कहा शीतल प्रसाद – शीतल प्रसाद !” साधु आपे से बाहर-सा हो गया !

लगभग दस मिनट पश्चात् ही भक्त अपने को रोक न सका ! उसके मुंह से निकल गया – “आपका नाम क्या…… ?”

अभी वह अपना वाक्य पूरा भी न कर पाया था कि साधू बाबा ने गुस्से से भरकर अपना चिमटा उठाया तथा उसे मारने के लिए दौड़ा ! भक्त आगे-आगे शीतल प्रसाद पीछे-पीछे ! वे चिमटा उठाये उसके पीछे-पीछे भागते चिल्लाते जाते – “उल्लू के पठ्ठे, हरामजादे, कितनी बार कहूं – शीतल प्रसाद – शीतल प्रसाद !”

“हाँ-हाँ मैं भी यही देखना चाहता था कि आप वास्तव में शीतल प्रसाद हैं कि नहीं ! परन्तु आप तो ग्रीष्म प्रसाद निकले !”
भक्त ने भागते हुए कहा !

राम कृष्ण खुराना

9988950584

khuranarkk@yahoo.in


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