KADLI KE PAAT कदली के पात

चतुर नरन की बात में, बात बात में बात ! जिमी कदली के पात में पात पात में पात !!

81 Posts

3606 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 875 postid : 64

रौशनी दिखती नहीं - (हास्य-व्यंग)

  • SocialTwist Tell-a-Friend

रौशनी दिखती नहीं

राम कृष्ण खुराना


बचपन में हम झूम-झूम के गाया करते थे – “जो वादा किया वो निभाना पडेगा !” परंतु जब हम कुछ बडे हुए तो हमारी समझ में यह बात आने लगी कि वादा निभाने की बातें तो सन उन्नीस सौ बीस की बातें हैं राकेट युग में तो केवल वादा करना ही आवश्यक होता है निभाना नहीं !

हालत यहां तक आन पहुंची है कि जब से इस बेरहम दुनिया ने मुझे एक अदद बीवी का पति घोषित कर दिया है तब से मैं अपनी बीवी से वायदा करता आ रहा हूं कि अगली पे मिलते ही मैं तुम्हें एक नई साडी ला दूंगा !  मेरी बीवी भी बकायदा वायदा पूरा होने के इंतज़ार में बडे आराम से दहेज में मिली साडियों को तार-तार होने तक निभाती चली आ रही है !

प्रधान मंत्री बनने के पश्चात मोरार जी देसाई ने भी कहा था कि चुनाव के दौरान किए गए सभी वायदे पूरा करना जरूरी नहीं है !  इसी बात को सभी नेता बदस्तूर निभाये जा रहे हैं !  बात पुरानी है !  एक बार जब श्रीमति इन्दिरा गांधी चुनाव हार गईं थीं तो अगले चुनाव में श्रीमति गांधी ने डीज़ल व मिट्टी के तेल की दुहाई देकर जनता पार्टी पर सारा तेल पी जाने का आरोप लगाया था !  और सत्ता हाथ में आने पर तेल की नदियां बहा देने का वायदा किया था !  परंतु यदि वादा निभा ही दिया तो वो वायदा कैसा ?  श्रीमति गांधी ने तेल के साथ-साथ चीनी की भी कद्र लोगों की नज़रों में बढा दी !  जनता इन को पाने के लिये राशन की दुकानों के सामने लम्बी-लम्बी कतारों में घंटों खडी तरसती रहती थी !

तब से लेकर आज दिन तक जितने भी चुनाव हुए हैं हर चुनाव में सभी नेता हर बार गरीबी हटाने, मंहगाई भगाने तथा नौकरी पर लगाने का वायदा करते हैं ! वायदे सुनकर तो कहने को जी चाहता है कि -

वही लह्ज़ा, वही तेवर, कसम है तेरे वादों की !

ज़रा भी शक नहीं होता कि यह झूठी तसल्ली है !

क्योंकि जनता चुनावों में बडे विश्वास और उत्साह के साथ वोट देकर इन नेताओं को जिताती है !  परंतु आज भी हनुमान की पूंछ की तरह बढती मंहगाई, अन्धों व गरीबों पर लाठीचार्ज, पुलिस द्वारा हरिजनों पर अत्याचार तथा महिलायों से बलात्कार की घटनायें देख व सुन कर दिल दहल जाता है !

क्या इसी सूरज की आशा में किया था रतजगा ?

नाम तो सूरज है,  लेकिन रौशनी दिखती नहीं !!

अब तो इन नेताओं के वायदे सुन कर लोग यही कहने लगे हैं -

वादे करके जो आपने एहसान किया है,

पूरा करके उन्हें हम पर और एहसान न करो !

जनता को इन राजनितिक पार्टियों का पता चल गया है !  इनकी पोल खुल चुकी है ! नेताओं का दुर्भाग्य है कि जनता कुछ-कुछ समझदार होती जा रही है !  अब इन नेताओं को जनता को बेवकूफ बनाने में बहुत कठिनाई आ रही है और उनको ज्यादा मेहनत करनी पड रही है ! जिस के लिए नेता लोग तरह- तरह की तरकीबें लडाने लगे हैं !  क्योंकि जनता को मालूम हो गया है कि -

खुली हवा में लाने का दम भर रहे हैं वो,

घरों में जिनके यारों रौशनदान भी नहीं !

राम कृष्ण खुराना

9988950584




Tags:       

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (42 votes, average: 4.95 out of 5)
Loading ... Loading ...

8 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

roshni के द्वारा
January 14, 2011

खुराना जी , आपके लेख पे बस दो पंक्तियाँ कहुगी ये सूरज जो आया है अँधेरे का सूरज है हमे अब रौशनी की खातिर घरों को जलना होगा उनके वादे पे जो कट रही है जिंदगियां अब इन जिंदगियों को बचाने के लिए खुद आगे आना होगा .. बहुत बढ़िया लेख

    R K KHURANA के द्वारा
    January 15, 2011

    प्रिय रौशनी जी, लोहड़ी ते मकर सक्रांति दी तुआनु बहुत बहुत मुबारकां ! मेरी रचना “रौशनी दिखती नहीं” पर आपका स्नेह मिला ! बहुत अच्छा लगा ! तीन चिड़ियों के साथ आपको तस्वीर देखी ! सुंदर ! राम कृष्ण खुराना

Ramesh bajpai के द्वारा
September 12, 2010

क्या इसी सूरज की आशा में किया था रतजगा ? नाम तो सूरज है, लेकिन रौशनी दिखती नहीं !! बहुत यथार्थ का बखान .वह भी गुदगुदाते हुए . यह आपके बस की ही बात है

    R K KHURANA के द्वारा
    September 13, 2010

    प्रिय रमेश जी, मेरी रचना “रौशनी दिखती नहीं” पर आपका स्नेह मिला ! प्रतिक्रिया के लिए आभारी हूँ ! राम कृष्ण खुराना

Arunesh Mishra के द्वारा
April 12, 2010

बड़ा अच्छा लेख लिखा आप ने खुराना जी. विषय की गंभीरता को बनाये रखते हुए गद्य और पद्य का समायोजन अच्छा लगा पढ़ के.

    R K KHURANA के द्वारा
    April 13, 2010

    प्रिय मिश्र जी, आपकी प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद ! आप जैसे सज्जनों के विचारों से हम लोगों का हौंसला बढता है ! कृपया स्नेह बनाये रखें !

ns के द्वारा
April 12, 2010

भ्रष्ट नेताओं के होते हुए हमें किसी भी तरह की उम्मीद नही करनी चाहिए,.

    R K KHURANA के द्वारा
    April 13, 2010

    बिलकुल ठीक कहा आपने ! इन नेतायों के होते हुए गरीब आदमी का तो जीना ही दूभर है ! परन्तु हमारे पास कोइ और विकल्प भी तो नहीं है ! प्रतिक्रिया के लोए धन्यवाद् !


topic of the week



latest from jagran